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आज ही नोट कर लें ये डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स, क्या पता ये आपका काम आसान बना दे!

आज ही नोट कर लें ये डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स, क्या पता ये आपका काम आसान बना दे! 

डाउन सिंड्रोम, सुनने में जितना आम सा शब्द लगता है, इससे ग्रस्त बच्चे की जिंदगी उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती है। डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे के माता-पिता को रोजाना के कामों को लेकर काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है, जाहिर है इस समस्या के साथ जीना अपने आप में एक बड़ा काम है। डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक कंडिशन (Genetic condition) है, जिसमें बच्चे के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी काफी धीमी गति से होता है। यह स्थिति जीवन भर के लिए रहती है, लेकिन सही देखभाल के जरिये डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे भी स्वस्थ जिंदगी जी सकते हैं। खास तौर पर डाउन सिंड्रोम में ईटिंग टिप्स (Down syndrome eating tips) को लेकर माता-पिता सजग रहते हैं, जो बच्चे के लिए बेहद जरूरी साबित होती है।

डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) : मात-पिता के लिए क्यों है चैलेंजिंग?

डाउन सिंड्रोम न सर्फ बच्चे के लिए बल्कि बच्चे की देखभाल कर रहे माता-पिता के लिए भी काफी चैलेंजिंग हो सकता है। इसका कारण है बच्चे के रोजाना के कार्यों को करने का तरीका। इस स्थिति में रोजमर्रा के कामों के लिए माता-पिता को बच्चे की मदद करनी होती है। इनमें से एक बड़ा काम है बच्चे के खान-पान का ध्यान रखना। डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) से ग्रसित बच्चे के खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि इन बच्चे थायरॉइड, डायबिटीज (Diabetes), कॉन्स्टिपेशन (Constipation), इंफेक्शन और फ़ूड इन्टॉलरेंस और एलर्जी आदि होने के चांसेस पहले से ही ज्यादा होते हैं। इसलिए डाउन सिंड्रोम में ईटिंग टिप्स से जुड़ी बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। आज हम आपको डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स (Down syndrome eating tips) के बारे में कुछ जरूरी बातें बताने जा रहे हैं, जो माता-पिता के साथ-साथ बच्चे की भी मदद कर सकती हैं।

क्यों जरूरी है खान-पान का ध्यान रखना? अन्य लोगों की तुलना में डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे मोटापे की ओर अधिक अग्रसर होते हैं। डाउन सिंड्रोम की वजह से यह बच्चे कम कैलोरी बर्न कर पाते हैं, जो आम लोगों के हिसाब से अलग होती है। इसके अलावा डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) से ग्रसित बच्चों में हाइपोथायरायडिज्म की वजह से वजन बढ़ने के चांसेस ज्यादा होते हैं। यह मोटापा डायट रिलेटेड कॉम्प्लिकेशन (Diet related complications) के चलते होता है, इसलिए मोटापे से अपने बच्चे को बचाने और सही न्यूट्रिशन देने के लिए आपको बच्चे के खानपान का खास ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है।

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डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स : जानेंगे, तभी तो ट्राय करेंगे! (Down syndrome eating tips)

डाउन सिंड्रोम इटिंग टिप्स - down syndrome eating tips

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं डाउन सिंड्रोम में बच्चे के न्यूट्रिशन को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत पड़ती है, इसलिए आज हम आपको डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) डायट टिप्स से संबंधित कुछ ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं, जो आपके बेहद काम आ सकती हैं।

अपने बच्चे को हायड्रेट रखें (Keeping a child hydrated)

डाउन सिंड्रोम डायट टिप्स में शुरुआत होती है बच्चे को हायड्रेट रखने से। डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चों को आसानी से कॉन्स्टिपेशन की समस्या हो सकती है। यदि बच्चा सही अमाउंट में तरल पदार्थ और पानी ना पिए, तो उसे पाचन संबंधी समस्या होने के चांसेस ज्यादा रहते हैं। इसलिए रोजाना बच्चे की एज के अनुसार पानी का अमाउंट तय करना बेहद जरूरी है।

8 साल तक बच्चे को रोजाना 1 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, जिसे 12 साल की उम्र तक आप डेढ़ लीटर तक बढ़ा सकते हैं। टीन एज तक इस अमाउंट को 2 लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर आपका बच्चा एक्सरसाइज (Exercise) या दूसरी फिजिकल एक्टिविटी (Physical Activity) कर रहा है, तो पानी का अमाउंट उनकी जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) डाइट टिप्स में बच्चों को रसीले फल जैसे वॉटरमेलन, अनानास, संतरा और बेरीज का सेवन भी करवाना चाहिए। दिन में छोटे-छोटे स्नैक्स के रूप में आप इन फ्रूट्स को बच्चों को खिलासकते हैं।

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फाइबर की मात्रा बढ़ाएं (Increase fiber intake)

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं, डाउन सिंड्रोम में बच्चों को कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या आम तौर पर होती है, इसलिए खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से उन्हें इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखने की जरूरत है कि ज्यादा फाइबर खाने पर डायरिया (Diarrhea) की समस्या हो सकती है, इसलिए सही अमाउंट में फाइबर का सेवन करवाना डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स (Down syndrome eating tips) में एक खास पॉइंट माना जाता है।

रोजाना बच्चे को 1000 कैलोरीज में 14 ग्राम फाइबर का सेवन करवाया जा सकता है। फाइबर युक्त खाने में एवोकाडो, दालें, केला, ओट्स और शकरकंद आदि का समावेश होता है। यदि आपका बच्चा जरूरत से ज्यादा फाइबर खा रहा है, तो उसे इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान बच्चे को पेट दर्द, ब्लोटिंग, गैस, डायरिया और मिनरल डेफिशियेंसी हो सकती है, इसलिए इन सिम्टम्स को ध्यान में रखते हुए बच्चे को पीडियाट्रिशियन की सलाह से फाइबर खिलाना बेहद जरूरी है।

ना दें शुगर युक्त ड्रिंक्स (Avoid sugar drinks)

अक्सर बच्चों को सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स इत्यादि बेहद पसंद आती है, लेकिन डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) से ग्रसित बच्चों को टाइप टू डायबिटीज होने के चांसेस बढ़ जाते हैं, इसलिए इन बच्चों को स्पोर्ट्स ड्रिंक, चॉकलेट मिल्क, सोडा और आर्टिफिशियल फ्रूट जूस से दूर रखना बेहद जरूरी है। जैसा कि हम पहले बता चुके हैं डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चों में मोटापा (Obesity in down syndrome) आमतौर पर देखा जाता है, इसलिए डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स के अनुसार शुगर युक्त ड्रिंक इन बच्चों के लिए सही नहीं मानी जाती।

अपने बच्चे की डेली शुगर इनटेक पर ध्यान रखकर आप उसकी बड़ी मदद कर सके सकते हैं। आप अपने बच्चे को रोजाना फलों का रस, कोकोनट वॉटर और घर में बनी स्मूदीज इत्यादि दे सकते हैं। इससे आप शुगर के कंटेंट को कंट्रोल कर सकते हैं।

ग्लूटन का ना करें इस्तेमाल (Gluten free diet)

डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चों को सिलियक डिजीज आसानी से हो सकता है, इसलिए उन्हें ग्लूटन युक्त पदार्थों से दूर रखना चाहिए। कई बच्चे ग्लूटेन इनटोलरेंस (Gluten intolerance) की समस्या से भी ग्रसित होते हैं, इसलिए उन्हें पेट में जलन इत्यादि की समस्या हो सकती है। इसके अलावा यह स्थिति ब्लोटिंग, कमजोरी और डायरिया जैसी समस्या भी पैदा कर सकती है, इसलिए बच्चे को ग्लूटेन फ्री डायट देना चाहिए। डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स (Down syndrome eating tips) में आप फल, सब्जियां, अंडे, बींस, फिश, पोल्ट्री और साबुत अनाज इत्यादि का समावेश कर सकते हैं।

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बच्चे को करें एनकरेज (Encourage your child)

