फिश प्रोटीन का होती हैं सबसे बेस्ट सोर्स, जानिए कौन सी फिश से मिलता है कितना प्रोटीन

Medically reviewed by | By

Update Date अप्रैल 17, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
Share now

प्रोटीन शरीर की इकाई है। प्रोटीन प्राप्त करने के लिए वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन डायट अपनाई जा सकती है। जिन लोगों को फिश खाना अच्छा लगता है, उनके लिए फिश प्रोटीन प्राप्त करना आसान हो जाता है। अगर आप भी प्रोटीन लेते हैं, लेकिन ये नहीं जानते हैं कि फिश खाने से किस तरह के लाभ होते हैं, तो इसे जानना जरूरी होता है। फिश में प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स के साथ ही मर्क्युरी भी पाई जाती है। अगर आपको प्रोटीन की जरूरत है तो फिश डायट अपनाई जा सकती है, लेकिन मर्क्युरी की मात्रा को जानने के बाद ही फिश का सेवन करें। सही फिश का चुनाव और सप्ताह में एक से दो बार फिश का सेवन शरीर को अच्छी मात्रा में प्रोटीन देता है।

यह भी पढ़ें : पोस्ट वर्कआउट ड्रिंक:वॉटर मेलन जूस से पूरा करें अपना फिटनेस गोल

फिश प्रोटीन के लिए ड्राई फिश

फिश प्रोटीन लेना चाहते हैं तो ड्राई फिश का यूज किया जा सकता है। ड्राई फिश स्नैक के रूप में ली जा सकती है। साथ ही ड्राई फिश कई वैराइटी में आती है। ड्राई फिश में हाई प्रोटीन, लो फैट ऑप्शन होता है। एक आउंस यानी 28 ग्राम ड्राई फिश में 18 ग्राम प्रोटीन होता है। ड्राई फिश में प्रोटीन के साथ ही विटामिन B 12 भी होता है। पोटेशियम, मैग्नीशियम और सेलेनियम के साथ ही अन्य न्यूट्रिएंट्स भी पाए जाते हैं। 100 ग्राम ड्राई फिश में 63 ग्राम यानी 93 प्रतिशत कैलोरी होती है। ड्राई फिश में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है।

फिश प्रोटीन चाहिए तो खाएं टूना

टूना फिश में कैलोरी और वसा में बहुत कम होता है। ये प्योर फिश प्रोटीन मील है। पके हुए टूना या फिश प्रोटीन मील के तीन औंस यानी 85 ग्राम में लगभग 25 ग्राम प्रोटीन और केवल 110 कैलोरी रहती है। फिश में विटामिन-बी, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिज भी पाए जाते हैं। टूना फिश में एंटीऑक्सिडेंट गुण भी होते हैं।
इसके अलावा टूना फिश में ओमेगा -3 फैटी एसिड भी होता है जिसके कारण शरीर की सूजन से लड़ने में मदद मिलती है।

फिश में कुछ मात्रा में पारा होता है, लेकिन सेलेनियम की अधिक मात्रा होने के कारण पारे मर्क्युरी की टॉक्सीसिटी से बचाती है। सप्ताह में एक बार फिश का सेवन करना सही रहता है। डॉक्टर प्रेग्नेंट लेडी को फिश खाने से मना करते है।

यह भी पढ़ें— वेट लॉस से लेकर जॉइंट पेन तक, जानिए क्रैब वॉकिंग के फायदे

फिश प्रोटीन के लिए लें हैलिबेट फिश

हैलिबट फिश प्रोटीन से भरपूर होती है। इस फिश को प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। हलिबेट के 159 ग्राम में 36 ग्राम प्रोटीन और 176 कैलोरी होती है। अलास्का हलिबेट में भी ओमेगा -3 फैटी एसिड पाया जाता है। ये एंटीइंफ्लामेट्री फूड है। हैलिबेट फिश में सेलेनियम भी उच्च मात्रा में पाया जाता है। साथ ही इसमें विटामिन बी 3, बी 6, और बी 12 और मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिज अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इस फिश में भी पारा पाया जाता है। इस कारण हैलिबेट फिश को हमेशा नहीं खाना चाहिए। जब भी संभव हो, मछली को मार्केट से फ्रेश ही खरीदें।

