एक्टोपिक प्रेग्नेंसी क्यों बन जाती है जानलेवा?

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Update Date जून 1, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic pregnancy) क्या है?

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टिट्रिशन एंड गायनोकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार जब एग यूट्रस के बाहर और फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube) के अंदर डेवलप हो जाता है तो इस स्थिति को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी को हिंदी में अस्थानिक गर्भावस्था कहते हैं। फैलोपियन ट्यूब में गर्भ ठहरने के कारण ट्यूब फट जाती है और इंटरनल ब्लीडिंग होने लगती है। ऐसे में मिसकैरिज हो जाता है। हालांकि, कभी-कभी मिसकैरिज नहीं होने की स्थिति में गर्भवती महिला के लिए यह प्रेग्नेंसी लाइफ थ्रेटनिंग भी हो सकती है। इमरजेंसी की स्थिति में सर्जरी भी की जा सकती है। अस्थानिक गर्भावस्था की जानकारी गर्भधारण के छठे सप्ताह से दसवें सप्ताह के अंदर जानकारी मिलती है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के लक्षण क्या हैं?

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की शुरुआत सामान्य प्रेग्नेंसी की तरह होती है। इस गर्भावस्था के दौरान भी पीरियड मिस होना, ब्रेस्ट सॉफ्ट होना, चक्कर आना, बेहोश होना और पेट से जुड़ी परेशानी महसूस होती है। हालांकि इन लक्षणों के अलावा और भी लक्षण होते हैं जैसे

  • वजायना से ब्लीडिंग होना (Abnormal Vaginal bleeding)- वजायना से ब्लीडिंग होना एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है। यह ब्लीडिंग नॉर्मल पीरियड्स की ब्लीडिंग की तरह कम या ज्यादा होती है।
  • बैक पेन होना- इस दौरान महिला के बैक में सामान्य से ज्यादा दर्द होता है।
  • एब्डोमेन या पेल्विस (Pelvis) में दर्द- गर्भधारण के 5वें हफ्ते के बाद से महिला को एब्डोमेन या पेल्विस में दर्द महसूस होने लगता है। महिला को पेल्विस के साइड में माइल्ड दर्द शुरू हो जाता है।

इन उपरोक्त परेशानी या लक्षण के साथ-साथ निम्नलिखित लक्षण भी समझे जा सकते हैं। जैसे-

  • कंधे में दर्द होना
  • कमजोरी महसूस होना
  • चक्कर आना
  • सामान्य से ज्यादा पसीना आना
  • एब्नॉर्मल ब्लीडिंग और पेल्विस में दर्द होने पर इसकी जानकरी हेल्थ एक्सपर्ट से जरूर दें

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एक्टोपिक गर्भावस्था के जोखिम कारक क्या हैं?

  • पहले कभी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हुई हो
  • किसी कारण फैलोपियन ट्यूब की सर्जरी हुई हो
  • पेल्विस या एब्डॉमिनल सर्जरी
  • सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STIs)
  • पेल्विस में सूजन संबंधी परेशानी होना
  • एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis)

इन कारणों के अलावा और भी अहम कारण हो सकते हैं। इन कारणों में शामिल हैं

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एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का निदान कैसे किया जाता है?

अगर गर्भवती महिला को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानी समझ में नहीं आती है, तो हेल्थ एक्सपर्ट इसकी जानकारी दे सकते हैं। इससे से जुड़ी जांच निम्नलिखित हैं।

  1. अल्ट्रासाउंड- एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने की स्थिति में हेल्थ एक्सपर्ट ट्रांसवजायनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal ultrasound) करते हैं। दरअसल ट्रांसवजायनल एक तरह का डिवाइस होता है जिसे वजायना के अंदर डाला जाता है। इस डिवाइस की मदद से यूट्रस को आसानी से देखा जा सकता है। अगर फैलोपियन ट्यूब में भ्रूण नजर आता है, तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की जानकारी मिलती है।
  2. ह्यूमन क्रॉनिक गोनाडोट्रोपिन हॉर्मोन ब्लड टेस्ट- यह एक तरह का ब्लड टेस्ट होता है, जिससे इस हॉर्मोन के बढ़े हुए लेवल की जानकारी मिलती है। अगर इसका लेवल बढ़ा हुआ होता है, तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होती है।
  3. पेल्विस टेस्ट– इस टेस्ट से वल्वा, वजायना, सर्विक्स, ओवरी, यूट्रस और रेक्टम से जुड़ी परेशानियों की जानकारी मिलती है।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का इलाज कैसे किया जाता है?

फैलोपियन ट्यूब में फीटस डेवलप होने के कारण इस दौरान गर्भवती महिला का ट्रीटमेंट बेहद जरूरी है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का इलाज दवा और सर्जरी की मदद से किया जाता है। इस दौरान स्वास्थय विशेषज्ञ स्थिति को समझते हुए प्रेग्नेंसी समाप्त करने की सलाह कपल को दे सकते हैं।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के बाद क्या गर्भधारण करना सुरक्षित रहता है?

ऐसा नहीं है कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होने पर फिर से गर्भधारण नहीं किया जा सकता है। इस दौरान सही ट्रीटमेंट की सख्त जरूरत होती है। यही नहीं गायनोकोलॉजिस्ट कपल्स को इस बारे में सही सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट महिला के हेल्थ के अनुसार फिर से हेल्दी गर्भवती होने की सही सलाह देते हैं।

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एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से जुड़ी अहम जानकारी।

  • 50 में से 1 महिला एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से गुजरती हैं।
  • लगभग 6 से 16 प्रतिशत तक गर्भवती महिला पहले ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग और पेन जैसी समस्या से परेशान रहती हैं, जो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण हो सकता है।
  • यूनाइटेड स्टेटस में साल 1980 से 2007 तक 876 गर्भवती महिलाओं की मौत एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण हुई थी।

गर्भावस्था की शुरुआत के साथ ही बिना देरी किए जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट अल्ट्रासाउंड और अन्य टेस्ट की मदद से मां और शिशु दोनों की सेहत की जानकारी लेते हैं। इस दौरान डॉक्टर भी जो सलाह देते हैं, उसे ठीक से फॉलो करना चाहिए।

हेल्थ एक्सपर्ट और रिसर्च के अनुसार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा उन महिलाओं को ज्यादा होता है, जो एक से ज्यादा लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं। एक से ज्यादा लोगों के साथ फिजिकली अटैच होने से इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ जाता है।

क्या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?

हां, इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर महिला की फैलोपियन ट्यूब में कोई नुकसान पहुंचता है, तो गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। इसलिए अगर कोई महिला एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से गुजर चुकी हैं, तो दोबारा बेबी प्लानिंग के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति होने पर घबराएं नहीं सिर्फ अपने गायनेकोलॉजिस्ट के संपर्क में रहें और जो सलाह डॉक्टर आपको दें उसे ठीक से फॉलो करें।

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अगर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की जानकारी जल्द मिल जाए तो यह गर्भवती महिला की सेहत के अच्छा माना जाता है। क्योंकि अगर भ्रूण फैलोपियन ट्यूब में ज्यादा वक्त तक रह जाता है, तो इससे फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान अगर परेशानी ज्यादा हो या वजायनल ब्लीडिंग हो, तो इसे जरा भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआत से ही या अगर आपने प्लानिंग के साथ कंसीव किया है, तो पौष्टिक आहार लेना शुरू कर दें। सिगरेट और एल्कोहॉल जैसे पेय पदार्थों से दूरी भी बनाना भी हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए आवश्यक होता है।

अगर आप एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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