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कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत मजबूत, पूरी दुनिया में सबसे कम 'डेथ रेट'

कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत मजबूत, पूरी दुनिया में सबसे कम 'डेथ रेट'

कोरोना वायरस के प्रकोप को चार महीने से ज्यादा समय हो चुका है। इस समय पूरी दुनिया इस खतरनाक वायरस से जंग लड़ रही है। वहीं सभी देश के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने में लगे हैं। कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा मजबूत है। चार महीने से चल रही कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत दुनिया में प्रति 10 लाख सबसे कम बढ़ती मौतों वाले देश में से एक है।

कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत मजबूत

भारत में पुष्टि किए गए मामलों में अब तक 2500 मौतों के साथ 75,000 का आंकड़ा पार कर लिया है। कई विकसित देशों और विशेष रूप से चीन के साथ तुलना में भारत की स्थिति कई मामलों में बेहतर है। चीन में 84,451 मामले और 4,644 मौतों रिपोर्ट हुई हैं।

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भारत में प्रति 10 लाख से भी है कम डेथ रेट

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) द्वारा कोविड-19 पर जारी एक डेटा-सेट के अनुसार, 7 मई को, भारत में प्रति मिलियन में संचयी मृत्यु 1.29 है, जो कि कई देशों की तुलना में बहुत कम है- यूएस (196.97), चीन (3.23), फ्रांस (394.91), यूके (443.04), स्वीडन (291.21), इटली (490.85), स्पेन (553.06), जर्मनी (84.97) आदि। वहीं भारत में मामलों पर मृत्युदर (सीएफआर) भी सबसे कम 3.2 प्रतिशत है।

अध्ययन के अनुसार, पहले 30 दिनों में प्रति मिलियन मौत पहले 30 दिनों में हुई मौतों की कुल संख्या का एक अंश है (दिन 1 की गणना उस दिन से की जाती है जब किसी दी गई जनसंख्या में पहला कोविड-19 मामला दर्ज किया गया था)।

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कोरोना वायरस से लड़ाई को लेकर क्या कहते हैं पीएचएफआई के अध्यक्ष?

पीएचएफआई के अध्यक्ष प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा कि प्रति मिलियन जनसंख्या पर होने वाली मौतें एक निश्चित संकेतक प्रदान करती हैं, जो केस प्रबंधन में स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता के साथ-साथ जनसंख्या-आधारित रोकथाम उपायों की दक्षता को पकड़ती है। साथ ही यह दरों के परीक्षण के लिए असुरक्षित भी नहीं है।

अमेरिका और यूरोप से कम है भारत की मृत्यु दर

प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी ने जोर देकर कहा कि भारत की मृत्युदर अमेरिका या यूरोप से कम है, और कम रहना निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है। अमेरिका और यूरोप भारत के रूप में एक ही समय के आसपास शुरू हुआ, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया की रणनीति अलग और धीमी गति से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि भारत के नियंत्रण के उपाय पहले शुरू हुए थे।

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रेड्डी ने कहा, “हमारे पास युवा आबादी है, जो वायरस का सामना बेहतर ढंग से कर सकती है। हमारे पास बहुत अधिक ग्रामीण आबादी है जो शहरी आबादी की तुलना में कम गतिशील है। इससे हमारे यहां प्रसार कम और धीमा है। वायरस की संक्रामकता दर (आरओ) कम गतिशीलता वाली ग्रामीण आबादी की तुलना में अधिक गतिशीलता वाली शहरी आबादी में अधिक है।”

रेड्डी ने जोर देकर कहा कि भारत में, अधिकारियों को बारीकी से निगरानी करनी होगी कि लॉकडाउन आसान होने के साथ वायरस कैसे फैलता है। “हमें अभी भी उम्मीद है कि हमारे सामाजिक-जनसांख्यिकीय और जलवायु कारक हमें चीनी स्तरों से नीचे रखेंगे।” भारत में जनवरी के अंत में पहले कोविड-19 मामले की सूचना दी थी। यहां अब तक कुल 74,281 पुष्ट मामले हैं और 2,415 मौतें हुई हैं।

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भारत के प्रयासों की डब्लयूएचओ ने भी की थी तारीफ

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) ने प्रशंसा की थी। डब्ल्यूएचओ के निदेशक माइकल रेयान ने कहा था कि भारत विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। भारत कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए बेहतर क्षमता रखता है। भारत को इससे पहले चेचक और पोलियो से भी निपटने का अनुभव है।

स्थिति को कंट्रोल करने के लिए समय पर लॉकडाउन घोषित करने को लेकर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की सराहना की थी। उन्होंने भारत के इस कदम को मुश्किल समय में लिया गया सही फैसला बताया। विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा- भारत कठिन चुनौतियों के बावजूद कोरोना वायरस से लड़ाई में डटकर खड़ा है।

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कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम

भारत सरकार ने अमेरिका और इटली जैसे देशों की स्थिति को देखते हुए पहले ही देश की होने वाली स्थिति को भांप लिया था। इसे ध्यान में रखते हुए कोरोना से लड़ाई के चलते भारत सरकार ने समय रहते कई सारे मजबूत फैसले लिए। भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों में अहम लॉकडाउन रहा। इसके अलावा भारत ने लोगों की जरूरतों के अनुसार वस्तुओं को उन तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की। इसके अलावा कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को ढूंढने से लेकर उनके उपचार को लेकर सारे बंदोबस्त किए।

केंद्र सरकार ने कमजोर वर्ग के लोगों के लिए ‘पीएम गरीब कल्याण योजना’ पैकेज की घोषणा की। लॉकडाउन के चलते देश को आर्थिक मंदी से बचाने के लिए सीनियर आर्थिक विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम का गठन भी किया गया। इसके अलावा भारत सरकार ने वक्त पर अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर रोक लगाई। कोरोना वायरस के ट्रीटमेंट और वैक्सीन तैयार करने को लेकर उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया। भारत में कोरोना के प्रसार को लेकर स्टडी भी की गई है। जिन वजहों से कोरोना संक्रमण फैल रहा है, उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है।

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सरकार की आर्थिक नीति भी करेगी मदद

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान 41 करोड़ खातों में 52,606 करोड़ रुपए डाले हैं। इसके साथ ही उन्होंने 15 उपायों की घोषण की। इनमें से 6 लघु-मझोले उद्योगों के लिए हैं।

उल्लेखनीय है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की, जिससे कोरोना से उत्पन्न संकट के समय देश की विकास यात्रा को नई गति दी जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के चौथे चरण को लेकर कहा कि यह पूरी तरह नए रंग रूप और नियमों वाला होगा। उन्होंने बताया कि राज्यों से मिले सुझाव के आधार पर लॉकडाउन 4 से जुड़ी जानकारी 18 मई से पहले दी जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से स्थानीय उत्पादों को खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि संकट में लोकल ने देश को बचाया है। आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए ‘वोकल’ बनना है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है।

(न्यूज एजेंसी आईएएनएस से इनपुट)

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सूत्र

Coronavirus – https://www.who.int/health-topics/coronavirus – Accessed on 13/5/2020

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Coronavirus (COVID-19) – https://www.nhs.uk/conditions/coronavirus-covid-19/ – Accessed on 13/5/2020

Coronavirus death rate- https://www.worldometers.info/coronavirus/country/india/ –Accessed on 13/5/2020

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Mona narang द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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