क्या एक ही व्यक्ति को दोबारा हो सकता है कोरोना वायरस का संक्रमण?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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विज्ञान की माने तो एक बार किसी वायरस के संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि उस वायरस से लड़ना सीख जाती है, जिससे दूसरी बार वह व्यक्ति संक्रमित नहीं होता। कोरोना वायरस को लेकर भी शोधकर्ताओं का अंदाजा यह ही था। उनका कहना था कि कोरोना से संक्रमित मरीज एक बार ठीक हो जाए तो यह वायरस दोबारा उस शख्स को नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। लेकिन कोविड-19 से ठीक होने वाले कई मरीजों के ताजा टेस्ट पॉजिटिव आए हैं, जिसे देख हर डॉक्टर हैरान हैं। इन ताजा रिपोर्ट को देखते हुए यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस दूसरे  संक्रमण से अलग है।

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दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित होने को लेकर क्या कहती हैं पुरानी स्टडीज

कई स्टडीज के अनुसार एक बार वायरस के खिलाफ शरीर एंटीबॉडीज बना लेती है, जिससे भविष्य में उस वायरस से बचा जा सकता है। एंटीबॉडी का सीधा नाता शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता से होता है। यह हमें वायरस से लड़ने के लिए मजबूत बनाने का काम करती है। कोरोना वायरस की फैमिली के ही वायरस सार्स और मार्स में भी एक ही व्यक्ति को दोबारा संक्रमण की चपेट में आते नहीं देखा गया था। हालांकि चीन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मरीजों के ठीक होकर अस्पताल से डिसचार्ज किए जाने के बाद कुछ लोगों में फिर से संक्रमण पाया गया है।

जापान के समाचार टेलीविजन चैनल एनएचके के अनुसार, 70 वर्षीय इस व्यक्ति को फरवरी में कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था। इसके बाद उन्हें टोक्यो के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों में वह पूरी तरह ठीक हो गए और उनकी रिपोर्ट्स नेगेटिव आने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। कुछ दिनों उन्होंने घर पर आराम किया। इसके बाद वह सामान्य दिनचार्य में लौट गए। लेकिन कुछ दिन के बाद उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई। उन्हें बुखार आया जिसके बाद उन्हें फिर से अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया, जिसे देख सभी डॉक्टर हैरान हो गए।

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14 प्रतिशत मामलों में दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि कोविड-19 से संक्रमित 14.5% लोगों में अस्पताल से डिसचार्ज होने के बाद दोबारा कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया। इस अध्ययन को चीन के पीएलए जनरल अस्पताल और अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया था। इसमें 262 लोगों में से 38 मामले ऐसे देखने को मिले जिनमें मरीज के ठीक होने के दो हफ्तों बाद दोबारा इस वायरस से संक्रमित पाया गया।

दोबारा कोरोना वायरस होने को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

कोरोना वायरस के संक्रमण से एक बार ठीक हो जाने के बाद दोबारा अटैक करने की बात जानकर वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। यह एक नया वायरस है। इसलिए दुनियाभर के वैज्ञानिक इसके व्यवहार को समझने की कोशिश में जुटे हुए हैं। वहीं कई रिसर्चर्स इस बात को समझने में लगे हैं कि यह वायरस शरीर में कैसे इतनी जल्दी वापस लौट आता है। कोविड-19 संक्रमित पेशेंट्स का इलाज कर रहे डॉक्टर्स का मानना है कि जिन लोगों के कोविड 19 वायरस का टेस्ट एक बार फिर पॉजिटिव आया है। इसके पीछे का कारण यह हो सकता है कि उनके शरीर से वायरस पूरी तरह खत्म ही न हुआ हो। साथ ही जब उनमें रोग प्रतिरोधक शक्ति कम हो रही हो तो यह वायरस फिर से शरीर में अटैक बोल रहा हो।

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लुई एखुआनेस स्पेनिश नेशनल सेंटर फ़ॉर बायोटेक्नोलॉजी (सीएसआईसी) ने कोरोना वायरस के दोबारा होने को लेकर बीबीसी से बात करते हुए बताया- उन लोगों में फिर से वायरस संक्रमण नहीं हुआ है बल्कि वही वायरस फिर से उनके शरीर में खुद को बढ़ा रहा है। मेडिकल विज्ञान में इसे ‘बाउंसिंग बैक’ कहते हैं। उन्होंने आगे कहा- मेरा मानना है कि हो सकता है कि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति कोरोना वायरस से हमेशा के लिए लड़ने के लिए तैयार नहीं हो पाती और जैसे ही व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति जरा कमजोर पड़ती है पहले से शरीर में मौजूद वायरस शरीर पर हमला कर देता है।

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दोबारा कोरोना वायरस होना है ज्यादा खतरनाक

येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के अनुसार एक बार होने के बाद दोबारा कोरोना वायरस की चपेट में आना ज्यादा घातक साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मरीज की इम्यूनिटी को बिल्कुल खत्म कर देता है। इसलिए लोगों को इस वायरस से ठीक होने के बाद भी आइसोलेशन में रहना चाहिए। जिन लोगों में इसके लक्षण बिना किसी दवा के दूर हो जाते हैं उन्हें भी कम से कम तीन दिन तक आइसोलेशन में रहना चाहिए।

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दोबारा कोरोना वायरस होने को लेकर ये सावधानी बरतने की जरूरत है

कोविड-19 पर स्टडी कर रहे रिसर्चर्स की मानें तो कोविड-19 के मरीजों के ठीक हो जाने पर भी उन्हें ज्यादा समय के लिए आइसोलेशन में रखना चाहिए। इस दौरान उनके जरूरी चेकअप किए जाए। आमतौर पर देखा गया है कि कोरोना पेशेंट्स को 14 दिनों की निगरानी में रखा जाता है, लेकिन मौजूद हालात को देखते हुए आइसोलेशन के समय को बढ़ाने की जरूरत है। इससे अगर उन लोगों में कोरोना वायरस है भी तो वो दूसरों तक न पहुंचे। हम सभी जानते हैं कि यह वायरस नया है। इसके बारे में फिलहाल कोई पर्याप्त जानकारी नहीं है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल दोबारा संक्रमण के कारणों के बारे में  कुछ भी कहना हमारे लिए मुश्किल होगा। इसलिए सावधानी और बचाव ही इसका अभी एकमात्र उपाय है।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में रोगियों द्वारा दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित होने से जुड़ी जानकारी दी गई है। यदि आपका इससे जुड़ा कोई सवाल है तो आप कमेंट कर पूछ सकते हैं। हम आपके प्रश्न के उत्तर देने की पूरी कोशिश करेंगे। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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