कॉन्स्टिपेशन और बढ़ता वजन, क्या पहली मुसीबत दूसरी का कारण बन सकती है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट February 25, 2021 . 7 मिनट में पढ़ें
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हां तो भाई, अब तक तो आपने सुना होगा कि कब्ज के कारण ब्लोटिंग (bloating), एसिडिटी (Acidity) गैस (gas) जैसी कई परेशानियां होती हैं, लेकिन अब आपको ये जानकर जोर का झटका लग सकता है कि कॉन्स्टिपेशन और वेट गेन (Constipation and weight gain) भी दूर के भाई हैं। जी हां आप एकदम सही पढ़ रहे हैं। कब्ज के कारण वजन बढ़ना बिल्कुल मुमकिन है। तो अब ये पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि कहां फंस गया रे बाबा! अब तक तो कब्ज से ही परेशान था, लेकिन अब इसके साथ मोटापा भी आ गया,लेकिन हमारे पास आपकी इस परेशानी का इलाज भी है। पहले ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये कब्ज अपने साथ वेट गेन को भी इन्वाइट क्यों कर लेता है? 

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जोर का झटका हाय जोरों से लगा, कब्ज बन गया वजन बढ़ने की वजह!

ऐसा कैसे होता है! ये तो आप पहले ही सोच रहे हैं, लेकिन इसके लिए दिमाग पर इतना जोर मत डालिये। दरअसल, बात ऐसी है कि सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease control and Prevention) के अनुसार, ‘कॉन्स्टिपेशन के मुख्य आरोपी हैं: शरीर में पानी की कमी (dehydration), पुअर डायट (poor diet) और एक्सरसाइज ना करना (lack of physical exercise)और ये तीनों बातें सीधे-सीधे वजन के बढ़ने का कारण बन सकती हैं। लगातार आपकी ये पुअर लाइफस्टाइल मेटाबॉलिज्म को स्लो कर देती है और इससे बॉडी फैट बढ़ता है।’  इसके बाद बढ़ता है वजन, यानी मोटापा। जिसे कब्ज के कारण वजन बढ़ना भी कह सकते हैं। तो अब समझे भाई साहब, कि कैसे आपके अनहेल्दी लाइफस्टाइल के चलते कब्ज के साथ वेट गेन भी आपसे दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है! 

कब्ज के कारण वजन बढ़ना: क्या हो सकता है ऐसा भी ?

इतना ही नहीं एक और वजह है, जो हमें बताता है क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन और वेट गेन (constipation and weight gain) के बीच का रिलेशन। चलिए उसके बारे में भी जान लेते हैं। 

दरअसल क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन (Chronic constipation) के कारण रेक्टम पूरी तरह से क्लियर नहीं होता। जिससे रेक्टम में स्टूल जमा होता रहता है। टेक्निकली यह आपके बॉडी वेट को इनक्रीज कर सकता है। इसे आसान भाषा में समझें, तो अगर आपकी बॉडी में हर दिन 200 ग्राम स्टूल जमा होता है, तो 5 दिन में यह 1kg हो जाएगा और अचानक आपकी बॉडी का वेट बढ़ जाएगा। हालांकि, यह हमेशा के लिए नहीं होता, लेकिन इससे वेट बढ़ता है और आप बल्की (Bulky) नजर आते हैं। जो लोग क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन के शिकार होते हैं, वे आम तौर पर बल्की (bulky) दिखाई देते हैं। 

