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हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना क्यों है जरूरी? जानिए!

हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना क्यों है जरूरी? जानिए!

हार्ट से जुड़ी समस्याएं व्यक्ति की सेहत को समय के साथ खराब कर सकती है। यही वजह है कि अलग-अलग हार्ट कंडिशन की वजह से व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि इन हार्ट डिजीज (Heart disease) का समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह व्यक्ति के लिए जान का जोखिम भी खड़ा कर सकती है। यही वजह है कि हार्ट डिजीज से ग्रसित लोगों के लिए सही खान-पान बेहद जरूरी माना जाता है। खास तौर पर तब, जब व्यक्ति रोजाना वर्कआउट करता है। वर्कआउट से पहले और बाद में आप किस तरह का खाना खा रहे हैं, इसका सीधा असर आपकी हार्ट की स्थिति पर पड़ सकता है। इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना किस तरह होना चाहिए। हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) सही तरह से चुनना बेहद जरूरी माना जाता है। इसलिए वर्कआउट से पहले और बाद में लिए जाने वाले खाने के बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। लेकिन इससे पहले आइए जानते हैं हार्ट डिजीज से जुड़ी यह जरूरी जानकारी।

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क्या है हार्ट डिजीज (Heart disease)?

जैसा कि आप सभी जानते हैं, मनुष्य का हृदय एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। जो लगातार शरीर के काम को चलाए रखने के लिए ब्लड पंप करता है और पूरे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। जब दिल के काम में किसी तरह की समस्या उत्पन्न होती है, तो इसे ह्रदय रोग कहा जाता है। हृदय रोग आमतौर पर ब्लड वेसल्स और रक्त संचार प्रणाली से जुड़े होते हैं। कभी कभी हार्ट डिजीज (Heart disease) किसी अन्य तरह की बीमारी से भी जुड़ी होती है। यही वजह है कि आपको हृदय रोग के दौरान खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। आइए अब जानते हैं हार्ट डिजीज के प्रकारों के बारे में।

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क्या हैं हार्ट डिजीज के प्रकार? (Types of Heart disease)

जैसा कि हमने पहले जाना हार्ट डिजीज (Heart disease) अलग-अलग तरह की हो सकती हैं। ये समस्याएं आमतौर पर आपकी आर्टरी और रक्त संचार प्रणाली से जुड़ी हो सकती हैं। यही वजह है कि हार्ट डिजीज के प्रकार भी अंदरूनी अंगों से जुड़े हुए होते हैं। आइए जानते हैं हार्ट डिजीज के प्रकार कौन कौन से हैं।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज : यह हार्ट डिजीज (Heart disease) में खतरनाक स्थिति मानी जाती है। इस स्थिति में कोरोनरी आर्टरी में वसा जमा होने लगती है। जिसकी वजह से यह ब्लॉक हो जाती है। समय के साथ वसायुक्त प्लाक कठोर होता चला जाता है, जिसकी वजह से आर्टरी को नुकसान पहुंचता है। यही वजह है कि यह पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त ब्लड की आपूर्ति नहीं कर पाती और व्यक्ति कोरोनरी आर्टरी डिजीज से ग्रस्त हो जाता है।

हार्ट एरिथमिया : दिल से जुड़ी समस्याओं में एक ऐसी समस्या है हार्ट एरिथमिया (Heart arrhythmia), जिसमें हृदय की धड़कन अनियमित हो जाती है। उदाहरण के तौर पर जब ह्रदय सामान्य से तीव्र गति से धड़कता है, तो इसे टैकीकार्डिया के नाम से जाना जाता है।

कार्डियोमायोपैथी : इस समस्या में हृदय में मौजूद मांसपेशियां बड़ी और मोटी हो जाती है, जिसकी वजह से ब्लड सप्लाय में तकलीफ होती है। जिसका सीधा प्रभाव आपके शरीर के जरूरी अंगों पर पड़ता है।

एथेरोस्क्लेरोसिस : एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) की समस्या में व्यक्ति के दिल की धमनिया सख्त हो जाती हैं और इससे धमनियों को नुकसान पहुंचता है। जिसकी वजह से ब्लड सप्लाय में समस्याएं उत्पन्न होती है।

हार्ट इन्फेक्शन : यह समस्या दिल में बैक्टीरिया या वायरस के कारण होने वाले इन्फेक्शन के कारण होती है। इस इंफेक्शन के कारण धमनियों को नुकसान पहुंचता है और हृदय ठीक ढंग से पूरे शरीर में ब्लड सप्लाय नहीं कर पाता।

यह सभी समस्याएं हार्ट डिजीज कहलाती हैं। हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) कितना ज़रूरी है, इसे जनने से पहले आइए जान लेते हैं हार्ट डिजीज के लक्षणों के बारे में।

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क्या हैं हार्ट डिजीज के लक्षण? (Symptoms of Heart disease)

जब आपको दिल की समस्या होने लगती है, तो कुछ लक्षणों पर आपको ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि व्यक्ति इस समस्याओं को नजरअंदाज करता है, तो उसे आगे चलकर हार्ट डिजीज (Heart disease) की समस्या झेलनी पड़ सकती है। कई बार यह समस्या इतनी गंभीर होती है कि व्यक्ति की मौत हो सकती है। आइए अब जानते हैं हार्ट डिजीज से जुड़े लक्षणों के बारे में –

  • चेस्ट पेन होना
  • सीने में जकड़न महसूस होना
  • गले, पेट और बाजुओं में दर्द होना
  • दिल की धड़कन में अनियमितता
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • हाथों और पैरों का सुन्न हो जाना
  • चक्कर आना
  • थकान होना
  • उल्टी की समस्या होना

यह सभी लक्षण हार्ट डिजीज (Heart disease) की ओर इशारा करते हैं। इसलिए इन्हें समझकर आपको हार्ट डिजीज में सही उपचार लेने की जरूरत पड़ती है। साथ ही साथ आपको आपके आहार में बदलाव लाने की भी जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि रोजाना वर्कआउट करने वाले और हार्ट डिजीज से ग्रसित लोगों के लिए सही खान-पान लेना जरूरी माना जाता है। आइए अब बात करते हैं हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) किस तरह चुना जाना चाहिए। साथ ही हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना किस तरह कारगर साबित हो सकता है।

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हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना चुनने के लिए जानें ये बातें (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions)

हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions)

जैसा कि सभी जानते हैं, हमारा शरीर एक गाड़ी की तरह है। जिसे ठीक ढंग से फ्यूल मिलना जरूरी माना जाता है। जब शरीर रूपी गाड़ी को ठीक ढंग से फ्यूल मिलता है, तो हमारा शरीर ठीक ढंग से काम करता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में छपी एक खबर के मुताबिक सही रूप में खाना और फ्लुइड एक्सरसाइज से पहले और बाद में लिया जाना चाहिए। जिससे व्यक्ति का ब्लड ग्लूकोज लेवल ठीक बना रहे। इससे हार्ट डिजीज (Heart disease) से ग्रसित व्यक्ति की वर्कआउट परफॉर्मेंस बेहतर बन सकती है। खास तौर पर यह बात उन एथलीट्स पर कारगर साबित होती है, जो एक्सरसाइज से पहले और बाद में अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहना चाहते हैं। एक्सरसाइज के दौरान शरीर में पानी की कमी होती है, इसलिए यह जरूरी है कि एक्सरसाइज से पहले और बाद में ठीक ढंग से खाना खाया जाए और फ्लुइड इनटेक पर ध्यान रखा जाए। आइए अब जानते हैं हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) किस तरह मैनेज किया जाना चाहिए। साथ ही हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना ठीक ढंग से लेना क्यों जरूरी है।

एक्सरसाइज से पहले (Food before exercise)

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक हार्ट से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए वर्कआउट के 2 घंटे पहले सही खाना खाना बेहद जरूरी है। एक्सरसाइज के 2 घंटे पहले यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो हार्ट डिजीज (Heart disease) के साथ वर्कआउट को ठीक ढंग से मैनेज किया जा सकता है। वर्कआउट से 2 घंटे पहले भरपूर पानी पिएं। इस दौरान हेल्दी कार्बोहाइड्रेट जैसे होल ग्रेन सीरियल्स, होल व्हीट टोस्ट, लो फैट या फैट फ्री योगर्ट, होल ग्रेन पास्ता, ब्राउन राइस, फ्रूट और वेजिटेबल्स इत्यादि का सेवन किया जा सकता है। वर्कआउट के 2 घंटे पहले सैचुरेटेड फैट (Saturated fat) और जरूरत से ज्यादा हेल्दी प्रोटीन खाने की सलाह नहीं दी जाती। इस तरह का खाना आमतौर पर धीरे-धीरे डायजेस्ट होता है और इसके लिए शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन खर्च करने की जरूरत होती है। यही वजह है कि वर्कआउट से 2 घंटे पहले हेल्दी कार्बोहाइड्रेट आपके लिए बेहतर ऑप्शन साबित हो सकते हैं। यदि वर्कआउट से पहले आपके पास सिर्फ 5 या 10 मिनट का समय है, तो आप किसी भी हेल्दी फ्रूट जैसे सेब या केले का सेवन कर सकते हैं। दरअसल वर्कआउट से पहले आपको सिर्फ एक बात का ध्यान रखने की जरूरत होती है। आपको ऐसे कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना होता है, जो आसानी से पचाया जा सके, जिससे आप आसानी से वर्कआउट पर ध्यान दे सकें।

