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गंजे पुरुषों को ज्यादा है कोरोना का खतरा, जानें क्या कहती है रिसर्च

गंजे पुरुषों को ज्यादा है कोरोना का खतरा, जानें क्या कहती है रिसर्च 

दुनियाभर में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कई वैक्सीन और दवाओं पर तरह-तरह की रिसर्च चल रही हैं। सोशल डिस्टेंसिंग और तमाम एहतियातों के बावजूद भी कोविड-19 का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। दिन पर दिन कोरोना पेशेंट्स की संख्या बढ़ती ही जा रही है। भारत में यह संख्या ढाई लाख से भी ऊपर पहुंच गई है। ऐसे में हर दिन कोरोना से बचाव के लिए रिसर्च हो रही है। इन शोधों से कई तरह के फैक्ट्स भी सामने आ रहे हैं। कोरोना के बदलते लक्षण से लेकर इसके रिस्क फैक्टर्स में कई तरह के बदलाव देखने को मिले हैं। इस ही बीच एक यह रिसर्च सामने आई है कि गंजे पुरुषों में कोरोना का खतरा ज्यादा होता है। आपको बता दें कि यह स्टडी अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक रिसर्चर ने की है।

क्या कहती है रिसर्च?

ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता का मानना है कि गंजे पुरुषों में कोरोना का खतरा अधिक एंड्रोजन की वजह से होता है। एंड्रोजन हार्मोन का समूह जो पुरुषों में बालों के झड़ने का कारण बनता है। मेल बाल्डनेस, कोविड-19 के गंभीर मामलों से जुड़ा हुआ हो सकता है। शोधकर्ता का दावा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कोरोना संक्रमण से मरने वाले पहले अमेरिकी फिजिशियन का नाम डॉ फ्रैंक ग्राबिन था और वे गंजे थे। इसलिए, शोधकर्ता का मानना है कि उनकी इस खोज को “गैब्रिन साइन” के नाम से जाना जाना चाहिए।

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कोरोना का खतरा और पुरुषों में गंजापन

वैम्बियर और उनकी टीम ने स्पेन में कोरोना का खतरा और मेल बाल्डनेस पर दो अध्ययन किए। कार्लोस वैम्बियर के पहले अध्ययन में पाया गया कि स्पेनिश अस्पतालों में कोविड-19 के साथ जांचे गए 41 रोगियों में से 71% पुरुष गंजे थे। जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित एक दूसरे अध्ययन में पाया गया कि मैड्रिड के अस्पतालों में 122 पुरुष कोरोना वायरस रोगियों में से 79% गंजे थे। रिसर्च के प्रमुख लेखक डॉ कार्लोस वैम्बियर ने कहा कि, ”गंजेपन और कोरोना की गंभीर स्थिति के बीच में संबंध है।” इसे गंभीरता से लेना चाहिए। शोधकर्ता का दावा है कि उसने रिसर्च में पाया है कि, गंजे पुरुषों में कोरोना के गंभीर संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है।

एंड्रोजन और कोरोना का खतरा

मेल सेक्स हार्मोन एंड्रोजन बालों के झड़ने का कारण बनता है और कोशिकाओं पर हमला करने के लिए कोरोना वायरस की क्षमता बढ़ा सकता है। इसका मतलब है कि हार्मोन-सप्रेसिंग ड्रग्स का इस्तेमाल संभवतः कोविड -19 की प्रगति को धीमा करने के लिए किया जा सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं पर अध्ययन को एक संभावित उपचार पद्धति के रूप में देखा गया है। हालांकि, मैथ्यू रेटिग, यूसी लॉस एंजिल्स के एक ऑन्कोलॉजिस्ट, सिएटल और न्यूयॉर्क में 200 बुजुर्गों पर एंड्रोजेन दवाओं के इस्तेमाल का निषेध कर रहे हैं। दरअसल, प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में एंड्रोजन को एक एंजाइम कैंसर ग्रोथ बढ़ाने वाले एंजाइम के रूप में देखा गया है। अप्रैल में प्रकाशित एक पेपर में पाया गया कि यह एंजाइम कोरोना वायरस संक्रमण में शामिल था।

प्रोस्टेट कैंसर फाउंडेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष हावर्ड सोले ने इस महीने की शुरुआत में साइंस पत्रिका को बताया कि “हर कोई एंड्रोजन और कोरोना के खतरे के बीच में एक लिंक को ढूंढने में लगा हुआ है। हालांकि, तब तक मेरी यह सलाह है कि लोग ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतें। प्रोस्टेट कैंसर की दवाओं का उपयोग कोरोना वायरस उपचार के लिए करने से पहले कई सटीक शोधों की आवश्यकता है।”

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एडीटी और कोरोना का खतरा

लीडिंग कैंसर मैगजीन एनल्स ऑफ ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, “शोधकर्ताओं ने पाया है कि COVID-19 संक्रमण से पुरुषों की रक्षा करने के लिए एंड्रोजन-डेप्रिवेशन थेरिपीज प्रभावी है। इटली के वेनेटो में 4532 पुरुषों के एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों को एंड्रोजेन-डेप्रिवेशन थेरिपी (एडीटी) के साथ प्रोस्टेट कैंसर का इलाज किया जा रहा था, उनमें कोरोना वायरस होने की संभावना कम थी।”

यूनिवर्सिटी डेला स्वेजेरा इटालियाना (बेलिनजीनो, स्विटजरलैंड) के प्रोफेसर एंड्रिया अलिमोंटी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड-19, 9.5% (430) से संक्रमित 4532 पुरुषों में कैंसर था और 2.6% (118) को प्रोस्टेट कैंसर था। पुरुष कैंसर के मरीजों में COVID-19 संक्रमण खतरा 1.8 गुना ज्यादा था और इससे और अधिक गंभीर बीमारी विकसित हुई। हालांकि, वेनेटो क्षेत्र के सभी प्रोस्टेट कैंसर रोगियों को देखा, तो उन्होंने पाया कि एंड्रोजेन-डेप्रिवेशन थेरिपी पर 5,273 पुरुषों में से केवल चार ने COVID -19 संक्रमण विकसित किया और उनमें से किसी की भी मृत्यु नहीं हुई। इसकी तुलना में प्रोस्टेट कैंसर वाले 37,161 पुरुष, जिनको एंड्रोजेन-डेप्रिवेशन थेरिपी नहीं दी जा रही थी, उनमें से 114 में से18 की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई। वहीं, अन्य प्रकार के कैंसर वाले 79,661 रोगियों में, 312 कोरोना संक्रमित हुए जिनमें से 57 की मृत्यु हो गई।

प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों जिनको एडीटी दी गई उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा चार गुना उन रोगियों की तुलना में कम था जिन्हें इस थेरिपी से दूर रखा गया। प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों की एडीटी से तुलना करने पर इससे भी बड़ा अंतर पाया गया।

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एंड्रोजन के लिए थेरिपी

कई मेडिकली एप्रूव्ड थेरिपीज हैं जो एंड्रोजन के स्तर को कम कर सकती हैं और जो रोगियों को दी जा सकती हैं। उदाहरण के लिए, हार्मोन को मुक्त करने वाले हार्मोन को ल्यूटिनाइज करना, या एलएच-आरएच, एंटागोनिस्ट्स (antagonists) 48 घंटों में रोगियों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकते हैं। प्रोफेसर एलीमॉन्टी (Institute of Oncology Research in Bellinzona) ने कहा कि “एण्ड्रोजन लेवल कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षणों की गंभीरता को बढ़ा सकता है। COVID-19 से संक्रमित पुरुषों में थोड़ी देर के लिए एडीटी का उपयोग कोरोना के जोखिम को कम करने के लिए प्रेरित करता है। हालांकि, इन आंकड़ों को कोविड-19 के संक्रमित रोगियों के एक बड़े समूहों पर यह स्टडी करने की आवश्यकता है।”

रिसर्च की लिमिटेशन में यह फैक्ट है कि कोरोना संक्रमित कैंसर रोगियों का गैर-कैंसर रोगियों की तुलना में वायरस के लिए परीक्षण किया जा सकता है। इससे कैंसर रोगियों और कोरोनो वायरस के बीच संबंध को भी आसानी से समझ जा सकता है। एडीटी प्राप्त करने वाले प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों को एडीटी न मिलने वाले लोगों की तुलना में सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में ज्यादा सावधान रहना चाहिए।

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क्या एंड्रोजन कुछ महिला रोगियों के लिए भी एक समस्या का संकेत है?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, “मेटाबॉलिक सिंड्रोम या बर्थ कंट्रोल मेथड का उपयोग करने वाली महिलाओं पर यह रिसर्च की जानी चाहिए। इसके अलावा, ऐसी कई मेडिकल कंडीशंस हैं जिससे महिलाओं में एंड्रोजन का स्तर बढ़ सकता है जिससे उनमे कोविड -19 के जोखिम की संभावना बढ़ सकती है।” बता दें इससे पहले ऐसी कई स्टडी रिपोर्ट आ चुकी है जिसमें यह तो साबित हो चुका है कि कोरोना वायरस का खतरा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा है। ऐसे में मेल बाल्डनेस इस समस्या को और भी अधिक बढ़ा सकती है।

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सूत्र

Bald men could be more likely to suffer serious coronavirus symptoms – here’s why.
Androgen-Deprivation Treatment May Protect Men From COVID-19. https://www.derryjournal.com/read-this/bald-men-could-be-more-likely-suffer-serious-coronavirus-symptoms-heres-why-2876321#gsc.tab=0. Accessed On 08 June 2020

https://medicaldialogues.in/oncology/news/androgen-deprivation-treatment-may-protect-men-from-covid-19-65550. Accessed On 08 June 2020

Bald Men At Higher Risk Of Severe Coronavirus Symptoms. https://www.forbes.com/sites/marlamilling/2020/06/06/bald-men-at-higher-risk-of-severe-coronavirus-symptoms/#6ae5d75929e4. Accessed On 08 June 2020

Why coronavirus hits men harder: sex hormones offer clues. https://www.sciencemag.org/news/2020/06/why-coronavirus-hits-men-harder-sex-hormones-offer-clues. Accessed On 08 June 2020

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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