इस बारे में फिटनेस एवं न्यूट्रिशन एक्सपर्ट मनीषा चोपड़ा का कहना है,’कब्ज और वजन का बढ़ना कुछ केसेस में एक साथ हो सकता है। अगर आपको कब्ज है, तो वजन में कुछ ग्राम बढ़ सकते हैं क्योंकि आपका बॉवेल (आंत) डायजेस्टेड फूड से भरा होता है। कॉन्स्टिपेशन में नॉर्मल इंटेस्टाइनल गैस स्लो मूविंग पूप के बीच फंस जाती है और बढ़ने लगती है। इसकी वजह से वजन बढ़ता है, क्योंकि आपके स्टूल का भी वजन होता है। दूध के साथ घी का सेवन कब्ज को कम करता है। जब आप दूध में कुछ चम्मच घी डालकर उसका सेवन करते हैं, तो यह एक डिटॉस्कीफाइंग एजेंट के रूप में काम करता है और हार्मफुल टॉक्सिन्स को बॉडी से बाहर निकालने में मदद करता है।’’  लेकिन क्या आप जानते हैं, कब्ज के कारण वजन बढ़ने (constipation and weight gain) की एक वजह और भी है! चलिए उसे भी समझ ही लीजिए, ताकि आप इस तकलीफ को हमेशा के लिए हरा सकें। 

कब्ज के कारण वजन बढ़ना (constipation and weight gain)

गट फ्लोरा बैक्टीरिया, जो फूड ब्रेकडाउन और न्यूट्रिएंट्स (nutrients) के अब्सॉर्प्शन में मदद करते हैं, इनमें इम्बैलेंस के कारण भी क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन हो सकता है। गट फ्लोरा एक ऐसा बैक्टीरिया है, जो डायजेस्टिव सिस्टम (digestive system) के लिए बेहद जरूरी है। ये बात साबित हो चुकी है कि वजन बढ़ने (weight gain) और व्यक्ति के गट बैक्टीरिया के बीच खास रिश्ता है। ये बैक्टीरिया ब्लोटिंग और हैवीनेस को कम करता है और लाइट फील करवाता है। 

इसका मतलब ये है कि कॉन्स्टिपेशन अकेला नहीं आता, अपने साथ बीमारियों और परेशानियों की बारात लेकर आता है। हम ऐसा भी कह सकते हैं कि कब्ज के साथ मोटापा (obesity) आपको फ्री मिल जाता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप सबसे पहले कब्ज की लगाम कसें। इसके बाद बाकी परेशानियां तो अपने आप ही इसके पीछे हो लेंगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कब्ज (constipation) ठीक करने के लिए भी हमारे पास एक अचूक तरीका है? क्या आप जानना चाहते हैं इसका नाम? तो सुनिए, इसका नाम है लैक्सेटिव। अब आप सोच रहे होंगे कि ये लैक्सेटिव क्या होता है? दरअसल, लैक्सेटिव एक ऐसा पदार्थ होता है, जो आपके पेट में जमा स्टूल को कुछ ही घंटों में बाहर का रास्ता दिखा देता है और आप कॉन्स्टिपेशन (constipation) से आजाद हो जाते हैं! यूं तो लैक्सेटिव कई तरह के होते हैं, लेकिन स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव इन सभी में ज्यादा कारगर है। अगर आप चाहें, तो स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव में बिसाकोडिल (Bisacodyl) पर भरोसा कर सकते हैं। ये एक ही रात में आपको कब्ज से गैरेंटीड राहत दे देता है। यह आपकी आंतों में कॉन्ट्रैक्शन बढ़ाता है और पॉटी (Stool) के बाहर निकलने का रास्ता आसान बनाता है। कब्ज की तकलीफ ठीक होने से आपको धीरे-धीरे दूसरी तकलीफों से भी राहत मिलती है। फिर चाहे वह कब्ज के कारण वजन बढ़ना हो या ब्लोटिंग। कब्ज के कारण वजन का बढ़ना आपके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है और ऐसा क्यों है, चलिए आपको इस बारे में आगे समझाते हैं। 

और पढ़ें: कब्ज के कारण गैस्ट्रिक प्रॉब्लम से अटक कर रह गई जान? तो, ‘अब की बार, गैरेंटीड रिलीफ की पुकार!’

बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां वाह भाई वाह! (Constipation can give rise to weight gain, acidity, stress, hypertension and diabetes)

कब्ज के कारण वजन बढ़ना - constipation and weight gain connection

ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी? अगर नहीं सुनी तो हम सुना देते हैं। इसका मतलब होता हैबुरे का और बुरे से साथ मिलना’ या ‘एक बुरा तो दूसरा उससे भी बुरा’। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? क्योंकि कब्ज के कारण वजन बढ़ना आपकी हिचकोले खाती नैया को पूरी तरह डूबो सकता है। कब्ज जहां पेट दर्द (stomach ache), गैस (gas), एसिडिटी (acidity), मेंटल स्ट्रेस (mental stress) का कारण बनता है, वहीं कब्ज के कारण वजन बढ़ना आपको हार्ट से जुड़ी तकलीफों के साथ ही डायबिटीज (Diabetes) और हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) का मरीज बना सकता है। बॉडी शेप और सिक्स पैक्स खराब होंगे सो अलग! यहां तक कि बारे में एक्सपर्ट ने भी अपनी राय दी है! इस बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल के मेटाबॉलिक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर, डॉ. प्रदीप जैन का कहना है, “हमें कब्ज की समस्या को मजाक में नहीं लेना चाहिए। बड़ी आंत के धीरे-धीरे काम करने या फिर एनोरेक्टल समस्याओं की वजह से पेट साफ न हो पाने के कारण कॉन्स्टिपेशन हो सकता है।”

चलिए अब बहुत हो गया ज्ञान, अब आपको करना है सिर्फ एक काम। जो कि है बिसाकोडिल (Bisacodyl), यानी स्टिम्युलेंट लैक्सेटिव का यूज। यह एक रात में ही कब्ज की छुट्टी कर देता है और आपकी छुट्टी होने से बचा लेता है। बिसाकोडिल (Bisacodyl) के उपयोग के साथ ही हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जो आपको कब्ज और वेट गेन (constipation and weight gain) से राहत दिला सकते हैं। इसके लिए आपको अपने खानपान (healthy eating habits) और लाइफस्टाइल (lifestyle) में थोड़ा बदलाव करना होगा और कब्ज के दुश्मन फाइबर (fiber) को गले लगाना होगा। चलिए इसे और भी अच्छे से समझते हैं!   

चेकमेट नहीं, फाइबर (fiber) देगा कब्ज और वेट गेन को सीधी मात!

कब्ज के कारण वजन बढ़ना : जानें क्या है इसका सच

अब जरा ये सुनिए, फाइबर और फाइबर फूड्स (Fibrous Foods) ये ही हैं, जो आपकी डूबती नैया को किनारे लगा सकते हैं। ये ना सिर्फ कॉन्स्टिपेशन कम करेंगे, बल्कि वजन को भी कंट्रोल में रखेंगे। 

फाइबर दो प्रकार के होते हैं, एक होता है सॉल्युबल फाइबर (soluble fiber) और दूसरा इनसॉल्युबल फाइबर (Insoluble fiber)। ये जो सॉल्युबल फाइबर होता है, वो स्टूल को बल्की बनाता है। जिससे स्टूल आसानी से पास हो सके। ये फाइबर आपको सेब, केला, ओट्स, बीन्स और बार्ले जैसे फूड्स में मिल जाएगा। वहीं इनसॉल्युबल फाइबर फूड को डायजेस्टिव ट्रैक्ट में लेकर जाने में मदद करता है और कब्ज होने से रोकता है। इनसॉल्यूबल फाइबर के अच्छे सोर्स में होल ग्रेन, सब्जियां, फलियां और व्हीट ब्रेड शामिल है। कब्ज से बचने के लिए हमें रोज कम से कम 25-30 ग्राम फाइबर (Fiber) अपनी डायट में शामिल करना चाहिए। 

इस बारे में बात करते हुए एक्सपर्ट कविता देवगन ने बताया, “कब्ज से परेशान व्यक्ति को दोनों प्रकार के फाइबर लेने चाहिए, दोनों ही फाइबर आपकी मदद कर सकते हैं  जहां एक तरफ सॉल्युबल फाइबर आपके शरीर में पानी के साथ घुल कर सोख लिया जाता है और डायजेस्टिव सिस्टम और स्टूल में नमी बनाए रखने में मदद करता है। वहीं, इनसॉल्युबल फाइबर पानी में घुले बिना, पूरे डायजेस्टिव सिस्टम से आसानी से गुजरता हुआ वेस्ट मटेरियल को बाहर निकालने में मदद करता है। जिससे व्यक्ति का पेट आराम से साफ हो जाता है और कब्ज में राहत मिलती है।”

तो ये बात हुई कब्ज की। अब जानते हैं कि फाइबर वेट गेन को कैसे कंट्रोल करता है। दरअसल क्या है कि फाइबर फूड्स आपको लंबे समय तक पेट भरे होने का एहसास कराते हैं, जिससे जल्दी भूख नहीं लगती है और आप बार-बार खाना खाने से बच जाते हैं। जाहिर है इस प्रैक्टिस से आपका वजन कंट्रोल में रहता है। इसके साथ ही एक काम और भी ऐसा है, जो आप कर लें, तो 100 में से 100 मार्क्स पा जाएंगे! चलिए आपको बताते हैं इस जरूरी काम के बारे में! 

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बढ़े हुए वजन और कब्ज को क्लीन बोल्ड करेगी एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise)

कब्ज के कारण वजन बढ़ना बन सकती है बड़ी मुसीबत

अरे नहीं! हम आपको जिम जाने के लिए नहीं कह रहे। ना ही कोई मुश्किल भरी एक्सरसाइज करने के लिए कह रहे हैं। बस आपकी थोड़ी ही चहलकदमी ही इन दोनों तकलीफों का काम तमाम कर सकती है। फिजिकल एक्टिविटीज (physical activities) ना करना या कम करना दोनों ही कब्ज और वजन बढ़ने का कारण बनते हैं। इन दोनों से निपटने के लिए अगर आपने कमर कस ली है, तो बस आपको दिन में 3 बार 10-15 मिनट के लिए टहलना है। अगर आप इसके साथ थोड़ा जॉगिंग कर लेते हैं, तो वजन बढ़ने का कोई चांस नहीं रहेगा। इसके अलावा अगर आप फिटनेस को सीरियसली ले रहे हैं, तो इसके साथ थोड़ा रनिंग भी कर सकते हैं। बस फिर तो आपको न वजन बढ़ने की चिंता सताएगी और ना ही कब्ज की। 

और पढ़ें: अगर गैस की समस्या से आपको बचना है तो इन फूड्स का सेवन न करें

एक्सरसाइज कब्ज को दूर करने में कैसे मदद करती है? अब ये सवाल आपको जरूर सत्ता रहा होगा। एक्सरसाइज या कहे कि फिजिकल एक्टिविटीज फूड को लार्ज इंटेस्टाइन में जल्द से जल्द पहुंचाती है, साथ ही स्टूल को ज्यादा पानी सोखने में मदद करती है। इसके साथ ही जॉगिंग, वॉकिंग, रनिंग जैसी एरोबिक एक्सरसाइज ब्रीदिंग और हार्ट रेट को नैचुरली बढ़ाती हैं। जिससे इंस्टेटाइन की मसल्स स्टिम्यूलेट होती हैं और स्टूल (stool) को बाहर निकालने में मदद करती हैं। 

कब्ज और वेट गेन का कनेक्शन तो अब आप समझ ही गए हैं, तो क्यों न कॉन्स्टिपेशन से छुटकारा पाने का रास्ता जल्द से जल्द अपना लिया जाए। ताकि कब्ज से होने वाली तकलीफें आपको ना घेरें और वक्त रहते आप इनसे पीछा छुड़ा सकें। इसके लिए आपको ज्यादा परेशान नहीं होना है, बस फिट रहना है, फाइबर डाइट में शामिल करते रहना है और बिसाकोडिल (Bisacodyl) को नहीं भूलना है क्योंकि यह है रात भर में कब्ज से राहत पाने का गैरेंटीड इलाज। तो फिर कस लीजिये अपनी कमर, क्योंकि मोटापा हो या कब्ज़, हारना तोह उन्हें ही है! 

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