क्या सूर्य ग्रहण से कोविड 19 खत्म हो जाएगा? जानें इस बात में कितनी है सच्चाई

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 22, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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आजकल व्हाट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है कि सूर्य ग्रहण कोरोना के लिए ‘काल’ बन जाएगा। वहीं, एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) के हवाले से भी खबर आई कि चेन्नई ने वैज्ञानिक ने सूर्य ग्रहण और कोरोना वायरस का संबंध बताया है। इस तरह से लोगों के मन में इस बात की सच्चाई जानने का कौतूहल मचा हुआ है कि क्या सच में 21 जून, 2020 को लगने वाले सूर्य ग्रहण के कारण कोरोना खत्म हो जाएगा। क्या सच में सूर्य ग्रहण और कोविड 19 के बीच में कोई संबंध है? इस आर्टिकल में हैलो स्वास्थ्य आपको इस बात की सच्चाई बताएगा। फिलहाल 21 जून, 2020 को लगने वाला सूर्य ग्रहण सुबह 9:17 बजे से दोपहरे के लगभग 3 बजे तक रहेगा।

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सूर्य ग्रहण क्या है? 

सूर्य ग्रहण ब्रह्मांड में घटने वाली एक प्राकृतिक घटना है, जो हर साल होती है। सूर्य ग्रहण का असर ग्रहों पर पूरी तरह से तो नहीं, लेकिन आंशिक रूप से दिखाई देता है। सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है, जो सूर्य की रोशनी को धरती पर आने से रोकता है। ये घटना पृथ्वी से दिखाई देती है। हालांकि, चंद्रमा पूरी तरह से या आंशिक रूप से सूर्य को पृथ्वी के सामने ढक लेता है, जो कुछ घंटों के लिए ही होता है। हालांकि 21 जून, 2020 को लगने वाला सूर्य ग्रहण खुद में एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring Of Fire) का नाम दिया गया है। 

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क्या सूर्य ग्रहण और कोविड 19 के बीच में संबंध है?

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एशियन न्यूज इंटरनेशनल के हवाले से चेन्नई के परमाणु और पृथ्वी (Nuclear and earth) वैज्ञानिक डॉ. केएल सुंदर कृष्णा ने बताया कि सूर्य ग्रहण और कोविड 19 के बीच में संबंध है। डॉ. कृष्णा का मानना है कि “26 दिसंबर, 2019 को लगे सूर्य ग्रहण के बाद ही कोरोना धरती पर फैला था। इसलिए सूर्य ग्रहण और कोविड 19 में संबंध है, क्योंकि इस पर्यावरण में बदलाव होता है और वायरस की कोशिका में म्यूटेशन या परिवर्तन होता है।

डॉ. कृष्णा का कहना है कि “कोरोना वायरस हमारे वातावरण के सबसे ऊपरी सतह पर पाया जाता है, इसका कारण अंतर ग्रहीय बल (Inter-Planetary Force) है। जिससे पृथ्वी पर कुछ बदलाव होते हैं, जैसे- सूर्य पर होने वाले विखंड ऊर्जा के कारण धरती पर न्यूट्रॉन्स बाहर आते हैं और बायोमॉलिक्यूल के साथ इंटरैक्ट करते हैं।”

डॉ. कृष्णा का मानना है कि सूर्य ग्रहण और कोरना वायरस का सीधा संबंध इसलिए है कि विखंडन ऊर्जा के कारण सूर्य ग्रहण के बाद उत्सर्जित पहले न्यूट्रॉन का कण बायोमॉलिक्यूल या माइक्रोऑर्गैनिज्म के साथ इंटरैक्शन कप सकता है। 26 दिसंबर, 2020 को सूर्य ग्रहण के दौरान सौर मंडल में नए संरेखण के साथ ग्रह संबंधी विन्यास में बदलाव हुआ था, जिसके कारण माइक्रोऑर्गैनिज्म में म्यूटेशन हुआ और धरती पर कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू हुआ।”

दूसरी तरफ डॉ. कृष्ण ने भी “वायरस के उत्पत्ति की पुरानी संभाविच थ्योरी को अपने सिरे से खारिज कर दिया है। डॉ. कृष्णा कहते हैं कि “वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई, इस पर कई तरह के मत है। लेकिन वायरस हमारे ऊपरी वायुमंडल से आया है, जहां पर अंतर ग्रहीय बल के कारण वायरस में परिवर्तन होता है। ऐसे में सूर्य से निकलने वाले न्यूट्रॉन से ऊपरी वायुमंडल में मौजूद वायरस जैव-परमाणु (Bio-nuclear) के संपर्क में आ सकता है। फिर यह जैव-परमाणु ही वायरस की उत्पत्ति का एक स्रोत हो सकता है।”

डॉ. कृष्णा ने ANI से कहा कि “21 जून, 2020 को लगने वाला सूर्य ग्रहण कोरोना के लिए एक प्राकृतिक इलाज है। इससे कोरोना खत्म हो सकता है और पृथ्वी पर स्थिति सामान्य हो सकती है। क्योंकि सूर्य ग्रहण और कोविड 19 में न्यूक्लियर एनर्जी और न्यूट्रॉन का संबंध है। जिससे कोरोना की कोशिका में परिवर्तन होगा और वह निष्क्रिय हो जाएगा।”

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सूर्य ग्रहण और कोविड 19 के बीच संबंध को सरकार ने बताया गलत

विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय (Ministry of Science & Technology) ने प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के हवाले से सूर्य ग्रहण और कोविड 19 के बीच संबंध को सिरे से खारिज किया है। PBI से विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय की ओर से वैज्ञानिक अनिकेत सुले ने बताया कि “सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जो सौरमंडल में ग्रह और उपग्रह के कारण होती है। सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा कुछ समय के लिए आ जाता है। जिससे पृथ्वी पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। पृथ्वी पर सूर्य ग्रहण साल में दो से पांच बार लगता है। सूर्य ग्रहण के कारण पृथ्वी पर कोई भी माइक्रोऑर्गैनिज्म प्रभावित नहीं होता है। वहीं, सूर्य ग्रहण के दौरान कोई भी रहस्यमयी किरण या न्यूट्रॉन धरती पर नहीं आती है, जिससे माइक्रोऑर्गैनिज्म में कोई भी बदलाव नहीं होता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण और कोविड 19 में कोई संबंध नहीं है।”

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सूर्य ग्रहण के कारण सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव

भारत में पारंपरिक और आध्यात्मिक तौर पर माना जाता है कि सूर्य ग्रहण के कारण सेहत पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने सूर्य ग्रहण के कारण सेहत पर प्रभाव को लेकर निम्न बातों के बारे में बताया है :

सूर्य ग्रहण और प्रेग्नेंट महिला

10 common labour complications

भारत में पौराणिक मान्यता है कि सूर्य ग्रहण और प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य में सीधा संबंध है। ऐसे गर्भवती महिलाओं को सूर्य की रोशनी में ना आने की सलाह दी जाती है। इसके लिए वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य ग्रहण के समय गर्भवती महिला को सूर्य की रोशनी में नहीं आना चाहिए, क्योंकि हॉट-कोल्ड थ्योरी के कारण गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गर्भवती महिला को सूर्य ग्रहण के समय अपने  घर में रूम टेम्प्रेचर पर ही रहना चाहिए।

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सूर्य ग्रहण और आंखें

आंख में एलर्जी-eye allergies

अक्सर आपने सुना होगा सूर्य ग्रहण के कारण आंखों में समस्या हो सकती है। ऐसे में आपको नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण को नहीं देखना है। क्योंकि सूर्य ग्रहण के कारण आंखें डैमेज हो सकती हैं। इसे सोलर रेटिनोपैथी या रेटिनल बर्न भी कहा जाता है। जब हम नंगी आंखों से सूर्य की तरफ देखते हैं तो उससे निकलने वाली किरणें सीधे हमारे आंखों की रेटिना पर पड़ती है, जिससे रेटिना की कोशिका डैमेज हो सकती है। हालांकि, इस दौरान आपको आंखों में दर्द महसूस नहीं होगा, लेकिन आंखों का अंधापन जरूर महसूस होगा। ये कुछ घंटों, कुछ दिनों या हमेशा के लिए हो सकता है। इसलिए जब भी सूर्य ग्रहण को देखना हो तो एक्स-रे शीट,सन ग्लासेस और गॉगल्स लगा कर ही देखें। 

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सूर्य ग्रहण और कोविड 19 में किन बातों का ध्यान रखें? 

कोरोना काल में सूर्य ग्रहण लगना तो मात्र एक खगोलीय घटना है, जिसमें आपको खुद को सूर्य ग्रहण और कोरोना वायरस दोनों से बचाना है। सूर्य की किरणों और कोरोना वायरस से बचने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें : 

  • नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण देखने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। बिना किसी दर्द के आंखों को नुकसान तेजी से होता है। सूर्य ग्रहण के कारण आंखों की रोशनी जाने का कोई इलाज नहीं है और बच्चों को में इसका रिस्क ज्यादा है। ऐसे में आंखों को सनग्लास, गॉगल्स या एक्स-रे शीट से ढक कर ही सूर्य ग्रहण की घटना को देखें।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान अपनी बॉडी को हाइड्रेट रखें। क्योंकि अक्सर लोग ग्रहण के दौरान कुछ भी खाते पीते नहीं है। ये सिर्फ एक मिथक है। इसलिए पानी पीते रहें, ताकि डिहाइड्रेशन ना हो। 
  • सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए ही आप सूर्य ग्रहण को देखें। 
  • आंखों को हाथों से छूने से बचें। अगर आप सूर्य ग्रहण देखने के लिए एक्स-रे शीट का इस्तेमाल कर रहे हैं को उस पर सैनिटाइजर का स्प्रे करें और अपने हाथों को धोने के बाद ही उसे पकड़ें और आंखों से कम से कम पांच इंच की दूरी पर रख कर देखें। 
  • कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क और फेस शील्ड जरूर पहनें।
  • हर आधे से एक घंटे पर अपने हाथों को साबुन से धुलते रहें। 

इस तरह से आपने जाना कि सूर्य ग्रहण और कोविड 19 के बीच कोई संबंध नहीं है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान ना दें। सूर्य ग्रहण और कोरोना वायरस से खुद को और अपनी आंखों को बचाएं। आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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