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इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग (Implantation Cramping) क्या होती है?

इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग (Implantation Cramping) क्या होती है?

प्रेग्नेंसी की शुरुआत तब होती है जब एग स्पर्म के द्वारा फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइज होता है। फर्टिलाइज होने के बाद कोशिकाएं विभाजित होती हैं और वृद्धि करना शुरू करती हैं और जायगोट (zygote) या फर्टिलाइज्ड एग यूटरस में आ जाता है और मोरूला (morula) बन जाता है। इसके बाद मोरूला ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) बनता है और यह यूटेरस की लाइनिंग में इम्प्लांट हो जाता है। इस प्रॉसेस को इम्प्लांटेशन (implantation) कहा जाता है। कुछ महिलाएं इम्प्लांटेशन प्रॉसेस के दौरान क्रैम्पिंग या पेन की शिकायत करती हैं।

इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग (Implantation Cramping)

इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग (Implantation Cramping) को प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षण (Early signs of pregnancy) भी कहा जा सकता है। कुछ महिलाएं को ऑव्युलेशन (Ovulation) के बाद कई दिनों तक माइल्ड इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग का एहसास होता है तो कुछ को नहीं भी होता। फर्टिलाइज्ड एग (fertilized egg) के यूटराइन लाइनिंग से अटैच होने पर महिलाओं को इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग का अनुभव हो सकता है। जब एग फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) में पहुंचकर ब्लाटोसिस्ट बनता है तब यूटेरस में इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। इम्प्लांटेशन से ब्लाटोसिस्ट को ब्लड सप्लाई मिलती है ताकि यह ग्रो होकर फीटस (fetus) का रूप ले सके। इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग के साथ महिलाएं इस दौरान इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation bleeding) या स्पॉटिंग का भी अनुभव कर सकती हैं। ऐसा गर्भधारण के 10 से 14 दिन के बाद पीरियड की सामान्य अवधि के आसपास होता है। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग रेगुलर पीरियड की तुलना में हल्की होती है।

वजायनल बर्थ प्रॉसेस

इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग के दौरान कैसा एहसास होता है? (What Do Implantation Cramps Feel Like?)

सेंसेशन का एहसास हर महिला में अलग हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इम्प्लांटेशन क्रैम्प हल्की ऐंठन तरह महसूस होते हैं। कुछ महिलाएं हल्की चुभन और खिंचाव का भी अनुभव कर सकती हैं। ऐसा दो से तीन दिन तक हो सकता है। आमतौर पर सेंसेशन पीठ के निचले हिस्से, लोअर एब्डोमेन और पेल्विक एरिया में महसूस हो सकते हैं। यद्यपि एक ओवरी अंडे को रिलीज करती है और क्रैम्पिंग का कारण एग का यूटेरस में इम्प्लांटेशन है। इसलिए इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग का एहसास बॉडी की किसी एक तरफ ना होकर मिडिल में ज्यादा हो सकता है।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी के पड़ाव कौन से हैं? जानिए कैसे रहें इस दौरान हेल्दी

इम्प्लांटेशन क्रैम्प्स पीरियड क्रैम्प्स की तरह होते हैं? (Do They Feel Like Period Cramps?)

इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग क्या है

ये सेंसेशन पीरियड क्रैम्प्स की तरह ही होते हैं, लेकिन यह उतने स्ट्रॉन्ग नहीं होते। कई महिलाओं को इस बात का एहसास भी नहीं होता है कि वे इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग से गुजर रही हैं क्योंकि ये पीरियड के अगले वीक से शुरू हो जाते हैं। कई बार इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग और पीरियड क्रैम्पिंग के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। अगर आप ये ऐंठन या दर्द को सहन नहीं कर पा रही हैं तो कोल्ड पैड का यूज कर सकती हैं। अगर पेन सीवियर है और इसके साथ फीवर और ब्लीडिंग भी हो रही तो डॉक्टर से संपर्क करें। यह अर्ली मिसकैरिज (Early miscarriage), एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (ectopic pregnancy) या ओवेरियन सिस्ट (ovarian cyst) का संकेत भी हो सकता है।

इम्प्लांटेशन के दूसरे लक्षण (Other Signs of Implantation)

महिलाएं इम्प्लांटेशन क्रैम्प्स के साथ ही कुछ दूसरे लक्षण भी महसूस कर सकती हैं। ये भी इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग की तरह ही अर्ली प्रेग्नेंसी के संकेत हैं। बता दें कि इस बात की भी पूरी संभावना है कि कुछ प्रेग्नेंट महिलाएं नीचे बताए गए इन सभी लक्षणों को महसूस करें वहीं कुछ महिलाएं हॉर्मोनल चेंजेस और दूसरी कंडिशन के चलते भी इन लक्षणों को महसूस कर सकती हैं।

पीरियड मिस होना (Missed Period)

पीरियड मिस होना प्रेग्नेंसी का पहला अर्ली साइन हैं। अगर आपके पीरियड्स हमेशा रेग्युलर रहते हैं और इस बार पीरियड लेट हो चुका है तो संभावना है कि आप प्रेग्नेंट हैं।

ब्रेस्ट टेंडरनेस (breast tenderness)

आप नोटिस करेंगी कि ब्रेस्ट पर सूजन है और छूने पर आपको दर्द का एहसास हो सकता है। ऐसा हॉर्मोनल चेंजेस के कारण होता है। इसे भी अर्ली प्रेग्नेंसी संकेत माना जाता है।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में टीकाकरण की क्यों होती है जरूरत ?

ब्लोटिंग (bloating)

 इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग

हालांकि ब्लोटिंग पीरियड के पहले होना कॉमन है, लेकिन यह प्रेग्नेंसी का भी साइन है। किसी भी प्रकार के हॉर्मोनल चेंजेस ब्लोटिंग का कारण बन सकते हैं।

मूडीनेस (Moodiness)

आप खुद हमेशा से ज्यादा इमोशनल महसूस करेंगी। इसके लिए भी हॉर्मोनल चेंजेस जिम्मेदार होते हैं।

कब्ज (constipation)

हॉर्मोनल चेंजेस के चलते आपका डायजेस्टिव सिस्टम डाउन हो जाता है जो कि कब्ज का कारण बनता है।

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी के दौरान कितना होना चाहिए नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल?

नेजल कंजेशन (nasal congestion)

हॉर्मोन्स नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन पर स्वेलिंग का कारण बनते हैं। जिससे रनी और स्टफी नोज का एहसास होता है। आपको नोज ब्लीडिंग भी हो सकती है।

इनके साथ ही आप गंध के प्रति बेहद संवेदनशील (खासतौर पर फूड स्मेल के लिए) हो सकते हैं। इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग के साथ महिलाओं में जी मिचलाना, चक्कर आना और थकान आदि लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

इम्प्लांटेशन के लक्षण कब दिखाई देते हैं? (When to expect implantation symptoms)

जब ब्लाटोसिस्ट महिला की यूटेराइन वॉल में इम्प्लांट हो जाता है तब। ऐसा गर्भधारण के 6 से 10 दिनों के भीतर होता है। इस समय यूटेराइन में एस्ट्रोजन कम हो रहा होता है और प्रोजेस्टेरोन यूटेराइन वॉल को इम्प्लांटेशन के लिए तैयार कर रहा होता है। अगर ब्लास्टोसिस्ट यूटेराइन वॉल में इम्प्लांट होता है तो बॉडी प्लेसेंटा का निमार्ण शुरू कर देती है। दो सप्ताह के भीतर बॉडी में पर्याप्त ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन ( Human Chorionic gonadotropin) (एचसीजी) हार्मोन मौजूद होगा जो पॉजिटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट का कारण बनता है। दूसरे ऊपर बताए गए अर्ली प्रेग्नेंसी साइन सक्सेसफुल इम्प्लांटेशन के तुरंत बाद दिखाई दे सकते हैं।

और पढ़ें: जानें क्या है डिजिटल प्रेग्नेंसी टेस्ट किट से टेस्ट करने का सही समय?

प्रेग्नेंसी टेस्ट कब करवाना चाहिए? (When to take a pregnancy test)

प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाने के लिए आपको एक से दो हफ्ते तक इंतजार करना चाहिए। बॉडी में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हॉर्मोन का निर्माण होना जरूरी है तभी यह यूरिन या ब्लड टेस्ट में दिखाई देगा। अगर आप एचसीजी (HCG) हॉर्मोन के निमार्ण के पहले प्रेग्नेंसी टेस्ट करा लेती हैं तो आपको फाल्स नेगेटिव रिजल्ट मिलेगा। ऑव्युलेशन के बारह से पंद्रह दिन बाद यूरिन टेस्ट पॉजिटिव आ सकता है। आप टेस्ट कराने के लिए डॉक्टर के पास जा सकते हैं या लोकल फार्मेसी से टेस्ट किट खरीदकर यूरिन टेस्ट कर सकते हैं। अगर आप प्रेग्नेंसी को जल्दी कंफर्म करना चाहते हैं तो डॉक्टर के पास जाकर ब्लड टेस्ट करवाना सही होगा। एचसीची हॉर्मोन ब्लड में गर्भधारण के एक हफ्ते बाद दिखाई दे सकता है। प्रेग्नेंसी कंफर्म होने बाद डॉक्टर से संपर्क करें। वे आपको प्रेग्नेंसी प्रॉग्रेस के बारे में जानकारी देने के साथ ही जरूरी टिप्स भी देंगे।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और इम्प्लांटेशन क्रैम्पिंग से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

 

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अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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