क्या एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर होता है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट November 2, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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अक्सर बीमार पड़ने पर हम एंटीबायोटिक्स लेते हैं, क्योंकि यह संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं, लेकिन गर्भधारण की कोशिश करने वाली महिलाओं और गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स या किसी भी तरह की दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए, क्योंकि इसका उनकी प्रजनन क्षमता पर असर हो सकता है। एंटीबायोटिक्स क्या सचमुच महिला की प्रेग्नेंसी में बाधक होते हैं? एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर होता है या नहीं जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।

कंसीव करने की कोशिश करने वाली महिलाओं को आमतौर पर डॉक्टर कुछ खास तरह की एंटीबायोटिक्स और कोल्ड मेडिसिन खाने से मना करते हैं। साथ ही गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स या दूसरी कई दवाओं को लेने से मना किया जाता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है जो साबित करे कि एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर होता है। ऑव्युलेशन के दौरान बीमार पड़ने का गर्भधारण से कोई लेना देना नहीं है, हां इस दौरान संबंध बनाने की इच्छा पर असर अवश्य पड़ता है। आगे जानेंगे कि एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर कितना होता है।

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क्या एंटीबायोटिक्स दवाएं फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं?

एंटीबायोटिक्स एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की एक रेंज है जो बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं और वर्तमान समय डॉक्टर सबसे अधिक इसी दवा की सलाह देते हैं, लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि एंटीबायोटिक्स का असर फर्टिलिटी पर होता है। यह पुरुषों और महिलाओं को प्रजनन क्षमता पर कितना असर डालती है चलिए जानते हैं-

  एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर (महिलाओं पर)

कई महिलाओं को यह डर सताता रहता है कि एंटीबायोटिक्स का असर फर्टिलिटी  पर होगा। सबसे ज्यादा डर उन्हें इस बात का होता है कि एंटीबायोटिक्स लेने से उनके पीरियड्स, ऑव्युलेशन, भ्रूण के इम्प्लाटेशन में मुश्किलें आती हैं जिससे गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन अभी तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला है जो साबित करे कि एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर होता है। साथ ही यह पीरियड्स, ऑव्युलेशन, भ्रूण के इम्प्लाटेशन के लिए जिम्मेदार हाॅर्मोन्स पर कोई नकारात्मक असर डालता है इसका भी कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

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एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर (पुरुषों पर)

अध्ययनों के मुताबिक, कई एंटीबायोटिक्स का असर फर्टिलिटी पर होता है। ऐसा पुरुषों के केस में होता है। कुछ एंटीबायोटिक्स पुरुषों के स्पर्म और फर्टिलिटी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। इसमें शामिल है टेट्रासाइक्लिन, पेनिसिलिन की दवा, एरिथ्रोमाइसिन की दवा आदि। कुछ दवाओं की वजह से सीमन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।

एंटीबायोटिक्स लेने के दौरान प्रेग्नेंसी की संभावना

एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर के साथ ही ऐसा माना जाता है कि एंटीबायोटिक्स लेने से गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है, लेकिन गर्भधारण की कोशिशों में एंटीबायोटिक्स लेने का कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं होती है। कुछ मामलों में महिलाओं ने अपने ऑव्युलेशन पैटर्न में बदलाव का अनुभव किया, खासतौर पर सर्वाइकल म्यूकस के प्रोडक्शन में। हालांकि इस बात को सही साबित करने के लिए कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। जहां तक एंटीबायोटिक्स का सवाल है तो यह इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है, कई बार इंफेक्शन भी गर्भधारण न कर पाने की वजह हो सकता है। ऐसे में एंटीबायोटिक्स इस बाधा को दूर करके प्रेग्नेंट होने में मदद करते हैं। साथ ही बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से कमजोर पड़ चुके रिप्रोडक्टिव सिस्टम को भी एंटीबायोटिक्स ठीक करने का काम करते हैं। अत: एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर के साथ गर्भधारण की संभावना पर असर से ज्यादा लेना-देना नहीं है।

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गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स लेने के नुकसान

एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर तो नहीं होता है, लेकिन गर्भावस्था में इसको लेने से महिला को कई नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। कोई महिला प्रेग्नेंट है, लेकिन उसे पता नहीं है और वह कुछ खास तरह की एंटीबायोटिक्स ले लेती है तो इससे जोखिम बढ़ सकता है। क्लिंडामाइसिन और सेफलोस्पोरिन जैसी एंटीबायोटिक्स दवाएं आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन अन्य एंटीबायोटिक्स का प्रेग्नेंसी पर नकारात्मक असर हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा पावर वाली एंटीबायोटिक्स दवाएं लेने से भ्रूण को विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जिसकी वजह से एबॉर्शन भी करवाना पड़ सकता है। इसलिए एंटीबायोटिक्स ट्रीटमेंट लेने से पहले अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में सुनिश्चित कर लेना जरूरी है।

हर एंटीबायोटिक्स की सामग्री अलग-अलग होती है, इसिलए डॉक्टर हमेशा खुद से दवा लेने से मना करते हैं। यदि आप बीमार हैं तो अपने डॉक्टर को बता दें कि आप कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं, तो डॉक्टर उसी के मुताबिक आपको एंटीबायोटिक्स देगा। इसके अलावा यदि आप प्रेग्नेंट है तो ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर को प्रेग्नेंसी के बारे में बता दें ताकि वह सुरक्षित दवा दे सकें। एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर जानने के लिए डॉक्टर से बात करना सही होगा।

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दवा का फर्टिलिटी पर इफेक्ट:  अर्ली प्रेग्नेंसी में एंटीबायोटिक्स से मिसकैरिज का खतरा

एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर तो इतना नहीं होता है, लेकिन यह मिसकैरिज का कारण  बन सकती हैं।  गर्भावस्था के शुरुआती चरण में यदि आप बीमार पड़ती हैं और बच्चे पर बीमारी का कोई असर न हो इसलिए तुरंत बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक ले लेती हैं, तो ऐसा करना आपके लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में छपे एक अध्ययन के मुताबिक, कुछ एंटीबायोटिक्स अर्ली प्रेग्नेंसी में लेने से मिसकैरिज हो सकता है। यदि प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते से पहले एंटीबायोटिक लिया जाए तो मिसकैरिज का खतरा 65 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, लेकिन सभी एंटीबायोटिक दवाओं से नुकसान नहीं होता है। कुछ दवाएं जैसे- पेनिसिलिन और सेफलोस्पोरिन डॉक्टर प्रेग्नेंट महिलाओं को इंफेक्शन के इलाज के लिए देते हैं। इसने मिसकैरिज का अधिक खतरा नहीं होता है। वैसे मिसकैरिज के लिए जरूरी नहीं कि सिर्फ एंटीबायोटिक्स ही जिम्मेदार हो, अन्य कारण जैसे- उम्र, तनाव का स्तर और डायट भी मिसकैरिज का कारण हो सकती है। एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर हो न हो लेकिन तनाव और डायट का जरूर होता है।

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दवा का फर्टिलिटी पर इफेक्ट:  कुछ एंटीबायोटिक्स होते हैं सुरक्षित

किसी भी तरह के इंफेक्शन और बीमारी के इलाज के लिए आमतौर पर डॉक्टर एंटीबायोटिक्स देते हैं। यहां तक की प्रेग्नेंसी के दौरान भी एंटीबायोटिक दिया जाता है, लेकिन इस दौरान कुछ एंटीबायोटिक्स ही सेफ माने जाते हैं, जबकि अन्य से प्रेग्नेंसी को खतरा हो सकता है। एंटीबायोटिक सुरक्षित है या नहीं यह एंटीबायोटिक के टाइप, प्रेग्नेंसी के किस चरण में इसे लिया जा रहा है और कितनी मात्रा में लिया जा रहा है आदि पर निर्भर करता है। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान ये एंटीबायोटिक्स सेफ माने जाते हैं।

  • पेनिसिलिन,
  • एमोक्सिसिलिन
  • एम्पीसिलीन
  • सेफलोस्पोरिन (जिसमें सीफ्लोर, सेफैलेक्सिन शामिल हैं)
  • इरीथ्रोमाइसीन
  • क्लिन्डामाइसिन

कुछ एंटीबायोटिक्स प्रेग्नेंसी के दौरान लेना खतरनाक हो सकता है जैसे टेट्रासाइक्लिन। यह भ्रूण के दांतों का रंग बदल सकता है। टेट्रासाइक्लिन प्रेग्नेंसी के 15वें हफ्ते के बाद आमतौर पर नहीं दिया जाता है। यदि संक्रमण या अन्य किसी बीमारी को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक्स देना जरूरी है तो आपका डॉक्टर आपको सुरक्षित एंटीबायोटिक्स ही देगा और उसकी सही मात्रा भी बताएगा। इसलिए कभी भी डॉक्टर के बताए डोज से अधिक दवा न खाएं।

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हमें उम्मीद है कि एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर विषय पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर होता है या नहीं इस आर्टिकल में यही बात समझाने की काेशिश की गई है। पुरुषों की फर्टिलिटी पर एंटीबायोटिक्स का असर होता है, लेकिन महिलाओं पर नहीं। यदि आप प्रेग्नेंट हैं या प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो एंटीबायोटिक का गर्भावस्था पर क्या असर होता है इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क कर सकती हैं। एंटीबायोटिक्स का फर्टिलिटी पर असर जानने के लिए भी डाॅक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा। ।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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