पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

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Update Date दिसम्बर 19, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
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पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी (Arun Shourie) की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पुणे के एक अस्पताल में भर्ती किया गया है। तबीयत बिगड़ने के बाद यहां उन्हें  डॉक्टर्स की निगरानी में रखा गया है। बताया गया कि बीजेपी के पूर्व नेता और वरिष्ठ पत्रकार अरुण शौरी रविवार की रात बेहोश हो गए थे। जहां से उन्हें रुबी हॉल क्लीनिक में ले जाया गया। एक डॉक्टर ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी अपने घर के पास गिर गए  थे जिससे उनके दिमाग में चोट लग गई और वे बेहोश हो गए जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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यह एक फ्री फॉल था जिसकी वजह से अरुण शौरी को सिर के पीछे चोट लगी। अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ सचिन गांधी जो पूर्व भाजपा नेता का इलाज भी कर रहे हैं उन्होंने बताया कि शुरू में उन्हें हिंजवडी (पुणे के बाहरी इलाके में एक अस्पताल में ले जाया गया) और बाद में रविवार देर रात रूबी हॉल क्लिनिक में ट्रांसफर कर दिया गया। गिरने के कारण अरुण शौरी के दिमाग में एक आंतरिक चोट और सूजन है और वह आईसीयू में है। हालांकि उनकी स्थिति पूरी तरह से स्थिर है और वह इलाज का रिस्पॉन्स दे रहे हैं और खाना खा रहे है। अब तक चोट के कारण कोई असामान्यता नहीं है डॉ.गांधी ने कहा।

उन्होंने कहा मेडिकल टर्म में अरुण शौरी की स्थिति को “ब्रेन हैमरेज (Brain haemorrhage) के साथ सेरिब्रल कंन्कशन (Cerebral concussion) ” कहा जाता है और यह फ्री फॉल के बाद बेहोश हो जाने के कारण लगी चोट की वजह से हुआ। सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन में उसके सिर के अंदर ब्लीडिंग और सूजन दिखाई दे रही है लेकिन उसमें सुधार ह रहा है,उन्होंने कहा।

ब्रेन हैमरेज के दौरान क्या होता है?

जब ट्रॉमा से खून मस्तिष्क के ब्रेन टिशु को परेशान करता है तो यह सूजन का कारण बनता है। इसे सेरेब्रल एडिमा के रूप में जाना जाता है। जमा हुआ खून बड़ी मात्रा में इकट्ठा होता है जिसे हेमेटोमा कहा जाता है। इसकी वजह से दिमाग के टिशु पर दबाव पड़ता हैं जो जरुरी ब्लड फ्लो को कम करता हैं और दिमाग की सेल्स को मारता है। एक ब्रेन हैमरेज के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। वे ब्लीडिंग के स्थान, रक्तस्राव की गंभीरता और अफेक्टेड टिशु की मात्रा पर निर्भर करते हैं। लक्षण अचानक या समय के साथ विकसित हो सकते हैं। वे समय के साथ खराब हो सकते हैं या अचानक दिखाई दे सकते हैं। इसके लिए समय से डॉक्टर को दिखाना जरुरी है।

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अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सभी जरूरी टेस्ट कर लिए गए हैं और अभी उन्हें निगरानी में रखा गया है और अभी वे पूरी तरह होश में हैं।

आपको बता दें कि अरुण शौरी एक पत्रकार, राजनेता और लेखक के रूप में जाने जाते हैं। अरुण शौरी का जन्म पंजाब के जालंधर में 2 नवंबर 1964 को हुआ था। अरुण शौरी ने 1968 से 1972 और 1975 से 1977 तक एक अर्थशास्त्री के रूप में वर्ल्ड बैंक के लिए काम किया। साथ ही अरुण शौरी भारत के योजना आयोग में सलाहकार के पद पर भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे देश के कई बड़ें मीडिया हाउस में संपादक के तौर पर भी काम कर चके हैं। अरुण शौरी साल 1998 से 2004 तक देश के केंद्रीय मंत्री भी रहें।

अरुण शौरी कौन है

एक लेखक, पत्रकार, राजनेता और केंद्रीय मंत्री, अरुण शौरी ने कई टोपी पहन रखी हैं  और वह कभी भी विवाद से दूर नहीं रहे हैं। अरूण शौरी का जन्म 2 नवंबर 1941 को जालंधर,पंजाब में एच। डी। शौरी और दयावंती देवाशीर के घर हुआ था। उन्होंने दिल्ली के आधुनिक संस्थानों मॉडर्न स्कूल और सेंट स्टीफन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के सिरैक्यूज विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र का अध्ययन किया, और विश्व बैंक और योजना आयोग में रहें। 1979 में वह कार्यकारी संपादक के रूप में इंडियन एक्सप्रेस में शामिल हुए। अगले चार सालों में अरुण शौरी संपादक के रूप में काम किया। कहानियों की अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें एक क्रुसेडिंग पत्रकार ’के रूप में जाना जाने लगा। इसमें उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस के बॉस रामनाथ गोयनका का समर्थन किया था।

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अरुण शौरी और उनकी टीम की उस चरण की कुछ प्रमुख कहानियों में भागलपुर अंधाधुंध घटनाओं, उपक्रमों के अधिकार और सीमेंट और तेल घोटाले शामिल हैं। इन दोनों ने मिलकर कांग्रेस सरकार को बैकफुट पर ला खड़ा किया और अरुण शौरी और इंडियन एक्सप्रेस ने एक खास ब्रांड की हार्ड-हिटिंग, निर्भीक पत्रकारिता की शुरुआत की जिसकी पसंद देश ने पहले नहीं देखी थी।

अरुण शौरी के तरीके अक्सर अपरंपरागत थे। उदाहरण के लिए 1981 में उन्होंने एक रिपोर्टर को कमला नाम की एक लड़की को खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को लिखा कि इंडियन एक्सप्रेस प्रभावी रूप से कानून को तोड़ने के लिए साबित कर रहा था कि देश में हर दिन कानून को तोड़ा जा रहा है – महिलाओं और बच्चों की अवैध तस्करी से।

अरुण शौरी बाद में भाजपा के सदस्य बने और फिर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में विनिवेश, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री थे। एक केंद्रीय मंत्री के रूप में 2002 में करियप्पा मेमोरियल लेक्चर को वितरित करते हुए उन्होंने कहा: “आज के आर्थिक लीवर का उपयोग राजनीतिक और राजनयिक छोर को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। हमारी स्वतंत्रता की कार्रवाई, हमारी संप्रभुता की रक्षा के लिए, पहली आवश्यकता यह है कि हमें आर्थिक दबावों के आगे नहीं झुकना होगा। हम कुछ भी करते हैं जो आर्थिक प्रगति को धीमा कर देता है जब हम उन सुधारों को रोकते हैं जो उस विकास के लिए आवश्यक हैं तो हम देश को कमजोर करते हैं।

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