एनीमिया ब्लड से जुड़ी एक बीमारी है। वैसे पुरुषों की तुलना में महिलाएं एनीमिया की शिकार ज्यादा होती हैं। अगर महिला या पुरुष किसी में आयरन की कमी की वजह से हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) बनना कम हो जाता है। ऐसी स्थिति होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है। हीमोग्लोबिन कम होने से ऑक्सिजन सप्लाय भी कम होने लगती है। और ये सभी परेशानियां एक साथ मिलकर एनीमिया की बीमारी बन जाती है। वैसे अभी तक आप ये तो समझ ही गयें होंगे कि न्युट्रिशन की कमी (Nutritional anemia) जैसे हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आवश्यक आयरन, प्रोटीन, विटामिन बी 12 और अन्य विटामिन और खनिज की कमी की वजह से एनीमिया की समस्या (Cause of Anemia) हो सकती है। एनीमिया की समस्या से कैसे बचा जाए, आज इस आर्टिकल में समझने की कोशिश करेंगे।
न्यूट्रिशनल एनीमिया यानी कौन-कौन से न्यूट्रिशन की कमी की वजह से एनीमिया की समस्या हो सकती है?
आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या
आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या (Cause of Anemia) होने पर माइक्रोस्कोप में रेड ब्लड सेल्स छोटे, ओवल-शेप एवं हल्के रंग के नजर आते हैं। हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से ब्लड का रंग हल्का हो जाता है।
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आयरन की कमी की वजह से होने वाले एनीमिया के लक्षण क्या हैं?
इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:
इन कारणों के अलावा और भी कारण हो सकते हैं।
आयरन डिफिशन्सी के कारण एनीमिया?
- आयरन युक्त पोषक तत्वों की कमी होना
- विटामिन-सी का सेवन कम करना
- किसी खास हेल्थ कंडीशन की वजह से शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयरन ना मिलना
- गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी की संभावना ज्यादा होती है। इससे गर्भवती महिला एवं गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को नुकसान पहुंच सकता है।
इन ऊपर बताये कारणों के अलावा अन्य कारण भी हो सकते हैं।
विटामिन की कमी से एनीमिया होना

जब विटामिन-बी-12 या फोलेट की कमी की वजह भी एनीमिया की समस्या (Cause of Anemia) होती है। ऐसी स्थिति तब हो सकती है, जब डायट में विटामिन-बी-12 या फोलेट को शामिल कम किया जाता है। विटामिन की कमी से एनीमिया की समस्या बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है। जब शरीर में विटामिन-बी-12 या फोलेट की कमी होने लगे, तो ऐसी स्थिति को मेगालोब्लास्टिक एनीमिया (Megaloblastic Anemia) कहते हैं।
विटामिन की कमी से होने वाले एनीमिया के लक्षण क्या हैं?
विटामिन की कमी से होने वाले एनीमिया के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:
- शरीर में झुनझुनाहट महसूस होना या चुभन महसूस होना
- जीभ में घाव होना या जीभ का लाल होना
- मुंह का अल्सर होना
- मांसपेशियों का कमजोर होना
- थकावट महसूस होना
- कमजोरी महसूस होना
- देखना में कठिनाई महसूस होना
- डिप्रेस्ड रहना
- भ्रम की स्थिति में रहना
- ध्यान केंद्रित नहीं कर पाना
- गर्भधारण में समस्या आना
- कंजेनिटल डिसऑर्डर (जन्मजात विकार)
- दिल से संबंधित परेशानी होना या हार्ट फेल होना
विटामिन एवं आयरन की कमी से नहीं होनेवाले एनीमिया:-
अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic anemia)-

अप्लास्टिक एनीमिया रेयर केस में होने वाली एनीमिया के प्रकार हैं, जो किसी भी उम्र में हो सकती है। इस कंडिशन में व्यक्ति का बोन मैरो नए ब्लड सेल्स का निर्माण नहीं कर पाता है। इसे (bone marrow failure disorder) को मायेलोडिस्प्लास्टिकसिंड्रोम भी कहा जाता है। जिससे आपको अधिक थकान महसूस होती है, संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और अनियंत्रित रक्तस्राव होता है। यह अचानक हो सकता है या फिर धीरे-धीरे विकसित होता है। अप्लास्टिक एनीमिया कम या बहुत गंभीर हो सकता है। दवाएं, ब्लड ट्रांस्फ्यूजन या स्टेम सेल ट्रांस्प्लांट जिसे बोन मैरो ट्रांस्प्लांट कहा जाता है, के जरिए अप्लास्टिक एनीमिया का उपचार किया जाता है। डॉक्टर इस स्थिति को अप्लास्टिक एनीमिया बोन मैरो फेलियर भी कहते हैं।
गर्भावस्था के दौरान एनीमिया (Anemia during pregnancy)-

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में आयरन, फोलेट एवं विटामिन-बी-12 की कमी की समस्या आम होती है। लेकिन अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक स्थिति पैदा हो सकती है। दरअसल प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी को ज्यादा आयरन की जरूरत पड़ती है। इसलिए गायनोकोलॉजिस्ट प्रेग्नेंट लेडी को प्रतिदिन 30 mg आयरन लेने की सलाह देते हैं।
सिकल सेल एनीमिया (Sickle-cell anemia)-

