आखिर चॉकलेट के लिए लोग क्यों हो जाते हैं दीवाने?

    आखिर चॉकलेट के लिए लोग क्यों हो जाते हैं दीवाने?

    World Chocolate Day : अक्सर आपने फिल्मों में एक ऐसा ब्रेकअप सीन तो जरूर ही देखा जिसमें लड़की अपने बेड पर बैठकर रो रही है और हाथों में उसके चॉकलेट है। वहीं, सीन यह भी बहुत आम है जिसमें बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड को खुश करने के लिए ढेर सारी डार्क चॉकलेट गिफ्ट्स देता है। इससे साबित होता है चाहे ख़ुशी हो या गम, चॉकलेट किसी को भी बेहतर महसूस कराने के लिए जरूरी है। चॉकलेट के शौक़ीन लोगों के लिए आज चॉकलेट डे (chocolate day) पर “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि आखिर लोगों को चॉकलेट क्यों पसंद आती है। आखिर ऐसा क्या होता है चॉकलेट में कि लोग उसके दीवाने हो जाते हैं।

    चॉकलेट क्या है?

    चॉकलेट काकाओ पेड़ (Theobroma cacao) की बीन्स से बनाई जाती है। जो चॉकलेट हम खाते हैं यह एक मल्टी-स्टेज प्रोसेस से कोको बीन्स से बनाई जाती है। हार्वेस्टिंग के बाद, बीन्स को फरमेंट करके सुखाया और साफ किया जाता है। फिर इसे पीसकर एक पेस्ट फॉर्म किया जाता है। इसके बाद इसे प्रेसराइज़्ड करके चॉकलेट लिकर या कोकोआ लिकर (chocolate liquor) और कोकोआ बटर बनाया जाता है। अलग-अलग रेश्यो में कोकोआ लिकर और कोकोआ बटर को मिलाकर चॉकलेट बनाते हैं। बेहतरीन डार्क (प्लेन) चॉकलेट में कम से कम 70 प्रतिशत कोकोआ लिकर और कोकोआ बटर मिलाया जाता है। जबकि मिल्क चॉकलेट (milk chocolate) में इसका रेश्यो केवल 50 प्रतिशत होता है। वहीं, व्हाइट चॉकलेट में कोकोआ लिकर नहीं मिलाई जाती है। वाइट चॉकलेट (white chocolate) में सिर्फ कोकोआ बटर (cocoa butter) का इस्तेमाल किया जाता है।

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    लोगों को चॉकलेट क्यों पसंद आती है?

    सबको चॉकलेट क्यों पसंद आती है? इसका जवाब 2007 की एक रिसर्च में मनोवैज्ञानिक डेविड लुईस द्वारा दिया गया। उनके के अनुसार, चॉकलेट जब आपके मुंह में धीरे-धीरे मेल्ट होती है तो मस्तिष्क की गतिविधियों और हार्ट रेट में बढ़त होती है। चॉकलेट में अन्य चीजों के अलावा, एनाडामाइड होता है, जो कि एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड को ठीक करने में मदद करता है। इसलिए, जब आप चॉकलेट खाते हैं और यह आपको बेहतर महसूस कराता है। इससे चॉकलेट खाने की क्रेविंग्स अक्सर आपको होती है।

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    एडिक्टिव बिहेवियर की वजह से चॉकलेट पसंद आती है

    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों एडमंड रोल्स और सियारा मैककेबे ने 2007 में यह समझने की कोशिश में कि क्या सभी लोगों को चॉकलेट की क्रेविंग होती है। क्या चॉकलेट लवर्स और नॉन-चॉकलेट लवर्स के ब्रेन रिस्पांस के बीच में कुछ अंतर होता है? उन्होंने मस्तिष्क के तीन प्रमुख क्षेत्रों में ऑर्कोफ्रॉस्ट्रल कॉर्टेक्स (orbitofrontal cortex), वेंट्रल स्ट्रिएटम (the ventral striatum) और प्रीजेनुअल सिंगुलेट कॉर्टेक्स (pregenual cingulate cortex) के बीच में महत्वपूर्ण अंतर पाया। पिछली स्टडीज बताती हैं कि मस्तिष्क ये हिस्से एडिक्टिव बिहेवियर (addictive behavior) के लिए जाने जाते हैं जैसे ड्रग लेना, शराब पीना और गैंबलिंग में शामिल होना आदि। दिलचस्प बात यह है कि रोल्स और मैककेबे पाया कि सब्जेक्ट के मुंह के सामने चॉकलेट रखने से भी चॉकलेट की क्रेविंग को दूर किया जा सकता है।

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    चॉकलेट क्यों पसंद आती है : वजह बैक्टीरिया तो नहीं

