आईबॉल में कराया टैटू, चली गई ‘ड्रैगन वुमेन’ की आंखों की रोशनी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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अक्सर लोग टैटू के द्वारा अपनी भावनाओं को व्यक्त हैं। वहीं कुछ लोग टैटू को आर्ट मानते हैं और अपने शरीर को कैनवस। हर तरह के टैटू के बारे में आपने जरूर सुना होगा लेकिन आईबॉल में टैटू के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।ऐसा भी माना जाता है कि अगर कोई शख्स बॉडी के साथ ऐसे पर्मानेंट मॉडिफिकेशन कराता है, तो उसकी झिझक निकल जाती है और वह एक्सट्रीम मॉडिफिकेशन के लिए भी तैयार रहता है। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया की  एक महिला ने ऐसी ही एक प्रक्रिया के लिए  25,000 डॉलर तक खर्च कर दिए। इस महिला ने अपनी जीभ को दो भागों में बांटा और अपने कान में इंप्लांट्स कराए। इसके बाद उसने अपने आईबॉल में टैटू कराया। वहीं उसका दावा है कि टैटू कराने के बाद दो हफ्ते तक वह कुछ भी नहीं देख सकी।

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अपने इस अनुभव को शेयर करते हुए ऑस्ट्रेलिया की एम्बर ल्यूक ने बारक्रॉफ्ट मीडिया को बताया, “मैं आपको यह बता भी नहीं सकती यह भावना कैसी था जब मैंने अपने आंखों में टैटू कराया। अपनी आंख के सफेद भाग को टैटू कराने के लिए नीले रंग में बदलना ऐसा था मानो टैटू आर्टिस्ट ने मेरी आंखों में ग्लास के 10 टुकडें रगड़ दिए हों।

इंस्टाग्राम पर “ब्लू आइज व्हाइट ड्रैगन” से जानी जाने वाली ल्यूक ने आउटलेट न्यूज को बताया कि उन्होंने 16 साल की उम्र में अपने शरीर को मोडिफाई कराना शुरु कर दिया था। लेकिन अब 8 साल बाद वह अब एक्सट्रिम प्रोसेस से थक चुकी हैं।

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एम्बर ने Barcroft Media से कहा कि दुर्भाग्य से मेरे टैटू आर्टिस्ट मेरी आंखों को नुकसान पहुंचा दिया। इसके बावजूद वह अभी भी मार्च 2020 तक टैटू में पूरी तरह से ढंकना चाहती है। अगर यह प्रक्रिया ठीक ढंग से की जाए तो आपकी आंखों से इसको कोई परेशानी नहीं होती।

मैनहेटन स्थित बोर्ड सर्टिफाइड प्लास्टिक सर्जन डॉ मैथ्यू शुल्मन ने आंख के अंदर टैटू कराने के खतरे पर बात की। उन्होंने कहा था कि जो लोग आंखों के अंदर टैटू बनवाते हैं। उसके लिए आर्टिस्ट को आंख के सफेद भाग में मशीन लगानी पड़ती है, जिसकी वजह से इंफेक्शन का खतरा होता है।  इस प्रक्रिया के लिए आंख की बाहरी कोटिंग से छेड़छाड़ करनी पड़ती है, जिसकी वजह से इंफेक्शन होता है।

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“शुल्मेन ने 2016 में फॉक्स न्यूज को बताया था कि इस प्रक्रिया में आईबॉल की बाहरी परत के नीचे डाई इंजेक्ट की जाती है ताकि यह आंख की सतह को रंग दे सकें। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको आंख की बाहरी कोटिंग से गुजरना पड़ता है। जब आप आईबॉल में कुछ तीखी चीज इंजेक्ट करते हैं तो इंफेक्शन, कॉर्नियल इंफेक्शन,आंसू या एक ग्लोबल रप्चर हो सकता है जो असल में आईबॉल रप्चर भी हो सकता है। ”

आईबॉल में टैटू क्या है?

आईबॉल में टैटू एक शब्द है जो टैटू का वो प्रकार है जिसमें आंख के सफेद भाग को स्थायी रंग से बदल दिया जाता है (जिसे स्कॉलरा भी कहा जाता है)। यह स्केलेरा पर आंख की ऊपरी परत के नीचे एक सुई के साथ स्याही इंजेक्ट करके किया जाता है, कई स्थानों पर, जहां से स्याही फिर धीरे-धीरे सभी स्केलरा को कवर करने के लिए फैलती है। यह प्रक्रिया दुनिया भर में केवल कुछ टैटू कलाकारों द्वारा की जाती है। यह स्थायी और नॉन-रिर्वसिबल है।

आईबॉल में टैटू के स्वास्थ्य जोखिम क्या हैं?

