सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ को एसडीओएच (SDOH) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें एनवायरनमेंट में उन कंडिशंस को शामिल किया जाता है, जिसमें लोग जन्म लेते हैं, रहते हैं, काम करते हैं, खेलते आदि हैं। इन कंडिशंस से उनकी हेल्थ, फंक्शनिंग और क्वालिटी ऑफ लाइफ आउटकम्स और रिस्क की वाइड रेंज को प्रभावित होती है। जबकि, डायबिटीज वो समस्या है जिससे दुनिया की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित है। आज हम बात करने वाले हैं सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बीच के लिंक के बारे में। लेकिन, सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बीच के कनेक्शन से पहले सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ के बारे में और अधिक जान लेते हैं।
सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ (Social Determinants of Health) : पाएं जानकारी
ऐसा माना जाता है कि सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ (Social Determinants of Health) का लोगों की हेल्थ, वेल-बीइंग और जीवन की गुणवत्ता में बहुत गहरा इम्पेक्ट पड़ता है। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं:
- सुरक्षित हाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन और नेबरहुड
- रेसिज्म, डिस्क्रिमिनेशन और वायलेंस
- एजुकेशन, जॉब के अवसर और इनकम
- न्युट्रिशयस फूड्स के लिए एक्सेस और फिजिकल एक्टिविटी ऑपर्चुनिटी
- प्रदूषित हवा और पानी
- भाषा और लिटरेसी स्किल्स
सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ (Social Determinants of Health) वाइड हेल्थ डिस्परिटीज और इनक्वॉलिटीज में भी योगदान देती है। उदाहरण के लिए, जिन लोगों के पास हेल्दी फूड के साथ -साथ इन तक पहुंचने की सहूलियत नहीं है, उनमें अच्छे पोषण की संभावना कम होती है। इससे हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे जैसी स्वास्थ्य स्थितियों का खतरा बढ़ जाता है और हेल्दी फूड तक पहुंच रखने वाले लोगों की तुलना में लाइफ एक्सपेक्टेंसी भी कम हो जाती है। हालांकि,केवल हेल्दी चॉइसेस को बढ़ावा देने से ये और अन्य हेल्थ डिस्परिटीज (Health disparities) समाप्त नहीं होंगी। इसके साथ ही शिक्षा, परिवहन और आवास जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों और उनके पार्टनर्स को अन्प्रीविलिज्ड लोगों की स्थितियों को सुधारने के लिए एक्शन लेने की आवश्यकता है। अब सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes) से पहले जानिए डायबिटीज के बारे में।
डायबिटीज (Diabetes) क्या है जानिए
डायबिटीज एक मेटाबोलिक डिजीज हो हाय ब्लड शुगर का कारण बनती है। इंसुलिन नामक हॉर्मोन ब्लड से शुगर को आपके सेल्स में स्टोर या ऊर्जा के लिए उपयोग करने के लिए ले जाता है। डायबिटीज की स्थिति में, रोइ का शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है या वह जो इंसुलिन बनाता है उसका प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर सकता है। सही से अगर हाय ब्लड शुगर का इलाज न किया जाए तो इससे रोगी की नर्वज, आंखें, किडनी और अन्य अंग डैमेज हो सकते हैं। डायबिटीज के भी कई प्रकार हैं। जिनमें से टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) और टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) को मुख्य माना जाता है। हर तरह के डायबिटीज के यूनिक लक्षण, कारण और ट्रीटमेंट हो सकता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:
यह तो थी जानकारी डायबिटीज के बारे में। अब जानते हैं सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बारे में।
सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes )
सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ, डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए हेल्थ इक्विटी को अचीव करने के लिए जरूरी इंटरवेंशन टारगेट है। ऐसा माना जाता है डायबिटीज का असर अल्पसंख्यक और निम्न-आय वाली आबादी पर अधिक पड़ता है। जैसा की पहले ही बताया गया है कि सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ (Social Determinants of Health) इकनोमिक और सोशल कंडिशंस हैं, जो हेल्थ स्टेटस में इंडिविजुअल और ग्रुप डिफरेंसेस को प्रभावित करती हैं।
डायबिटीज एक क्रॉनिक मेटाबॉलिक डिजीज है जिसकी वजह से लोगों, परिवारों और नेशनल हेल्थ केयर सिस्टम को डिसएबल, डेडली और कॉस्टली टेस्ट्स से गुजरना पड़ता है। डायबिटीज के सही मैनेजमेंट पर फोकस कर के ब्लड प्रेशर, लिपिड लेवल्स और ब्लड ग्लूकोज लेवल्स को कंट्रोल व तंबाकू को नजरअंदाज कर के मैक्रोवैस्कुलर और माइक्रोवैस्कुलर कॉम्प्लिकेशन्स को कम किया जा सकता है।
हालांकि फार्माकोलॉजिकल और नॉन-फार्माकोलॉजिकल स्ट्रेटेजीज में महत्वपूर्ण प्रगति विकसित की गई है, लेकिन रियल वर्ल्ड प्रैक्टिस और लो और मिडिल इनकम कन्ट्रीज में खासतौर पर केयर गोल्स को प्राप्त करने में बहुत बड़ा गैप पाया गया है। केयर टार्गेट्स को प्राप्त करने में बड़े गैप मौजूद हैं, विशेष रूप से रियल वर्ल्ड प्रैक्टिस और निम्न और मध्यम आय वाले देशों में। डायबिटीज के रोगियों में केयर गोल प्राप्त करने में जो सबसे बड़ी बाधाएं हैं वो हैं मेडिकल केयर में कमी, भुखमरी, मेडिकल अटेंशन प्राप्त करने के लिए समय की कमी, कॉन्फिडेंस की कमी और अपर्याप्त सोशल सपोर्ट आदि। डायबिटीज केयर गोल्स में बेहतर हेल्थ आउटकम्स भी शामिल हैं।
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सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बीच का कनेक्शन
सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ (Social Determinants of Health) जिसमें एजुकेशन लेवल और सोसिओएकनोमिक स्टेटस (Socioeconomics Status) के साथ ही अन्य के फैक्टर्स भी शामिल हैं जिन्हें अन्य डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ के रूप में जाना जाता है। इन्हें भी रोगियों में चिकित्सा के प्रति रिस्पांस को मॉडिफाई करने के लिए डेमोंस्ट्रेट किया गया है। ऐसा माना जाता है जहां बीमारियों का बर्डन अधिक हो, तो तुरंत हेल्थ केयर सिस्टम में सुधार की जरूरत होती है, ताकि कॉम्प्लीकेशन्स और मोर्टेलिटी को कम किया जा सके। यह तो थी जानकारी सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बारे में। अब जानते हैं उन तरीकों के बारे में जिनसे आप इस समस्या को मैनेज कर सकते हैं।
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डायबिटीज को कैसे करें मैनेज?
सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बारे में यह तो आप जान ही गए होंगे कि डायबिटीज का प्रभाव न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है। इसके साथ ही डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति का पूरा शरीर प्रभावित होता है। ऐसे में इस इसे मैनेज करना बेहद जरूरी है। इसके मैनेज करने के लिए इन तरीकों को अपनाया जा सकता है।
- अपने आहार का खास ध्यान रखें। हेल्दी आहार का सेवन करें और उसमें फल, सब्जियों, साबुत अनाज आदि को शामिल करें। आपका आहार न्यूट्रिशन व फाइबर से भरपूर किंतु फैट्स और कैलोरीज में लो होना चाहिए।
- नियमित रूप से व्यायाम करें। दिन में कम से कम तीस मिनट व्यायाम के लिए अवश्य निकालें। आप किसी भी ऐसी फिजिकल एक्टिविटी को कर सकते हैं जो आपको पसंद हो जैसे वॉक, स्विमिंग आदि।
- अगर आपका वजन अधिक है तो उसे कम करें। इसके लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।
- डॉक्टर के बताए अनुसार सही दवाइयों और इंसुलिन को लें। तनाव से बचें और अगर आपको स्मोकिंग करते हैं तो उसे भी छोड़ दें।
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उम्मीद है कि सोशल डिटर्मिनेन्ट्स ऑफ हेल्थ और डायबिटीज (Social Determinants of Health and Diabetes ) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। रोगी जितना हो सके अपने ब्लड शुगर लेवल को सही बनाए रखें। इसके लिए सही डायट प्लान का पालन करना, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाना और सही दवा और नियमित जांच जरूरी है। इसके साथ ही ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल, ट्राइग्लिसराइड लेवल को भी सही रखें और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें।