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गर्भनिरोधक दवाइयों से हो सकता है कैंसर, कहीं आप तो नहीं करती भरोसा गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ पर

गर्भनिरोधक दवाइयों से हो सकता है कैंसर, कहीं आप तो नहीं करती भरोसा गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ पर

25 वर्षीय रीता की चार महीने पहले शादी हुई है और उनके पार्टनर को गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना पसंद नहीं है। उनके पीरियड्स मिस हो गए। सुबह उन्हें पता चला कि वे गर्भवती हैं। रीता की तरह ऐसी कई युवतियां और जोड़े हैं, जिन्हें प्रेग्नेंसी को लेकर उचित सलाह की जरूरत है। गर्भधारण के साथ ही उन्हें गर्भनिरोधन के तरीके की उचित जानकारी की आवश्यकता भी है। हमारे समाज में गर्भनिरोधक के जुड़े मिथ फैले हुए हैं जिनके चलते महिलाएं इनका उपयोग करने से डरती हैं।

अनियोजित प्रेग्नेंसी मां को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। यह यह सामाजिक और आर्थिक जटिलता का कारण हो सकती है। ऐसा देखा गया है कि कई युवा गलत जानकारी या साइड इफेक्ट्स की चिंता को लेकर गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने से बचते हैं या इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। ऐसे में इन गलत जानकारियों को दूर करके यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि युवा गर्भनिरोधन का एक उचित तरीका चुनें और इसे सही ढंग से इस्तेमाल करना जारी रखें। आज हम इस आर्टिकल में गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ (Myths related to contraception) के बारे में जानेंगे।

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गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ ((Myths related to contraception))- 1.गर्भनिरोधक से कैंसर होता है

तथ्य: मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां हकीकत में ओवरियन और एंडोमैट्रियल (यूटरस की इनर लाइनिंग) कैंसर के खतरे को कम करती हैं। इसलिए गर्भनिरोधक के इस तरीको को सुरक्षात्मक माना जाना चाहिए। हालांकि, ब्रेस्ट कैंसर और गर्भनिरोधक गोलियों के बीच कुछ संबंध देखा गया है। ऐसे में गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। गर्भनिरोधक के तरीके में गोलियां एक बेहतर तरीका साबित हो सकती हैं।

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ- 2.कंडोम अनचाही प्रेग्नेंसी से 100% सुरक्षा देता है (Condom provides 100% protection from unwanted pregnancy)

तथ्य: कंडोम अनचाही प्रेग्नेंसी से सिर्फ 80% सुरक्षा देता है। इसका मतलब यह हुआ कि कंडोम का इस्तेमाल करने वाले 10 में से 2 जोड़ों में प्रेग्नेंसी का मामला सामने आ सकता है। ऐसा ही ‘सेफ पीरियड’ और ‘विदड्रॉल मेथड’ के लिए माना जाता है। हालांकि, कंडोम यौन संचरित रोगों (एसटीडी) से सुरक्षा प्रदान करता है। गर्भनिरोधक के तरीके में कंडोम कई मायनों में फायदेमंद साबित होता है।

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ (Myths related to contraception))- 3.यदि मैं अभी गोलियां लेती हूं तो भविष्य में कभी मां नहीं बन सकती

तथ्य: मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां या कंबाइन्ड ओरल गर्भनिरोधक तभी प्रभावी होती हैं, जब महिला इनका नियमित रूप से सेवन करे। जैसी ही महिला गोलियों का इस्तेमाल करना बंद करती है, वह गर्भवती हो सकती है। ऐसे में गर्भनिरोधक गोलियों से डरने की जरूरत नहीं है। गर्भनिरोधक के तरीके में यह बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ- 4. गोलियों की वजह से वजन बढ़ता है (Pills cause weight gain)

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ

तथ्य: कई कारणों की वजह से महिला का वजन बढ़ता है, लेकिन ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से वजन बढ़ता है। हकीकत में गर्भनिरोधक गोलियां मासिक धर्म में होने वाली ब्लीडिंग और ऐंठन को कम करती हैं। यह गोलियां त्वचा के निखार और चेहरे के बाल और मुंहासों को कम करती हैं। गर्भनिरोधक गोलियां पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम (Polycystic Ovarian Syndrome) और एंडोमेट्रियोसिस को नियंत्रित करती हैं। गर्भनिरोधक के तरीके में गोलियां कई कारणों से आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। गर्भनिरोधक के तरीके में गोलियों का सेवन करना भी बेहद ही आसान है। गर्भनिरोधक के तरीके में इसे अपनाना भी काफी सरल और सहज है। आप जब चाहे इस गर्भनिरोधक के तरीके को बंद कर सकती हैं।

और पढ़ें: गर्भधारण से पहले देखभाल क्यों जरूरी है?

