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Gestational diabetes: जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना है कितना कठिन? इन बातों को न करें इग्नोर!

Gestational diabetes: जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना है कितना कठिन? इन बातों को न करें इग्नोर!

जेस्टेशनल डायबिटीज के मतलब प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज से है। गर्भवस्था के दौरान महिलाओं में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की समस्या हो जाती है, जिसे जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes) के नाम से जाना जाता है। महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज के कारण शुगर का लेवल अनियंत्रित हो जाता है। अगर बीमारी का इलाज समय पर न कराया जाए, तो मां के साथ ही बच्चे को भी खतरा बढ़ सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मां को डायबिटीज की समस्या होने पर होने वाले बच्चे में भी डायबिटीज की संभावना बढ़ जाती है। जानिए जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना (Gestational diabetes) कितना कठिन हो सकता है।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज के लॉन्ग टर्म कॉम्प्लीकेशन में शामिल हो सकती हैं ये समस्याएं!

जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना (Gestational diabetes) महिलाओं के साथ एक साथ कई मुसीबतों को जन्म देता है। जानिए गर्भवस्था में डायबिटीज होने पर क्या लक्षण दिख सकते हैं।

ग्लूकोज प्रॉडक्शन और रिलीज के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें ये 3 डी मॉडल-

और पढ़ें: डायबिटिक अटैक और इमरजेंसी : इसके लक्षणों को न करें अनदेखा…..

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना: जानिए किसको रहता है अधिक रिस्क

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना (Gestational diabetes) वाकई महिला के मुश्किल रहता है। कुछ महिलाओं में इसका अधिक खतरा रहता है। जानिए किन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा रहता है।

  • अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं।
  • अगर आपको पहले भी मधुमेह हो चुका है।
  • अगर पहली प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को ज्यादा वजन का बच्चा पैदा हुआ है।
  • परिवार में किसी को (माता-पिता या भाई-बहन) डायबटीज की समस्या रही हो।

जेस्टेशनल डायबिटीज के क्या हैं पॉसिबल कॉम्प्लीकेशंस (Possible complications)

जेस्टेशनल डायबिटीज के कारण महिलाओं में कई तरह कॉम्प्लीकेशंस हो जाते हैं, जिसके कारण महिलाओं को डिलिवरी के समय समस्याओं का सामना करना पड़ता है। डायबिटीज के कारण हाय ब्लड शुगर की समस्या कई समस्याओं को जन्म दे सकती है। कुछ समस्याएं जैसे कि इंड्यूस्ड लेबर (Induced labour), सी-सेक्शन ( C-section), बेबी का साइज बड़ा होना, बच्चे में लो ब्लड शुगर लेवल होना, बच्चे का ओवरवेट होना या फिर मोटा होना आदि कॉम्प्लीकेशंस जुड़े हो सकते हैं। कुछ केसेज में डिलिवरी के दौरान बच्चे की मौत भी हो सकती है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान ही ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर लिया जाए, प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज से संबंधित कॉम्प्लीकेशंस को नियंत्रित किया जा सकता है।

और पढ़ें: डायबिटीज टाइप 2 में मेडिकेशन, ध्यान रखें इन बातों का….

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना: ब्लड शुगर करना है कंट्रोल, तो टेस्ट कराएं जरूर

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना (Gestational diabetes) आपके लिए कई मायनों में कठिन हो सकता है। अगर आपको ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखना है, तो समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच जरूर कराएं। ऐसा करने से ब्लड शुगर के लेवल के बारे में जानकारी मिलती रहेगी और दवाओं या फिर इंजेक्शन के माध्यम से ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी। आप घर पर भी टेस्ट कर सकते हैं। आपको इसके लिए जरूरी जानकारी डॉक्टर से प्राप्त करनी होगी। आपको टेस्ट स्ट्रिप में ब्लड की कुछ बूंदे डालने की जरूरत होती है। आप टेस्ट के बाद ग्लूकेज के लेवल के बारे में डॉक्टर को बता सकती हैं। डॉक्टर फिर आपको उचित सावधानी बरतने की सलाह देंगे।

गर्भावस्था के दौरान महिला को डायबिटीज होने पर डॉक्टर उसे इंसुलिन इंजेक्शन (insulin injection) लेने की सलाह भी दे सकते हैं। जेस्टेशनल डायबिटीज (gestational diabetes) सभी महिलाओं को नहीं बल्कि कुछ ही महिलाओं को (10 से 20 प्रतिशत महिलाओं को) ब्लड शुगर (Blood sugar) को कंट्रोल करने की जरूरत होती है। अगर आपको भी प्रेग्नेंसी में डायबिटीज के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत इस संबंध में डॉक्टर से बात करें और अपना ट्रीटमेंट कराएं। इंसुलिन की आवश्यकता कुछ महिलाओं को पड़ सकती है। बिना डॉक्टर की सलाह के आपको प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित प्रेग्नेंट महिला को बच्चे के जन्म के बाद ब्लड शुगर चेक कराना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे में डायबिटीज या ब्लड शुगर के लेवल में परेशानी नहीं होगी।

और पढ़ें: डायबिटीज है! इन्सुलिन प्लांट स्टीविया का कर सकते हैं सेवन, लेकिन डॉक्टर के इजाजत के बाद!

जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना है मुश्किल, लेकिन ऐसे रख सकते हैं अपना ख्याल

प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज हमेशा रहेगी, ये जरूरी नहीं है। अगर आप अपने खानपान के साथ ही फिजिकल एक्टिविटी का भी ध्यान रखते हैं, तो डिलिवरी के बाद जेस्टेशनल डायबिटीज खत्म हो सकती है। अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान इस बीमारी का इलाज नहीं कराते हैं, तो आपको भविष्य में कई प्रकार की समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। खाने में हेल्दी और बैलेंस डायट को शामिल करें। उन फूड्स को खाने में न लाएं, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने की संभावना अधिक होती है। आपको खाने में फ्रेश फ्रूट्स के साथ ही वेजीटेबल्स, फाइबर युक्त आहार और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करना चाहिए।

  • आपको खानपान के साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान हल्की फुल्की एक्सरसाइज भी करनी चाहिए लेकिन आपको इस बारे में डॉक्टर से एक बार जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
  • आपको भूखा रहने की आवश्यकता नहीं है बल्कि खाने में पौष्टिक आहार को शामिल करने की जरूरत है।
  • समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं और डॉक्टर की ओर से दी गई दवाओं का रोजाना सेवन करें।
  • आपको पैक्ड फूड्स, प्रोसेस्ड फूड्स, बाहरी तले-भुने खाने से दूर रहने की जरूरत है।
  • आप डॉक्टर से जानकारी लें कि डेयरी प्रोडक्ट में क्या शामिल करना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए।
  • आप खाने में गुड फैट्स को शामिल कर सकती है लेकिन इस बारे में डॉक्टर से जरूर पूछें।

अगर आपका टेस्ट रिजल्ट नॉर्मल आया है, तो हो सकता है कि डॉक्टर आपको किसी तरह की दवा या इंसुलिन को लेने की सलाह न दे। ऐसे में आपको खानपान में अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। आपकी ओर से रखी गई थोड़ी सी सावधानी आपको बड़ी समस्या से बचा सकती है। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो डॉक्टर से डायबिटीज से संबंधित जरूरी प्रश्न पूछें और बताई गई सावधानियों को भी अपनाएं।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ रहना (Gestational diabetes) से संबंधित ये आर्टिकल पसंद आया होगा। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट a week ago को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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