मेघालय में फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं को मिलेंगी फ्री सैनेटरी नैपकिन

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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मेघालय राज्य में कारखानों में काम करने वाली महिला श्रमिकों के लिए अच्छी खबर है। दरअसल राज्य मंत्रिमंडल ने उन्हें फ्री सैनेटरी नैपकिन प्रदान करने का निर्णय लिया है। राज्य ने कार्यस्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा के लिए 40 साल पुराने कारखाने के नियम में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार, कारखानों के लिए सभी श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) प्रदान करना भी अनिवार्य है।

राज्य के कैबिनेट मंत्री, जिला परिषद मामलों, खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, कानून, शक्ति मंत्री जेम्स पीके संगमा, ने पीटीआई को बताया कि चर्चा के बाद, मेघालय फैक्ट्रीज नियम, 1980 के नियम 25 और 78 (सी) में संशोधन प्रस्ताव को सोमवार को मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार को लिखित रूप में दिया गया था कि वह फैक्ट्री अधिनियम, 1948 के तहत महिला श्रमिकों के लिए फ्री सैनेटरी नैपकिन के प्रावधानों के बारे में मॉडल फैक्ट्रीज नियमों में शामिल करें। इसी के साथ ही सभी श्रमिकों के लिए पीपीईएस (PPEs) से संबंधित नियम भी शामिल किया जाए।

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नैपकिन की भरपाई रोज की जाएगी

संशोधन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारतीय मानकों के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में फ्री सैनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे और महिलाओं के टॉयलेट्स का रखरखाव किया जाएगा। फ्री सैनेटरी नैपकिन को दैनिक आधार पर प्रदान किया जाएगा।

इसी के साथ बताते चलें कि अगस्त में, हरियाणा सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वे गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं और लड़कियों (जिनकी उम्र 10-45 वर्ष के बीच है ) के लिए एक साल तक लगभग 22.50 लाख फ्री सैनेटरी नैपकिन मुहैया कराएंगे।

केन्द्र सरकार की स्कीम

आपको बता दें कि 2018 में, केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनधन योजना (PMBJP) के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता सुलभ और उपलब्ध कराने के लिए सेनेटरी पैड 1 रुपये प्रति पैड के हिसाब से बेचने की शुरुआत की थी। ये ऐसे ग्रामीण क्षेत्र थें, जहां मासिक धर्म को एक टैबू के रूप में देखा जाता था।

सरकार द्वारा एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 2018 में योजना की शुरुआत के बाद से 4.61 करोड़ से अधिक सैनेटरी नैपकिन PMBJ केंद्रों पर बेचे गए और 2019 में कीमतों में संशोधन के बाद, लगभग 3.43 करोड़ पैड 10 जून तक बेचे गए।

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जब मार्च में देशभर में लॉकडाउन लगाया गया, तो “आवश्यक वस्तुओं” के तहत सूचीबद्ध सैनेटरी नैपकिन की स्थिति पर कुछ भ्रम था, लेकिन बाद में, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक ट्वीट में लिखा है कि सैनेटरी नैपकिन को एक आवश्यक वस्तु के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। “सैनेटरी नैपकिन की उपलब्धता के बारे में बढ़ती चिंता को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार के गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को एक आवश्यक वस्तु के रूप में स्वच्छता पैड के बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है”।

मेघायल की फैक्ट्रीज में काम करने वाली महिलाओं की मुश्किलें तो वहां की सरकार ने फ्री सैनेटरी नैपकिन देकर आसान कर दी, लेकिन आज भी देश में ऐसे कई इलाके हैं जहां महिलाएं आज भी पीरियड्स के दौरान पैड्स की जगह कपड़े का उपयोग करती हैं और मेंस्ट्रुअल हाइजीन से कोसों दूर हैं। कपड़े का उपयोग करना उनकी सेहत के लिए कितना हानिकारक हो सकता है। इस बात से वे अनजान हैं। आइए जानते हैं कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं स्वच्छता का ध्यान किस प्रकार रखना चाहिए।