    चॉकलेट क्यों पसंद आती है

    वहीं, कुछ वैज्ञानिकों ने एक और स्टडी रिपोर्ट में बताया है कि कुछ लोगों को चॉकलेट क्यों पसंद आती है और कुछ लोगों को क्यों नहीं। अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के जर्नल ऑफ प्रोटीन रिसर्च में एक नए अध्ययन में पाया गया है कि चॉकलेट के लिए क्रेविंग पेट से होती है। दरअसल, चॉकलेट के लिए क्रेविंग पेट में रहने वाले बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीवों (microscopic organisms) की वजह से होती है।

    हर किसी के पेट में बैक्टीरिया होते हैं। बीमारियों का कारण बनने वाले बैड बैक्टीरिया के उलट भोजन को पचाने में मदद करने के लिए गुड बैक्टीरिया भी होते हैं। स्विटजरलैंड के नेस्ले रिसर्च सेंटर में चॉकलेट पर स्टडी करने वाले वैज्ञानिक डॉ. सुनील कोचर ने 11 चॉकलेट क्रेवर्स और 11 नॉन-चॉकलेट लवर्स के पेट में पनपने वाले बैक्टीरिया का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि चॉकलेट क्रेवर्स के पेट में बैक्टीरिया उन लोगों की तुलना में अलग थे, जो चॉकलेट को कोई खास पसंद नहीं करते थे। डॉ कोचर के अनुसार ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि चॉकलेट क्रेवर्स के पेट में मौजूद बैक्टीरिया चॉकलेट के स्वाद को बढ़ाने वाले केमिकल्स को रिलीज करके चॉकलेट क्रेविंग को बढ़ा सकते हैं।

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    चॉकलेट क्यों पसंद आती है क्योंकि यह हमें खुश रखती है

    मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में स्वाइनबर्न प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर ह्यूमन फार्माकोलॉजी, ने एक अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि चॉकलेट में मौजूद कुछ कंपोनेंट्स मूड में सुधार करके अन्य ब्रेन पैटर्न में बदलाव लाते हैं। इसमें ट्रिप्टोफैन (tryptophan) होने की संभावना है, जो चॉकलेट में पाया जाने वाला एक एमिनो एसिड है। यह दिमाग को सेरोटोनिन (एक न्यूरोट्रांसमीटर) बनाने में मदद करता है जो हमें खुश और संतुष्ट महसूस कराता है।

    इसके अलावा चॉकलेट में मौजूद फेनिलथाइलेलेन (phenylethylalanine) और थियोब्रोमाइन (theobromine) एंटीडिप्रेसेंट का काम करते हैं। इससे मूड रिलैक्स होता है और तनाव से राहत मिलती है।

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    चॉकलेट के फायदे क्या हैं?

    चॉकलेट क्यों पसंद आती है

    • कई अध्ययनों से पता चलता है कि डार्क चॉकलेट खाने से हार्ट अटैक का खतरा 37% कम हो जाता हैं। इसलिए, अगर दिल की सेहत बनी रहे, इसके लिए थोड़ी-सी चॉकलेट खाई जा सकती है।
    • कोको अर्क से बनी चॉकलेट (जो फ्लेवानोल्स से भरपूर होती है) के इस्तेमाल से याद्दाश्त बढ़ती है। इसके साथ ही कोलेस्ट्रॉल के लेवल को मेंटेन रखने में भी यह फायदेमंद है।
    • एक रिसर्च से पता चलता है कि अधिक फ्लेवेनॉल कंटेंट वाली चॉकलेट खाने से सनबर्न की प्रॉबल्म कम होती है।
    • सुनकर आपको विश्वास नहीं होगा लेकिन सच यही है कि चॉकलेट खाने से वेट कम हो सकता है। दरअसल,
    • अगर खाना खाने से 20 मिनट पहले एक या दो पीस चॉकलेट के खा लिए जाए तो दिमाग और भूख शांत होती है। नतीजन, भूख कम लगने से वेट भी कम होता है।
    • लो-ब्लड प्रेशर के मरीज को चॉकलेट खाने से लाभ मिलता है।
    • अगर आपको जल्दी थकान होने लगती है तो थोड़ी-सी चॉकलेट आपकी थकान को दूर करने में मददगार साबित हो सकती है को शामिल करें।
    • चॉकलेट में मौजूद कोको फ्लैवनॉल एंटी एजिंग का काम करता है।

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    साइकोलॉजिकली देखा जाए तो इंसान वही चीज बार-बार करता है जिससे उसको ख़ुशी मिलती है। शायद इसीलिए चॉकलेट को खाने की इच्छा बार-बार होती है।जब आप चॉकलेट खाते है, तब उससे स्ट्रेस को दूर करने वाले हार्मोन रिलीज होते हैं और खुशी का अहसास होता है। इस वजह से ही कुछ लोग चॉकलेट को नियमित रूप से खाने लगते हैं। उम्मीद करते हैं आपको कुछ लोगों को चॉकलेट क्यों पसंद आती है? इसका जवाब मिल गया होगा। इसके अलावा आपको चॉकलेट खाने के फायदे भी पता चले। इस विषय से जुड़ा कोई और सवाल है तो आप हमसे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

     

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Shikha Patel द्वारा लिखित · अपडेटेड 04/07/2020

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