कोरोना वैक्सीन के लिए ह्यूमन चैलेंज ट्रायल को लेकर डब्ल्यूएचओ जारी करेगा नई गाइडलाइन

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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पूरी दुनिया को कोरोना वायरस की वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। वैक्सीन की खोज को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। कई वैक्सीन एनिमल ट्रायल में पास हो चुकी हैं और फिलहाल उनका इंसानों पर ट्रायल चल रहा है। हर दिन के साथ बदतर हो रही स्थिति को देख हर कोई चाहता है कि जल्द से जल्द इसकी दवा की खोज पूरी हो जाए। दिन-ब-दिन कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है, जो परेशानी का कारण बनी हुई है। इसी वजह से इस खतरनाक वायरस के लिए वैक्सीन का जल्दी से जल्दी तैयार करने का दबाव बना हुआ है। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए कुछ वैज्ञानिक और कार्यकर्ता ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT) के उपयोग की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे कोरोना वायरस की वैक्सीन को जल्दी तैयार करने में मदद होगी।

क्या होता है ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT)?

ह्यूमन चैलेंज ट्रायल में वैक्सीन की प्रभावशीलता का परीक्षण करने के लिए हेल्दी युवा वॉलंटियर्स को जानबूझकर वायरस से संक्रमित किया जाता है। जो लोग ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT) के लिए इजाजत मांग रहे हैं उनका कहना है कि ऐसा करके वैक्सीन को बनाने की प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। वैक्सीन इजाद करने की प्रक्रिया को गति देने के लिए जल्द ही डब्ल्यूएचओ ह्यूमन चैलेंज ट्रायल को लेकर कुछ गाइडलाइन जारी करने वाला है।

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ह्यूमन चैलेंज ट्रायल को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

डब्ल्यूएचओ स्पोकपर्सन मारगरेट हरिस ने कहा- संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्वास्थ्य एजेंसी अगले कुछ हफ्तों में दिशानिर्देश जारी करने की योजना बना रही है। सबसे पहले कोविड-19 को लेकर ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT) की चर्चा द जर्नल ऑफ इनफेक्शियस डिजीज में प्रकाशित एक पेपर से शुरू हुई थी। इस पेपर के सहलेखक पीटर स्मिथ लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के प्रोफेसर भी हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर तीसरे फेज के ट्रायल में कई साल लगते हैं। उम्मीद की जाती है कि इससे कोविड-19 वैक्सीन को जल्दी तैयार करने में मदद होगी, लेकिन यह प्रतिभागियों में ट्रांसमिशन रेट और संचरण दर पर भी निर्भर करता है।

इस पेपर में एचसीटी प्रक्रिया कराने को लेकर यह तर्क दिया गया है कि यह प्रकिया टाइमलाइन में दवा को तैयार करने में मदद कर सकती है। क्योंकि एचसीटी प्रक्रिया से वैक्सीन के लिए किए जा रहे परीक्षण में तेजी आएगी और कम समय में दवा को तैयार किया जा सकेगा।

तीन फेज में होता है किसी भी वैक्सीन का ट्रायल

किसी भी वैक्सीन की प्रभावकारिता जांचने के लिए तीसरे फेज का क्लीनिकल ट्रायल अहम होता है। तीसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल में बड़े पैमाने पर परीक्षण किया जाता है। इससे पहले के चरणों में जानवरों और मनुष्यों के छोटे समूहों पर संभावित वैक्सीन की सुरक्षा और प्रतिरक्षात्मकता को साबित करने के लिए परीक्षण किया जाता है।

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इन बीमारियों में भी किया गया था ह्यूमन चैलेंज ट्रायल

वैज्ञानिकों ने इससे पहले इंफ्लूएंजा, मलेरिया, डेंगू फीवर, कोलेरा और टायफॉइड बुखार के लिए ह्यूमन चैलेंज ट्रायल का इस्तेमाल किया गया था। डब्ल्यूएचओ ने 2016 में इसे लेकर रेगुलेटरी एडवाइजरी जारी की थी। इसके अनुसार इस तरह के परीक्षण पर तभी विचार किया जाएगा जब बीमारी का इलाज करने और मृत्यु को रोकने के लिए कोई अन्य प्रभावी उपचार उपलब्ध न हो। मनुष्यों पर किए जाने वाले रिसर्च को लेकर मौजूदा नैतिक दिशानिर्देश काउंसिल फॉर इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ मेडिकल साइंसेज और डब्ल्यूएचओ द्वारा 2016 में जारी किए गए थे। इसमें इबोला और एंथ्रेक्स जैसी बीमारियों के लिए ह्यूमन चैलेंज ट्रायल को रोका गया था।