रॉयल ऑस्ट्रेलियन एंड न्यूज़ीलैंड कॉलेज ऑफ ऑप्थल्मोलॉजिस्ट (RANZCO – डॉक्टर जो आंखों के रोगों के विशेषज्ञ हैं) आईबॉल में टैटू को एक उच्च जोखिम प्रक्रिया का टैटू मानते हैं और सलाह देते हैं कि इसे केवल स्पेशलाइज्ड डॉक्टर द्वारा ही किया जाना चाहिए। वो भी तब जब चिकित्सकीय रूप से संकेत दिया जाए या कोई विशिष्ट नेत्र असामान्यताएं हो तब। RANZCO कॉस्मेटिक इस्तेमाल के लिए आईबॉल टैटू ना करने का सलाह देता है क्योंकि वे इसे एक अत्यंत खतरनाक और अनावश्यक प्रक्रिया के रूप में देखते हैं।

आईबॉल में टैटू से कई संभावित स्वास्थ्य जोखिम हैं। वे हल्के जोखिमों जैसे कि आंख की हल्की जलन से लेकर अंधेपन जैसे गंभीर जोखिमों तक होते हैं।

आईबॉल में टैटू के जाने-माने जोखिम इस तरह से हैंः

  • आंख का छिद्र जो अंधेपन को जन्म दे सकता है
  • रेटिना टुकड़ी (तत्काल चिकित्सा स्थिति जो रोगी को अंधा छोड़ सकती है)
  • एंडोफ्थेलमिटिस (आंख के अंदर संक्रमण, जिससे अंधापन हो सकता है)
  • सिंपेथेटिक ऑप्थेलमिया (एक ऑटोइम्यून भड़काऊ प्रतिक्रिया जो दोनों आंखों को प्रभावित करती है और परिणाम अंधापन हो सकता है)
  • रक्त जनित वायरस (उदाहरण के लिए हेपेटाइटिस बी और सी, और एचआईवी) के उपकरणों से संचरण जो ठीक से साफ नहीं किया जाता है
  • इंजेक्शन स्थलों पर रक्तस्राव और संक्रमण
  • स्याही के लिए प्रतिकूल प्रतिक्रिया
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता

अमेरिकन सोसाइटी ऑफ प्लास्टिक सर्जन के अनुसार, बोर्ड के प्रमाणित प्लास्टिक सर्जन इस तरह के एक्सट्रिम बॉडी मॉडिफिकेशन करते हैं। अक्सर बॉडी मॉडिफिकेशन आर्टिस्ट द्वारा की जाने वाली प्रक्रियाओं में डर्मल और सॉलिड सिलिकॉन इम्प्लांट के जरिए नया लुक दिया जाता है।

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ल्यूक की मां ने कहा कि उनकी बेटी ने खुद को कभी सुंदर नहीं समझा और ल्यूक को 14 साल की उम्र में डिप्रेशन हो चुका था। उन्होंने कहा कि अलग-अलग बॉडी मॉडिफिकेशन की वजह से उन्होंने अपनी बेटे के आत्मविश्वास को बढ़ते देखा है।

अगर आप खुद में डिप्रेशन महसूस करते हैं या किसी कारण आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, तो आप यहां दिए गए निम्न आर्टिकल पढ़ सकते हैं।

डिप्रेशन दूर करने लिए : डिप्रेशन से बचने के उपाय, आसानी से लड़ सकेंगे इस परेशानी से

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए : बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

साथ ही, निम्न बातों का ध्यान रखकर आप अपनी आंखों की सेहत का भी ख्याल रह सकते हैं, जिसमें शामिल हैंः

  • आंखों को हमेशा केमिकल फ्री रखें। किसी भी तरह के आई मेकअप का इस्तेमाल करते समय सर्तक रहें। अगर आई मेकअप का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पूरे दिन उन्हें लगाए रखने कि बजाय, कुछ ही घंटों बाद उन्हें हटा दें। ताकि, आपके आंखे फ्रेश बनी रह सकें।
  • अगर आप अपना अधिक समय कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने व्यतीत करते हैं, तो थोड़ी-थोड़ी देर के बाद अपनी आंखों को ठंडे पानी से धोएं। दिन में एक बार आंखों पर अईस क्यूब का इस्तेमाल करें।
  • धूप या धूल वाली जगहों पर जाते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी के चश्मा पहनें।
  • अगर आप नंबर वाले चश्मे का इस्तेमाल करते हैं, तो समय-समय पर अपने चश्में के नंबर की भी जांच कराएं। ताकि, आपको अपनी आंखों के रोशनी में हो रहे बदलाव की सही जानकारी रहे।

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