दुनियाभर में फिर तेजी से फैल रही ये बीमारी, WHO को सता रही इस बात की चिंता

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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बारिश के मौसम में डेंगू तेजी से फैलने लगा है। देश के कई हिस्सों में इस बीमारी के तेजी से फैलने के मामले सामने आने लगे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि डेंगू के मच्छर मात्र दो मिलीलीटर पानी में भी पनप सकते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में रुका हुआ साफ पानी इनके लिए घर बन जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेंगू को लेकर चिंता भी जाहिर की है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बारिश शुरू होते ही डेंगू बेकाबू हो गया है। कुछ ही दिनों में मच्छरों के काटने से होने वाली इस बीमारी के 200 से ज्यादा मामले सामने आए और लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बात करें चंड़ीगढ़ की, तो वहां के स्वास्थ्य विभाग में तब हड़कंप मच गया जब यहां डेंगू सर्च में 4710 जगहों पर डेंगू वाले एडीज मच्छरों के लार्वा होने की पुष्टि हुई । इसके बाद से ही हेल्थ डिपार्टमेंट ने ऐसी जगहों पर मालिकाना हक रखने वालों को कारण बताओ नोटिस देते हुए तलब किया है। इसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट ने इससे निपटने की तैयारी कर ली है। इसके अलावा देश के कई राज्यों में डेंगू फैलने का खतरा मंडरा रहा है।

पहले जान लें कैसे होता है डेंगू

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। इन धारियों की वजह से इन्हें टाइगर मच्छर भी कहा जाता है। जब कोई एडीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके खून में मिल जाता है। वहीं डेंगू के किसी मरीज को काटने के बाद यही मच्छर किसी दूसरे व्यक्ति को भी काटकर वायरस उसके शरीर में भी पहुंचा देता है। इसी वजह से डेंगू तेजी से फैलने लगता है।

कहीं आपको डेंगू तो नहीं हुआ?

काटे जाने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने का समय 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है। अगर आपको अचानक तेज बुखार, शरीर में लाल रैशेस, बदन दर्द, सिर दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में जबरदस्त दर्द होने लगे तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि ये सभी लक्षण डेंगू के होते हैं।

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देश ही नहीं, पूरी दुनिया में डेंगू का कहर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत समेत 128 देशों में डेंगू का कहर है। आज भी कई देश इस जानलेवा बीमारी से निजात नहीं पा पाए हैं। बांग्लादेश जैसे देशों में डेंगू हर साल बेकाबू हो जाता है। मानसून में यहां डेंगू इतनी तेजी से फैलता है कि सैंकड़ों जाने जाती हैं। यहां के डॉक्टर काजी तारिकुल इस्लाम कहते हैं, ”डेंगू जैसी महामारी के फैलने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। इसमें हम तीन कारकों को देखते हैं। पहले (हम) यानी इंसान, दूसरा (वेक्टर) यानी एडीज मच्छर और तीसरा (वायरस) यानी डेंगू का वायरस। इन तीनों कारकों के अलावा मौसम और हमारा रहन सहन भी इनके फैलने की वजह बनता है”।

खतरनाक होता जा रहा है डेंगू

ढाका मेडिकल कॉलेज में अपने स्पीच के दौरान डॉ. तारिकुल इस्लाम ने कहा, ”एडीज मच्छर आसानी से खुद में बदलाव करने में सक्षम हैं। मौसम और हमारे वातावरण में होते बदलावों के साथ-साथ एडीज मच्छरों के जीवित रहने की क्षमता बढ़ी है। वातावरण में बदलाव के साथ -साथ इंसानों के रहन-सहन का भी इनके जीवनकाल पर असर होता है। कहीं न कहीं इन सभी परिस्थितियों के साथ-साथ एडीज मच्छर खुद को ढालते चले जा रहे हैं, जो आने वाले समय के लिए बेहद खतरनाक है”। डॉ. इस्लाम ने आगे कहा, इनमें बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि पहले डेंगू बच्चों और युवाओं को होता था, वयस्कों को पहले डेंगू नहीं होता था। लेकिन अब बांग्लादेश, थाइलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, भारत समेत तमाम देशों में वयस्क अब इसका ज्यादा शिकार बनने लगे हैं।

WHO को सता रही इस बात की चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने कहा है कि ग्लोबल वॉर्मिंग भी कहीं ना कहीं डेंगू के प्रकोप का एक बड़ा कारण है। ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से लगातार आसैत तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। ऐसे गर्म और उमस भरे वातावरण से एडीज मच्छरों को पनपने में आसानी हो रही है। वहीं अत्यधिक बारिश वाली जगहें इनके जन्म के लिए अनुकूल बनती जा ग्लोबल वॉर्मिंगरही हैं। WHO के मुताबिक इस वर्ष बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी डेंगू का खतरा बहुत बढ़ गया है। चिंता की बात यह है कि डेंगू का वायरस तीन तरह से हमें प्रभावित कर सकता है, जिसे सीरोटाइप-1,2 और 3 कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर एक व्यक्ति को सीरोटाइप-1 का डेंगू हो जाए और ठीक होने के बाद उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता उस वायरस के प्रति मजबूत हो जाए, फिर भी उसे सीरोटाइप-2 और 3 वाला डेंगू हो सकता है।

” डेंगू का मच्छर छोटा नहीं होता, वह दीवार पर नहीं बल्कि टेबल, बिस्तर, सोफा आदि जगहों के नीचे रहता है। ये मच्छर 2 एमएल पानी में भी अंडे दे सकते हैं। यानी एक बॉटल के ढक्कन में भी” – डॉ. बीएन नागपाल, WHO

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कैसे करें बचाव?

डब्लयूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक डेंगू से बचने के दो ही उपाय हैं। एडीज मच्छरों को पैदा होने से रोकना। एडीज मच्छरों के काटने से बचाव करना।

मच्छरों को पैदा होने से रोकने के उपाय

  • अपने ऑफिस, घर या काम की जगह के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें। क्योंकि रूका हुआ पानी डेंगू के मच्छरों का घर बनता है।
  • अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है, तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन (मिट्टी तेल) ऑयल डालें।
  • अपने घरों में लगे कूलरों, पानी की खुली टंकियों का सारा पानी हफ्ते में एक बार पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें।
  • घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें, क्योंकि इनमें पानी भर सकता है।
  • डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
  • अगर मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।
  • मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि इस्तेमाल करें।
  • घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवा का छिड़काव जरूर करें। यह दवाई बेड, सोफा, टेबल आदि के नीचे और घर के कोनों पर जरूर छिड़कें। दवाई छिड़कते वक्त अपने मुंह और नाक पर कोई कपड़ा जरूर बांधें। साथ ही, खाने-पीने की सभी चीजों को ढककर रखें।

मच्छरों की रोकथाम के बाद दूसरा बचाव है उनके काटने से, क्योंकि कई सावधानियों के बावजूद डेंगू के मच्छर कहीं न कहीं पनप जाते हैं। इसलिए ऐसे कपड़े पहने, जिससे शरीर का ज्यादा-से-ज्यादा हिस्सा ढका रहे। खासकर बच्चों के लिए यह सावधानी बहुत जरूरी है। बच्चों को बरसात के सीजन में फुल कपड़े पहनाएं।

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