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Serum insulin test: पैंक्रियाज से प्रोड्यूज होने वाले इंसुलिन के बारे में जानकारी देता है ये टेस्ट!

Serum insulin test: पैंक्रियाज से प्रोड्यूज होने वाले इंसुलिन के बारे में जानकारी देता है ये टेस्ट!

स्टमक यानी पेट के पीछे की ओर एक ग्लैंड होती है, जो इंसुलिन को प्रोड्यूस करने का काम करती है। पैंक्रियाज यानी अग्नाशय से इंसुलिन हॉर्मोन प्रोड्यूस होता है। इंसुलिन शरीर को अनुमति देता है कि शरीर ग्लूकोज को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर सके। ग्लूकोज एक प्रकार का शुगर होता है, जो कई कार्बोहायड्रेट में पाया जाता है। खाने के बाद डायजेस्टिव ट्रेक्ट कार्बोहायड्रेट (Carbohydrate) को तोड़कर ग्लूकोज (Glucose) में बदलने का काम करता है। जब ब्लड में ग्लूकोज पहुंच जाता है, तो इंसुलिन की सहायता से सेल्स शुगर के माध्यम से एनर्जी को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम करती हैं। इंसुलिन ब्लड शुगर लेवल को भी बैलेंस करता है और अधिक ग्लूकोज होने पर उसे लिवर में स्टोर करने का काम करता है। इंसुलिन की मात्रा में असंतुलन की जांच के लिए सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) की जरूरत पड़ती है। इस आर्टिकल के माध्यम से सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) के बारे में जानिए विस्तार से।

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सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test)

सीरम इंसुलिन टेस्ट

सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) की सहायता से पैंक्रियाज में बीटा सेल्स से इंसुलिन के उत्पादन के बारे में जानकारी मिलती है। ब्लड में लो ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia), इंसुलिन रजिस्टेंस के बारे में जानकारी या फिर टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) में जरूरी इंसुलिन के बारे में जानकारी के लिए सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) किया जाता है। सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) की जरूर तब पड़ती है, जब व्यक्ति में लो ग्लूकोज लेवल के लक्षण दिखाई पड़ते है। कुछ लक्षण जैसे कि पसीना आना (Sweating), धड़कन का अनियमित होना, बेहोशी आना आदि लक्षणों को देखते हुए डॉक्टर सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) की सलाह दे सकते हैं। अगर आपको भी मधुमेह या फिर डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of diabetes) नजर आएं, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं और साथ ही जांच भी कराएं।

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कैसे किया जाता है सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test)?

सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) करने के लिए डॉक्टर आर्म वेन से ब्लड सैंपल लेते हैं। आपको सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) कराने से करीब 8 घंटे पहले तक फास्ट रखना यानी भूखा रहना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर खाली पेट रहने के समय को कम या फिर ज्यादा भी कर सकते हैं। आपको इस बारे में अधिक जानकारी डॉक्टर से प्राप्त करनी चाहिए। टेस्ट के माध्यम से ब्लड में इंसुलिन की मात्रा के बारे में जानकरी मिलती है। ब्लड में इंसुलिन और ब्लड वैसल्स का अमाउंट बैलेंस होना चाहिए। घर में इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) नहीं किया जा सकता है जबकि ग्लूकोज लेवल (Glucose level) की जांच घर में की जा सकती है। अगर इंसुलिन की मात्रा में कमी पाई जाती है, तो इंसुलिन पंप की सहायता से इसे पेशेंट को दिया जाता है। ये ओरली नहीं दिया जाता है।

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टेस्ट का रिजल्ट बढ़ा सकता है इन बीमारियों की संभावना

इंसुलिन की नॉर्मल रेंज 2.6 – 24.9 mcIU/mL के बीच औसत होती है। टाइप 1 डाबिटीज से पीड़ित लोगों में ग्लूकोज लेवल लो होता है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज की प्राइमरी स्टेज में इंसुलिन लेवल या तो हाय होता है या फिर नॉर्मल होता है। सेकेंड्री लेवल में इंसुलिन लेवल लो हो जाता है। सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) के दौरान अगर इंसुलिन का लेवल हाय होता है, तो आपको निम्न समस्याएं हो सकती हैं।

इंसुलिन टेस्ट के दौरान अगर इंसुलिन का लेवल अगर कम होता है, तो आपको निम्न समस्याएं हो सकती हैं।

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इंसुलिन टेस्ट का क्या होता है जोखिम?

सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) पूरी तरह से सुरक्षित होता है लेकिन कुछ लोगों को इंसुलिन टेस्ट के बाद कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वेन के जिन स्थान में सुई इंजेक्ट की गई थी, वहां हल्का नीला निशान पड़ सकता है या फिर ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। जिन लोगों को इंजेक्शन या फिर खून देखकर चक्कर आते हैं, उनमें बेहोशी का खतरा भी बढ़ जाता है। सुई लगने पर मामूली दर्द का एहसास होता है, जो तुरंत ठीक भी हो जाता है। कुछ लोगों में इंजेक्शन लगने के बाद सूजन की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर को जानकारी देनी चाहिए और उपाय करना चाहिए।

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कब होती है टेस्ट की जरूरत?

इंसुलिन टेस्ट की जरूरत बीमारी के लक्षणों के दिखने पर होती है लेकिन एक उम्र के बाद ये टेस्ट जरूरी हो जाता है। अगर आपकी उम्र 40 साल हो चुकी है, तो आपको साल में एक बार फिजिकल एक्जामिनेशन के साथ ही इंसुलिन टेस्ट भी कराना चाहिए। यहां हम आपको कुछ महत्वपूर्ण बिंदू बता रहे हैं, जो आपको बताएंगे कि टेस्ट कब जरूरी होता है।

  • अगर आपकी लाइफस्टाइल (Lifestyle) ठीक न हो और आपको कई बीमारियों ने घेरा हो।
  • शरीर में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल (Good cholesterol) की मात्रा कम है और ट्रायग्लीसराइड का लेवल (Triglyceride level) हाय है, तो ऐसे में टेस्ट की जरूरत हो सकती है।
  • अगर आपके परिवार में किसी को मधुमेह की बीमारी है, तो ऐसे में आपको भी डॉक्टर से परामर्श करने के बाद टेस्ट कराना चाहिए।
  • हाय ब्लड प्रेशर ( High blood pressure) इंसुलिन रसिस्टेंस का लक्षण है, ऐसे में इंसुलिन टेस्ट कराना जरूरी हो जाता है।
  • अगर पैदा हुए बच्चे का वजन चार किलो तक है, तो भी आपको टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है।
  • अगर आपको स्ट्रोक की समस्या है, तो आपको जांच कराने की जरूर है। आप चाहे तो इसके संबंध में डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं।

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अगर आपको इंसुलिन या फिर टाइप 1 डायबिटीज के बारे में अधिक जानकारी चाहिए, तो आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। बेहतर लाइफस्टाइल, वेट को कंट्रोल करके और पौष्टिक आहार का सेवन (Eating nutritious food) कर आप डायबिटीज के खतरे को कम कर सकते हैं।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको सीरम इंसुलिन टेस्ट (Serum insulin test) से संबंधित ये आर्टिकल पसंद आया होगा। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 23/07/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड