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नींद में खर्राटे आते हैं, मुझे क्या करना चाहिए?

नींद में खर्राटे आते हैं, मुझे क्या करना चाहिए?

नींद आना सेहत के लिए अच्छे संकेत हैं। लेकिन हमेशा या कभी भी नींद आना सेहत की दृष्टिकोण से अच्छी बात नहीं है। वहीं, नींद में आने वाले खर्राटे (Snoring) से भी लोग परेशान रहते हैं। नई दिल्ली के टैक्सी ड्राइवर जोगिंदर शर्मा ने कुछ इसी तरह की परेशानी हमारे साथ साझा की है।

और पढ़ेंः नींद की दिक्कत के लिए ले रहे हैं स्लीपिंग पिल्स तो जरूर पढ़ें 10 सेफ्टी टिप्स

खर्राटे (Snoring) से जुड़ा सवाल

खर्राटे (Snoring)

जोगिंदर कहते हैं कि “मेरी उम्र 40 साल है। मैं दिन में अक्सर नींद महसूस होती है। कई बार तो मैं ट्रैफिक सिग्नल पर भी सो जाता हूं। मेरी पत्नी भी मेरे खर्राटे की शिकायत करती है। मैं इस समस्या से कैसे निजात पा सकता हूं?”

जवाब

जोगिंदर के इस सवाल के लिए हैलो स्वास्थ्य ने बैंगलोर के बनारघाटा रोड स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी के निदेशक डॉ. विवेक आनंद पेडेगल से बात की। डॉ. विवेक आनंद पेडेगल ने बताया कि खर्राटे जैसे लक्षण आमतौर पर ऐसे लोगों में देखने को मिलते हैं, जिन्हें सोते वक्त सांस लेने में परेशानी होती है। इसे स्लीप डिसऑर्डर ब्रीथिंग (Sleep Disorder Breathing) के नाम से जाना जाता है।

यह एक ऐसी परिस्थिति होती है जिसमें ऊपरी हवा में रुकावट महसूस होती है और इसकी वजह से हवा नाक द्वारा आसानी से पास नहीं हो पाती है। जब हम सोते हैं, तो हमारे शरीर का मसल टोन (Muscle Tone) कम हो जाता है। शरीर के लिए सही मात्रा में सांस लेने के लिए एयरवे (Airway) को फिर से खोलना होता है। इस वजह से खर्राटे आते हैं। जैसे ही सांस लेने की प्रक्रिया रुकती है वैसे ही खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जिसके कारण मरीज जाग जाता है और मस्तिष्क सांस लेने वाली मांसपेशियों को एयरवे को खोलने के लिए संदेश भेजना शुरू कर देता है। इस स्थिति में गहरी नींद सो पाना नामुमकिन होता है। यही कारण है कि मरीज दिन भर नींद महसूस करता है। ऐसे में खर्राटे की समस्या को दूर करने के लिए जोगिंदर को स्लीप स्पेशलिस्ट से परीक्षण कराना चाहिए।

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खर्राटे पर काबू कैसे पाएं? (Tips to control Snoring)

खर्राटों से राहत पाने के लिए आप नीचे बताए गए घरेलू उपाय अपना सकते हैं :

  • खर्राटों से राहत पाने के लिए शराब (Alcohol), गुटखा और सिगरेट (Cigarette) जैसे पदार्थों का सेवन बंद कर दें।
  • सोने का तरीका बदलने से भी फायदा होता है, क्योंकि कुछ लोगों को पेट के बल सोने की आदत होती है, इससे भी खर्राटे लगते हैं।
  • व्यायाम या योगा करने की आदत डालें। इससे वजन (Weight) कंट्रोल में रहेगा, जिससे खर्राटे आने की समस्या से निजात मिलती है।
  • थ्रोट एक्सरसाइज करने की आदत डालें।

खर्राटे की समस्या धीरे-धीरे बढ़ने से कोई नई स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से मिलें और अपनी समस्या बताएं और उनके द्वारा दी गई सलाह को फॉलो करें और स्वस्थ रहें।

और पढ़ेंः ज्यादा सोने के नुकसान से बचें, जानिए कितने घंटे की नींद है आपके लिए जरूरी

खर्राटे क्यों आते हैं?

निम्न स्थितियों के कारण सोते समय हो सकती है खर्राटे की समस्याः

छोटी गर्दन होने के कारण खर्राटे

ऐसे लोग जिनकी गर्दन सामान्य से छोटी होती है, कभी-कभी इस वजह से भी लोगों को खर्राटे आने की समस्या हो सकती है।

नाक की हड्डी में समस्या

नाक की हड्डी में किसी तरह की समस्या, जैसे- नाक की हड्डी बढ़ जाना या मांस बढ़ जाने की वजह से भी सांस लेने में परेशानी होने लगती है। जिसकी वजह से सोते समय खर्राटे (Snoring) की आवाज आने लगती है।

मुंह के जबड़े की बनावट के कारण खर्राटे

मुंह के जबड़े का निचला हिस्से अगर छोटा है, तो भी सोते समय खर्राटे आने की समस्या हो सकती है।

जरूरत से ज्यादा मोटापा

आमतौर पर देखा जाता है कि मोटे लोगों को सोते समस खर्राटे की समस्या अधिक होती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ना (Weight gain) भी खर्राटे की एक वजह होती है।

युवुला ज्यादा संकरा होने के कारण खर्राटे

जब युवुला (मुंह के अंदर पिछले हिस्से में लटका हुआ छोटा-सा हिस्सा) तक का हिस्सा संकरा हो जाता है, तो सांस लेने पर यह युवला वाइब्रेशन पैदा करता। इससे वायुमार्ग भी अवरुद्ध हो जाता है, जिस कारण खर्राटे आने लगते हैं।

और पढ़ेंः जानें क्या है गहरी नींद की परिभाषा, इस तरह से पाएं गहरी नींद और रहें हेल्दी

खर्राटे की वजह से सेहत को क्या नुकसान होते हैं? (Side effects of Snoring)

खर्राटों के कारण नीचे बताई गई स्वास्थ्य समस्याए हो सकती हैं:

साइनस (Sinus) की समस्या

साइनस की समस्या या नाक से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive Sleep Apnea) की समस्या

अगर खर्राटों की ओर ध्यान न दिया जाए, तो यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive Sleep Apnea [OSA]) की समस्या शुरू हो सकती है।

डायबिटीज का खतरा

टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) की समस्या हो सकती है।

ब्रेन से जुड़ी समस्याएं

कई बार खर्राटों की वजह से दिमाग पर भी असर पड़ता है। शरीर में ऑक्सिजन की मात्रा कम होने और कार्बनडाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से मस्तिष्क पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रोक्स की आशंका काफी बढ़ जाती है।

लाइफस्टाइल प्रभावित होना

रात में ठीक से न सोने के कारण आपको अगले दिन थकान महसूस होती है, जिससे आपका लाइफस्टाइल बिगड़ सकता है।

और पढ़ेंः नींद की गोलियां (Sleeping Pills): किस हद तक सही और कब खतरनाक?

क्या है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive Sleep Apnea [OSA])?

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (Obstructive Sleep Apnea [OSA]) एक ऐसी बीमारी है, जो नींद और सांस से जुड़ी होती है। इस बीमारी में जब भी आप सोते हैं, तो नाक का कुछ हिस्सा या पूरी नाक जाम हो जाती है। ऐसे में आप मुंह से सांस लेने लगते हैं, जिससे हवा के दबाव के कारण नाक से आवाज आने लगती है, जो खर्राटे (Snoring) का भी कारण बन सकता है। इसलिए आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग जब खर्राटे लेते हैं, तो उनका मुंह पूरा या आधा खुला होता है। इस बीमारी के कारण फेफड़ों को हवा बाहर निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण कई बार व्यक्ति की सांस तक रुक जाती है और व्यक्ति की जान भी जा सकती है।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Obstructive Sleep Apnea)

  • सोते समय तेज खर्राटे आना
  • नींद में बेचैनी महसूस करना
  • सोते समय दम घुटने लगना या सांस में रुकावट महसूस करना
  • सोते समय पसीना आना और सीने में दर्द महसूस करना
  • दिन में ज्यादा सोना और दिनभर सुस्त रहना
  • सुबह उठने के बाद सिर में दर्द होना
  • नींद से बार-बार पेशाब के लिए उठना
  • भरपूर नींद के बाद भी सुस्त और थका हुआ महसूस होना।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के अलावा सेंट्रल स्लीप एप्निया भी खर्राटे का कारण हो सकता है। सेंट्रल स्लीप एप्निया (Sleep Apnea) काफी गंभीर प्रकार की स्लीप एप्निया है। इस स्थिति में एयरवे ओएसए की तरह जाम तो नहीं होता है, लेकिन व्यक्ति का ब्रेन सांस लेने के लिए श्वसन मांसपेशियों को संकेत देने में असक्षम हो जाता है। जिसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। यह बीमारी के श्वसन नियंत्रण केंद्र में अस्थिरता के कारण होता है। अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Shayali Rekha द्वारा लिखित
अपडेटेड 07/11/2019
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