कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी कोविड-19 के एक्सपर्ट ने खोले राज

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अपडेट डेट जून 3, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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चीन के वुहान से फैले नोवेल कोरोना वायरस (2019-nCoV) से होने वाली बीमारी कोविड-19 (COVID- 19) की वजह से दुनियाभर में मरने वालों की संख्या हजारों के पार चली गई है। इसके अलावा, इस खतरनाक वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या भी मरने वालों के मुकाबले कई गुना हो चुकी है। जाहिर है कि इस वायरस के फैलने का कारण वुहान स्थित सीफूड मार्केट में चमगादड़ और सांपों जैसे वाइल्ड जानवरों का गैर-कानूनी व्यापार माना जा सकता है। देखा गया है कि यह नोवेल कोरोनावायरस-2019 व्यक्ति से व्यक्ति में भी तेजी से फैल रहा है। ऐसे में एचसीएफआई, सीएमएएओ प्रेसिडेंट, डॉ. के. के. अग्रवाल ने कोरोना वायरस की बीमारी कोविड- 19 से जुड़े मिथ को दूर करने और सही जानकारी पेश करने की कोशिश की है।

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कोरोना वायरस कोविड-19 (COVID- 19) जैसी बीमारी पहली बार नहीं हुई है

डॉ. के. के. अग्रवाल का कहना है कि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कोरोना वायरस के किसी प्रकार ने इतना गंभीर रूप ले लिया हो। उनका कहना है कि, हर दशक में कोई न कोई जूनोटिक (जानवरों से फैलने वाला वायरस) कोरोना वायरस उसकी प्रजाति से बाहर जाकर इंसानों को संक्रमित कर देता है। इस दशक में हमारे पास नोवेल कोरोना वायरस है, जिसे 2019-nCoV का नाम दिया गया है और इससे कोविड-19 (COVID- 19) नाम की बीमारी होती है। मजो कि सबसे पहले चीन के वुहान स्थित सीफूड मार्केट में लोगों से शुरू हुई है।

कोरोना वायरस (कोविड-19) का नाम ऐसा क्यों है?

डॉक्टर का कहना है कि, कोरोना वायरस का नाम उसके आकार पर निर्भर करता है। क्योंकि, इस वायरस का आकार इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप के नीचे देखने पर ताज यानी क्राउन या फिर सोलर कोरोना जैसा दिखता है।

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अभी तक ह्यूमन रेस्पिरेटरी कोरोना वायरस के कितने जानलेवा प्रकार देखे गए हैं?

डॉक्टर का कहना है कि, अभी तक ह्यूमन रेस्पिरेटरी कोरोना वायरस के तीन जानलेवा प्रकार पाए जा चुके हैं। जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं। जैसे-

  • सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (SARS-CoV)
  • मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS-CoV)
  • 2019-nCoV, जो कि SARS-CoV से 75 से 80 प्रतिशत मिलता-जुलता है।

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पैथोजेनेसिस (संक्रमण का विकास)

इन कोरोना वायरस के प्रकारों से संक्रमित होने पर व्यक्ति को सीवियर इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स का सामना करना पड़ता है।

कोरोना वायरस कोविड-19 से मृत्यु

वर्तमान में देखा जाए, तो कोरोना वायरस कोविड-19 से होने वाली मृत्यु दर 3 प्रतिशत है। इस कारण इस संक्रमण से होने वाली बीमारी की गंभीरता चिंताजनक है। इस संक्रमण से ग्रसित करीब एक तिहाई मरीजों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम की समस्या हो जाती है।

यह जूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus) है

डॉ. के. के. अग्रवाल का कहना है कि, यह वायरस कई बैट कोरोना वायरस के ज्यादा करीब है। ऐसा लगता है कि, इस वायरस का मुख्य सोर्स चमगादड़ रहे होंगे। सार्स कोरोना वायरस भी बैट मार्केट में एग्जोटिक एनिमल्स से मनुष्यों में ट्रांसमिट हुआ था और मर्स कोरोना वायरस भी ऊंटों से इंसानों में आया था। इन दोनों की स्थितियों में भी संभावित मुख्य स्त्रोत चमगादड़ ही माने गए थे।

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कोरोना वायरस कोविड-19 मनुष्यों के लिए ज्यादा संक्रमित है

डॉक्टर के मुताबिक, ऐसा दिख रहा है कि यह कोरोना वायरस कोविड-19 सार्स या मर्स कोरोना वायरस से अलग स्टेंडर्ड टिश्यू-कल्चर सेल्स के मुकाबले प्राइमरी ह्यूमन एयरवे एपिथेलियल सेल्स में ज्यादा फैल रहा है। हालांकि, इसका व्यवहार अधिकतर सार्स की तरह है।

व्यक्ति से व्यक्ति संक्रमण पर ये कहती है रिसर्च

SARS-CoV और MERS-CoV शरीर के अपर एयरवे सेल्स के मुकाबले इंट्रापल्मोनरी एपिथेलियल सेल्स को ज्यादा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, इन वायरस का ट्रांसमिशन बीमारी से गंभीर ग्रसित व्यक्ति से होता है, न कि माइल्ड या अस्पष्ट लक्षणों से ग्रसित व्यक्ति से। दूसरी तरफ 2019-nCoV भी सेल्युलर रिसेप्टर (ह्यूमन एंजियोटेंसिन-कंवर्टिंग एंजाइम 2 (hACE2)) SARS-CoV की तरह इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन, इसका ट्रांसमिशन व्यक्ति में सिर्फ लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट डिजीज विकसित होने के बाद ही होता दिख रहा है।

इस संक्रमण से संक्रमित होने पर लक्षणों के दिखने का अनुमानित समय करीब 7 दिन (4.0-8.0) देखा गया है। इसके बाद इस बीमारी की वजह से सांस चढ़ने की समस्या का समय 8 दिन (5.0-13.0) से लेकर एक्यूट रेस्पिरेटरी डिजीज सिंड्रोम होने का अनुमानित समय 9 दिन (8.0-14.0) देखा गया है। वहीं, मेकेनिकल वेंटीलेशन के लिए 10.5 दिन (7.0-14.0) और आईसीयू में दाखिल करने का अनुमानित समय भी 10.5 दिन देखा गया है।

corona virus

भारत में सीफूड का सेवन करने से कोरोना वायरस का फैलना असंभव है

डॉक्टर के. के. अग्रवाल के मुताबिक, चीन में इस संक्रमण को सांपों के साथ जोड़ा गया है, तो इसलिए भारत में सीफूड का सेवन करने से इसके फैलना असंभव है। सांप चमगादड़ों का शिकार करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वुहान की स्थानीय सीफूड मार्केट में सांपों की बिक्री होती है। ऐसा संभव हो सकता है कि, 2019-nCoV अपने मुख्य स्त्रोत यानी चमगादड़ों से सांप और फिर आउटब्रेक के समय सांपों से इंसानों में पहुंच गया हो। हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि, कैसे यह वायरस वॉर्म ब्लडेड और कोल्ड ब्लडेड होस्ट दोनों में कैसे फैल सकता है।

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फ्लाइट ट्रांसमिशन

ऐसी कई रिपोर्ट्स हैं जहां एयरक्राफ्ट में कोलेरा, शिगेलॉसिस, साल्मोनेल्लोसिस और स्टैफिलोकोकस की खाने के जरिए ट्रांसमिशन की बात कही गई है। 1965 में पहली बार एयरक्राफ्ट में स्मॉलपॉक्स दर्ज किया गया था। 1979 में पहली बार फ्लाइट उड़ने से पहले तीन घंटे की देरी के दौरान यात्रियों में इंफ्लुएंजा के फैलने का मामला दर्ज किया गया। यात्रियों के बीच इंफ्लुएंजा अटैक रेट बहुत ऊंची थी, जो कि 72 प्रतिशत थी। जिसके लिए, ग्राउंड डिले में वेंटिलेशन सिस्टम के फेल हो जाने को जिम्मेदार ठहराया गया है। मीजल्स भी इंटरनेशल फ्लाइट्स के दौरान फैलता देखा गया है। हालांकि, अभी तक कमर्शियल एयरक्राफ्ट पर टीबी के ट्रांसमिशन का कोई मामला नहीं पाया गया है। लेकिन, एम. ट्यूबरक्युलॉसिस का ट्रांसमिशन 8 घंटे से ज्यादा समय की फ्लाइट में किसी व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है।

कोविड-19 कोरोना वायरस लार्ज ड्रापलेट्स इंफेक्शन है

2019-nCoV का ट्रांसमिशन ज्यादातर संक्रमित व्यक्ति के खांसते या छींकते वक्त निकली लार्ज ड्राप्लेट्स के जरिए और उसके संपर्क से होता है। इसके अलावा, एरोसोल और फोमाइट्स के जरिए इसके फैलने की संभावना कम होती है।

यूनिवर्सल ड्रापलेट्स प्रीकॉशन्स इसका हल है

  • एलआरटीआई मरीज के दो हफ्तों के लिए अलग रखना
  • समय पर इलाज
  • यूनिवर्सल प्रीकॉशन्स का पालन करना

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कितने देशों में कोरोना का वायरस फैल चुका है

यह वायरस ऑस्ट्रेलिया, मकाउ, हांगकांग, फ्रांस, जापान, मलेशिया, नेपाल, सिंगापुर, ताईवान, साउथ कोरिया, थाईलैंड, यूनाइटेड स्टेट्स और वियतनाम आदि में फैल चुका है।

क्या कोविड-19 एक पब्लिक इमरजेंसी है?

डॉक्टर का कहना है कि, यह चीन में इमरजेंसी कही जा सकती है, लेकिन अभी यह ग्लोबल पब्लिक इमरजेंसी नहीं कही जा सकती।

पीएमओ की प्रतिक्रिया

17 जनवरी 2020- भारत में कोरोना वायरस का खतरा और एडवाइजरी जारी की गई।

22 जनवरी 2020-  N95 को एसेंशियल ड्रग और प्राइस कैप्ड की लिस्ट में शामिल किया गया और ओसेल्टामिविर को भी प्राइस कैप्ड की सूची में डाला गया। एयर फ्लाइट्स में सभी यात्रियों को एयर मास्क उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया। हालांकि, फ्लाइट लेने या लैंड करने पर फ्लू जैसे लक्षण होने पर पनिशेबल ऑफेंस नहीं माना जाएगा।

24 जनवरी 2020- कोरोनावायरस पर एक इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी की जरूरत महसूस की गई। इसी शाम को पीएमओ ने एक मीटिंग ली।

25 जनवरी 2020- भारतीय सरकार ने चीन में इस वायरस से संक्रमित भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए।

26 जनवरी 2020- नेशनल ड्रॉपलेट इंफेक्शन कंट्रोल प्रोग्राम की जरूरत देखी गई। फेस मास्क के एक्सपोर्ट पर बैन की पॉलिसी, चीन के प्रभावित क्षेत्रों से भारतीयों को लाने की पॉलिसी आदि।

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