कोरोना के बाद चीन में सामने आया नया फ्लू वायरस, दे रहा है महामारी का संकेत

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अपडेट डेट जुलाई 1, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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अभी कोरोना का कहर थमा नहीं कि चीन के वैज्ञनिकों ने एक नया फ्लू वायरस का पता लगाया है। बताया जा रहा है यह फ्लू वायरस महामारी का रूप ले सकता है। नए शोध के अनुसार, इस फ्लू स्ट्रेन को शोधकर्ताओं ने इसे G4 EA H1N1 का नाम दिया है। अभी पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं, उसके बीच में यह खबर और मुसीबत पैदा करने वाली हो सकती है। आपको बता दें चीन में पाया गया यह नया फ्लू वायरस, 2009 में आए स्वाइन फ्लू की तरह ही है, जो इंसान को संक्रमित कर सकता है। नेशनल अकादमी ऑफ सांइसेज में छपे शोध की माने तो इस नए वायरस में कुछ बदलाव देखे गए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, ये स्ट्रेन सुअरों में पाया जाता है। इसके अंदर इतनी ताकत है कि कोई भी व्यक्ति इससे बुरी तरह से संक्रमित हो सकता है।

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नया फ्लू वायरस : सुअरों पर नजर रखने की आवश्यकता है

इस नए वायरस पर स्टडी करने वाले शोधकर्ताओं के अनुसार वैसे तो यह अभी इमरजेंसी जैसी समस्या नहीं लग रही है। लेकिन, इसमें ऐसे कई ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जो ह्यूमन को संक्रमित कर सकता है। इसलिए, जरूरी है कि इस पर लगातार नजर रखी जाए। वहीं, प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस के अनुसार यह नया स्ट्रेन है। इसके बारे में ज्यादा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। हो सकता है लोगों में इससे लड़ने की क्षमता कम हो या हो ही नहीं। यह नया फ्लू वायरस महामारी का रूप न ले ले, इसके लिए सुअरों पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है।

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लेकिन सुअर पर ही अध्ययन क्यों?

वैज्ञानिक रिपोर्ट करते हैं कि नया स्ट्रेन (G4), H1N1) स्ट्रेन से आया है जो 2009 में स्वाइन फ्लू (swine flu) महामारी के लिए जिम्मेदार था। शोध की रिपोर्ट के अनुसार “सुअर, महामारी इन्फ्लूएंजा वायरस के लिए इंटरमीडिएट होस्ट की तरह काम करते हैं। इसलिए, सूअरों में इन्फ्लूएंजा वायरस की व्यवस्थित निगरानी अगले महामारी इन्फ्लूएंजा के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय साबित हो सकता है। हालांकि, यह अभी नहीं कहा जा सकता है कि यह नया स्ट्रेन, अगर सूअरों से मनुष्यों में संचरित होता है, तो यह एक इंसान से दूसरे इंसान में संचारित हो सकता है।

वैज्ञानिकों का सुझाव है कि सूअरों में प्रचलित जी 4 यूरेशियन-एवियन (ईए) एच1एन1 वायरस (G4 Eurasian-Avian like (EA) H1N1) को नियंत्रित करना  जरूरी है। इसके लिए विशेष रूप से सूअर उद्योग में काम करने वाले लोगों की भी निगरानी करना जरूरी हो गया है।

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नया फ्लू वायरस : वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वेटेरनरी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉक्टर जेम्स वुड की माने तो विश्वभर के देशों को उनके सूअर पालन वाली जगहों की कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही क्योंकि सूअर और अन्य जानवरों के मांस के उद्योग में इस तरह के वायरस का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए, इन स्थानों की भी निगरानी रखने की जरूरत हो सकती है।

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पहले भी हुआ था स्वाइन फ्लू टेस्ट

2011 से 2018 के बीच शोधकर्ताओं ने चीन के 10 प्रांतों और वेटेरिनिरी हॉस्पिटल्स से टेस्ट के लिए 30,000 सुअरों का नेसल स्वैब (nasal swab) लिया था।उन्होंने इसमें से लगभग 179 स्वाइन फ्लू के वायरस अलग किए थे। इनमें से ज्यादातर वायरस नए टाइप के हैं, जो 2016 के बाद सुअरों में बड़े स्तर पर पाए गए हैं।

