जल्द ही आ सकती है कोरोना वायरस की वैक्सीन

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Update Date जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना वायरस दुनियाभर के लिए एक स्वास्थ्य आपदा बनकर उभरा है। चीन में कोरोना वायरस से प्रभावित मरीजों के मृत्यु के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। चीन में कोरोना वायरस के करीब 20,438 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है। पिछले सोमवार के मुकाबले मंगलवार को इसमें 3,235 कोरोना वायरस के मामलों का इजाफा हुआ है। कोरोना वायरस के मामलों में करीब 18 % का इजाफा हुआ है।दुनियाभर में कोरोना वायरस की दवा पर शोध चल रहा है। इस वायरस की दवा के आभाव में चीन में 425 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। रविवार से इसमें करीब 65 मामलों का इजाफा हुआ है। दो दर्जन से भी ज्यादा देशों में कोरोना वायरस के 185 मामले सामने आ चुके हैं। इस वैश्विक आपदा को देखते हुए कोरोना वायरस की दवा काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कोरोना वायरस की दवा का ट्रायल

चीन ने इस वायरस की दवा का क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। फिलहाल, कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है। कोरोना वायरस की दवा में एंटी वायरल दवाओं और अन्य उपायों को मिलाकर पीढ़ित का इलाज किया जाता है। फिलहाल वैज्ञानिक कोरोना वायरस की दवा ढूंढ रहे हैं।

एक्सपेरिमेंटल एंटीवायरल ड्रग रेम्डेसिविर (Remdesivir) को अमेरिका के गिलइएड साइंसेज ने विकसित किया था। इसका उद्देश्य इबोला और सार्स (Sars) जैसे संक्रामक बीमारियों से लड़ना था। पहली बार यह दवा 35 वर्षीय एक पुरुष को दी गई, जिसकी स्थिति में एक दिन के भीतर सुधार देखने को मिला।

चीन के नेशनल हेल्थ कमिशन ने सोमवार को कहा कि वुहान शहर के कई अस्पतालों में कोरोना वायरस की दवा का ट्रायल चल रहा है। वुहान इस महामारी का केंद्र बना हुआ है। दिसंबर से यहां पर 360 लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना वायरस से पीढ़ित 270 लोगों में से कुछ लोग कोरोना वायरस की दवा के ट्रायल में हिस्से लेंगे।

WHO भी ढूंढ रहा दवा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वह कोरोना वायरस की दवा बनाने के लिए सहयोगियों के साथ कार्य कर रहा है। यह बीमारी निमोनिया के जैसी दिखती है। संगठन ने कहा कि कोरोना वायरस पर एंटीबायोटिक दवाइयां कार्य नहीं करती हैं। सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन से पीढ़ित मरीजों को संक्रमण के साथ लड़ने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयां दी गई हैं।

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थाईलैंड में वायरस की दवा

थाईलैंड में कोरोना वायरस से संक्रमित एक चीन की महिला को कई एंटी-वायरल दवाइयां मिलाकर दी गईं। यह दवाइयां फ्लू और एचआईवी में इस्तेमाल की जाती हैं। इन दवाओं से महिला के स्वास्थ्य में एक नाटकीय सुधार देखा गया। थाईलैंड के डॉक्टरों द्वारा महिला को एंटीवायरल दवाइयां देने के 48 घंटे बाद उसकी जांच नेगेटिव आई। डॉक्टरों ने महिला को एंटी-फ्लू दवा ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) को लोपिनाविर (Lopinavir) और रिटोनाविर (Ritonavir) एचआईवी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटी वायरल दवाइयां दी।

चीन के महामारी विशेषज्ञ झॉन्ग नाशंग (Zhong Nanshan), जो 2002-03 में सार्स (Sars) बीमारी के खिलाफ लड़ाई में काफी अहम भूमिका निभाई थी। 2002-03 में सार्स (Sars) बीमारी के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले चीन के महामारी विशेषज्ञ झॉन्ग नाशंग ने कहा कि कोरोना वायरस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कुछ इलाज के तरीके कारगर साबित हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘सार्स से लड़ाई के अनुभव से हमने एक सक्रिय इलाज की योजना विकसित की है। इसमें हम रिकवरी हासिल करने के लिए कई प्रकार के लाइफ सपोर्ट तरीकों को अपनाएंगे।’ विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना वायरस से 813 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 8,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। भारत ने कुछ समय पहले कोरोना की दवा पेश की थी, लेकिन चीन ने उससे इंकार कर दिया।