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  • अगर महिलाएं पीरियड्स के दौरान अनक्लीन पैड्स या गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं तो उन्हें यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन  हो सकता है।
  • अगर वे एक ही पैड का इस्तेमाल लंबे समय तक करती हैं उसे चेंज नहीं करती हैं तो यह वजायनल इंफेक्शन और रैशेज का कारण बन सकता है। गीलेपन की वजह से रैशेज होने के चांजेस बढ़ जाते हैं इसलिए पैड को चेंज करते रहना जरूरी है।
  • नहाने के बाद और सोने से पहले एंटीसेप्टिक क्रीम का यूज रैशेज से राहत दिला सकता है। बड़े साइज के कपड़े का उपयोग रैशेज को बढ़ावा देता है क्योंकि इससे जांघों के बीच घर्षण होता है।
  • कई महिलाएं सोचती हैं कि पीरियड्स के दौरान इंटरकोर्स करना सही है क्योंकि इससे प्रेग्नेंसी से बच सकते हैं, लेकिन फैक्ट ये है कि इस समय इंटरकोर्स करने से सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज जैसे कि हर्पीस, हेपेटाइटिस बी फैलने का खतरा होता है।
  • सैनेटरी नैपकिन को छूने के बाद ठीक से हाथ न धोना भी इंफेक्शन का कारण बन सकता है।
  • मेस्ट्रुअल हाइजीन का ध्यान न रखना सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। भारत में हर साल 70 हजार महिलाएं इसकी गिरफ्त में आ रही हैं। यह भारत में महिलाओं को होने वाले कैंसर में शीर्ष पर है।

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इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान

वजायना को क्लीन करने के लिए साबुन या दूसरे प्रोडक्ट्स का यूज न करें

आपको बता दें कि वजायना का खुद का क्लीनिंग मैकेनिज्म होता है जो अच्छे और बुरे बैक्टीरिया को बैलेंस करके चलता है। साबुन का इस्तेमाल अच्छे बैक्टीरिया को मार सकता है जो कि इंफेक्शन का कारण बन सकता है। इसलिए वजायना को क्लीन करने के लिए सिर्फ गुनगुने पानी का ही यूज करें।

पैड्स और टैम्पून को डिस्पोज करें

पैड्स और टैम्पून को यूज करने के बाद ठीक से डिस्पोज करना भी जरूरी है, क्योंकि इससे इंफेक्शन फैलने के अधिक खतरे होते हैं। इन्हें फेंकने से पहले ठीक से पैक करें ताकि स्मेल और कीटाणु बाहर न जा सके। सैनेटरी पैड्स या नैपकिन को कभी भी टॉयलेट में फ्लश न करें, ये टॉयलेट को ब्लॉक कर सकते हैं। डिस्पोज करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह साफ कर लें।

रोज नहाएं

कुछ संस्कृतियों में ऐसा माना जाता है कि महिलाओं को पीरियड्स के दौरान स्नान नहीं करना चाहिए। यह बस एक  मिथक है,  जोकि इस तथ्य पर आधारित था कि पुराने दिनों में महिलाओं को खुले में या नदी या झील जैसे सामान्य जल निकायों में स्नान करना पड़ता था, लेकिन इनडोर प्लंबिंग के साथ स्नान करना सबसे अच्छी बात है, जो पीरियड्स के दौरान आप कर सकते हैं। नहाने से न केवल आपके शरीर की सफाई होती है, बल्कि इससे आपके प्राइवेट पार्ट्स की हाइजीन भी बनी रहती है। इससे मासिक धर्म में होने वाली ऐंठन, पीठ दर्द में राहत और आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे ब्लॉटिंग भी कम होती है। पीठ दर्द और मासिक धर्म की ऐंठन से राहत पाने के लिए, गर्म पानी के शॉवर के नीचे खड़े हो जाएं आप बेहतर महसूस करेंगे। यहां बताई गईं सभी मेंस्ट्रुअल हाइजीन टिप्स का पालन महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य के लिए करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से संपर्क करें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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