गर्भावस्था की पहली तिमाही में अपनाएं ये प्रेग्नेंसी डायट प्लान

Medically reviewed by | By

Update Date जनवरी 2, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Share now

प्रग्नेंसी की खबर मिलने के बाद महिलाओं के मन में प्रेग्नेंसी डायट प्लान को लेकर कई सवाल आते हैं। खाना तो हम सभी रोज खाते हैं लेकिन, प्रेग्नेंसी डायट प्लान थोड़ा अलग होता है। इस समय मां के साथ ही होने वाले बच्चे को भी पूरा पोषण चाहिए होता है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान पर अगर ध्यान दिया जाए तो मां और होने वाला बच्चा दोनों ही स्वस्थ्य रहते हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हैलो स्वास्थ्य आपको प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में डायट प्लान कैसा होना चाहिए जानकारी दे रहा है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान को फॉलो करने से मां के साथ-साथ बच्चा भी तंदरुस्त होता है।

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी में न करें ये 8 काम, शिशु को हो सकता है नुकसान

पहली तिमाही में कैसा हो प्रेग्नेंसी डायट प्लान?

प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में आपको 300 कैलोरी एक्स्ट्रा चाहिए होती है। साथ ही 15 से 20 ग्राम रोजाना प्रोटीन की आवश्यकता होती है। कई बार शरीर की जरूरत के हिसाब से या फिर मेडिकल कंडिशन की वजह से ये आकड़ा अलग भी हो सकता है। आपको कैलोरी लेने के साथ ही उसे बर्न करने के बारे में भी सोचना चाहिए। प्लेट में 50 % फल और सब्जियाें को शामिल करें। 25 % प्रोटीन भी आपको लेना है। चार टेबलस्पून फैट रोजाना लिया जाना चाहिए। अपनी प्रेग्नेंसी डायट प्लान में प्रोटीन को शामिल करें।

यह भी पढ़ें : क्या प्रेग्नेंसी कैलक्युलेटर की गणना हो सकती है गलत?

ये फूड प्रदान करते हैं प्रोटीन

दाल, बींस, पनीर, दूध, मछली, अंडे, मांस, टोफू, और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत हैं। गर्भावस्था के दौरान ये खाद्य पदार्थ आपके बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है।  प्रेग्नेंसी डायट प्लान में इन प्रोटीन फूड्स को शामिल करें।

साबुत अनाज

मल्टीग्रेन चपाती, गेहूं का पास्ता, दलिया, गेहूं की रोटी और भूरे चावल को डायट में शामिल करें। कार्बोहाइड्रेट लेने के लिए ऐसे अनाज का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में साबुत अनाज को जोड़े। ये आपके साथ-साथ आपके पेट में पल रहे बच्चे के लिए भी अच्छा है।

डेयरी प्रोडक्ट करें शामिल

प्रेग्नेंसी डायट प्लान में डेयरी प्रोडक्ट चुनते समय दही, दूध और पनीर को शामिल करना दोनों के लिए अच्छा विकल्प है। ये आपके बच्चे की हड्डियों के लिए आवश्यक कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी प्रदान करते हैं। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में डेयरी प्रोडक्ट शामिल करें जो कैल्शियम देता है। बच्चे की हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है इसलिए मां का डेयरी प्रोडक्ट खाना हमेशा फायदेमंद होता है।

प्रेग्नेंसी डायट प्लान में फल और सब्जियां जोड़ें

अगर प्रग्नेंसी के दौरान आपका वेट बहुत बढ़ गया है तो कोशिश करें कि सब्जियों को तलने की बजाय उबाल कर खाएं। विभिन्न फल और सब्जियां फाइबर, विटामिन और खनिजों में समृद्ध होते हैं। इनमे कैलोरी भी कम होती है। उबाल कर सब्जियां खाने से आप बिना कुछ एक्स्ट्रा जोड़ें सब्जी के सभी पोषक तत्व ले सकें। प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आपको कुछ सब्जियां खाने से मतली आती है तो उसे अलग-अलग स्टाईल में बना कर खाएं। सब्जियां और फल छोड़ना आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्स करना सही या गलत?

पहली तिमाही के दौरान प्रेग्नेंसी डायट प्लान में सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व में फोलिक एसिड, आयरन और विटामिन बी 6 जरूरी होता है।

  • फोलिक एसिड बच्चे को न्यूरल ट्यूब डिसऑर्डर जैसे कि स्पाइना बिफिडा (spina bifida) और अन्य जन्म के विकारों जैसे कि क्लेफ्ट पैलेट (cleft palate) से बचाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी डायट प्लान में फोलिक एसिड को जोड़ें।
  • स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए आयरन आवश्यक होता है। ये आपके शरीर के चारों ओर ऑक्सिजन ले जाने का काम करता है। पर्याप्त आयरन न होने से आपको थका हुआ महसूस हो सकता है इसलिए प्रेग्नेंसी डायट प्लान में आयरन की मात्रा ठीक ढ़ंग से लें। आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया भारत में आम है इसलिए यह पोषक तत्व पूरे गर्भावस्था में महत्वपूर्ण है।
  • मॉर्निंग सिकनेस के कारण आपको बेचैनी लग सकती है। साथ ही ज्यादा खाने का मन भी नहीं करेगा। विटामिन बी 6 मतली को कम करने में मदद कर सकता है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में विटामिन बी 6 का सेवल करें ये आपको प्रेग्नेंसी की सबसे सामान्य परेशानी से बचाता है।

यह भी पढ़ें : पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षण में क्या अंतर है?