कोरोना वायरस में एंटी वायरल दवा

इस वायरस की दवा के रूप में एंटी वायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जा चुका है, लेकिन यह पूरी तरह प्रभावी हैं, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। इसके इलाज में अन्य उपाय ज्यादातर लाइफ सपोर्ट को शामिल किया गया है। इसमें एक ऑक्सीजन मास्क और एक्सट्राकोरपोरइएल मेम्ब्रेन ऑक्सीजेनेशन (extracorporeal membrane oxygenation) का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक दिल और फेफड़ों का एक आर्टिफिशयल इलाज है। कोरोना वायरस वैक्सीन का ह्युमन ट्रायल भी शुरू किया जा चुका है।

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जर्मनी में दवा की खोज

जर्मनी की लुबेक यूनिवर्सिटी के रॉल्फ हिलेनफील्ड (Rolf Hilgenfeld) इस वायरस की दवा को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। 2002-03 में सार्स (Severe Acute Respiratory Syndrome) के फैलने के बाद उन्होंने इसकी शुरुआत की थी। हिलेनफील्ड चीन के वुहान जाना चाहते हैं, जिससे शोधकर्ताओं के साथ संक्रमित जानवरों में नए वायरस के दो कंपाउंड की जांच कर सकें। यह संक्रमण कोरोना वायरस से संबंधित है, जो पिछले साल के अंत में सामने आया था। इस दवा के प्रारंभिक उपयोग के लिए लोग ड्रग कैंडिडेट अपने ऊपर इस्तेमाल करने के लिए राजी नही हैं। लेकिन हिलेनफील्ड जानवरों पर इस दवा का प्रयोग करना चाहते हैं, जिससे वह भविष्य में कोरोना वायरस के फैलने से रोका जा सके।

कोरोना वायरस की दवा में चीन की तेजी

सेक्विनाविर (Saquinavir), इंडिनाविर (Indinavir) , लोपिनाविर (Lopinavir), रिटोनाविर (Ritonavir) और कारफिलजोमिब (Carfilzomib) सहित 12 एचआईवी दवाओं के अलावा, चयनित लोगों पर दो रेस्पिरेटरी सिन्सटियल वायरस दवा सेचिजोफ्रेनिया और इम्यूनोसप्रेसेंट्स  का इस्तेमाल किया गया। इन लोगों पर चीन की पारंपरिक दवाओं जैसे पॉलीगोनुम कुस्पिडाटुम (Polygonum cuspidatum) का भी इस्तेमाल किया गया। इन दवाओं में वुहान कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के गुण हैं।

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जल्द आयेगी कोरोना वायरस की दवा

अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी गिलिएड साइंसेज (Gilead Sciences Inc) कोरोना वायरस के मरीजों के लिए एक्सपेरिमेंटल इबोला थेरेपी अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी गिलिएड साइंसेज (Gilead Sciences Inc) कोरोना वायरस के कुछ मरीजों के लिए अपनी एक्सपेरिमेंटल इबोला थेरेपी मुहैया करा रही है। कंपनी चीन में अपना अध्ययन केंद्र लगाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। अमेरिकी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के डॉक्टर एंथनी फेउकी ने कहा था कि वो कोरोना वायरस की दवा के लिए रेमडेसिविर (Remdesivir) दवा का परीक्षण कर रहे हैं।

कोविड-19 वैक्सीन पर अध्ययन

हालांकि, पिछली बार इस दवा का परीक्षण इबोला के मरीजों में किया गया था, लेकिन यह दवा कारगर साबित नहीं हुई थी। कंपनी ने कहा कि यह दवा सार्स (Severe Acute Respiratory Syndrome) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम से संक्रमित जानवरों में सक्रिय पाई गई है। यह बीमारियां काफी करीब से मौजूदा कोरोना वायरस से संबंधित हैं। वहीं, चीन के जिन यिनटान अस्पताल में पहले 41 करोना वायरस के मरीजों का इलाज किया गया है, जिनमें लोपिनाविर और रिटोनाविर को मिलाकर एंटी-एचआईवी दवाओं का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। यह जानकारी चीन के वैज्ञानिकों ने दि लानसेंट जर्नल में दी है। फिलहाल, कोरोना वायरस की दवा पर अध्ययन चल रहे हैं। वैक्सीन को लेकर भी दुनियाभर में खोज जारी है। इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर लोगों को कोरोना महामारी के बारे में सचेत कर रहे हैं

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