प्रोफेसर पीटर स्मिथ कहते हैं कि इस तरह का प्रतिबंध कोविड-19 पर लागू नहीं होना चाहिए। खासतौर पर जब सिर्फ स्वस्थ युवा वॉलंटियर्स को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा- जब तक इबोला का कोई प्रभावी उपचार नहीं मिल जाता, वो एक अत्यधिक घातक रोग है। फिलहाल इबोला का जो उपचार है वो मृत्यु दर को कम करता लेकिन खत्म नहीं करता है। कोविड-19 में से युवा वयस्कों में मृत्यु का जोखिम बहुत कम है। इसलिए यह इबोला से अलग है।

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इस पेपर के सहलेखक न्यू जर्सी में रटगर्स विश्वविद्यालय में बायोइथिस्टिस्ट नीर ईयाल और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एपिडेमियोलॉजिस्ट मार्क लिप्सच ने उच्च संचरण दर वाले क्षेत्रों से वॉलंटियर्स को चुनने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने बताया कि हम लोगों से दूसरों के लिए ये रिस्क लेने के लिए कह रहे हैं। वॉलंटियर्स की भर्ती को लेकर यूएस के कई कार्यकर्ताओं ने “वन डे सूनर” नाम से कैंपेन चलाया। कुछ ही हफ्तों में 50 से ज्यादा देशों के लगभग 9 हजार लोगों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ग्रूप की वेबसाइट पर यह लिखा है कि स्वस्थ युवाओं में इस गंभीर बीमारी से मृत्यु दर कम है, लेकिन इसके सथ ही यह भी चेतावनी दी है कि ऐसा हो सकता है कि आपको गंभीर बीमारी का सामना करना पड़े या फिर किसी की इसमें जान भी जा सकती है। मॉरीसन ने कहा- ज्यादातर जिन वॉलंटियर्स ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं वो मुख्य रूप से युवा पेशेवर हैं।

ह्यूमन चैलेंज ट्रायल करने से पहले इन बातों का ध्यान रखना होगा

‘वेलकम’ में वैक्सीन प्रोगराम की प्रमुख चार्ली वेलर कहती हैं कि वैक्सीन को बनाने में आमकौर पर एक दशक लगता है। दुनिया को कोविड-19 की वैक्सीन की जल्द से जल्द जरूरत है। इसके लिए हमें अलग तरीको पर काम करना होगा, जिसमें ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT) भी शामिल है। इसके साथ चार्ली वेलर ने कुछ सवाल भी रखें। उन्होंने कहा- हमें उन परिस्थितियों पर सावधानीपूर्वक विचार करना जिनके तहत कोविड-19 के लिए ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT) करना सुरक्षित और नैतिक होगा। जैसे हम तभी इसे करने का फैसला कर सकते हैं जब हमारी पास एक अत्यधिक प्रभावी चिकित्सीय स्थान हो।

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डब्ल्यूएचओ स्पोकपर्सन मारगरेट हरिस ने चार्ली वेलर द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर चिंता जाहिर करते हुए कहा- यह रोगजनक इंसानों में बिल्कुल नया है। हम हर दिन इसके बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। जो वॉलंटियर्स इस स्टडी में हिस्सा ले रहे हैं उन्हें इसके जोखिम को पूरी तरह समझना होगा। वो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। आपको बताते चले कि कोरोना वैक्सीन को लेकर अब तक कई कंपनी दावेदारी कर चुकी हैं।

हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में कोरोना वायरस के लिए ह्यूमन चैलेंज ट्रायल (HCT) को लेकर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं, ये बताया गया है। इसे लेकर आपकी क्या राय है यह आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

 हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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