क्लीनिकल ट्रायल में फेल हुई रेमडेसिविर, लोगों की उम्मीदों पर फिरा पानी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए दुनियाभर के शोधकर्ता लगे हुए हैं। वैसे तो दवा को लेकर सैकड़ों प्रोजेक्ट चल रहे हैं लेकिन इनमें 86 प्रोजेक्ट को दमदार माना जा रहा है। इनके क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गए हैं। इन्हीं में एक रेमडेसिवीर दवा है, जिससे काफी उम्मीद जताई जा रही थी। क्लीनिकल ट्रायल में रेमडेसिविर फेल होने के कारण लोगों को एक बड़ा झटका लगा है।

रेमडेसिविर का चीन के अस्पतालों में क्लीनिकल परीक्षण चल रहा था। फाइनेशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण में रेमडेसिविर दवा नाकामयाब रही है। यह खबर विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से दी गई है। यही नहीं इस दवा के नाकामयाब साबित होने से इसे बनाने वाली कंपनी गिलिएड के शेयर पांच फीसद तक गिर गए।

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क्लीनिकल ट्रायल में रेमडेसिविर फेल

रेमडेसिविर के क्लीनिकल ट्रायल के दौरान परीक्षण में पाया गया कि यह दवा कोरोन वायरस से संक्रमित लोगों की तबियत में कोई सुधार करने में कामयाब नहीं हुई। इसके अलावा इस दवा को लेने से रोगियों के रक्त में मौजूद वायरस की तीव्रता में कोई कमी देखने को नहीं मिली। इस परीक्षण को 237 मरीजों पर किया गया था। इनमें 158 को यह दवा दी गई जबकि 79 को यह दवा नहीं दी गई। जिन मरीजों को यह दवा दी गई उनमें इस दवा के दुष्प्रभाव देखे जाने पर 18 मरीजों को यह दवा देना बंद कर दिया गया। क्लीनिकल ट्रायल में रेमडेसिविर फेल होने से कोरोना की वैक्सीन की दिशा में चल रही मुहिम को एक बड़ा झटका लगा है।

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रेमडेसिविर पर किए गए इस अध्ययन को सही नहीं मानती इस दवा को बनाने वाली कंपनी

चीन में किए गए इस अध्ययन की रिपोर्ट से दवा बनाने वाली कंपनी गिलीड ने आपत्ति जताई है। वे इस रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट के निष्कर्षों को गलत तरीके से बताया गया है। उनका मानना है कि अध्‍ययन में अनुचित प्रसंगों को लिया गया है जो ठोस नहीं हैं। इसके साथ ही उनका कहना है कि परिक्षण में मरीजों को कम संख्या में लिया गया है जिससे यह निष्कर्ष महत्वहीन है।

आपको बता दें, पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी कि शिकागो यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर में 2400 मरीजों पर परीक्षण किया गया था। इन सभी लोगों को रेमडेसिविवर दी गई थी। इस दवा से कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को काफी फायदा पहुंचा था। इस रिपोर्ट के आने के बाद कंपनी के शेयर में उछाल आ गया था।

क्लीनिकल ट्रायल में रेमडेसिविर फेल लेकिन इबोला के इलाज में दमदार साबित हुई थी यह दवा

रेमडेसिविर दवा को एक दशक पहले इबोला वायरस पीड़ितों के इलाज के लिए बनाया गया था। इबोला के इलाज के लिए यह काफी प्रभावशाली साबित हुई थी। इससे पहले माना गया था कि यह दवा कोरोना वायरस का असर आगे बढ़ने से रोकने में सक्षम है। यही नहीं कई रिपोर्ट्स की मानें तो यह सार्स को निष्‍कृ‍य करने में भी सहायक है।

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क्लीनिकल ट्रायल में रेमडेसिविर फेल, बीसीजी वैक्सीन और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा पर भी चल रहा है शोध क्लीनिकल ट्रायल में रेमडेसिविर फेल हो गई हो, लेकिन अभी बीसीजी वैक्सीन और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा पर भी कोरोना वायरस के इलाज में प्रभावशीलता पर शोध चल रहा है। हाल ही में हुए शोध में पता चला था कि, जिन देशों में टीबी जैसे लंग इंफेक्शन को खत्म करने के लिए बीसीजी टीके का इस्तेमाल हो रहा है, वहां कोरोना वायरस के मामले कम देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा, कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन ड्रग (Hydrocychloroquine drug) का प्रभाव देखने के लिए भी शोध किया जा रहा है। दरअसल, हाइड्रोक्सी कोलोरोक्वाइन एक एफडीए मान्यता प्राप्त एंटीमलेरियल ड्रग है जो कि मुंह द्वारा लिया जाता है। मलेरिया के अलावा, यह रूमेटाइड अर्थराइटिस और ल्यूपस एरिथेमेटोसस (rheumatoid arthritis and lupus erythematosus) बीमारी में भी इस्तेमाल की जाती है। यह कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं दी जाती है, इसलिए इस दवा का सेवन सिर्फ डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके से ही करना चाहिए। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन टैबलेट्स का गलत इस्तेमाल करने से कई गंभीर दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। रेमडेसिविर के बाद लोगों को बीसीजी वैक्सीन से उम्मीद है। इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है। कुछ दिनों के बाद मालूम हो पाएगा कि कोरोना वायरस के इलाज में यह कितनी प्रभावशीलता है।

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कोरोना वायरस से सावधानी

इस खतरनाक वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सरकार ने लोगों के लिए कुछ प्रीकॉशन दे रखी हैं। सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के साथ इन एहतियात रूपी सलाह को फॉलो करने से आप कोरोना वायरस संक्रमण से काफी हद तक बच सकते हैं।

  1. जबतक कोई कोरोना वायरस वैक्सीन नहीं बन जाती। तबतक अपने डॉक्टर द्वारा दी गई सभी सलाह को फॉलो करते रहें।
  2. सरकार का कहना है कि अगर आप मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे लगाने से पहले अपने हाथों को साबुन व पानी से अच्छी तरह धो लें या फिर एल्कोहॉल बेस्ड हैंड रब का इस्तेमाल करें।
  3. अपने मुंह और नाक को मास्क से अच्छी तरह कवर करें कि उसमें किसी भी तरह का गैप न रहे।
  4. हाथों को साफ करने के लिए साबुन व पानी से अच्छी तरह धोएं
  5. भीड़ न बनें और संक्रमण फैलने से रोकें।
  6. अपनी आंखों, नाक और मुंह को बेवजह न छूएं।
  7. अगर आपको बुखार, खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलें।
  8. एक बार इस्तेमाल किए गए मास्क को दोबारा इस्तेमाल न करें
  9. मास्क को पीछे से हटाएं और उसे इस्तेमाल करने के बाद आगे से न छूएं।
  10. इस्तेमाल के बाद मास्क को तुरंत एक बंद डस्टबिन में फेंक दें।
  11. छींकते या खांसते समय अपने मुंह और नाक को किसी टिश्यू पेपर या फिर कोहनी को मोड़कर ढकें।

कोरोना वायरस से बचाव के लिए इन बातों का भी ध्यान रखें

कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के लिए हमें लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क व पर्सनल हाइजीन जैसी सावधानियों का पालन करना होगा। इसके अलावा, सिर्फ सरकार या हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा दी गई जानकारी पर ही विश्वास करें। हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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