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रिसर्च: कोरोना महामारी से जिन लोगों की हुई मृत्यु, जानिए आखिर क्या थे उनमें कॉमन फैक्टर

रिसर्च: कोरोना महामारी से जिन लोगों की हुई मृत्यु, जानिए आखिर क्या थे उनमें कॉमन फैक्टर

दुनिया के सभी देश चाहे विकसित हों या विकासशील, सभी कोरोना महामारी के कारण परेशान हैं। भारत में ही कोविड-19 के कारण संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 10 हजार के पार पहुंच चुका है। कोरोना वायरस के कारण अब तक दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी कोरोना वायरस के कारण तेजी से लोग संक्रमित हो रहे हैं और मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। कोविड-19 से मरने वाले कुछ लोगों के ऊपर एक रिसर्च की गई और जानने की कोशिश की गई कि कोरोना के मृतकों में समानताएं क्या थी। कोरोना के मृतकों में समानताएं जांचने के लिए वुहान के ही कुछ मृतकों में ये स्टडी की गई। आप भी इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि आखिर कोरोना के मृतकों में समानताएं क्या थीं ?

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कोरोना के मृतकों में समानताएं क्या हैं ?

शोधकर्ताओं ने वुहान, चीन में मरने वाले करीब 85 लोगों पर शोध किया। शोध के बाद जानकारी मिली कि कोरोना के मृतकों में समानताएं पाई गई है। यानी कोरोना से मरने वाले व्यक्तियों में एक बात जरूर कॉमन थी। इंवेस्टिगेशन टीम में चाइना और यूनाइटेड स्टेट के आठ इंस्टीट्यूट की टीम को शामिल किया गया था। टीम में चाइना प्यूपिल लिबरेशन आर्मी जनरल हॉस्पिटल के लोग भी शामिल थे। उन लोगों ने शोध के दौरान ये पाया कि जिन लोगों की कोरोना महामारी के कारण मृत्यु हुई है, उन लोगों के शरीर का कोई न कोई ऑर्गन खराब था। शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में भी जगह दी गई है।

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कोरोना के मृतकों में समानताएं : गंभीर बीमारियां

कोरोना महामारी से पीड़ित लोगों की मृत्यु के बाद जब शोध किया गया तो ये बात सामने आई कि ज्यादातर लोगों को कोई न कोई क्रॉनिक डिसीज थी। ज्यादातर मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री में क्रॉनिक कंडीशन की बात सामने आई है। शोध के दौरान मर चुके लोगों के लेबोरेट्री टेस्ट और सीटी स्कैन आदि की जांच भी की गई। साथ ही इस बात की जानकारी भी ली गई कि उन्हें कोरोना महामारी के दौरान किस तरह का ट्रीटमेंट दिया गया। आपको बताते चलें कि कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों को लक्षणों के आधार पर अलग-अलग ट्रीटमेंट दिया जा सकता है। कोरोना के मृतकों में समानताएं काफी हद पाई गई। कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या में 72.9% पुरुष थे। इन सभी लोगों की औसत उम्र 65.8 थी। वहीं ज्यादातर लोगों को हार्ट डिसीज और डायबिटीज की समस्या थी। साथ ही रिस्क ग्रुप में 50 से ज्यादा लोग थे जिन्हें हाइपरटेंशन की समस्या यानी हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी हार्ट डिसीज और डायबिटीज की समस्या थी।

शोध के दौरान ये पाया गया कि कोरोना महामारी से मौत का सामना करने वाले लोगों में करीब 81.2% लोग ऐसे थे, जिनके शरीर में वाइट ब्लड सेल्स की मात्रा भी कम थी। आपको बताते चलें कि वाइट ब्लड सेल्स शरीर में इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करती है। जिन लोगों में वाइट ब्लड सेल्स की कमी होती है, उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है।

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एंटीबॉडी को भी कोई असर नहीं

कोरोना के मरीजो को उपचार के दौरान एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और ग्लुकोकोर्टिकोइड्स आदि दिए गए। साथ ही इंटरफेरॉन अल्फा -2 बी, इम्युनोग्लोबुलिन आदि का भी प्रयोग किया गया।ये सभी शरीर में एंटीबॉडी को बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। ये बात भी साफतौर पर डॉक्टर्स को समझ आ चुकी थी कि कोरोना के पेशेंट में एंटीबॉडी का कोई भी असर नहीं हो रहा था। शोध के दौरान ये बात भीका सामने आई कि ज्यादातर लोगों में सांस संबंधि तकलीफ संक्रमण के तुरंत बाद नजर नहीं आए बल्कि मौत से कुछ पहले ही लोगों को सांस लेने में अधिक तकलीफ महसूस हुई। ज्यादातर लोगों में लो eosinophils की समस्या भी सामने आई थी। मुख्य रूप से कोरोना के मृतकों में समानताएं जो भी पाई गई, वहीं सब बातें मौत का आंकड़ा बढ़ने साथ भी नजर आ रही है। फिलहाल लोगों को इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय के बारे में जानकारी दी जा रही है और साथ ही सावधान रहने की सलाह भी दी जा रही है।

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सावधानी ही है कोरोना से बचने का उपाय

ये सच है कि इस तरह के शोध से डॉक्टर्स को महामारी में लड़ने के दौरान काफी मदद मिल सकती है, लेकिन कोविड- अलग तरह का वायरस है। रोजाना डॉक्टर्स को पेशेंट के लक्षणों को लेकर नई जानकारी मिलती रहती है। ऐसे में वायरस के नए स्ट्रेन के लिए वैक्सीन खोजने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। कोविड-19 महामारी से बचने का बेहतर उपाय यही है कि वायरस से बचाव किया जाए। बुजुर्ग लोग और जिन लोगों को क्रॉनिक डिसीज है, वो लोग विशेष तौर पर अपना ख्याल रखें। अगर कोई व्यक्ति बाहर से घर के अंदर प्रवेश कर रहा है तो बेहतर रहेगा कि वो खुद को पूरी तरह से साफ करें। घर के बाहर निकलते समय मास्क का यूज जरूर करें। कपड़े का यूज भी मास्क की जगह किया जा सकता है। अगर आपको किसी भी तरह की क्रॉनिक डिसीज है तो बेहतर होगा कि आप समय पर दवा लें। कोरोना के लक्षण अगर दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर अपना इलाज कराएं। सावधानी से ही कोरोना महामारी पर रोक लगाई जा सकती है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Coronavirus Disease (COVID-19) – Statistics and Research: https://ourworldindata.org/coronavirus Accessed on 14/4/2020

Coronavirus Patient Reports: https://www.cdc.gov/mmwr/volumes/69/wr/mm6913e2.htm  Accessed on 14/4/2020

Why ‘Death Rates’ From Coronavirus Can Be Deceiving: https://www.npr.org/sections/goatsandsoda/2020/03/27/821958435/why-death-rates-from-coronavirus-can-be-deceiving Accessed on 14/4/2020

COVID-19, a worldwide public health emergency: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7173827/  Accessed on 21/4/2020

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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