होमोसिस्टीन और मिसकैरिज का क्या है संबंध?

    होमोसिस्टीन और मिसकैरिज का क्या है संबंध?

    यदि किसी महिला का बार-बार मिसकैरिज हो रहा है, तो डॉक्टर उसे रक्त में होमोसिस्टीन के स्तर की जांच के लिए कह सकते हैं, क्योंकि इसका बढ़ा स्तर बार-बार मिस्कैरिज के लिए जिम्मेदार हो सकता है। मिसकैरिज के साथ ही होमोसिस्टीन प्रेग्नेंसी के दौरान अन्य समस्याएं भी बढ़ा देता है। आइए जानते हैं कि होमोसिस्टीन और मिसकैरिज (Homocysteine and miscarriage) का क्या संबंध है। यह मिसकैरिज के लिए कैसे जिम्मेदार है?

    होमोसिस्टीन (Homocysteine) क्या है?

    यह रक्त में मौजूद एक तरह का अमीनो एसिड (Amino acid) होता है, जिसकी थोड़ी मात्रा सबके शरीर में होती है, लेकिन इसका स्तर यदि बढ़ जाए तो बेहद घातक साबित हो सकता है। अमीनो एसिड प्रोटीन बनाने में सहायक होता है। हमारे रक्त में होमोसिस्टीन की मात्रा कम होनी चाहिए। इसकी बढ़ी हुई मात्रा हार्ट डिजीज के साथ ही मिसकैरिज के लिए भी जिम्मेदार होती है। इसलिए होमोसिस्टीन और मिसकैरिज को संबंधित माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनिया में हर साल दिल के दौरे और स्ट्रोक के कारण होने वाली मौतों में से 10 प्रतिशत के लिए होमोसिस्टीन जिम्मेदार है। होमोसिस्टीन का लेवल बढ़ने की मुख्य वजह फॉलिक एसिड (Folic acid) और बी ग्रुप के विटामिंस की कमी है। इसके अलावा अनुवांशिक कारणों से भी यह बढ़ सकता है। ब्लड टेस्ट (Blood test) के जरिए रक्त में होमोसिस्टीन की मात्रा की जांच की जाती है।

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    होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ने के परिणाम

    रक्त में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ने से हाइपरकोएगुलैबिलिटी हो जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें सामान्य से बहुत जल्दी ब्लड क्लॉटिंग होने लगती है। जब यह रक्त वाहिकाओं जैसे कोरोनरी आर्टरीज में होता है, तो यह रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध करता है जिससे कोरोनरी आर्टरी डिसीज (Coronary artery disease) होती हैं। गर्भवती महिला के मामले में जब ऐसा होता है तो यह छोटे ब्लड क्लॉट प्लासेंटा (Placenta) में रक्त वाहिकाओं का मार्ग अवरुद्ध कर सकते हैं जिससे मिसकैरिज (Miscarriage) हो सकता है। इसलिए होमोसिस्टीन और मिसकैरिज (Homocysteine and miscarriage) का संबंध माना जाता है।

    होमोसिस्टीन का अधिक स्तर और मिसकैरिज का खतरा

    अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि होमोसिस्टीन का बढ़ा हुआ स्तर मिसकैरिज के लिए जिम्मेदार है, लेकिन अन्य स्थितियों के साथ कुछ समानताएं हैं जो गर्भपात का कारण हो सकती हैं। एक स्थिति, जिसे एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम कहा जाता है, गर्भपात और हृदय रोग (Heart disease) दोनों का परिणाम हो सकता है।

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    प्रेग्नेंसी से जुड़ी अन्य जटिलताएं

    भले ही होमोसिस्टीन और मिसकैरिज (Homocysteine and miscarriage) के बीच संबंध के बारे में अभी तक सटीक प्रमाण प्राप्त नहीं हुए हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन स्तर प्रेग्नेंसी के दौरान अन्य समस्याएं बढ़ा देता है जिसमें शामिल हैः

    • प्रजनन क्षमता में कमी
    • जन्मजात विकासात्मक दोष, जैसे कि एनेस्थली जैसे न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट
    • इंट्रायूटराइन ग्रोथ रिटारडेशन
    • जन्म के समय बच्चे का कम वजन

    होमोसिस्टीन के उच्च स्तर का कारण (Cause of High level of Homocysteine)

    शरीर में पोषक तत्वों की कमी, जिसमें फॉलिक एसिड, विटामिन बी 6 (Vitamin B6) और विटामिन बी 12 (Vitamin B12) की कमी से रक्त में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है। इसके अलावा होमोसिस्टीन के अधिक होने के लिए अनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, स्मोकिंग (Smoking) करने वाले लोगों का होमोसिस्टीन लेवल भी अधिक होता है। होमोसिस्टीन लेवल को बढ़ने से बचाने के लिए फॉलिक एसिड और बी ग्रुप के विटामिंस को डेली अपनी डायट में शामिल करना न भूलें। साथ ही नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों में इसका स्तर सामान्य बना रहता है। होमोसिस्टीन के उच्च स्तर की वजह से मिसकैरिज हो सकता है, साथ ही यह हार्ट डिजीज और स्ट्रोक (Stroke) का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा MTHFR जीन वेरिएंट भी बढ़े हुए होमोसिस्टीन लेवल के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। कई हेल्थ कंडिशन और दवाइयों के कारण भी होमोसिस्टीन का लेवल बढ़ जाता है। यानी इसके लिए किसी एक चीज को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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    प्रेग्नेंसी के दौरान फास्टिंग प्लाज्मा होमोसिस्टीन की जांच को लेकर विवाद