फिश प्रोटीन के लिए तिलापिया

तिलापिया फिश प्रोटीन से भरपूर होती है। साथ ही ये अन्य मछलियों की तुलना में सस्ती होती है। ये सफेद, ताजे पानी की मछली होती है जो प्रोटीन का बड़ा सोर्स मानी जाती है। इस फिश में भी कैलोरी और वसा कम मात्रा में पाया जाता है। तिलापिया फिश के 87 ग्राम में 23 ग्राम प्रोटीन पाई जाती है। तिलापिया फिश में ओमेगा-6 से ओमेगा 3 अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इस बात को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है। ये सेहत के लिए सही है या फिर नहीं, इसको लेकर कॉन्ट्रोवर्सी है। वैसे ओमेगा-6 चिंता का कारण नहीं है। साथ ही इस फिश में विटामिन बी, सेलेनियम, फॉस्फोरस और पोटेशियम जैसे खनिज भी पाए जाते हैं।

यह भी पढ़ें- लो कैलोरी एल्कोहॉलिक ड्रिंक्स के साथ सेलिब्रेट करें यह दीपावली

फिश प्रोटीन चाहिए तो अपना सकते हैं कॉड फिश

कॉड फिश को ठंडे पानी की मछली भी कहते हैं। कॉड फिश प्रोटीन का अच्छा सोर्स मानी जाती है। इस फिश में भी कैलोरी और वसा कम मात्रा में पाए जाते हैं। तीन औंस यानी 85 ग्राम फिश में 16 ग्राम प्रोटीन और 72 कैलोरी होती है। कॉड फिश में विटामिन बी 3, विटामिन बी 6, और बी 12 की अच्छी मात्रा पाई जाती है। साथ ही फिश में ओमेगा 3 फैटी एसिड भी पाए जाते हैं। ये सभी हार्ट के लिए लाभदायक होते हैं। इसके साथ ही कॉड में सेलेनियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम भी होते हैं।

फिश प्रोटीन के लिए पोलेक

फिश प्रोटीन के लिए पोलेक फिश को अपनाया जा सकता है। ये व्हाइट फिश प्रोटीन से भरपूर होती है। इस फिश के तीन औंस यानी 85 ग्राम में 17 ग्राम प्रोटीन होता है और साथ ही 74 कैलोरी होती है। पोलेक फिश में ओमेगा-3 फैटी एसिड भी होता है। साथ ही अधिक मात्रा में विटामिन बी 12 के साथ ही अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इस मछली की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें पारा कम मात्रा में पाया जाता है। 100 ग्राम फिश में 19 ग्राम प्रोटीन और 88 कैलोरी होती है।

फिश प्रोटीन के लिए रेनबो ट्राउट

रेनबो ट्राउट में इंद्रधनुष के तरह रंग पाए जाते हैं, इसलिए इसे रेनबो ट्राउट कहा जाता है। रेनबो ट्राउट फ्रेश वॉटर में रहती है। अमेरिका में ट्राउट फिशिंग रेगुलेशन के कड़े नियम हैं। नियम के तहत उन कैमिकल्स की संख्या को सीमित किया जाता है, जो मछली को नुकसान पहुंचा सकती है। रेगुलेशन के कारण ही रेनबो ट्राउट में कम मात्रा में पारा पाया जाता है। रेनबो ट्राउट फिश के 100 ग्राम में 19.94 ग्राम प्रोटीन के साथ ही विटामिन बी -12 के 4.30 माइक्रोग्राम भी उपस्थित होते हैं। लोग रेनबो ट्राउट फिश को जैतून का तेल, नींबू का रस और जड़ी बूटियों के साथ बेक करते हैं।

यह भी पढ़ें: Calcium Pantothenate: कैल्शियम पैंटोथेनेट क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

 मैकेरल फिश अपनाएं प्रोटीन के लिए

मैरेकल प्रोटीन में अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। अन्य प्रकार की मछलियों की तुलना में इसमे अधिक ओमेगा -3 फैटी एसिड और विटामिन बी -12 होता है। साथ ही स्मोक्ड मैकेरल खाने से सोडियम की मात्रा भी प्राप्त होती है। जब भी इस मछली को खरीदें, फूड लेबल की जांच करना बहुत जरूरी होता है। अटलांटिक और स्पैनिश मैकेरल छोटी किस्म की मछली हैं। छोटी किस्म की मछली चुनना इसलिए बेहतर होता है क्योंकि इनमें पारे की मात्रा कम पाई जाती है। वहीं बड़ी मछलियों में पारा अधिक मात्रा में पाया जाता है।

सर्डिन फिश

सर्डिन फिश को ऑयली फिश भी कहते हैं। सर्डिन फिश में बहुत सारे न्यूट्रिएंट्स होते हैं। सर्डिन में कैल्शियम, आयरन, सेलेनियम, प्रोटीन, विटामिन बी-12 और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। वैसे तो सर्डिन फिश को फ्रेश भी खरीदा जा सकता है, लेकिन ये कैंड या फिर फ्रोजन भी मिलती हैं। आप सर्डिन को सलाद के रूप में भी खा सकते हैं।

यह भी पढ़ें : पोस्ट वर्कआउट ड्रिंक:वॉटर मेलन जूस से पूरा करें अपना फिटनेस गोल

खा रहे हैं फिश तो रखें इन बातों का ध्यान

फिश में प्रोटीन के साथ ही अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। फिश खाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। फिश में पारा भी पाया जाता है। पारा एक जहरीली धातु है जो मनुष्य के लिए हानिकारक हो सकती है। मर्क्युरी जेनेटिक एब्नॉरमलिटी के साथ ही ब्रेन और किडनी को डैमेज कर सकती है। वैसे तो बड़ी मछलियों में अधिक मात्रा में पारा या मर्क्युरी पाई जाती है। फिश खाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो भी फिश खा रहे हैं, उसमें बहुत कम मात्रा में मर्क्युरी होनी चाहिए। नहीं तो शरीर को नुकसान झेलना पड़ सकता है। मैक्सिको की खाड़ी की टेलफिश, शार्क, स्वोर्डफिश और किंग मैकेरल से बचना चाहिए क्योंकि इन मछलियों में अधिक मात्रा में मर्क्युरी पाई जाती है।

कुछ मछलियां ऐसी भी है जो स्वास्थ्य को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाती हैं। मोंटेरी बे एक्वेरियम सीफूड वॉच नाम से प्रोग्राम चलाता है जिसमे दुनियाभर की मछलियों की जानकारी दी जाती है। अगर फिश प्रोटीन चाहिए तो सप्ताह में दो बार प्रोटीन का सेवन करें। साथ ही मछली का बेहतर विकल्प चुनें ताकि शरीर को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

और पढ़ें:-

Vitamin O: विटामिन-ओ क्या है?

Vitamin K: कैसे पहचानें विटामिन के की कमी के लक्षण?

Vitamin B12: विटामिन बी-12 क्या है?

विटामिन डी की कमी को कैसे ठीक करें?

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    वर्कआउट के बाद आप क्या खाते हैं, इसका है विशेष महत्व

    वर्कआउट के बाद फूड खाना बहुत जरूरी होता है। मसल्स से ग्लाइकोजन और प्रोटीन की मात्रा कम होने लगती है, ऐसे में वर्कआउट के बाद फूड लेने से मसल्स जल्द रिपेयर हो जाती हैं।

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by Bhawana Awasthi

    ड्राई आई सिंड्रोम : जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

    यहां जानें किसे कहते हैं ड्राई आई सिंड्रोम और साथ ही जाने इसके कारण लक्षण और बचाव को। ड्राई आई सिंड्रोम लक्षण, कारण और इलाज, dry eye syndrome in hindi

    Medically reviewed by Dr. Pranali Patil
    Written by indirabharti
    हेल्थ कंडिशन्स, स्वास्थ्य ज्ञान A-Z फ़रवरी 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

    क्या आप जानते हैं क्रैब डायट के बारे में?

    क्रैब डायट की जानकारी in hindi. क्रैब डायट शरीर को लाभ पहुंचाने के साथ ही आसानी से पच भी जाती है। क्रैब डायट के लिए की जानकारी लेने के बाद इसे अपनाना चाहिए।

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Bhawana Awasthi
    आहार और पोषण, स्वस्थ जीवन दिसम्बर 26, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

    मसल्स बनाने में इस तरह मदद करता है सप्लिमेंट, जानिए इसे लेने का तरीका

    प्रोटीन सप्लिमेंट को पोस्ट वर्कआउट के बाद लें। सप्लिमेंट से प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, कार्ब्स पूरा होता है। जानिए प्रोटीन सप्लीमेंट लेने का तरीका। प्रोटीन सप्लीमेंट के प्रकार, whey protein in hindi, types of protein supplement in hindi

    Medically reviewed by Dr. Hemakshi J
    Written by Sidharth Chaurasiya
    फिटनेस, स्वस्थ जीवन अक्टूबर 16, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें