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कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश के इंजीनियर्स ऐसे निभा रहे अहम भूमिका

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश के इंजीनियर्स ऐसे निभा रहे अहम भूमिका

अभी आप सुन रहे होंगे कि कोरोना वायरस महामारी से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर्स, स्वास्थ्यकर्मी और पुलिस जी-जान से जुटे हुए हैं। पर क्या आपको पता है कि देश के इंजीनियर्स भी कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में दिन- रात जुटे हुए हैं। कोविड-19 से छुटकारा पाने के लिए इनोवेशन हो या फिर सस्ते वेंटिलेटर का निर्माण करना, इंजीनियर्स अपने तरीके से कोविड-19 से छुटकारा पाने के लिए जुटे हुए हैं। कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर एक्सपेरिमेंट में लगे हुए हैं ताकि कोरोना महामारी में लोगों को राहत मिल सके। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि कैसे कोरोना महामारी के दौरान इंजीनियर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और देश की सेवा कर रहे हैं।

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कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर : ड्रोन से सैनिटाइजेशन

कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर

कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर ऐसी तरकीबें अपना रहे हैं जिससे कम समय में कोरोना वायरस का खात्मा करने में मदद मिले। आईआईटी गुवहाटी के इंजीनियर्स ने ऐसा ड्रोन डेवलप किया है जो सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने का काम करता है। कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए सैनिटाइजेशन का प्रोसेस बहुत जरूरी है। घर में रहकर हाथों को सैनेटाइज करना बहुत जरूरी है, ठीक वैसे ही हॉट स्पॉट वाले इलाकों का सैनिटाइजेशन बहुत जरूरी है। कोविड-19 के खिलाफ इंजीनियर्स ने लड़ने के लिए ऐसे ड्रोन का निर्माण किया है जो ऑटोमेटेड स्प्रेयर की हेल्प से लार्ज एरिया को सैनिटाइज किया जा सकता है।

कम समय में हो सकता है सैनिटाइजेशन

इंजीनियर्स के इस स्टार्टअप को रेसर साइकिल नाम दिया गया है। इस बारे में इंजीनियर्स का कहना है कि उनका ड्रोन टास्क को कंम्प्लीट करने में 15 मिनट का समय लेता है। अगर एरिया बड़ा है तो एक या आधा दिन लग सकता है। इंजीनियर्स ने असम और उत्तराखंड सरकार को ड्रोन को लेकर अप्रोच किया है ताकि कोरोना महामारी के खिलाफ जंग आसान हो सके।

कोरोना के खिलाफ इंजीनियर : सस्ते वेंटिलेटर का निर्माण

कोरोना वायरस के संक्रमण से सांस लेने में समस्या होती है। जिन मरीजो को सांस लेने में अधिक समस्या होती है, उन्हें वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। देश में वेंटिलेटर की कमी को देखते हुए पूणे के कुछ इंजीनियर्स ने सस्ते वेंटिलेटर बनाने का काम शुरू किया। इंजीनियर्स ने वेंटिलेटर बनाते समय ये ध्यान रखा कि वेंटिलेटर की कॉस्ट अधिक न हो। कुछ दिनों पहले ही युवा इंजीनियर्स ने पचास हजार रुपए में वेंटिलेटर बनाने का दावा किया था। कोरोना महामारी के दौरान पेशेंट की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में इंजीनियर्स का ये कदम सराहनीय है।

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कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर : रोबोट से सैनिटाइजेशन

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सैनिटाइजेशन महत्वपूर्ण है इसलिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के इंजीनरियर्स ऐसी टेक्निक विकसित कर रहे हैं, जिनसे कम समय में अधिक सैनिटाइजेशन की प्रोसेस की जा सके। आईआईटी खड़गपुर के डॉक्टर देबायन साहा और शशि रंजन ने ऐसे रोबोट का निर्माण किया है जो वॉट आयोनाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल करके वॉटर ड्रॉपलेट्स की मदद से चारों ओर के वातावरण को साफ करने का काम करता है। कोरोना डिस्चार्ज के संपर्क में आने के बाद वॉटर आयनीकृत ( ionised) हो जाता है, फिर वायरस की प्रोटीन ऑक्सीडाइज हो जाती है। ऐसा करने से सैनिटाइजेशन का काम आसान हो जाता है। भीड़ वाले इलाकों में इस तरह के रोबोट का यूज किया जा सकता है। कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए ये इंजीनियर्स का बेहतरीन प्रयोग है।