    यदि आपका डॉक्टर होमोसिस्टीन लेवल की जांच करता है, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान होमोसिस्टीन लेवल (Homocysteine level) में बदलाव होता रहता है। यानी एक समय पर होमोसिस्टीन लेवल की मात्रा सामान्य रूप से उतनी नहीं होती जो अधिकांश समय होती है। इस बदलाव की वजह पोषक तत्व और लाइफस्टाइल में विविधता है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान रक्त की मात्रा बढ़ने से भी कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो होमोसिस्टीन के स्तर में परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है।

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    होमोसिस्टीन लेवल का मेटाबॉलिज्म और जेनेटिक्स

    यदि आपका होमोसिस्टीन लेवल हाई है तो इसकी वजह अनुवांशिक (जेनेटिक) हो सकती है। ऐसे लोग जिनके MTHFR जीन में भिन्नता है, विशेष रूप से C677T भिन्नता है, तो उनका होमोसिस्टीन स्तर उच्च होने की अधिक संभावना है। कुछ अध्ययनों में MTHFR जीन वेरिएंट और बढ़े हुए गर्भपात के जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। इस तरह भी होमोसिस्टीन और मिसकैरिज का संबंध हो सकता है। कुछ डॉक्टर रिकरेंट मिसकैरेज की जांच के तहत MTHFR जीन वेरिएंट की भी जांच करते हैं। अन्य को लगता है कि होमोसिस्टीन की जांच अधिक जरूरी है क्योंकि MTHFR जीन वेरिएंट वाले सभी लोगों में एमिनो एसिड (Amino acid) का स्तर अधिक नहीं होता है।

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    होमोसिस्टीन के उच्च स्तर की वजह से मिसकैरिज का उपचार

    जैसा पहले ही बताया जा चुका है कि हाई लेवल होमोसिस्टीन की वजह से मिसकैरिज होता है इस बात का अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन हीमोसिस्टीन और मिसकैरिज का इनडायरेक्टली संबंध है। इसलिए मिसकैरिज (Micarriage) होने पर हाई लेवल होमोसिस्टीन का कोई यूनिवर्सल उपचार नहीं है। हालांकि बार-बार मिसकैरिज होने पर कुछ डॉक्टर होमोसिस्टीन टेस्ट (Homocysteine test) की सलाह देते हैं और परिणाम के आधार पर उपचार की सलाह दे सकते हैं। आमतौर पर फॉलिक एसिड और विटामिन बी (Vitamin B) का हाई डोज लेने की सलाह दी जाती है जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहे। हालांकि जिन लोगों में जेनेटिक कारणों से होमोसिस्टीन का स्तर अधिक है उन पर फॉलिक एसिड (Folic acid) और विटामिन बी (Vitamin B) का कोई असर नहीं होता है। ऐसे में डॉक्टर कुछ और रास्ता ढूंढ़ेंगे। गर्भावस्था के दौरान ब्लड क्लॉटिंग रोकने के लिए कुछ डॉक्टर एंटी-क्लॉटिंग थेरिपी, जैसे हेपरिन या कम डोज एस्पिरिन (Aspirin) की सलाह दे सकते हैं, लेकिन यह प्रैक्टिस स्टैंडर्ड नहीं है। बार-बार मिसकैरिज होने पर डॉक्टर से संपर्क करना सही होगा। हीमोसिस्टीन और मिसकैरिज एक दूसरे से कितने संबंधित है इस बारे में डॉक्टर आपको जानकारी देंगे।

    होमोसिस्टीन के उच्च स्तर से अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा

    बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन लेवल किन स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, इस बारे में सटीक तौर पर तो कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह देखा गया है कि एथेरोस्क्लेरोसिस, दिल का दौरा, स्ट्रोक, डिमेंशिया (Dementia), पार्किंसंस रोग (Parkisonism), मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multipal sclerosis) और मिर्गी के मरीजों में होमोसिस्टीन का स्तर अधिक था। यह कहा जा सकता है कि रक्त में होमोसिस्टीन का उच्च स्तर (Homocysteine) वस्कुलर और नर्वस सिस्टम पर हानिकारक असर डालता है।

    हम आशा करते हैं कि होमोसिस्टीन और मिसकैरिज से संबंधित यह आर्टिकल आपको उपयोगी लगा होगा। होमोसिस्टीन और मिसकैरिज में क्या संबंध है यह समझने में भी यह आर्टिकल आपकी मदद कर सकता है। अगर होमोसिस्टीन और मिसकैरिज से संबंधित किसी प्रकार की शंका है तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। अगर आपका या आपके किसी परिचित का बार-बार मिसकैरिज हो रहा है तो एक बार हीमोसिस्टीन के स्तर की जांच करवाएं। हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Dr Sharayu Maknikar


    Kanchan Singh द्वारा लिखित · अपडेटेड 21/12/2021

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