सिकल सेल एनीमिया को सिकल सेल भी कहा जाता है। यह एक वंशानुगत (हेरिडिटरी) एनीमिया है। यह वह स्थिति होती है, जिसमें शरीर के अन्य भागों में ऑक्सिजन ले जाने के लिए पर्याप्त मात्रा में हेल्दी रेड ब्लड सेल्स (Red Blood Cells) नहीं बन पाती है। सिकल सेल एनीमिया होने पर ये कोशिकाएं सिकल के शेप में बदल जाती हैं, जो कठोर और चिपचिपी हो जाती हैं। इन असामान्य आकार की कोशिकाओं को पतली ब्लड वेसल्स में जाने में परेशानी हो सकती है। शरीर के कुछ हिस्सों में ब्लड सर्क्यूलेशन और ऑक्सिजन का जाना धीमा हो सकता है या रुक सकता है। ऐसी स्थिति में पर्याप्त मात्रा में ब्लड न मिलने पर टिश्यू डैमेज होने के साथ ही अंगों को नुकसान पहुंचता है।
हीमोलिटिक एनीमिया (Haemolytic Anaemia )-

हीमोलिटिक एनीमिया ब्लड सेल्स काउंट में कमी आने की वजह से होने वाली समस्या है। हीमोलिटिक एनीमिया एक्सट्रिनसिक या इंट्रिंसिक हो सकता है। एक्सट्रिनसिक हीमोलिटिक एनीमिया में स्प्लीन रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर देता है। इसके अलावा ऑटोइम्यून रिएक्शन के कारण भी एक्सट्रिनसिक हीमोलिटिक एनीमिया हो सकता है। इंट्रिंसिक हीमोलिटिक एनीमिया में शरीर के द्वारा बनाई गई रेड ब्लड सेल्स ठीक तरह से काम नहीं कर पाती है।
न्यूट्रिशनल एनीमिया का निदान कैसे किया जाता है?
न्यूट्रिशनल एनीमिया के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर इसके निदान के लिए निम्नलिखित बाते पूछ सकते हैं। जैसे:
- आपकी डायट क्या है?
- क्या आपको कोई शारीरिक परेशानी है या बीमारी है?
- क्या किसी बीमारी का इलाज चल रहा है?
- आपकी और आपकी फैमली मेडिकल हिस्ट्री क्या है?
इन ऊपर बताये सवालों के अलावा हेल्थ एक्सपर्ट पेशेंट को ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।
आयरन, विटामिन-बी-12 और फोलेट (Iron, Vitamin-B12 and Folate)-

डायट में आयरन, विटामिन-बी-12 और फोलेट का सेवन नियमित करना चाहिए। इसलिए अंडे का सेवन बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें सिर्फ एक नहीं बल्कि कई पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को न्यूट्रिशन प्रदान करते हैं। अंडे में प्रोटीन, आयरन, विटामिन ए, विटामिन बी 6, विटामिन बी 12, फोलेट, एमिनो एसिड, फास्फोरस और सेलेनियम एसेंशियल अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (लिनोलिक, ओलिक एसिड) की मौजूदगी इसे हेल्दी फूड लिस्ट में टॉप पर रखता है। वहीं मांसाहारी लोगों के लिए चिकन का सेवन भी फायदेमंद माना जाता है। दरअसल चिकन के सेवन से शरीर में प्रोटीन की कमी को दूर किया जा सकता है। हालांकि कई लोग इसे अत्यधिक स्पाइसी बनाकर खाते हैं, लेकिन अगर आप सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो बॉयल चिकन खाने की आदत डालें। आप चाहें तो रेड मीट का सेवन भी कर सकते हैं। अगर आप चिकन, रेड मीट या अंडे का सेवन नहीं करना चाहते हैं, तो आपको साबूत अनाजों में शामिल गेहूं, दाल, बाजरा, जौ एवं मकई का सेवन करना चाहिए। इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन से शरीर में विटामिन बी 12 की कमी को दूर करने में मदद मिलती है। दूध का सेवन भी विशेष लाभकारी माना जाता है। दूध के सेवन से शरीर को संपूर्ण पौष्टिकता मिलती है।
इन खाद्य एवं पेय पदार्थों के अलावा पेशेंट को न्यूट्रिशनल एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए संतरे का सेवन करना चाहिए। इसमें विटामिन ए, विटामिन-बी, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे अन्य पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें एंटीऑक्सिडेंट की भी मौजूदगी होती है, जो सेहत के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। वहीं नियमित रूप से ग्रीन लीफी वेजेटिबल का सेवन करना चाहिए। रिसर्च के अनुसार मूंगफली का सेवन विशेष लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसे प्रोटीन का खजाना माना जाता है। न्यूट्रिशनल एनीमिया (Nutritional anemia) की समस्या दालों के नियमित सेवन से दूर की जा सकती है।
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हेल्थ एक्सपर्ट सबसे पहले पेशेंट की डायट से इस बीमारी को दूर करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर पेशेंट की स्थिति गंभीर या ऊपर बताये डायट से स्थिति में सुधार नहीं आ रही है है, तो विटामिन-बी-12 की इंजकेशन और फोलेट सप्लिमेंट्स प्रिस्क्राइब कर सकते हैं।अगर आप एनीमिया की समस्या या न्यूट्रिशनल एनीमिया (Nutritional anemia) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।