शोधकर्ताओं ने जो ब्लड टेस्ट लिए हैं, उनसे साबित होता है कि इस नए फ्लू वायरस के कॉन्टैक्ट में आने के बाद एंटीबॉडी बनी थी। लेकिन, सुअरों के फार्म पर काम करने वाले 10.4 प्रतिशत लोग पहले ही इससे इन्फेक्टेड हो चुके थे। साथ में यह भी बात सामने आई है कि 4.4 फीसदी आम जनसंख्या भी इससे प्रभावित हो चुकी है। मतलब साफ है कि यह नया फ्लू वायरस जानवरों से व्यक्ति में जा चुका है। हालांकि, एक इंसान से दूसरे इंसान में यह फैल रहा है या नहीं इस बारे में कोई सबूत नहीं मिले हैं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा नया फ्लू वायरस पर निगरानी जरूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक प्रवक्ता ने कहा: “यूरेशियन एवियन-जैसे स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस को एशिया में स्वाइन आबादी में सर्कुलेट होने के लिए जाना जाता है जो मनुष्यों को थोड़ा-बहुत संक्रमित करता है। एक साल में दो बार होने वाली इन्फ्लूएंजा वैक्सीन कम्पोजीशन मीटिंग के दौरान वायरस पर सभी जानकारी की  समीक्षा की गई है और नए टीके की आवश्यकता पर चर्चा की गई है। डब्लूएचओ (WHO) ने कहा कि इस नए स्ट्रेन में क्या नया हैं, यह समझने के लिए हमें रिसर्च पेपर को ध्यान से पढ़ने की आवश्यकता है। “यह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि हम इन्फ्लूएंजा  को लेकर ढीले नहीं पड़ सकते हैं। हमें कोविड-19 महामारी के दौरान भी सतर्क रहने और निगरानी जारी रखने की आवश्यकता है।”

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2009 स्वाइन फ्लू महामारी

डब्ल्यूएचओ ने 2009 में टाइप ए एच1एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस (type A H1N1 influenza virus) के प्रकोप को एक महामारी घोषित किया था। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, “टाइप ए इन्फ्लूएंजा वायरस से उत्पन्न सूअरों की एक श्वसन बीमारी है जो नियमित रूप से सूअरों में इन्फ्लूएंजा के प्रकोप का कारण बनती है। इन्फ्लुएंजा वायरस जो आमतौर पर सूअर में फैलते हैं, उन्हें “स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस” या “स्वाइन फ्लू वायरस” कहा जाता है। मानव इन्फ्लूएंजा वायरस की तरह ही पिग इन्फ्लूएंजा वायरस के कई उप-प्रकार और स्ट्रेन हैं।

स्वाइन फ्लू एक वायरस है जिससे सूअर संक्रमित हो सकते हैं। जबकि जो मनुष्य सूअरों के बीच रहते हैं वे आमतौर पर ऐसे वायरस से संक्रमित नहीं होते हैं और अगर ऐसा होता है, तो इसे “वैरिएंट इन्फ्लूएंजा वायरस (variant influenza virus)” कहा जाता है। सीडीसी के अनुसार, आमतौर पर जब व्यक्ति संक्रमित सूअरों के संपर्क में आता है तो वह इस वायरस से संक्रमित हो सकता है।

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यह फैला तो रोकना होगा मुश्किल

आपको बता दें कि कोविड-19 से पहले दुनिया में आई आखिरी महामारी 2009 में आई थी। इसे ही स्‍वाइन फ्लू के नाम से जाना गया। यह वायरस मैक्सिको से शुरू हुआ था। जहां दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। ऐसी में अगर नया फ्लू वायरस फैलता है, तो इसकी रोकथाम करना बहुत मुश्किल साबित हो सकता है।

एक और जहां कोरोना वायरस से निपटने के लिए सभी देशों में इसकी वैक्सीन और दवाओं को लेकर जद्दोजहद जारी है। उसके बीच में यह नया फ्लू वायरस सभी के लिए ही परेशानी का सबब बन सकता है। इसलिए, जरूरी है आप अपना बहुत ख्याल रखें।

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