कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने में जुटा भारत, कुष्ठ रोग की दवा का इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन ढूंढने में जुटे हुए हैं। भारत में भी सभी रिसर्च संस्थान कोरोना वायरस की वैक्सीन ढूंढने में पीछे नहीं हैं। CSIR यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च का मानना है कि लेप्रोसी और सेप्सिस जैसी बीमारियों में इस्तेमाल किए जाने वाला टीका कोरोना में कारगर हो सकता है। दवाइयों के क्षेत्र में इस टीके को फिलहाल एमडब्लू (माइक्रो बैक्टोरियल डब्लू) के नाम से जाना जाता है। कोरोना वायरस के इलाज के लिए एमडब्लू वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने इसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अप्रूवल लिया है।

कोरोना वायरस के इलाज के लिए एमडब्लू वैक्सीन

शोधकर्ताओं के अनुसार, अब तक किए गए अध्ययनों में देखा गया है कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए एमडब्लू वैक्सीन कारगर साबित हो सकती है। क्योंकि एमडब्लू वैक्सीन में कोरोना जैसी डीएनए को खत्म करने की क्षमता है। यही कारण है कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भी अब इसे कोरोना पर क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। कोरोना पेशेंट्स पर एमडब्लू वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर काम शुरू हो गया है। फिलहाल इसके ट्रायल की शुरूआत कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों और गंभीर मरीजों से शुरु की गई है।

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कोरोना वायरस की प्रजाति को लेकर काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने दी ये जानकारी

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने बताया कि भारत में कोरोना वायरस की कई प्रजाति मौजूद हैं। हमारे यहां अलग-अलग देशों से लोग आए हुए हैं। कुछ लोगों में वुहान वाला वायरस नजर आया है। ईरान से जो लोग आए हैं उनमें भी वुहान जैसा ही वायरस पाया गया है। लेकिन इटली से आए लोगों में यूरोप और यूएस के वायरस दिखे हैं। इस तरह हमारे देश में अलग-अलग कोरोना वायरस की प्रजति नजर आ रही हैं। ऐसे में यह देखना है कि किस किस्म के वायरस पर कौन सी दवा असर करती है। हमने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए वैक्सीन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। कोरोना वायरस के इलाज के लिए एमडब्लू वैक्सीन कितनी कामयाब है, इसके नतीजे अगले कुछ हफ्तों में सामने आने शुरू हो जाएंगे।

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कोरोना वायरस के इलाज के लिए बीसीजी वैक्सीन पर भी वैज्ञानिक कर रहे हैं शोध

इससे पहले एक शोध में यह सामने आया था कि बीसीजी वैक्सीन (BCG Vaccine) लेने वाले लोगों में कोरोना वायरस का खतरा 6 गुना कम होता है। आपको बता दें कि, बीसीजी का टीका ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) यानी टीबी से बचाव करने के लिए लगाया जाता है। दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस से बचाव में इस टीके के प्रभाव का टेस्ट किया जा रहा है। बीसीजी के टीके को लेकर माना जा रहा है कि इससे अन्य संक्रमण के खिलाफ व्यक्ति की इम्यूनिटी काफी बढ़ जाती है और वह कोरोना वायरस महामारी से बच सकता है अथवा कोरोना वायरस से होने वाली मौत का खतरा कम किया जा सकता है।

बीसीजी टीके को लेकर भारत सहित कई देशों में कोरोना का प्रभाव कम होने की चर्चा शुरू हुई। यही वो समय था जब भारतीय वैज्ञानिकों का ध्यान एमडब्लू वैक्सीन की तरफ गया। बीसीजी पर फिलहाल कई देश रिसर्च कर रहे हैं। हालांकि यह दावे अपुष्ट हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह परिणाम इसलिए दिख रहा है क्योंकि बीसीजी टीके अधिकतर पिछड़े क्षेत्रों में लगे हैं। वहां ट्रेवल कम होता है और शायद इसीलिए कोरोना का कम असर दिखा।

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कोरोना वायरस के इलाज के लिए एमडब्लू वैक्सीन को लेकर क्या कहते हैं रिसर्चर

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआइआर) के महानिदेशक डॉ शेखर सी मांडे को उम्मीद है कि यह टीका कोरोना के इलाज में कारगार साबित होगा। उन्होंने बताया फिलहाल निष्कर्ष पर जाने से पहले इसके क्लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। क्लीनिकल ट्रायल की प्रक्रिया को पूरा होने में दो महीने का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस टीके के प्रोडक्शन में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी। अभी भी यह टीका देश में बन रहा है। इस टीके को बनाने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल हो रहा है वो सारी चीजें भारतीय ही हैं। वैसे भी कोरोना की जंग में हमारा पूरा जोर इस बात पर है, कि हम जो भी बनाए, वह भारत में उपलब्ध चीजों से ही बनाया जाए।

1966 में बनी थी ये वैक्सीन

आपको बता दें, एमडब्लू वैक्सीन इम्यूनिटी बढ़ाने वाली बीसीजी वैक्सीन के परिवार की ही वैक्सीन है। इस वैक्सीन को भारतीय वैज्ञानिकों ने 1966 में बनाया था। इसका इस्तेमाल कुष्ठ रोग से बचाव के लिए किया गया। इसके साथ ही एमडब्लू वैक्सीन टीबी और कैंसर में भी उपयोगी पाई गई है। एमडब्लू वैक्सीन का इसतेमाल कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) से बचाव के लिए किया जाता है। इसके क्लीनिकल ट्रायल को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। इस ट्रायल में यह पता लगाया जाएगा कि कोरोना वायरस के नियंत्रण में यह वैक्सीन कितनी कारगर साबित होती है। इस दवा के लिए किए जाने वाले परीक्षण में कोविड-19 के गंभीर मरीजों को शामिल नहीं किया जाएगा।

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कोरोना वायरस से सावधानी

कोरोना की दवा को लेकर पूरी दुनिया में शोध चल रहे हैं। फिलहाल सोशल डिस्टेंस ही इससे बचाव का एकमात्र माध्यम है। भारत सरकार ने लोगों के लिए कुछ सलाह दी है। सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के साथ इन एहतियात रूपी सलाह को फॉलो करने से आप कोरोना वायरस संक्रमण से काफी हद तक बच सकते हैं।

  1. आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए।
  2. हाथों को 20 सेकेंड तक अच्छी तरह से धोएं
  3. बेवजह लोगों से न मिलें, भीड़ न लगाएं।
  4. छींकते या खांसते समय अपने मुंह और नाक को किसी टिश्यू पेपर या फिर कोहनी को मोड़कर ढकें।
  5. अगर आपको बुखार, खांसी व सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलें।
  6. हेल्थ केयर प्रोवाइडर की हर सलाह मानें और पूरी जानकारी प्राप्त करते रहें।
  7. अगर आप मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उससे पहले अपने हाथों को एल्कोहॉल बेस्ड हैंड रब या फिर साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
  8. अपने मुंह और नाक को मास्क से अच्छी तरह कवर करें कि उसमें किसी भी तरह का गैप न रहे।
  9. एक बार इस्तेमाल किए गए मास्क को दोबारा इस्तेमाल न करें।
  10. मास्क को पीछे की तरफ से हटाएं और उसे इस्तेमाल करने के बाद आगे से न छूएं।
  11. मास्क को इस्तेमाल करने के बाद तुरंत एक बंद डस्टबिन में फेंक दें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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