डाउन सिंड्रोम में बच्चों को लो मसल टोन की वजह से खाने पीने में खासतौर पर समस्या होती है। कुछ बच्चों में छोटा मुंह, बड़ी जीभ और बड़े पैलेट के कारण चबाने में समस्या होती है। ऐसी कंडीशन को लेकर बच्चे परेशान हो सकते हैं, इसलिए बच्चे को खाने के लिए एनकरेज करना बेहद जरूरी है। आप रोजाना पूरी फैमिली के साथ खाना खाने के दौरान बच्चे को एनकरेज कर सकते हैं, साथ ही बच्चे को सही तरीके से खाने को लेकर गाइड कर सकते हैं। इसके अलावा आपको एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि वह इंडिपेंडेंटली अपने खाने-पीने का ध्यान रख सके। वे कॉर्डिनेशन की समस्या (Coordination problems) के चलते कई बार खाने पीने की चीजों को गिरा सकते हैं, इसलिए उन्हें खाने पीने को लेकर अलग-अलग चीजें सिखाने की जरूरत पड़ सकती है। इसमें आपका और आपके परिवार का सपोर्ट बच्चे को एनकरेज करने के लिए काफी माना जाता है।

डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स : बच्चे को इंडिपेंडेट बनाना है जरूरी

डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) से ग्रसित बच्चों को एनकरेज करने के साथ-साथ स्वावलंबी बनाना भी बेहद जरूरी माना जाता है, इसलिए खानपान को लेकर आपको उन्हें इंडिपेंडेंट बनाना जरूरी है। आप उनके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रख सकते हैं, जैसे –

  • उनके लिए एक कंफर्टेबल चेयर का इंतजाम करें, जो अन्य फैमिली मेंबर्स के साथ बैठकर खाने के लिए काम आ सके। बच्चे परिवार जनों को देखकर ही सीखते हैं, इसलिए फैमिली के साथ बैठकर खाने से बच्चा दूसरों को देखकर खुद खाने की कोशिश करेगा।
  • इस स्थिति में आपको स्टेप बाय स्टेप अप्रोच (Step by step approach) की जरूरत पड़ती है। सबसे पहले आपको बच्चे को सॉलि़ड फूड खाना सिखाना चाहिए, जिसमें आप चम्मच, कांटा-छूरी इत्यादि का इस्तेमाल उसे सिखा सकते हैं। आप बच्चों को एनकरेज कर सकते हैं कि वे उंगलियों से अपने खाने को अपने मुंह तक कैसे लेकर जा सकते हैं। साथ ही बच्चे के हाथ और आर्म के इस्तेमाल को लेकर आप उसे ट्रेनिंग दे सकते हैं। इस ट्रेनिंग के दौरान आप बच्चे के मनपसंद खाने का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सॉलि़ड फूड (Solid food) के बाद आप बच्चे को लिक्विड फूड के लिए ट्रेनिंग दे सकते हैं। सबसे पहले आपको बच्चे को गाढ़े लिक्विड को पीना सिखाना होगा। धीरे-धीरे इसे मिल्कशेक और दूसरे बेवरेजेस में बदलना होगा, जिससे बच्चा धीरे-धीरे अलग-अलग कंसिस्टेंसी के ड्रिंक को पीने की कोशिश कर सके। सबसे पहले कप का इस्तेमाल करते हुए छोटे से बड़े ग्लास तक आप बर्तनों का इस्तेमाल उसे सिखा सकते हैं।इस ट्रेनिंग के दौरान हर स्तर पर आपको बच्चे को पूरी तरह से एनकरेज करने की जरूरत पड़ती है, इसलिए आपमें उसे सिखाने का उत्साह कम नहीं होना चाहिए। कुछ बच्चे शुरुआती दौर में अपनी जीभ और मुंह के इस्तेमाल में परेशानी का सामना करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें खाना खाने की इच्छा नहीं होती। लेकिन आपको बच्चे का हौसला बनाए रखना होगा।

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डाउन सिंड्रोम ईटिंग टिप्स (Down syndrome eating tips) में यदि आप इन बातों का ध्यान रखेंगे। तो आप बच्चे को उसके भोजन के प्रति एनकरेज कर पाएंगे और उसे एक आम जिंदगी देने के प्रति अग्रसर हो पाएंगे।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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