इन मेडिकल कंडिशन में रखें ध्यान

अगर आपको पहले से किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या है तो प्रेग्नेंसी डायट प्लान करते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आपको किसी चीज से एलर्जी तो नहीं है। अगर आपको डायबिटीज की समस्या है तो आपको पहले से निश्चित करना होगा कि कौन सा फूड अवॉयड करना है। हाइड्रेटेड रहने के लिए दिन में करीब आठ से 12 गिलास पानी जरूर पिएं।

आपको कुछ बातें ध्यान रखने की जरूरत है

प्रेग्नेंसी डायट प्लान में फल और सब्जियों को शामिल करते वक्त इस बात ध्यान रखें कि आजकल सभी सीजन में लगभग सभी सब्जियां और फल मिल जाते हैं। आपको ये सोचने कि जरूरत नहीं है कि इस सीजन में फलां चीज नहीं मिलेगी। वैसे भी कहा जाता है कि मौसमी फल या सब्जियां शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। अगर कुछ नहीं भी मिल रहा है तो उसकी जगह सीजन फल या सब्जियों को स्थान दिया जा सकता है। इससे आपको समान न्यूट्रिएंट्स ही मिलेंगे। कई बार सिंगल फूड से ही आपको कई प्रकार का पोषण मिल जाएगा। उदाहरण के लिए दाल में अच्छी मात्रा में फॉलिक एसिड, ओमेगा 3 फैटी एसिड और आयरन पाया जाता है। जो लोग वेजीटेरियन है, उनके लिए ये अच्छा स्त्रोत है। चाहे तो पहली तिमाही के लिए एक प्रकार का फूड, वहीं दूसरी तिमाही के लिए अलग प्रकार का फूड अपना सकती हैं। इसके लिए आप डायटीशियन की मदद ले सकती हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान पोषण का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। यहां बताई गई टिप्स को फॉलो करके आप एक बेहतर प्रेग्नेंसी डायट प्लान कर सकते हैं। फिर भी कोई डायट अपनाने से पहले डायटीशियन से संपर्क करें।

हैलो स्वास्थ्य किसी प्रकार का उपचार या निदान प्रदान नहीं करता

यह भी पढ़ें :

गर्भधारण के लिए सेक्स ही काफी नहीं, ये फैक्टर भी हैं जरूरी

प्रेग्नेंसी में थकान क्यों होती है, कैसे करें इसे दूर?

गर्भावस्था में प्रेग्नेंसी पिलो के क्या हैं फायदे?

प्रेग्नेंसी में इन 7 तरीकों को अपनाएं, मिलेगी स्ट्रेस से राहत

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"
    सूत्र

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    White soapwort: व्हाइट सोपवोर्ट क्या है?

    व्हाइट सोपवोर्ट क्या है? व्हाइट सोपवोर्ट का इस्तेमाल किन बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है? white soapwort के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Mona Narang
    जड़ी-बूटी A-Z, ड्रग्स और हर्बल मार्च 26, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    Mary Kom’s Birthday : मां बनने के बाद थम नहीं जाती है दुनिया, मैरी कॉम ने ऐसे बदली समाज की पुरानी सोच

    मैरी कॉम का नाम जबान पर आते ही महिलाओं को साहस मिलता है कुछ करने का, मुश्किल हालातों से लड़ने का, क्षमताओं से कहीं अधिक जीत लेने का और जीवन जीने की कला भी।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Bhawana Awasthi
    स्वास्थ्य बुलेटिन, लोकल खबरें फ़रवरी 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    Ethinyl Estradiol: एथिनिल एस्ट्राडियोल क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

    जानिए एथिनिल एस्ट्राडियोल की जानकारी in hindi, फायदे, लाभ, एथिनिल एस्ट्राडियोल उपयोग, इस्तेमाल कैसे करें, कब लें, कैसे लें, कितना लें, खुराक, Ethinyl Estradiol डोज, ओवरडोज, साइड इफेक्ट्स, नुकसान, दुष्प्रभाव और सावधानियां।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Anoop Singh
    दवाइयां A-Z, ड्रग्स और हर्बल फ़रवरी 18, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    सामान्य प्रेग्नेंसी से क्यों अलग है मल्टिपल प्रेग्नेंसी?

    मल्टिपल प्रेग्नेंसी क्या है? सामान्य प्रेग्नेंसी से क्यों अलग है मल्टिपल प्रेग्नेंसी? ऐसी स्थिति में कब हो सकता है शिशु का जन्म? multiple pregnancy के वक्त क्या करना चाहिए?

    Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar
    Written by Nidhi Sinha
    प्रेग्नेंसी स्टेजेस, प्रेग्नेंसी फ़रवरी 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें