डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के खतरे को कैसे करें कम?
नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार कोरोनरी आर्टरी का खतरा (Coronary artery disease) डायबिटीज के मरीजों में सबसे ज्यादा डायग्नोस किये जाते हैं। अगर सामान्य शब्दों में समझें तो कोरोनरी आर्टरी डिजीज का अर्थ है दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा। इसलिए आज इस आर्टिकल में डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा (Diabetes and coronary artery disease) एवं इससे जुड़े सभी पहलुओं को समझेंगे, लेकिन सबसे पहले डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के बारे में संक्षेप पर समझ लेते हैं।
डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा: क्या है डायबिटीज (Diabetes) की समस्या?
मधुमेह एक ऐसी शारीरिक परेशानी है, जिसमें शरीर में मौजूद ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) इमबैलेंस हो जाता है। जब किसी खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद फूड डायजेस्ट होने लगता है उससे मानव शरीर को ग्लूकोज मिलता है, जिससे बॉडी को एनर्जी मिलती है। वहीं अगर शरीर में इन्सुलिन (Insulin) मौजूद ना हो, तो वो अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाती है और ब्लड से सेल्स तक ग्लूकोज नहीं पहुंच पाता है। ऐसी स्थिति होने पर ग्लूकोज ब्लड में इकट्ठा होने लगता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार ब्लड में ग्लूकोज (Glucose) अगर इकट्ठा होने लगे तो यह शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। मधुमेह यानी डायबिटीज (Diabetes) 3 अलग-अलग प्रकार के होते हैं। जैसे: टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes), टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) एवं जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes)।
डायबिटीज टाइप 1 (Diabetes Type 1)- जब शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन करने वाली सेल्स नष्ट हो जाती हैं, तो ऐसी स्थिति टाइप 1 डायबिटीज की ओर इशारा करती है।
डायबिटीज टाइप 2 (Diabetes Type 2)- जब शरीर में इन्सुलिन (Insulin) का निर्माण ना हो सके या इन्सुलिन कोशिकाओं के साथ रिएक्ट ना कर सके, तो ऐसी स्थिति टाइप 2 डायबिटीज की ओर इशारा करती है।
जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes)- गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर लेवल बढ़ना जेस्टेशनल डायबिटीज कहलाती है।
आर्टिकल में आगे बढ़ते हैं और डायबिटीज के बाद कोरोनरी आर्टरी डिजीज को समझने की कोशिश करते हैं।
डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा: कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Diabetes and coronary artery disease) क्या है?
कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) को अगर सामान्य शब्दों में समझें, तो हार्ट तक ब्लड सप्लाय ठीक तरह से नहीं हो पाना। ऐसी स्थिति तब होती है जब आर्टरी में किसी भी कारण ब्लॉकेज की समस्या शुरू हो जाए। डायबिटीज के मरीजों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा अत्यधिक होता है। इसलिए आर्टिकल में डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा (Diabetes and coronary artery disease) क्यों होता है इस बारे में समझेंगे।
डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा: क्यों हो सकती दिल (Heart) से जुड़ी समस्या?
डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा यानी हार्ट डिजीज का आपस में गहरा रिश्ता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज पेशेंट को हार्ट डिजीज एवं स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। दरअसल डायबिटीज के मरीजों में हार्ट डिजीज (Heart disease) हमेशा कोरोनरी आर्टरी (Coronary Artery) से ही शुरू होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ब्लड सप्लाय करने वाली धमनियों में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) जमा होने लगता है, जिससे आर्टरी सख्त होने लगती है और ब्लॉकेज की समस्या शुरू हो जाती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा (Diabetes and coronary artery disease) सबसे ज्यादा होता है। एक आंकड़े के मुताबिक 70 प्रतिशत डायबिटीज पेशेंट्स में ब्लॉकेज की समस्या देखी जाती है। हालांकि ऐसा नहीं है कि डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा हमेशा बना ही रहेगा। इसके लिए इसके लक्षणों को ध्यान में रखकर और डॉक्टर से समय-समय पर कंसल्टेशन से निजात पाया जा सकता है।
डायबिटीज के मरीजों को फिजिकल एक्टिविटी (Physical activity) जरूर करना चाहिए।
ब्लड शुगर के मरीजों को डॉक्टर से सलाह लेकर इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) और स्ट्रेस टेस्ट (Stress test) समय-समय पर करवाना चाहिए।
एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा स्मोकिंग (Smoking) ना करें और थर्ड हैंड स्मोकिंग (Third Hand Smoking) से भी बचें।
डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब्ड मेडिसिन (Medication) को समय-समय पर लेना चाहिए।
इन 5 बातों को जरूर ध्यान रखना चाहिए, जिससे डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा टल सके।
देखा जाए, तो पिछले कुछ सालों से डायबिटीज यानी ब्लड शुगर (Blood sugar) की समस्या पूरी दुनिया में एक बड़ी शारीरिक समस्या बनती जा रही है। दुनिया की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा इस बीमारी से पीड़ित है। वहीं अलग-अलग रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार यह भी साफ है कि डायबिटीज की वजह से कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) का भी खतरा बना रहता है। इसलिए इन गंभीर बीमारियों से खुद को दूर रखें।
अगर आप डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा (Diabetes and coronary artery disease) ना हो, इसलिए इससे जुड़ी किसी तरह की कोई जानकारी पाना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब देंगे। हालांकि अगर आप डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Diabetes and coronary artery disease) की समस्या से परेशान हैं, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करें। क्योंकि डॉक्टर ब्लड शुगर (Blood sugar) यानी डायबिटीज की समस्या को ध्यान में रखकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज का इलाज शुरू करते हैं।
डायबिटीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा (Diabetes and coronary artery disease) ना हो, इसलिए हेल्दी डायट (Healthy diet) फॉलो करना बेहद जरूरी है। डॉक्टर से द्वारा प्रिस्क्राइब्ड ड्रग्स भी समय पर लें और नियमित योगासन करें। योग के फायदे और करने का तरीका जानिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक में।
बीएमआई कैलक्युलेटर
डिस्क्लेमर
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