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बच्चों की अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स के बारे में कितना जानते हैं आप?

बच्चों की अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स के बारे में कितना जानते हैं आप?

बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है कि सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ ही बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों (Other Child Health Issues) का भी ध्यान रखा जाए और किसी भी तरह की हेल्थ प्रॉब्मलम्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि बचपन का अच्छा स्वास्थ्य ही उन्हें हेल्दी व्यस्क बनाता है। इसलिए हर पैरेंट्स को सामान्य के साथ ही बच्चों की अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स या बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां (Other Child Health Issues) के बारे में भी पता होना चाहिए और किसी तरह की बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार कराना चाहिए। जानिए बच्चों में बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां क्या हो सकती हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है बच्चों का स्वास्थ्य? (Child health is important)

बचपन का अच्छा स्वास्थ्य ही किसी के स्वस्थ जीवन (Healthy life) की नींव होती है। जो बच्चा छोटी उम्र से ही शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहता है, वही स्वस्थ व्यस्क बनता है, इसलिए बच्चे के स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य का ध्यान रखने का मतलब सिर्फ किसी बीमारी के समय उनकी देखभाल या उपचार ही नहीं है, बल्कि उनके शारीरिक या मानसिक विकास (Mental development) का ध्यान रखना भी जरूरी है। बच्चे के स्वास्थ्य से तात्पर्य है उम्र के अनुसार उसके विकास की निगरानी करना, बच्चों में हेल्थ प्रॉब्लम्स होने पर उपचार कराना, किसी तरह की चोट चाहे बाहरी हो या अंदरूनी उसकी अनदेखी न करें, बच्चे के व्यवहार पर नजर रखें और उसकी मानसिक स्थिति पर भी नजर बनाए रखें, किसी तरह की असमान्यता दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या का पता यदि शुरुआती अवस्था में ही चल जाता है, तो उपचार आसान होता है और बड़े होने पर बच्चे को किसी तरह की समस्या नहीं होगी, इसलिए बच्चे की बाकी जरूरतों का ध्यान रखने के साथ ही उसके स्वास्थ्य (Health) को सबसे ज्यादा अहमियत दें, क्योंकि यही उसके स्वस्थ जीवन का आधार है। जब बच्चा पूरी तरह से हेल्दी होगा तभी पढ़ाई से लेकर दूसरी एक्टिविटी (Activity) में भी वह अच्छा परफॉर्म कर पाएगा।

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बच्चों की सेहत को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting the child’s health)

बच्चों का संपूर्ण स्वाथ्य कई चीजों से प्रभावित होता है जिसमें माता पिता की आर्थिक स्थिति से लेकर उनकी शिक्षा और पारिवारिक वातावरण सबकुछ शामिल है। आमतौर पर बच्चों की सेहत को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल है-

आर्थिक कारण- आर्थिक रूप से समृद्ध पैरेंट्स के बच्चों का स्वास्थ्य (Children health) अच्छा रहता है, क्योंकि उनके पास हर तरह की सुविधाएं और पौष्टिक आहार तक आसान पहुंच होती है। ऐसे पैरेंट्स बच्चे की सेहत का पूरा ध्यान रख पाते हैं, जबकि गरीब पैरेंटस बच्चों को पौष्टिक आहार (Nutritious diet) भी मुहैया नहीं करा पाते हैं और वह अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में ही व्यस्त रहते हैं जिससे बच्चे के स्वास्थ्य पर ध्यान हीं दे पाते और कई बार बीमारी का भी इलाज नहीं करा पाते। ऐसे पैरेंट्स के बच्चों का स्वास्थ्य आमतौर पर ठीक नहीं रहता है।

शिक्षा- शिक्षित पैरेंट्स अपने बच्चों की सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक होते हैं जबकि कम पढ़े-लिखे पैरेंट्स को स्वास्थ्य के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। पैरेंट्स का शिक्षित होना बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य (Overall health)को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाता है।

पारिवारिक माहौल- बच्चों की सेहत पर पारिवारिक माहौल (Family environment) का भी असर पड़ता है। अच्छे माहौल में पले-बढ़े बच्चों की मानसिक और सामाजिक स्थिति अन्य के मुकाबले अच्छी होती है।

बच्चों की अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स और उनका उपचार (Children common health issues)

बच्चों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, सर्दी-खासी बुखार के साथ ही बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां (Other Child Health Issues) भी होती है जिसका ध्यान रखने की जरूरत है। बच्चों की अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स में शामिल है-

बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां: रेस्पिरेटरी सिंसिशल वायरस (Respiratory syncytial virus)

रेस्पिरेटरी सिंसिशल वायरस (Respiratory syncytial virus (RSV) बच्चों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के लिए यही वायरस जिम्मेदार होता है। यह फेफड़े (lungs) और श्वसन नली (breathing passages) में संक्रमण पैदा करता है। इसके लक्षण कफ जैसे ही होते हैं जैसे नाक बहना, कफ और बुखार। आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है यदि बच्चे में निम्न लक्षण दिखे-

  • तेज बुखार
  • बलगम से नाक भरी हो
  • खाने और पीने में दिक्कत हो
  • खांसी के साथ बलगम आ रहा हो
  • बच्चा डिहाइड्रेटेड हो जाता हो।

जहां तक उपचार का सवाल है तो रेस्पिरेटरी सिंसिशल वायरस के लिए कोई दवा नहीं है, हां इसके लक्षणों का उपचार डॉक्टर बच्चे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए करता है। आमतौर पर आराम करने और डॉक्टर के बताए निर्देशों का पालन करने पर बच्चे को आराम मिलेगा।

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बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां: कान का संक्रमण (Ear infections)

छोटे बच्चों में कान का संक्रमण भी आम होता है और अक्सर यह एक-दो हफ्ते में बिना किसी इलाज के अपने आप ठीक हो जाता है। संक्रमण (Infection) क कारण बच्चे को कान में दर्द (Ear pain) और सुनने में तकलीफ हो सकती है। कान के बाहर और मध्य में इंफेक्शन होना सामान्य है और यह बैक्टीरिया (Bacteria) या वायरस (virus) के कारण होता है। बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत है यदि उसे-

  • कान में तेज दर्द हो रहा हो
  • कान से तरल पदार्थ निकल रहा हो
  • वह कुछ सुन नहीं पा रहा हो या बहुत कम सुनाई दे रहा हो।

यदि संक्रमण ज्यादा नहीं है तो अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन इंफेक्शन ज्यादा होने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) दवाओं से इलाज करता है और दर्द की दवा देन के साथ ही ईयर ड्रॉप भी देता है। आमतौर पर 7 से 10 दिन की दवा दी जाती है।

बच्चे को कान के संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है कि खुद से उसके कान में कभी कुछ न डालें और न ही डॉक्टर की सलाह के बिना कोई ईयर ड्रॉप (Ear drop) डालें।

बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां: गैस्ट्रोइन्ट्राइटिस (Gastroenteritis)

गैस्ट्रोइन्ट्राइटिस (Gastroenteritis) एक बाउल इंफेक्शन है जिसकी वजह से आंत (Intestines.) और पेट (stomach) में सूजन हो जाती है और यह डायरिया (Diarrhoea) और कभी-कभी उल्टी का कारण बन जाता है। गैस्ट्रोइन्ट्राइटिस के लिए कई तरह के जर्म्स जिम्मेदार हो सकते हैं, हालांकि इसका सबसे आम कारण वायरल (Viral) या बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial infection) होता है।

गैस्ट्रोइन्ट्राइटिस होने पर बच्चे में निम्न लक्षण दिखते हैं-

  • मितली (Nausea)
  • सिरदर्द (Headaches)
  • उल्टी पहले 24 से 48 घंटे के अंदर
  • भूख न लगना
  • पेट दर्द (Stomach pains)
  • बुखार (Fever)

आमतौर पर इसके उपचार के लिए बच्चों को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती और घर पर ही वह ठीक हो जाते हैं। डायरिया के कारण डिहाइड्रेशन (Dehydration) का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए बच्चे को लगातार तरल पदार्थ देते रहना चाहिए। यदि स्थिति गंभीर हो जाए या लक्षणों में किसी तरह का सुधार न हो डॉक्टर के पास जाएं। इस बीमारी से बच्चे को बचाने के लिए मां को खासतौर पर हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए।

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बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां: रास्योला (Roseola)

रास्योला इन्फैंटम ( Roseola infantum) एक वायरल इंफेक्शन (Viral infection) है जो आमतौर पर 6 माह से 2 साल तक के बच्चों को होता है और इसकी वजह से बच्चों को तेज बुखार हो जाता है।

रास्योला (Roseola) के लक्षणों में शामिल है-

  • गले में हल्का खराश
  • अचानक तेज बुखार
  • गले की ग्रंथियों में सूजन
  • छाती, पेट और पीठ पर गुलाबी चकत्ते

रास्योला होने पर समस्या तब होती है जब बच्चे को बुखार की ऐंठन (Febrile convulsions) हो जाती है। इसके लक्षणों में शामिल है-

  • अचेतन (Unconsciousness)
  • हाथ, पैर और चेहरे पर कई मिनट तक झटका लगना
  • ब्लैडर और बाउल कंट्रोल न कर पाना

ऐसे में बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। आमतौर पर रास्योला (Roseola) के लिए कोई विशेष उपचार नहीं है, लेकिन कई डॉक्टर एंटीवायरल दवा के जरिए इंफेक्शन का इलाज करते हैं

और पढ़ें- कहीं आपके बच्चे में तो नहीं है इन पोषक तत्वों की कमी?

बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां: कंजक्टिवाइटिस ( Conjunctivitis (pink eye)

इसे आम भाषा में आंख आना भी कहा जाता है। छोटे बच्चों में यह समस्याबहुत ही आम है। कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) बहुत संक्रामक होता है और इसके लक्षणों में शामिल है-

यदि बच्चे को कुछ घंटों में आराम नहीं मिलता है तो डॉक्टर के पास ले जाए। उसकी स्थिति का मुआयना करने के बाद डॉक्टर उपचार करेगा। यदि यह वायरल इंफेक्शन के कारण हुआ है तो बिना उपचार के ही ठीक हो जाता है, लेकिन यदि इसकी वजह बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial infection) है तो इसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक आई ड्रॉप (Eye drop) दिया जाता है।

बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां: अस्थमा (Asthma)

Other Child Health Issues: बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां

बच्चों की अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स में अस्थमा भी शामिल है। इससे पीड़ित बच्चे को सांस लेने में दिक्कर होती है और थोड़ी सी फिजिकल एक्टिविटी भी उन्हें थका देती है। बच्चों में अस्थमा यानी दमा होने पर निम्न लक्षण दिखते हैं-

  • सांस लेते समय घरघराहट (Wheezing sound ) की आवाज आना
  • सांस फूलना (Breathlessness)
  • छाती में कसाव
  • खांसी (Coughing) आना खासतौर पर रात और सुबह में

ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाए। वह बच्चे कि मेडिकल हिस्ट्री और लंग फंक्शन टेस्ट (Lung function test) के आधार पर उनकी स्थिति की जांच करता है। उसके आधार पर ही लक्षणों में सुधार के लिए दवा देगा। अस्थमा (Asthma) से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन इसे बढ़ाने वाले कारकों का पता लगाकर लक्षणों में सुधार अवश्य किया जा सकता है। जैसे कुछ बच्चों को धूल, एक्सरसाइज, मिट्टी आदि से एलर्जी होती है तो उन्हें इन सबसे दूर रखने की जरूरत है।

हाथ, पैर और मुंह की बीमारियां ( Hand, food and mouth disease)

यह वायरल स्थिति (Viral condition) है जिसमें हाथ, पैर और मुंह में छाले पर जाते हैं। इसके लक्षण करीब 7 दिनों तक रह सकते हैं। लक्षणों में शामिल है।

  • बुखार (Fever)
  • गाल, मसूड़े और मुंह की साइड में छोटे छाले (Bliste)
  • हाथ, पैर और नैपी एरिया में भी छाले होना
  • गले में खराश (Sore throat)

इस वायरल कंडिशन (viral condition) का कोई उपचार नहीं है, लेकिन आप बच्चे को अधिक से अधिक तरल पादर्थ देकर और आराम करने के लिए कहकर स्थिति में सुधार ला सकते हैं। छाले अपने आप सूख जाते हैं, इन्हें फोड़ने की गलती न करें। हाथ, पैर और मुंह की बीमारी से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ-पैर धोना जरूरी है। बच्चा यदि स्कूल जाता है तो जब तक हाथ-पैर के छाले ठीक नहीं हो जाते, उसे स्कूल न भेजें।

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बच्चे की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए पैरेंट्स के लिए टिप्स (Tips for parents to maintain good child health)

बच्चों की सेहत की पूरी जिम्मेदारी पैरेंट्स की ही होती है, ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखकर वह छोटी उम्र से ही अपने बच्चे की सेहत का ध्यान रखकर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी अन्य बीमारियों से बचा सकते हैं।

  • हेल्दी ईटिंग (Healthy eating) की हैबिट डालें।
  • नाश्ते में जंक फूड (Junk food) की बजाय घर पर बनी हेल्दी चीजें दें।
  • जबरन कुछ न खिलाएं। बच्चे को भूख न लगने पर उन्हें जबर्दस्ती खिलाने की भूल न करें।
  • बच्चे को हाइजीन (Hygiene) का ध्यान रखना और बार-बार हाथ धोना सिखाएं।
  • फिजिकल एक्टिविटी (Physical activity) के लिए प्रेरित करें, फिर चाहे वह योग हो, एक्सरसाइज या आउटडोर गेम खेलना।
  • बच्चे को खुद से खाने दें।
  • बच्चे को समय पर सोने और उठने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद बहुत जरूरी है।
  • समय पर बच्चे का वैक्सीनेशन (Vaccination) करवाएं।
  • खूब पानी पीने के लिए कहें।

बच्चों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां (Other Child Health Issues) न हो, इसके लिए पैरेंट्स को बहुत अलर्ट रहने की जरूर है। बच्चे की न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक, इमोशनल और व्यवहार आदि पर भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि संपूर्ण विकास के लिए सभी का संतुलित होना जरूरी है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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