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कोरोना के मिथ और फैक्ट : क्या विटामिन-सी बचाएगा कोरोना से?

कोरोना के मिथ और फैक्ट : क्या विटामिन-सी बचाएगा कोरोना से?

कोरोना के मिथ और फैक्ट को लेकर लोगों के बीच में बहुत ही कंफ्यूजन है। सोशल मीडिया में कोरोना वायरस को लेकर हजारों मैसेज आते हैं। लोगों के लिए यह पहचान पाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि कौन-सी बात सच है और कौन सी बात झूठ। सरकार की ओर से जारी की गई एडवाइजरी और समय-समय पर अपडेट के अलावा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। कई बार गलत तरीकों को अपनाने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। बेहतर होगा कि कोरोना के मिथ और फैक्ट के बारे में आपको सही जानकारी हो। अगर आपको कोरोना वायरस के बारे में फैल रही अफवाह और कोरोना की सच्चाई के बारे में जानकारी नहीं है तो आप आर्टिकल के माध्यम से फैक्ट को जान सकते हैं।

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जानिए कोरोना के मिथ और फैक्ट के बारे में

कोरोना के मिथ और फैक्ट : वेजीटेरियन खाने से कोरोना वायरस का खतरा बिल्कुल नहीं रहता है।

जानिए सच : कुछ दिनों से सोशल मीडिया में इस तरह की अफवाह उड़ रही है कि जो लोग वेजीटेरियन फूड खाते हैं, उन्हें कोरोना का खतरा बिल्कुल नहीं रहता है। नॉनवेज खाने वाले को ही कोरोना का खतरा रहता है। डब्लूएचओ ने लोगों को अवेयर करने के लिए ये जानकारी दी है कि ये बात पूरी तरह से गलत है। कोरोना वायरस का खतरा किसी भी व्यक्ति को हो सकता है चाहे वो वेज खाना खाएं या नॉनवेज खाना। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया में तो ये भी अफवाह फैलाई है कि किसी भी शाकाहारी व्यक्ति को अभी तक कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ है।

कोरोना के मिथ और फैक्ट

कोरोना के मिथ और फैक्ट : विटामिन सी सप्लीमेंट लेने से कोविड-19 का खतरा कम हो जाता है ।

जानिए सच : कोरोना वायरस का संक्रमण किसी सप्लीमेंट या फूड को लेने से कम नहीं होता है। हां कुछ फूड को खाने से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ जाती है। मजबूत इम्यूनिटी के कारण शरीर की रक्षा होती है। विटामिन सी सप्लीमेंट लेने कोविड-19 से रक्षा होती है या नहीं, अभी तक इस बात के प्रमाण नहीं हैं।

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कोरोना के मिथ और फैक्ट : नए स्ट्रेन का कोरोना वायरस क्या मच्छर के काटने से भी फैल सकता है ?

जानिए सच : नए स्ट्रेन का कोरोना वायरस रेस्पिरेट्री सिस्टम को प्रभावित करता है। मच्छर से कोरोना वायरस फैलने की बात बिल्कुल सच नहीं है। कोरोना वायरस का संक्रमण इंफेक्टेड व्यक्ति के सलाइवा, संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से आस-पास के व्यक्तियों में फैलता है। सलाइवा की ड्रॉपलेट और नाक की डिस्चार्ज से वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना वायरस का संक्रमण न फैले, इसके लिए कुछ सावधानियां रखनी बहुत जरूरी हैं। समय-समय पर अपने हाथों को साबुन से धुलते रहें। अगर आपके पास साबुन या फिर पानी नहीं हो तो एल्कोहॉल बेस्ड सैनिटाइजर का यूज करें। किसी भी व्यक्ति को अगर जुकाम या खांसी है तो उस व्यक्ति से दूरी जरूर बनाएं। इन तरीकों को अपनाकर ही कोरोना वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है।

जानिए कोरोना की सच्चाई

कोरोना के मिथ और फैक्ट : बच्चों को कोरोना वायरस संक्रमित नहीं कर सकता है ।

जानिए सच : जब कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरूआत चीन से हुई थी, तब कुछ लोगों ने इस बारे में अनुमान लगाया था कि ये संक्रमण बच्चों को प्रभावित नहीं कर रहा है। जबकि ऐसा नहीं है। अब तक के आंकड़ों पर अगर विश्वास किया जाए तो 9 महीने तक के बच्चे को कोरोना का संक्रमण हो चुका है। अभी 13 साल के बच्चे की कोरोना के कारण मौत की खबर भी आ रही है। यानी ये बात बिल्कुल सच नहीं है कि कोरोना वायरस का असर बच्चों पर नहीं हो रहा है।

कोरोना के मिथ और फैक्ट : कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन तैयार की जा चुकी है।

जानिए सच : इस बारे में कुछ देश दावा कर चुके हैं लेकिन अभी इस बात का कोई भी प्रमाण नहीं है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बन चुकी है। अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन बन जाएगी तो सबसे पहले सरकार की ओर से इस बात की जानकारी दी जाएगा। विभिन्न देशों को वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर काम कर रहे हैं। यहां वैक्सीन बन जाने का अर्थ यह होगा कि वैक्सीन बनने के बाद ट्रायल पास कर ले और इसके किसी तरह के साइड इफेक्ट न हों।

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कोरोना के मिथ और फैक्ट : पानी पीने से कोविड-19 डिसीज से छुटकारा पाया जा सकता है।

जानिए सच : सोशल मीडिया में अफवाह उड़ रही है कि जिस तरह से हाथ धुलने से वायरस से छुटकारा मिल जाता है, ठीक उसी तरह से 15 मिनट के अंतराल में पानी पीने से पेट के अंदर के वायरस खत्म हो जाते हैं। लेकिन ये सच नहीं है। सही मात्रा में पानी पीना अच्छी आदत है लेकिन अभी इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि अधिक पानी पीने से कोरोना वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है।

कोरोना के मिथ और फैक्ट : कोरोना वायरस सीजनल फ्लू की तरह ही होता है, ये खतरनाक बीमारी नहीं है।

जानिए सच : ऐसा नहीं है। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण जान चली जाती है। भले ही पेशेंट को सीजनल फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हो, लेकिन ये बीमारी सीजनल फ्लू से 10 गुना भयानक है। जो लोग इस बीमारी को नॉर्मल समझते हैं, उनकी जान को खतरा हो सकता है।

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कोरोना के मिथ और फैक्ट : हैंड ड्रायर का यूज करने से कोरोना वायरस को मारा जा सकता है।

जानिए सच : जब से कोरोना वायरस का संक्रमण फैला है, लोगों को समय-समय पर हाथ धुलने की सलाह दी जा रही है। ऐसे में लोगों के मन में ये बात बैठ गई है कि हाथों को अगर हैंड ड्रायर से सुखाया जाए तो कोरोना वायरस मर जाता है। लेकिन ये सच नहीं है। हाथ को साफ करने के लिए सोप का यूज करना बेहतर है। अगर सोप न मिले तो एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर अच्छा रहेगा। लेकिन हैंड ड्रायर का इस्तेमाल करने से कोरोना वायरस नहीं खत्म होगा।

कोरोना के मिथ और फैक्ट : प्रोडक्ट या पैकेजिंग को रिसीव करने से कोरोना वायरस के इंफेक्शन रहता है।

जानिए सच : ये सच नहीं है क्योंकि कोई भी पैकेजिंग आप तक पहुंचने पर कुछ घंटों या दिन का फर्क होता है। इतनी देर तक वायरस का पैकेजिंग के ऊपर जिंदा रह पाना मुश्किल है। ये कहा जा सकता है कि पैकेजिंग रिसीव करने से कोरोना वायरस फैलने का खतरा बहुत कम होता है।

अगर आपको कोविड-19 के लक्षण नजर आ रहे हैं और कई दिनों तक सुधार नजर नहीं आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जांच के बाद डॉक्टर के बताए नियमों का पालन करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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लेखक की तस्वीर
06/04/2020 पर Bhawana Awasthi के द्वारा लिखा
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
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