कोरोना वायरस के शिकार लोगों पर होता है ऐसा असर, रिसर्च में सामने आई ये बातें

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Update Date मई 7, 2020
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नोवेल कोरोना वायरस का प्रकोप अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। भरत में भी इसके तीन आधिकारिक मामले सामने आने से लोगों में डर बढ़ गया है। नोवेल कोरोनावायरस (2019-nCov) को लेकर लोगों के मन में अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, हर देश का स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार नोवेल कोरोना वायरस के बारे में लोगों को जागरुक कर रहा है। अभी भी कोरोना वायरस के असर कैसा है या इससे संक्रमित होने के बाद मरीज को क्या-क्या समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसके बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन, अब कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों पर अध्ययन किया गया है, जिसमें कोरोना वायरस के असर को लेकर कुछ बातें सामने आई हैं।

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कोरोना वायरस के असर पर अभी तक की अपडेट

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नोवेल कोरोना वायरस का केंद्र चीन के वुहान शहर में मौजूद है। जिसकी वजह से चीन को इससे सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट यानी सिच्युएशन रिपोर्ट-21 में बताया गया है कि, नोवेल कोरोना वायरस के अबतक दुनियाभर में 40554 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और इससे अभी तक दुनियाभर में 910 मौतें हो चुकी हैं। इन आंकड़ों में से 40235 मामलें सिर्फ चीन में दर्ज हुए हैं और 909 लोगों की जान जा चुकी है। डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 97 मौतें दर्ज की गई हैं। जिससे साफ पता चलता है कि अभी भी इस संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है। इसके साथ ही कई देश अभी भी नोवेल कोरोना वायरस का इलाज ढूंढ रहे हैं।

कोरोना वायरस के असर और नोवेल कोरोना वायरस की गंभीरता

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नोवेल कोरोना वायरस विभिन्न वायरस की फैमिली से संबंध रखता है, जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर गंभीर रेस्पिरेटरी डिजीज का कारण बनता है। यह वायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम; सार्स और मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम ; मर्स आदि जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है। डब्ल्यूएचओ की हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम में डॉ. मारिया वान केरखोव ने बताया कि, ‘यह वायरस रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट की कई समस्याएं पैदा करता है। जिसकी वजह से माइल्ड कंडीशन, सीवियर कंडीशन और क्रिटिकल कंडीशन दिख सकते हैं। हालांकि, अभी तक हमने 17000 मामलों का आंकड़ा इकट्ठा किया है, जिसमें से कोरोना वायरस के असर को देखने पर पता चला है कि करीब 82 प्रतिशत मामलों में माइल्ड कंडीशन है। वहीं, सीवियर कंडीशन के 15 प्रतिशत और क्रिटिकल कंडीशन के 3 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए हैं।‘ उनका कहना है कि, इस वायरस से गंभीर निमोनिया के लक्षण से लेकर मल्टी ऑर्गन फेलियर और मौत तक हो सकती है।

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कोरोना वायरस के असर पर क्या कहती है रिसर्च?

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संक्रमित व्यक्तियों पर कोरोना वायरस के असर को देखने के लिए 138 संक्रमित मरीजों पर अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन यानी जामा (Journal of American Medical Assosication; JAMA) में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में देखा गया है कि नोवेल कोरोना वायरस के असर में सबसे आम बुखार, थकान और सूखी खांसी के लक्षण शामिल हैं। इसके बाद कोरोना वायरस के असर में एक तिहाई मरीजों को मसल्स पेन और सांस लेने में दिक्क्त का सामना करना पड़ा है। जबकि करीब 10 प्रतिशत संक्रमित लोगों में डायरिया और जी मिचलाने की समस्या देखी गई है।

जामा ने आगे बताया कि, कोरोना वायरस के असर की वजह से संक्रमित होने वाले अधिकतर लोगों को डायबिटीज या हाइपरटेंशन की समस्या पहले से है और इसके अधिकतर मामले 49 वर्ष से 56 वर्ष के लोगों में देखे गए हैं। बच्चों में अभी भी कम मामले शामिल हैं। इस अध्ययन में सामने आया है कि, कोरोना वायरस के असर की वजह से 138 मरीजों में से 6 मरीजों की मौत हो गई है।

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एक अन्य स्टडी में सामने आया है कि, इस वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों में कोरोना वायरस के असर की वजह से साइटोसाइन स्टॉर्म की स्थिति देखी गई है। यह एक गंभीर इम्यून रिएक्शन की स्थिति होती है, जिसमें शरीर इम्यून सेल्स और प्रोटीन का उत्पादन करता है, जो अन्य शारीरिक अंगों को क्षतिग्रस्त करता है। जामा के मुताबिक, कोरोना वायरस के असर की वजह से लक्षण दिखने के 5 दिनों के भीतर सांस फूलने की समस्या और 8 दिनों के भीतर सांस संबंधित गंभीर समस्याएं देखी गई हैं।

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14 दिनों के अंदर मौत

अन्य दो जर्नल में बताया गया है कि, अध्ययन में शामिल मरने वाले लोगों की मृत्यु बीमारी की शुरुआत के 14 दिनों के भीतर हुई है। वहीं, एक 35 वर्ष की उम्र के मरीज पर कोरोना वायरस के असर को लेकर हुए अध्ययन में देखा गया है कि, सबसे पहले उसमें बुखार के साथ सूखी खांसी के लक्षण देखे गए। बीमारी के तीसरे दिन मरीज को जी मिचलाने और उल्टी की समस्या का सामना करना पड़ा और इसके छठे दिन तक डायरिया और पेट में दर्द भी होने लगा। इसके बाद नौवें दिन तक मरीज को निमोनिया की बीमारी हुई और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हालांकि, 12वें दिन तक आते-आते उसकी स्थिति में सुधार हुआ और बुखार कम होने लगा और 14वें दिन तक उसमें कोरोना वायरस के असर की वजह से सिर्फ माइल्ड खांसी दर्ज की गई।

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कोरोना वायरस के असर और भारत सरकार की एडवाइजरी

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने नोवेल कोरोना वायरस के असर और इसके प्रति असमंजस की स्थिति को बढ़ते देखते हुए एक एडवाइजरी जारी की थी। जिसमें, भारतीय नागरिकों को कुछ स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी दी गई हैं। जो कि, खासकर चीन या चीन के वुहान शहर या उसके आसपास या फिर कोरोना वायरस के मामले पाए गए दूसरे देशों में यात्रा करने वाले लोगों के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा, अन्य भारतीय नागरिकों को भी इन एहतियातों को बरतने के बारे में सुझाव दिया गया है। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी कुछ इस प्रकार है-

  1. कोरोना वायरस के असर और खतरे से बचाव के लिए भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि आप जब भी घर से बाहर निकलें तो मुंह पर मास्क का प्रयोग करके निकलें।
  2. इसके अलावा, चीन की यात्रा करने वाले लोग अपने स्वास्थ्य के बारे में बारीकी से नजर रखें और उसमें जरा-सा भी बदलाव आने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।
  3. अगर चीन या उसके आसपास के देशों की यात्रा करने के दौरान या उसके बाद आपको छींक, खांसी, बुखार या शारीरिक थकान महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें।
  4. यदि चीन जा रहे हैं या उससे आ रहे विमान में किसी भी नागरिक की तबियत खराब हो, तो इसकी सूचना तुरंत एयरहोस्टेस को दें और उससे मास्क लें। इसके बाद एयरपोर्ट हेल्थ अथॉरिटी से संपर्क करें।
  5. घर से बाहर जाने पर अपने साथ ताजा खाना रखें और बाहर का खाना न खाएं।
  6. किसी से भी हाथ मिलाने से बचें और यदि जरूरी भी है तो हाथ मिलाने के बाद हाथों को साबुन से धोएं।
  7. छींक या खांसी आने पर मुंह को ढक लें।
  8. खांसी और छींक से परेशान मरीज से थोड़ी एहतियात के साथ मिलें या जिसकी तबियत ठीक न हो उससे दूरी बनाकर रखें।
  9. जानवरों के संपर्क से दूर रहें और मीट का सेवन भी कम करें।
  10. किसी भी तरह के जानवरों के फार्म, पशुओं के बाजार और बूचड़खाने में जाने से बचें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार मुहैया नहीं कराता।

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