वर्कआउट के दौरान (Food during exercise)

हार्ट डिजीज के साथ वर्कआउट करने से पहले आपको कई बातों का ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) बेहद जरूरी माना जाता है। अब हम बात करने जा रहे हैं वर्कआउट के दौरान किस तरह के फ्लूइड लिए जा सकते हैं। प्रोफेशनल एथलीट और हार्ट डिजीज से ग्रसित किसी भी व्यक्ति के लिए कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। यदि आप लगातार कई घंटों के लिए वर्क आउट कर रहे हैं, तो आपको शरीर को हायड्रेट रखने की जरूरत पड़ती है। इसलिए आपको समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना जरूरी माना जाता है। क्योंकि आप वर्कआउट के दौरान खा नहीं सकते, इसलिए आपके शरीर को एनर्जी से भरपूर और हायड्रेट रखने के लिए आपको जरूरत के मुताबिक पानी पीना चाहिए। साथ ही आपको हाय इंटेंसिटी वर्कआउट (High intensity workout) के दौरान हर आधे घंटे में 50 से 100 कैलोरी लेने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए आपको कार्बोहाइड्रेट जैसे लो फैट योगर्ट, किशमिश या एक केला खाने की जरूरत पड़ सकती है। आइए अब बात करते हैं वर्कआउट के बाद किस तरह का खाना आपके लिए जरूरी माना जाएगा।

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वर्कआउट के बाद (Food after exercise)

हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) बेहद जरूरी होता है। लेकिन अक्सर लोग वर्कआउट से पहले और वर्कआउट के दौरान लिए जाने वाले खाने पर ही ध्यान देते हैं। जबकि वर्कआउट के बाद भी आपको सही अमाउंट में खाना चाहिए। वर्कआउट के करीब 20 से 60 मिनट बाद आप तीन तरह की चीजें ले सकते हैं, जिसमे फ्लुइड, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का समावेश होता है। फ्लुइड के तौर पर आप सही मात्रा में पानी पी सकते हैं। साथ ही साथ आप सौ प्रतिशत जूस, जैसे कि ऑरेंज जूस और उस तरह के पेय जिसमें कार्बोहाइड्रेट मौजूद हो इत्यादि ले सकते हैं। कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) के तौर पर आपको सही मात्रा में खानपान का चुनाव करना पड़ता है। वर्कआउट के दौरान आपके शरीर से एनर्जी कम होती है और आपका शरीर बड़ी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट बर्न करता है। इसलिए आपके शरीर को रिकवरी के लिए सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट की जरूरत पड़ती है। इसी तरह प्रोटीन भी एक ऐसा तत्व है, जिसकी जरूरत वर्कआउट के बाद आपके शरीर को पड़ती है। सही मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना आपके मसल्स ग्रोथ के लिए जरूरी माना जाता है।

आमतौर पर हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन अलग-अलग लोगों में इसकी जरूरत अलग-अलग तरह से हो सकती है। इसलिए हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लेकर खानपान का चुनाव करना चाहिए। हृदय रोग से जुड़ी समस्याएं आपके खानपान से प्रभावित होती है, इसलिए हार्ट कंडिशन वाले लोगों के लिए वर्कआउट से पहले और बाद में फ्यूल के रूप में खाना (Food As Fuel Before And After Workout For People With Heart Conditions) हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। जिससे किसी भी तरह का गलत प्रभाव आपके हृदय स्वास्थ्य पर ना पड़े और आप ह्रदय रोग के साथ भी ठीक ढंग से वर्कआउट पर ध्यान दे सकें।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड