WHO ने कोरोना वायरस के चार सबसे प्रभावशाली उपचारों का किया ट्रायल

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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पूरी दुनिया में पैर पसार चुके कोरोना वायरस के फैलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि अब तक इसकी दवा इजाद नहीं हो पाई है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी दवा विकसित करने में जुटे हैं। फिलहाल के लिए डॉक्टर इस वायरस का इलाज करने के लिए एंटी वायरल दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। शुक्रवार को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बड़े वैश्विक परीक्षण की घोषणा की है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाले खतरनाक श्वसन रोग का इलाज किया जा सकता है। ऐसा पहली बार हुआ है जब एक महामारी के दौरान तेजी से वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने के लिए हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं।

कोरोना वायरस के इलाज को ढूंढने में जुटे हैं दुनियाभर के शोधकर्ता

इस अध्ययन में दर्जनों देशों के हजारों रोगी शामिल हो सकते हैं। इस शोध की प्रक्रिया को बहुत ही सरल बनाया गया है जिससे कोरोना वायरस के पेशेंट बिना किसी परेशानी के इसमें हिस्सा ले सकें। कोरोना वायरस के लगभग 15% रोगी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं साथ ही अस्पतालों की कमी होने के कारण जल्द से जल्द इसके कारगर इलाज की सख्त जरूरत है। शोधकर्ताओं द्वारा इसके कंपाउंड्स के आने और उनके विकसित और परीक्षण करने में वर्षों लग सकते हैं। यहीं कारण है कि शोधकर्ता और पब्लिक हेल्थ एजेंसियों उन दवाओं का इस्तेमाल करने का सोच रहे हैं जो अन्य बीमारियों के लिए पहले से अनुमोदित हैं औप काफी हद तक सुरक्षित भी हैं।

इसके अलावा कोरोना वायरस के इलाज के लिए शोधकर्ता कुछ ऐसी दवाओं को भी देख रहे हैं जिनके जानवरों पर बेहतर परिणाम पाए गए हैं। ऐसी दवाएं जिनसे सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome- SARS) और मिडल ईस्ट रिस्पेरेटरी सिंड्रोम (Middle East Respiratory Syndrome- MERS) में राहत देखने को मिली है। आपको बता दें, सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और मिडल ईस्ट रिस्पेरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस द्वारा जनित श्वसन से संबंधित रोग हैं।

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शोधकर्ताओं ने दर्जनों कंपाउंड्स के परीक्षण के सुझाव दिए हैं लेकिन डब्ल्यूएचओ ने नीचे बताए चार थेरेपी को परीक्षण की मंजूरी दी है:

  • एक्सपेरीमेंटल एंटीवायरल कंपाउंड रेमडेसिविर (experimental antiviral compound called remdesivir): बता दें यह दवा इबोला वायरस में रिकमेंड की जाती है।
  • मलेरिया में दी जाने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रो क्लोरोक्वीन (the malaria medications chloroquine and hydroxychloroquine)
  • एचआईवी ड्रग्स लोपिनाविर/रिटोनाविर (HIV Drugs lopinavir and ritonavir)
  • लोपिनवीर और रीटोनेवीर प्लस इंटरफेरॉन बीटा (HIV Drugs lopinavir and ritonavir plus interferon-beta)

कोरोना वायरस के इलाज में एचआईवी दवाओं का कॉम्बीनेशन

कोरोना के मरीजों में इन दवाओं के कुछ आंकड़े पहले ही सामने आ चुके हैं। कोरोना वायरस के इलाज के लिए चीन में एक छोटे से अध्ययन में एचआईवी कॉम्बो विफल रहा है। चीन के कुछ शोधकर्ताओं के दल का कहना है उन्होंने कोरोना वायरस के जांच हेतू एचआईवी दवाओं के कॉम्बीनेशन को बहुध अधिक प्रभावकारी उपचार नहीं पाया है। इस अध्ययन को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मैडिसिन के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित किया गया है। इस स्टडी को अस्पताल में भर्ती कोरोना वायरस से ग्रसित 199 मरीजों पर किया गया था। इनमें 99 रोगियों का इलाज एचआईवी दवाओं के कॉम्बीनेशन से किया दिया था और 100 मरीजों की सामान्य देखभाल की गयी। 28 दिनों बाद एचआईवी दवाइयां प्राप्त करने वाले रोगियों की मृत्युदर 19.2 प्रतिशत थी। वहीं सामान्य देखभाल प्राप्त करने वाले मरीजों की मृत्युदर 25 प्रतिशत थी। शोधकर्ताओं ने इस स्टडी का निष्कर्ष निकाला कि एचआईवी दवाओं के कॉम्बीनेशन से कोरोना वायरस पेशेंट्स की स्थिति में सुधार या मृत्युदर में कोई कमी नहीं आई। कोरोना वायरस के अलग-अलग चरणों में इन दवाओं के रिजल्ट देखने के लिए अधिक शोध करने की आवश्यकता है। वहीं डब्ल्यूएचओ का मानना ​​है कि एचआईवी दवाओं के कॉम्बीनेशन को लेकर अधिक से अधिक रोगियों के साथ एक बड़ा परीक्षण किया जाए।

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कोरोना वायरस का ट्रीटमेंट ढूंढने के लिए की जा रही इस स्टडी में नीचे बताए ट्रीटमेंट पर शोध किया जा रहा है:

कोरोना वायरस के इलाज के लिए की जा रही इस स्टडी में हिस्सा लेना बहुत आसान है। किसी व्यक्ति को अगर कोरोना वायरस की पुष्टी होती है तो उसका चिकित्सक मरीज की जानकारी डब्लूएचओ की वेबसाइट पर अपडेट कर सकता है। यदि मरीज को कोई अन्य बामारी है जैसे एचआईवी या मधुमेह तो इसे भी उसकी डिटेल में शामिल करना होगा क्योंकि इससे दवा में बदलाव किया जा सकता है। इस स्टडी में हिस्सा लेने वाले मरीज को एक सूचित सहमति फॉर्म पर हस्ताक्षर करना होता है जिसे स्कैन किया जाता है और इलेक्ट्रॉनिक रूप से डब्ल्यूएचओ को भेजा जाता है। इसके बाद आपका चिकित्सक इस बात की जानकारी भेजता है कि उसके अस्पताल में कौन सी दवाएं उपलब्ध हैं। वेबसाइट रोगी को उपलब्ध दवाओं में से दवा रिकमेंड करेंगे।

रेमडेसिविर (Remdesivir)

इबोला से लड़ने के लिए इस दवा का इजाद किया गया था। हालांकि, इबोला के इलाज में इसे सफल नहीं पाया गया था। इस दवा को गिलीड साइंस द्वारा बनाया गया था। जानवरों पर किए गए एक शोध में इस दवा को कोरोना वायरस के इलाज में कुछ हद तक उपयोगी पाया गया है। दुनियाभर में शोधकर्ता कोरोना वायरस के मरीजों पर इस दवा परीक्षण कर रहे हैं। यूएस में कोरोना वायरस के एक पेशेंट में रेमडेसिविर देने से सुधार पाया गया। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के अनुसार, कैलिफोर्निया में एक पेशेंट जिसकी बच पाने की उम्मीद बहुत कम थी। रेमडेसिविर देने पर उसकी स्थिति में सुधार देखने को मिला। हालांकि ऐसे कुछ व्यक्तिदत मामलों से यह साबित नहीं होता है कि यह दवा सभी के लिए सुरक्षित और प्रभावी है।

जियांग शिबो, जिन्होंने लंबे समय तक कोरोनो वायरस चिकित्सा पर काम किया है, कहते हैं- इस दवा की उच्च खुराक दी जा सकती है।

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कोरोना वायरस के इलाज के लिए क्लोरोक्वीन और हाइड्रो क्लोरोक्वीन (chloroquine and hydroxychloroquine)

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान मलेरिया रोधी दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रो क्लोरोक्वीन को कोरोना वायरस से निपटने में संभावित गेमचेंजर बताया। उन्‍होंने कहा कि इसके प्रारंभिक परीक्षण में बहुत उत्‍साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इसके परिणामों को देखते हुए कोरोना जैसे महामारी से निपटने में यह बेहद कारगर हो सकती है।

लोपिनाविर/रिटोनाविर (lopinavir and ritonavir)

इस ड्रग के कॉम्बीनेशन को यूएस ने एचआईवी इंफेक्शन के लिए बनाया था। कोरोना वायरस के इलाज के लिए यह दवा कितनी कारगर है इसके लिए दुनियाभर के शोधकर्ता अनुसंधान कर रहे हैं। एचआईवी दवाओं का कॉम्बीनेशन कोरोना वायरस के लिए कितना प्रभावशाली है इसके नतीजे आने बाकी हैं।

लोपिनवीर और रीटोनेवीर प्लस इंटरफेरॉन बीटा (HIV Drugs lopinavir and ritonavir plus interferon-beta)

लोपिनवीर और रटनवीर इंटरफेरॉन बीटा का संयोजन देकर भी कोरोना के इलाज को लेकर शोध किया जा रहा है। सबसे पहले सऊदी अरब में यह कॉम्बीनेशन दिया गया। लेकिन कोरोना वायरस के गंभीर मामलों में इंटरफेरॉन बीटा खतरनाक बताई गई है। हेरोल्ड के अनुसार, अगर कोरोना के गंभीर मामलों में इंटरफेरॉन दी जाती है तो इससे मरीज की हालत और भी ज्यादा खराब हो सकती है।

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