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ (Myths related to contraception))- 5.गर्भनिरोधक एक महिला समस्या है

तथ्य: प्रेग्नेंसी प्लानिंग कपल का निर्णय होता है, ऐसे में गर्भनिरोधक भी कपल का ही निर्णय होता है। युगल को यह ढूंढने की जरूरत होती है कि उनके लिए कौन सा गर्भनिरोधक का तरीका बेहतर होगा। गर्भनिरोधक के मामले में गायनोकोलॉजिस्ट से भी मदद ली जा सकती है। राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम ‘हम दो’ (/humdo.nhp.gov.in/) के माध्यम से परिवार नियोजन के तरीकों पर योग्य जोड़ों को सूचना और सलाह मुहैया कराता है और उसकी यह सर्विस उपलब्ध भी है। उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कपल और इंडविजुअल्स एक स्वस्थ, खुश और समृद्ध जीवन जिएं। गर्भनिरोधक एक बुरा शब्द नहीं है और ना ही एक पाबंदी है। गर्भनिरोधक के तरीके महिला के एक सच्चे मित्र की तरह हैं, जो महिला की इच्छानुसार जब तक वह चाहे तब तक उसे प्रेग्नेंसी से बचाकर रखते हैं।

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ- 6. बर्थ कंट्रोल से हॉर्मोन असंतुलित होते हैं (Birth control makes hormones unbalanced)

तथ्य: बर्थ कंट्रोल में पाए जाने वाले हाॅर्मोन महिलाओं की बॉडी में मिलने वाले हार्मोन्स के समान होते हैं। स्ट्रेस का बर्थ कंट्रोल के मुकाबले हाॅर्मोन्स पर अधिक प्रभाव पड़ता है। यदि आप गर्भनिरोधक के कार्य करने के तरीके के बारे में चिंतित हैं तो लो डोज हाॅर्मोनल गर्भनिरोधक के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें। गर्भनिरोधक के तरीके में नॉन हार्मोनल गर्भनिरोधक जैसे कॉपर टी आईयूडी उपलब्ध है।

और पढ़ें: Contraceptive Pills: क्या आप गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं?

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ (Myths related to contraception))- 7.आइयूडी (IUD) से पेल्विक इनफ्लेमेटरी डिजीज होती है

तथ्य: आइयूडी से पेल्विक इनफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) नहीं होती है। बेहद ही दुर्लभ मामलों में पीआईडी के मामले सामने आते हैं। आइयूडी का इस्तेमाल करने वाली सिर्फ 1 प्रतिशत महिलाओं में यह समस्या आ सकती है। यौन संचरित रोग से पीआईडी होती है। यदि जब आपने आइयूडी लगवाई थी तब आपको एसटीआई थी, जिसका पता आपको नहीं था। ऐसे में पहले 20 दिनों के भीतर एसटीआई के पीआईडी में तब्दील होने का खतरा रहता है। 20 दिनों के बाद बिना आइयूडी और आइयुडी का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में इस स्थिति में समान खतरा रहता है। गर्भनिरोधक के तरीके में आइयूडी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। किसी भी गर्भनिरोधक को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ ((Myths related to contraception))- 8. गर्भनिरोधक गोलियों को प्रतिदिन एक ही समय पर लेना चाहिए

तथ्य: गर्भनिरोधक गोलियां दो प्रकार की होती हैं। पहली मिनी पिल्स या प्रजेस्टिन- सिर्फ बर्थ कंट्रोल पिल्स। दूसरी रेग्युलर पिल्स, जिनमें एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टिन संयुक्त रूप से होता है। हकीकत में गर्भनिरोधक गोलियों को प्रतिदिन सिर्फ एक ही समय पर लेना चाहिए, यह नियम मिनी पिल्स पर लागू होता है। गोलियां गर्भनिरोधक के तरीके में बेहतर विकल्प तो हो ही सकती हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करना चाहिए। गर्भनिरोधक के तरीके के बीच में कनफ्यूज होने की जरूरत नहीं है।

और पढ़ें: IUD आईयूडी के बावजूद भी हो सकता है प्रेग्नेंसी का खतरा

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ- 9.आपको गर्भनिरोधक से ब्रेक लेने की जरूरत है (You need to take a break from contraception)

गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ

तथ्य: जब तक आप बेबी प्लानिंग नहीं करती हैं तब तक गर्भनिरोधक से ब्रेक लेने का कोई कारण नहीं है। आप जब तक चाहें तब तक गर्भनिरोधक का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। सिर्फ डेपो-प्रोवेरा (Depo-Provera) शॉट्स के मामले में यह अपवाद है। महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वह लगातर सिर्फ दो वर्षों तक गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करें, चूंकि इसके बाद हड्डियों से मिनरल्स कम होने की संभावना रहती है। गर्भनिरोधक के तरीके में आपको काफी चीजों का ध्यान रखना चाहिए। बेहतर होगा कि किसी भी प्रकार के गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने से पहले आप डॉक्टर से सलाह लें।

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं। गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ पर भरोसा न करें।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और गर्भनिरोधक से जुड़े मिथ से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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Debunking common birth control myths
https://www.medicalnewstoday.com/articles/birth-control-myths

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Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड