बड़े ही नहीं तीन साल तक के बच्चों में भी हो सकता है डिप्रेशन

By Medically reviewed by Dr. Hemakshi J

यह बात सुनने में अजीब लग सकती है पर कई शोधों की मानें तो यह सच है कि छोटे बच्चों को भी डिप्रेशन हो सकता है। यानी दुनिया की समझ न रखने वाले बच्चे भी अवसादग्रस्त हो सकते हैं। कई रिसर्च और भी ज्यादा चौंकाने वाली हैं, जिनके मुताबिक जन्म के कुछ साल बाद एक छोटे बच्चे को भी डिप्रेशन हो सकता है। यह एक अलग किस्म का डिप्रेशन होता है, जो आगे चलकर मानसिक व शारीरिक विकास में बाधा डालता है।

छोटे बच्चों में डिप्रेशन को लेकर क्या कहती है शोध?

  • नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्कूल साइकोलोजिस्ट (National Association of School Psychologists) के अनुसार डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जो छोटे से छोटे बच्चे को भी प्रभावित कर सकता है। डिप्रेशन या तनाव के कारण बच्चा थका हुआ या शक्तिहीन महसूस करता है। उसमें रोमांच की कमी आ जाती है। कई बार ऐसे बच्चे या तो बहुत शांत हो जाते हैं या बहुत चिड़चिड़े। कई बार बढ़ती उम्र के साथ ऐसे बच्चे खुद को नाकाबिल, बदसूरत, बददिमाग मानने लगते हैं। सबसे बड़ा डर यह है कि ऐसे बच्चे खुदकुशी तक करने की सोच सकते हैं। कई बार बेहद छोटे बच्चे भी खुद को नुकसान पहुंचाने के​ लिए खतरनाक कदम उठा सकते हैं। हालांकि, उन्हें मरने के बारे में जानकारी नहीं होती लेकिन, खुद को नुकसान जरूर पहुंचाने का सोच सकते हैं।
  • 2009 में डिप्रेशन इन प्रीस्कूलर के नाम के एक शोध में पाया गया कि तीन साल तक के बच्चे को भी तनाव हो सकता है।
  • अमेरीकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलेसेंट साइकियाट्री (American Academy of Child Adolescent Psychiatry ) के अनुसार पांच प्रतिशत बच्चे या किशोर कभी न कभी तनाव का शिकार हो सकते हैं।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (National Institutes of Health) पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक बच्चों में डिप्रेशन का पता लगाना विशेषज्ञों के लिए भी मुश्किल हो सकता है। चूंकि बड़ों में तनाव उनके उदास होने से जुड़ा होता है। वहीं बच्चों में उदास होने जैसे लक्षण मौजूद हों या जरूरी नहीं है।

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण

  • बार-बार उदासी या बेवजह रोने को आतुर होना
  • अपने पसंदीदा मनोरंजन से दूरी बना लेना
  • चहल-पहल कम कर देना
  • लोगों से बातचीत/खेलकूद से दूरी
  • आत्मविश्वास की कमी और अपराधबोध महसूस करना
  • किसी नाकामयाबी पर बेहद संवेदनशील हो जाना
  • अत्यधिक गुस्सा और आक्रामक हो जाना
  • एकाग्रता की कमी
  • खान-पान और सोने के समय में अप्रत्याशित बदलाव
  • घर से भाग जाने की कोशिश करना

बच्चों में तनाव के कारण

अलग होने का डर

मुंबई स्थित पेडियेट्रिक डॉ गौतम सप्रे ने हैलो स्वास्थ्य से बात करते हुए कहा कि बच्चों में मां-बाप या परिवार से अलग होने का डर पैदा होने के कुछ महीनों बाद ही आने लगता है। सबसे पहले दूध पीने वाले बच्चे को मां से दूर रहने का डर लगता है। इसलिए मां के आसपास न होने पर वह रोने लगता है और सबसे ज्यादा सुकून मां की गोद में ही महसूस करता है। धीरे-धीरे बच्चा जब बड़ा होने लगता है और अपने परिवार या आसपास के लोगों से घुलने मिलने लगता है। तब उसे इन लोगों से दूर होने का डर सताने लगता है। प्ले स्कूल में एडमिशन होने पर मां-बाप को स्कूल में रहने की सलाह इसलिए ही दी जाती है, क्योंकि बच्चे को नए लोगों के साथ मेलजोल करने में समय लगता है। कई बच्चे सप्ताह भर या महीने भर में मेलजोल कर लेते हैं लेकिन, कई बच्चे ऐसे होते हैं जो स्कूल के टीचर या बच्चों के साथ सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते हैं। बच्चों में अपनों से बिछड़ने का यह डर उनके सिरदर्द, पेट दर्द या दस्त के रूप में जाहिर हो सकता है।

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बाहरी दुनिया या भीड़ का डर यानी सोशल फोबिया

कई बच्चे अपने माता-पिता से बहुत बात करते हैं लेकिन, किसी भी तीसरे व्यक्ति के सामने जाने से भी कतराते हैं। किसी भी तीसरे व्यक्ति के साथ वह बात नहीं करते चाहे टीचर हो या दोस्त। ऐसे बच्चे बेहद चुप-चुप रहते हैं। ऐसे बच्चों को स्कूल जाना भी पसंद नहीं आता। वह किसी भी पार्टी में जाना भी पसंद नहीं करते। अगर पेरें​ट्स ले भी जाएं तो उन्हीं से चिपके रहते हैं।

मांग पूरी न होने का डर

बच्चे हर चीज के लिए जिद करने की आदत पैदा होने के साथ ही पाल लेते हैं। जो भी चीज वह सोच लें, वो उन्हें मिलनी ही चाहिए। इसके लिए या तो वह रोकर आसमान सिर पर उठा लेते हैं या माता—पिता के गुस्से से डर कर अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं।

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खिलौनों से तनाव

छोटे बच्चों में डिप्रेशन का एक कारण खिलौना भी हो सकता है। यदि किसी बच्चे का खिलौना मां या बाप घर में आए किसी अन्य बच्चे को दे दें, तो यह भी उनके तनाव का कारण बन जाता है। या तो पहले ही वह खिलौना नहीं देने की पुरजोर कोशिश करते हैं। यदि किसी तरह दूसरे बच्चे को खिलौना दे दिया गया हो तो वह बच्चा जब तक खिलौना न लौटा दे तब तक उसी की टेंशन में रहते हैं। कई बच्चों में ​खुद के खिलौनों को इतना डर होता है कि वह उस खिलौने को हमेशा अपने पास रखने लगते हैं।

टीचर या स्कूल से डिप्रेशन

यदि स्कूल में टीचर या दूसरे बच्चे सही से पेश न आ रहे हो तो भी बच्चे में डिप्रेशन हो सकता है। यदि बच्चा स्कूल जाने से मना करे तो एक बार कारण जरूर पता कर लें।

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क्या कर सकते हैं माता—पिता?

  • बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए बढ़ावा दें। यदि वह ऐसा नहीं कर रहा तो वजह जानकर उसे सुलझाने की कोशिश करें।
  • योगासन या एक्सरसाइज से बच्चे को जोड़ें।
  • उठने—सोन से लेकर पढ़ने, खेलने व खाने का समय निर्धारित करें।
  • हो सके तो बच्चों को आउटडोर एक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित करें।
  • बच्चे को समय चाहिए। उसे भरपूर समय दें और खेल-खेल में उसकी समस्याओं को भी जानें।
  • असफल होन पर उसे डांटे नहीं। इसके साथ ही सिर्फ नंबर वन बने रहने या आने के लिए उसपर प्रेशर न डालें।
  • अपने बच्चे की तुलना किसी अन्य बच्चे से न करें।

बचपन का तनाव आगे चलकर जिंदगी भर का तनाव बन जाए, इससे अच्छा है कि माता-पिता पहली ही उसकी रोकथाम कर दें। बच्चों को प्यार और साथ की जरूरत होती है। सिर्फ खिलौने उनके विकास का जरिया नहीं हैं। उन्हें समय दें और उनकी छोटी से छोटी बातों पर भी पूरा ध्यान रखें ताकि छोटे बच्चों में डिप्रेशन ना आ पाए। यदि आप अपने बच्चे पर ध्यान नहीं देंगे तो डिप्रेशन के कारण वह कुछ भी कदम उठा सकता है। बच्चे को डिप्रेशन से निकालने के लिए विशेषज्ञ की मदद जरूर लें।

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रिव्यू की तारीख नवम्बर 5, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया नवम्बर 7, 2019