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कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर : कोरोना शील्ड से कार रहेगी सुरक्षित

कोरोना महामारी संक्रमित व्यक्ति के साथ ही सतह से भी फैल सकती है, जहां कोरोना संक्रमित व्यक्ति से फैल सकता है, ठीक वैसे ही उस सतह को छूने से भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है, जिस पर वो पहले से मौजूद था। ऑनलाइन मार्केटप्लेस, ड्रूम (Droom) ने एक ऐसा तरीका निकाला है, जिससे कार की सतह को संक्रमण मुक्त किया जा सकता है। कुछ इंजीनियर्स ने मिलकर कोरोना शील्ड का निर्माण किया है जो कि कार, बाइक आदि को एंटी माइक्रोबियल सर्फेस प्रोटक्शन देगी। कंपनी की ओर ये जानकारी दी गई है कि इस शील्ड का उपयोग करने से कार में संक्रमण का खतरा न के बराबर होगा। कोरोना महामारी से बचने के लिए सफाई का खासतौर पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

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कोरोना के खिलाफ इंजीनियर : मरीजों की देखभाल के लिए रोबोट

कोरोना पेशेंट का इलाज कर रहे डॉक्टर्स को कोराना से संक्रमित होने का खतरा लगातार बना रहता है। इस खतरे को देखते हुए आईआईटी गुवहाटी के मैकेनिकल इंजीनियर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स खास तरह का रोबोट बनाने का काम कर रहे है। रोबोट का काम कोरोना पेशेंट को खाना देना, मेडिसिन देना आदि है। साथ ही रोबोट पेशेंट के पास से बायोकेमिकल वेस्ट को भी हटाने का काम करेगा। आपको बताते चले कि देशभर में कोरोना मरीजों का इलाज करते हुए स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित हो चुके हैं।

कोरोना से जंग में उतरे इंजीनियर : कवच से बनी रहेगी दूरी

कोरोना महामारी से बचने के लिए फिलहाल हाइजीन और सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेंन करने की बात की गई है। ऐसे में बी टेक स्टूडेंट प्रबीन कुमार ने ऐसे डिवाइस को डेवलप किया है, जो सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने का काम करती है। डिवाइस को गले में पहना जा सकता है। जैसे कि व्यक्ति सोशल डिस्टेंसिंग को इग्नोर करेगा, डिवाइस में लगे सेंसर इस बात की जानकारी देंगे। डिवाइस की हेल्प से सामाजिक दूरी बनाने में आसानी होगी। साथ ही पेंडेंट की तरह दिखने वाली डिवाइस में तीस मिनट के बाद हैंडवॉश रिमाइंडर भी उपलब्ध है। बॉडी टेम्परेचर के अधिक होने पर ये डिवाइस मोबाइल की हेल्प से नोटिफिकेशन भी भेजेगा।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं देता है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से एक बार सलाह जरूर लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

(Accessed on 29/4/2020)

COVID-19: US cheers Indian engineers for building low-cost ventilator

https://economictimes.indiatimes.com/news/science/covid-19-us-cheers-indian-engineers-for-building-low-cost-ventilator/articleshow/74946136.cms

Seven Ways Indian Engineers Are Leading The Fight Against COVID-19

https://www.indiatimes.com/technology/science-and-future/seven-ways-indian-engineers-are-leading-the-fight-against-covid-19-509851.html

Coronavirus: India’s race to build a low-cost ventilator to save Covid-19 patients

https://www.bbc.com/news/world-asia-india-52106565

In fight against coronavirus, India’s universities have lagged far behind China’s

https://www.livemint.com/education/news/in-fight-against-coronavirus-india-s-universities-have-lagged-far-behind-china-s-11586088831865.html

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित
अपडेटेड 30/04/2020
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