जानिए कहां से आए क्वारंटीन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग या लॉकडाउन जैसे शब्द?

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Update Date जून 3, 2020 . 5 mins read
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नोवल कोरोना वायरस महामारी के इस समय में आप रोजाना नए-नए शब्द सुनते होंगे। टीवी पर सामाचार देखते होंगे तो जरूर सुनते होंगे कि कहीं किसी सरकार ने लोगों को सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) का पालन करने को बोला है, तो कहीं पूरे देश में ही लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। कहीं मरीजों को क्वारंटीन किया जा रहा है, तो किसी जगह रोगी को आइसोलेशन में रखा जा रहा है। क्या कभी आपने यह सोचा है कि जिन क्वारंटीन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग या लॉकडाउन जैसे शब्दों को आप रोज सुन रहे हैं, वे कहां से आए हैं? इन शब्दों को कहां और किस काम में इस्तेमाल किया जाता है। उम्मीद है अधिकांश लोग इसके बारे में नहीं जानते होंगे। आज हम आपको बताएंगे कि क्वारंटीन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेंसिंग या लॉकडाउन जैसे शब्दों का मतलब क्या है और इनका कहां इस्तेमाल किया जाता है।

कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय-covid-19 per niyantran ke upay

1.कोविड-19 पर नियंत्रण के उपायः क्वारंटीन शब्द की उत्पत्ति

जब किसी समाज, राज्य या देश में कोई ऐसी बीमारी होती है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है, तब वहां क्वारंटीन शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।  क्वारंटीन के तहत संदिग्ध रोगी के दैनिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मरीज को दूसरे लोगों से अलग रखा जाता है।

कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय-covid-19 per niyantran ke upay

ऐसा अक्सर संक्रामक बीमारी के समय ही किया जाता है। आज कोरोना महामारी के कारण भी लोगों को क्वारंटीन किया जा रहा है। कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय के रूप में विश्व भर में संदिग्ध लोगों को क्वारंटीन किया जा रहा है।

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क्वारंटीन का इतिहासः  (History of Quarantine)

आप कोविड-19 पर नियंत्रण पाने के उपाय के रूप में जिस क्वारंटीन शब्द को रोज सुनते हैं, उसकी उत्पत्ति इटालियन शब्द क्वारैंटा (quaranta) से हुई है। क्वारैंटा शब्द का मतलब होता है 40 दिन। 14वीं शताब्दी के समय तटवर्ती क्षेत्रों में प्लेग महामारी फैली हुई थी। संक्रमित स्थानों से वेनिस पहुंचने वाले जहाजों को बंदरगाह पर लैंडिंग से पहले 40 दिन के लिए लंगर लगाकर बैठना पड़ता था। यहीं क्वारंटीन शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल किया गया था। 

अमेरिका में भी पीला बुखार के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए साल 1878 में फेडरल क्वारंटीन कानून पास किया गया। यूरोप में भी ऐसा ही एक कदम 1892 में अपनाया गया था। उस समय यूरोप में हैजा फैला हुआ था। हैजा के प्रसार पर नियंत्रण पाने के लिए क्वारंटीन नीति लागू की गई थी।

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2.कोविड-19 पर नियंत्रण के उपायः आइसोलेशन 

जब कोई व्यक्ति के किसी संक्रामक रोग से ग्रसित होने की पुष्टि हो जाती है और उसे दूसरे लोगों से दूर रखा जाता है, ताकि उसकी बीमारी किसी दूसरे में न फैले, तो इसे आइसोलेशन कहा जाता है। अभी कोविड-19 पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार कई मरीजों को आइसोलेट करने का काम कर रही है। वर्तमान में यह कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। 

आइसोलेशन का इतिहास (History of Isolation)

आइसोलेशन का मतलब होता है अकेला रहना। आइसोलेशन शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द insula से हुई जिसका अर्थ है आइलैंड यानी द्वीप, जहां एकांतवास का एहसास होता है। इस शब्द के पहले प्रयोग का जिक्र 18वीं सदी की एक डायरी से मिलती है। कहा जाता है कि थॉमस टर्नर नाम का एक दुकानदार था। वह बहुत ही खुशमिजाज व्यक्ति था। दुकानदारी करने के साथ-साथ वह एक प्रशिक्षक, स्कूल मास्टर, सर्वेक्षक भी था और समय-समय पर गरीबों की देखभाल भी करता था। 

कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय-covid-19 per niyantran ke upay

