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कार्डियोवैस्क्युलर सिस्टम में खराबी कैसे पहुंचाती है शरीर को नुकसान?

कार्डियोवैस्क्युलर सिस्टम में खराबी कैसे पहुंचाती है शरीर को नुकसान?

कार्डियोवैस्क्युलर या सर्क्युलेटरी सिस्टम बॉडी को ब्लड सप्लाय करने का काम करता है। इसमें हार्ट, आर्टरीज, वेंस और कैपिलरीज (capillaries) आती हैं। जब किन्हीं कारणों से इस सिस्टम में खराबी आ जाती है, तो शरीर को पर्याप्त मात्रा में ब्लड की सप्लाय नहीं हो पाती है। जब बॉडी में ब्लड सप्लाई की कमी होती है, तो विभिन्न प्रकार के लक्षण नजर आते हैं। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि दुनियाभर में कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के कारण कई लोगों की जान जाती है। कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के बारे में जानने से पहले आपको इसके प्रकार और बीमारी के लक्षणों के बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के साथ ही इसके ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी देंगे। जानिए कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के बारे में।

और पढ़ें: हार्ट वॉल्व का क्या होता है काम? जानिए हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्याओं के बारे में

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज (Cardiovascular diseases) क्या होती हैं?

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज (Cardiovascular disease) कई कंडिशन पर निर्भर करती है। जिनके बारे में आज हम आपसे बात करने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी ये कुछ कंडिशन्स।

हार्ट डिजीज (Heart disease)

हार्ट और ब्लड वैसल्स डिजीज के कारण बहुत-सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) से संबंधित है। एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण नैरो आर्टरीज का निर्माण होता है, जो ब्लड फ्लो में रुकावट पैदा करता है। अगर ब्लड क्लॉट का निर्माण हो जाता है, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। हार्ट अटैक और स्ट्रोक मौत का कारण भी बन सकते हैं।

दिल का दौरा पड़ना या हार्ट अटैक (Heart attack)

जब किन्हीं कारणों से दिल में ब्लड फ्लो नहीं हो पाता है या फिर ब्लड क्लॉट के कारण ब्लड फ्लो नहीं हो पाता है, तो हार्ट अटैक की समस्या हो जाती है। इस कारण से हार्ट मसल्स मरना शुरू हो जाती हैं। कुछ लोग पहले हार्ट अटैक के बाद भी अच्छी लाइफ जीते हैं और वर्षों समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। जो लोग लाइफस्टाइल में सुधार करते हैं और खानपान में पौष्टिक आहार शामिल करते हैं, उनकी हार्ट हेल्थ में सुधार होता है। डॉक्टर हार्ट डैमेज के अनुसार ही पेशेंट को दवाओं के साथ ही अन्य सलाह देते हैं।

स्ट्रोक की समस्या (Stroke)

जब दिमाग को रक्त पहुंचाने वाली ब्लड वैसल्स ब्लॉक हो जाती हैं, तो स्ट्रोक का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा ब्लड क्लॉट के कारण हो सकता है। स्ट्रोक का कारण ब्रेन के हिस्से में रक्त की आपूर्ति न हो पाना है। इस कारण से ब्रेन की सेल्स मरना शुरू हो जाती हैं। ब्रेन से कंट्रोल होने वाले कुछ काम जैसे कि बात करना या चलना आदि स्ट्रोक के कारण प्रभावित होते हैं। स्ट्रोक के कुछ प्रभाव परमानेंट होते हैं। जब मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीजन सही तरह से नहीं पहुंच पाती हैं, तो ब्रेन सेल्स डेड होने लगती हैं। इन सेल्स को कभी भी रिप्लेस नहीं किया जा सकता है। वहीं कुछ परिस्थितियों में ब्रेन सेल्स नहीं मरती हैं। यानी ये टेम्परेरी होता है और बाद में सेल्स प्रॉपर फंक्शन करने लगती हैं।

और पढ़ें: पुरुष हार्ट हेल्थ को लेकर अक्सर करते हैं ये गलतियां

हार्ट संबंधित बीमारियों की अधिक जानकारी के लिए देखें ये बायो डिजिटल वीडियो –

हार्ट फेलियर (Heart failure)

हार्ट फेलियर को कंजेस्टिव हार्ट फेलियर भी कहा जाता है। जब हार्ट ब्लड को सही से पंप नहीं कर पाता है, तो ये स्थिति पैदा हो जाती है। कुछ लोगों को मानना है कि इस कारण से धड़कन भी बंद हो सकती है। लेकिन ये सच नहीं है। हार्ट पंपिंग बंद कर देता है, तो बॉडी पार्ट को ब्लड और ऑक्सीजन पूरी तरह से नहीं मिल पाती है। अगर हार्ट फेलियर प्रॉब्लम का इलाज न कराया जाए, तो पेशेंट को बड़ी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हार्ट एरिदमिया (Heart arrhythmia)

जब हार्ट रिदम ठीक प्रकार से काम नहीं करती है, तो अरेथ्मिया की समस्या हो जाती है। ऐसी सिचुएशन में हार्ट बीट या तो बहुत तेजी (Tachycardia) से यानी 100 बीट्स पर मिनट चलती है या फिर धीमी (Bradycardia) गति यानी 60 बीट्स पर मिनट हो जाती है। ऐसा कई कारणों से हो सकता है। हार्ट बीट की अनियमितता के कारण ब्लड की पंपिंग सही तरह से नहीं हो पाती है और शरीर को पर्याप्त मात्रा में ब्लड की सप्लाई नहीं हो पाती है।

इस बारे में एसएल रहेजा अस्पताल, माहिम की सलाहकार चिकित्सक और विशेषज्ञ-आंतरिक चिकित्सा की डॉक्टर परितोष बघेल का कहना है कि फ्लू के प्रभावित ( Flu infection) होने पर हृदय पर बदाव बढ़ जाता है, जिसकी वजह से हृदय गति, रक्तचाप में वृद्धि और कैटेकोलामाइंस नामक तनाव को बढाने वाला हॉर्मोन और कई दूसरे हाॅर्मोनों में भी वृद्धि होने लगती है। यह हृदय पर अत्यधिक तनाव पैदा करता है, और कमजोर हृदय वाले इससे खुद को जल्दी संभाल नहीं पाते हैं। फ्लू के लक्षण (Flu symptoms), अपर एयरवेज और लोअर एयरवेज (Upper airways or Lower airways) में इंफेक्शन के साथ शुरू होते हैं। इससे रोगी का एयरवेज कंजस्टेड हो जाता है और खांसी व बुखार जैसे लक्षण दिखने लगते हैं, जिससे हार्ट पर भी दबाव पड़ने लगता है। ज्यादातर मामलों में, शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है और लोगों में हार्ट प्रॉब्लम का रिस्क और बढ़ जाता है। कई स्थितियों में हृदय की गति भी रुक (Heart failure) जाती है। भारत में, लोगों फ्लू संक्रमण के अधिक शिकार होते हैं। जिससे उनके हृदय स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

और पढ़ें :सीने में दर्द, पैरों में सूजन और थकावट कहीं आपको दिल से बीमार न बना दे!

हार्ट वॉल्व की प्रॉब्लम (Heart valve problems)

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज (Cardiovascular disease) में हार्ट वॉल्व की प्रॉब्लम शामिल है। जब किन्हीं कारणों से हार्ट वॉल्व खुल नहीं पाते हैं, तो ब्लड फ्लो ठीक तरह से नहीं हो पाता है। इस कंडीशन को स्टेनोसिस (stenosis) कहते हैं। जब हार्ट वॉल्व ठीक तरह से बंद नहीं हो पाते हैं, तो खून का रिसाव होने लगता है। इसे (regurgitation) रिगर्जिटेशन कहते हैं। अगर वॉल्व बैक चैम्बर में प्रोलेप्स हो जाती है, तो इस कंडीशन को वॉल्व प्रोलेप्स ( prolapse) कहते हैं।

और पढ़ें :जानिए हृदय रोग से जुड़े तथ्य क्या हैं?

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के कारण क्या हैं? (Cardiovascular disease causes)

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज का मुख्य कारण एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) होता है, जिस कारण से फैट और प्लाक ( Plaque ) आर्टरी में जमा हो जाता है। इसी वजह से बल्ड फ्लो में रुकावट पैदा होता है और बॉडी को पर्याप्त मात्रा में ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है। ये सीरियस कंडीशन है और व्यक्ति की मौत का कारण भी बन सकती है। प्लाक ( Plaque) धमनियों के आसपास बनता है। समय के साथ ही ये कठोर हो जाता है और कोरोनरी ऑर्टरी को नीचे की ओर धकेल देता है। अगर ये रप्चर हो जाता है, तो ब्लड सेल्स टूट जाती हैं और ब्लड क्लॉट का निर्माण करने लगती हैं। इस तरह से पूरे शरीर में बुरा प्रभाव पड़ता है।

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज हाय ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग, हाय कॉलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोपाटा बढ़ने के कारण, कार्डियोवैस्क्युलर डिजीजेस की फैमिली हिस्ट्री होने के कारण भी हो सकता है। आपको इस बारे में डॉक्टर से भी जानकारी लेनी चाहिए।

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के लक्षण क्या हैं? (Cardiovascular disease symptoms )

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज होने पर निम्मलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं। जानिए क्या हैं वो लक्षण।

  • छाती में दर्द या दबाव महूसस होना। ये एंजाइना का संकेत हो सकता है।
  • बाहों, बाएं कंधे, कोहनी, जबड़े या पीठ में दर्द होना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • मतली और थकान का एहसास
  • चक्कर आना
  • ठंड लगने के साथ ही पसीना आना।

और पढ़ें :सोने से पहले ब्लड प्रेशर की दवा लेने से कम होगा हार्ट अटैक का खतरा

इन समस्याओं के लिए कौन से ट्रीटमेंट (Cardiovascular disease Treatment) उपलब्ध हैं?

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज होने पर डॉक्टर पहले जांच करते हैं और फिर उसी के अनुसार आपको दवाइयों के सेवन के साथ ही लाइफस्टाइल से संबंधित सुझाव देते हैं। डॉक्टर मेडिकेशन में लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन कॉलेस्ट्रॉल को कम करने वाली दवाएं, ब्लड फ्लो या हार्ट रिदम को इम्प्रूव करने वाली दवाएं देते हैं। कुछ केसेज में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है। कुछ सर्जरी जैसे कि कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग या वॉल्व रिपेयर (Valve repair) या रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। ट्रीटमेंट के दौरान बीमारी के जोखिम को कम करने की कोशिश की जाती है और साथ ही स्ट्रोक या दिल के दौरे की संभावना को भी कम किया जाता है। हेल्थ केयर प्रोवाइडर पेशेंट के शरीर में आ रहे बदलावों के अनुसार ट्रीटमेंट जारी रखते हैं। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए कॉर्डियोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकते हैं।

खानपान में सुधार आपको बचाएगा हार्ट डिजीज (Heart disease) से

आपको हेल्दी डायट अपनानी चाहिए। आपको खाने में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स जैसे कि जैसे कि अखरोट, पीनट ऑयल, सनफ्लावर ऑयल और ओमेगा-3 युक्त फूड्स जैसे कि फिश को अपनाना चाहिए। साथ ही खाने में वेजीटेबल्स और फ्रूट्स को रोजाना शामिल करें। खाने में सॉल्ट, शुगर और सैचुरेटेड फैट (Saturated fat) की मात्रा को सीमित करें। ऐसा करने से आप हार्ट को हेल्दी रख सकते हैं और बीमारियों से भी बच सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर में कॉलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने लगता है। ऐसे में हार्ट को खतरा बढ़ना लगता है। आपको खाने में प्रोसेस्ड फूड पूरी तरह से बंद कर देने चाहिए। हेल्दी डायट के साथ ही पानी का पर्याप्त मात्रा में सेवन आपको दिल की बीमारियों से बचाने का काम करता है।

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज (Cardiovascular disease) में किन बातों का ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है?

कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज होने पर शरीर को विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है। जानिए आपको किसन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • इंस्टीट्यूट एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिसऑर्डर के अनुसार अगर कोई व्यक्ति पांच से 10 प्रतिशत वेट कम कर लेता है, तो वो कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज के खतरे को कम कर सकता है। यानी शरीर का वजन कम करने से आप कई बीमारियों को मात दे सकते हैं।
  • आपको रोजाना एक्सरसाइज करनी चाहिए। अगर आप रोजाना आधे घंटे की वॉक करते हैं, तो भी आपका शरीर फिजिकल एक्टिव रहेगा और कई बीमारियों का खतरा भी कम हो जाएगा।
  • कुछ बुरी आदतें जैसे कि स्मोकिंग (Smoking), एल्कोहॉल का सेवन, अवैध दवाओं का सेवन आदि आपको बंद कर देना चाहिए। ये शरीर को नुकसान पहुंचाने के साथ ही मौत का कारण भी बन सकती हैं। अगर आप स्मोकिंग नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं।

कुछ बातों का ध्यान रख आप अपनी हार्ट हेल्थ की दुरस्त बना सकते हैं। इसके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल बहुत जरूरी है। अगर आपके मन में कोई प्रश्न हो, तो डॉक्टर से जरूर पूछें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कल को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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