कोरोना वायरस की दवा : डेक्सामेथासोन (dexamethasone) साबित हुई जान बचाने वाली पहली दवा

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अपडेट डेट जून 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना वायरस की मार झेल रही पूरी दुनिया में कई देश कोरोना की दवा ढूंढने में लगे हैं। कई देशों में तरह-तरह की दवाओं पर क्लिनिकल ट्रायल भी चल रहे हैं। ऐसे में यूनाइटेड किंगडम में सस्ती और हर जगह मिलने वाली दवा डेक्सामेथासोन कोविड-19 से गंभीर रूप से संक्रमित पेशेंट्स की जान बचाने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम मात्रा में इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी की तरह सामने आया है। दरअसल, डेक्सामेथासोन नामक दवा को कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को कम करने में मददगार माना गया है, जिसने वैश्विक स्तर पर 430,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है।

डेक्सामेथासोन (dexamethasone) से 35 फीसदी घटी मृत्युदर

रिसर्च की माने तो फर्स्ट कोरोना वायरस ड्रग के रूप में देखी जाने वाली इस दवा को 2104 संक्रमित मरीजों को दिया गया। इन कोरोना पॉजिटिव मरीजों की तुलना साधारण तरीके से इलाज किए जा रहे दूसरे मरीजों से की गई जिनकी संख्या 4321 थी। कोरोना के इलाज के तौर पर वेंटीलेटर के साथ कोरोना ट्रीटमेंट करा रहे मरीजों को डेक्सामेथासोन (dexamethasone) दी गई जिससे मृत्यु दर 35 फीसदी तक घट गई।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक स्टडी लीडर पीटर हॉर्बी ने कहा, “कोरोना की दवा के रूप में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल और प्रभावशीलता काफी अच्छे रिजल्ट्स दे रही है। ऑक्सीजन ट्रीटमेंट (oxygen treatment) की आवश्यकता योग्य संक्रमित मरीजों में डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल को अब देखभाल का एक मानक बनना चाहिए। डेक्सामेथासोन सस्ती दवा है और दुनिया भर में कोरोना संक्रमित लोगों की जान बचाने के लिए तुरंत इस्तेमाल की जा सकती है। ”

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अधिक जोखिम वाले पेशेंट्स के लिए मददगार डेक्सामेथासोन

कोरोना  के ऐसे मरीज हैं, जिन्हें ऑक्सीजन या फिर वेंटिलेटर की जरुरत पड़ रही है या जिन संक्रमित लोगों को अधिक जोखिम है, उनके लिए यह दवा काफी प्रभावी नजर आ रही है। स्टेरॉयड दवाएं सूजन को कम करती हैं, जो कभी-कभी कोविड-19 के रोगियों में विकसित होती है क्योंकि प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए रिएक्ट ज्यादा करती है। यह ओवर रिएक्शन खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए डॉक्टर ऐसे रोगियों में स्टेरॉयड और अन्य एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं का परीक्षण कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के दौरान पहले स्टेरॉयड का उपयोग करने की सलाह का विरोध करता है क्योंकि यह रिकवरी को धीमा कर सकती हैं। आपको बता दें कि इस दवा का इस्तेमाल पहले से ही सूजन को कम करने में किया जाता रहा है और अब ऐसा लगता है कि यह कोरोना वायरस से लड़ने में शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी मददगार साबित हो रही है। हालांकि, दवा की ज्यादा डोज खतरनाक हो सकती है।

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क्या कहती है रिसर्च?

रिकवरी ट्रायल से पता चलता है कि परीक्षण की गई खुराक पर, स्टेरॉयड उपचार के लाभ संभावित नुकसान से कहीं आगे हैं। अध्ययन में पाया गया कि ट्रीटमेंट से इसका कोई प्रतिकूल घटना नहीं हुई। हॉर्बी का मानना है कि “यह कोरोना उपचार किसी को भी दिया जा सकता है। जब मरीज वेंटिलेटर पर होता है, तो आमतौर पर यह होता है कि मरीज एक असामान्य या हाइपरएक्टिव इंफ्लेमेटरी रिस्पांस देने लगता है जो किसी भी डायरेक्ट वायरल इफेक्ट के रूप में मृत्यु दर में योगदान देता है।”

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शोध में शामिल एक दूसरे रिसर्चर प्रोफेसर मार्टिन लैंड्रे का कहना है कि इस कोरोना की दवा के तौर पर डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल और वेंटिलेटर के सहारे हर आठ में से एक मरीज की लाइफ बचाई जा सकती है और जो मरीज ऑक्सीजन पर हैं उनमें से करीब 20-25 मरीजों में से एक की जान बचा सकते हैं।

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दवा भी है सस्ती

रिसर्चर मानना है कि “यह साफ तौर पर तय है कि डेक्सामेथासोन कोरोना मरीजों को मदद पहुंचाने वाली दवा है। इसके साथ ही डेक्सामेथासोन सस्ती भी है। एक कोरोना संक्रमित मरीज पर दस दिन के इलाज पर करीबन पांच सौ से भी कम रूपए खरचने पड़ते हैं। यह दवा हर जगह आसानी से मिल भी जाती है।” हालांकि जिन मरीजों में कोरोना के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, उनको यह दवा कोई मदद नहीं पहुंचाती है।

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कोरोना की दवा का ट्रायल

कोरोना की दवा पर चल रहे ट्रायल में मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन भी एक थी। इस महीने की शुरुआत में पता चला कि मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना वायरस के खिलाफ काम नहीं कर रही थी। साथ ही इसकी वजह से हार्ट प्रॉब्लम्स बढ़ने की संभावना रहती है। इस दवा के अध्यन में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के करीबन 11,000 से अधिक रोगियों को शामिल किया गया। इन्हें या तो केयर स्टैंडर्ड्स दिए गए या फिर कई उपचारों में से एक: डेक्सामेथासोन; एचआईवी कॉम्बो दवा लोपिनवीर-रटनवीर , एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन; एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा टोसिलिज़ुमाब (tocilizumab) प्लाज्मा थेरेपी दी गई। पीटर बेली की माने तो अभी निष्कर्षों में अन्य गंभीर श्वसन बीमारियों को लेकर और शोध जारी हैं। क्योंकि कोरोना के इलाज के लिए स्टेरॉयड ट्रीटमेंट अब भी विवादास्पद हैं। माना जाता है कि स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल से एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (acute respiratory distress syndrome) नामक स्थिति पैदा हो सकती है।

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कोरोना की दवा, वैक्सीन और अन्य उपचारों पर अभी भी कई शोध जारी है। तब तक आप खुद की सेफ्टी का पूरा ध्यान रखें। कोरोना संक्रमण के इलाज से बेहतर इससे बचाव करना है। इसलिए, सोशल डिस्टेंसिंग (social distancing) का पूरा ध्यान रखें जितना हो सके घर में ही रहें। इसके साथ ही पर्सनल हाइजीन को मेंटेन रखें।

अगर आप कोरोना वायरस से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइसइलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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