वह अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था। 23 जून 1761 को मार्गरेट टर्नर का निधन हुआ तो उसने अपने आपको बहुत अकेला पाया। 18वीं शताब्दी के टर्नर की डायरी से यह पता चला है कि पत्नी की मृत्यु के दुख से उसने खुद को आइसोलेट कर लिया था। कोविड-19 बीमारी की वजह से आज जिस आइसोलेशन शब्द को आप रोज सुनते हैं, उसका भी यही मतलब है कि खुद को दूसरे से अलग कर लेना। 

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3.कोविड-19 पर नियंत्रण के उपायः कर्फ्यू 

कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय के रूप में कर्फ्यू शब्द का भी आज बहुत इस्तेमाल हो रहा है। कर्फ्यू कई कारणों से लगाया जा सकता है। कहीं किसी स्थान पर ऐसी हिंसक स्थिति उत्पन्न हो गई हो, जिससे समाज और देश को नुकसान हो सकता है, तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार या स्थानीय प्रशासन कर्फ्यू का आदेश देती है। आज कोविड-19 महामारी पर नियंत्रण पाने के उपाय के रूप में कर्फ्यू का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश के कई राज्यों में कोविड-19 बीमारी की वजह से कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया गया था।

कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय-covid-19 per niyantran ke upay

कर्फ्यू का इतिहास (History of  Curfew)

कहा जाता है कि कर्फ्यू पहली बार 1968 में लगाया गया था। विलियम नामक व्यक्ति ने विद्रोह की संभावना और आगजनी रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया था। उस समय कर्फ्यू के संकेत के रूप में चर्च की घंटिया बजाई गई थीं।

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4.कोविड-19 पर नियंत्रण के उपायः सोशल डिस्टेंसिंग 

सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब होता है सामाजिक दूरी। कोविड-19 महामारी पर नियंत्रण के कारण आज पूरे देश में सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है। सामाजिक दूरी के तहत लोगों को सलाह दी गई है कि वे एक-दूसरे से दूरी बनाए रखें। कोरोना वायरस की रोकथाम करने के लिए लोगों एक-दूसरे से मिले-जुले नहीं। एक जगह इकट्ठा न हों। कोविड-19 बीमारी की वजह से लोगों को एक-दूसरे से एक मीटर की दूरी रखने की सलाह दी गई है।

सोशल डिस्टेंसिंग का इतिहास (History of Social Distancing)

सोशल डिस्टेंग की शुरुआत साल 1348 में हुई थी। उस समय वेनिस और मिलान जैसे शहरों में प्लेग का प्रकोप फैला हुआ था। प्लेग के प्रसार को रोकने के लिए स्थानीय अधिकारियों ने स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन उपाय किए थे। इस उपाय के तहत लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ इकट्ठा नहीं होने की सलाह दी गई थी।  

कोविड-19 पर नियंत्रण के उपाय-covid-19 per niyantran ke upay

1916 में न्यूयॉर्क में पोलियो महामारी के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग अपनाते हुए सिनेमा थिएटर बंद कर दिए गए थे। सार्वजनिक सभाएं और बैठकें रद्द कर दी गई थीं। लोगों को मनोरंजन पार्क और स्विमिंग पूल जैसे स्थानों पर जाने से मना किया गया था।

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5.कोविड-19 पर नियंत्रण के उपायः लॉकडाउन

कोविड-19 पर नियंत्रण पाने के उपाय के रूप में लागू किया जाने वाला लॉकडाउन का मतलब होता है घरों के अंदर बंद होना। यह एक तरह से आपातकाल की स्थिति होती है। लॉकडाउन में तहत सार्वजनिक परिवहन सेवा, प्राइवेट संस्थान, दैनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दिए जाते हैं। किसी आपदा या महामारी के समय अक्सर लॉकडाउन लगाया जाता है। इसमें दवा, खान-पान या जरूरी चीजों को ही छूट दी जाती है।

लॉकडाउन का इतिहास (History of Lockdown)

कहा जाता है कि साल 1970 में सबसे पहले लॉकडाउन शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल किया गया था। दक्षिणी कैलिफोर्निया (आज के लॉस एंजिल्स यूनिफाइड स्कूल में) में मोडजलेस्की ने लॉकडाउन की रणनीति विकसित की थी। मोडजलेस्की एक स्कूल के ट्रेनर थे और स्कूल की सुरक्षा के लिए उन्होंने लॉकडाउन लगाया था। इस स्कूल के बाहर नियमित तौर पर आपराधिक घटनाएं घटती थी। इन्हीं घटनाओं से छात्रों और स्कूल को बचाने के लिए लॉकडाउन लागू किया गया था। 

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