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लॉकडाउन में घर से ऐसे काम कर रही है हैलो स्वास्थ्य की टीम, जिससे आपको मिलती रहे हेल्थ से जुड़ी हर अपडेट

लॉकडाउन में घर से ऐसे काम कर रही है हैलो स्वास्थ्य की टीम, जिससे आपको मिलती रहे हेल्थ से जुड़ी हर अपडेट

कोरोना लॉकडाउन की वजह से हर किसी की जिंदगी प्रभावित हुई है। पूरा देश तमाम समस्याओं से गुजर रहा है। बहुत सारे लोग दफ्तर का काम घर से ही कर रहे हैं। हैलो स्वास्थ्य की टीम भी इसमें पीछे नहीं हैं। हमारी टीम के सभी साथी कोविड-19 से जुड़ी हर अपडेट सही आंकड़े और जानकारी को समय पह अपने यूजर्स तक पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लॉकडाउन में जिंदगी को लेकर हमने अपनी टीम से कुछ सवाल पूछे हैं। जिसमें हमने यह जानने की कोशिश कि कैसे वे वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं? इस दौरान उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है? लॉकडाउन की अवधि में वे अपने यूजर्स को क्या संदेश देना चाहते हैं? वर्क फ्रॉम होम को आसान बनाने के लिए यूजर्स संग क्या टिप्स शेयर करेंगे?

लॉकडाउन में जिंदगी: पीयूष सिंह राजपूत, कंटेन्ट एडिटर

लॉकडाउन में जिंदगी : पीयूष सिंह राजूपत, एडिटर हैलो स्वास्थ्य

पीयूष कहते हैं, ” निश्चित तौर पर इस महामारी की वजह से जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। लेकिन यह लॉकडाउन बेहद जरूरी भी था। मुझे लगता है कि सरकार ने समय रहते सही फैसला लिया, जिसकी वजह से हम अब भी कम्यूनिटी स्प्रैड से बचे हुए हैं। हमारी तरह मीडिया के अन्य साथी भी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, यकीन मानिए आप अकेले नहीं है। हमें भी वर्क फ्रॉम होम में मानिसक और शारीरिक परेशानियां हो रही हैं, लेकिन आप इसे एक तपस्या समझें। आपको भी अगर जरा भी खांसी है, तो घर पर भी फेस मास्क लगाएं और घर वालों से भी दूरी बनाकर रखें। हैलो स्वास्थ्य (helloswasthya.com) के हमारे सभी साथी इस लड़ाई में आपके साथ हैं। हम घर पर रहकर भी दोगुनी रफ्तार से काम कर रहे हैं, जिससे अपने प्यारे देशवासियों को स्वास्थ्य संबंधित हर अपडेट समय पर पहुंचाते रहें “।

लॉकडाउन में जिंदगी :यकीन मानें आप और हम घर से जंग लड़ रहे हैं

पीयूष आगे कहते हैं, ” जो लोग घरों पर रहकर खुद का और दूसरों का बचाव कर रहे हैं, उन्हें हमारा प्रणाम। यकीन मानें आप और हम घर से एक तरह की जंग ही लड़ रहे हैं। वहीं कुछ लोगों को अब भी सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व समझ नहीं आ रहा है। उन्हें बस इतना ही कहूंगा कि इटली जैसे देशों ने भी कोरोना को हल्के में लेने की भूल की थी और आगे क्या हुआ आंकड़े गवाह हैं। संभल जाइए, वरना तबाह हो जाएंगे”।

घर से काम करने वाले लोगों के लिए मेरे टिप्स

  • अगर आप भी हमारी तरह घर से काम कर रहे हैं, तो मेरे कुछ टिप्स अपना सकते हैं। मैं रोज सुबह तय वक्त पर ही उठता हूं। वर्कफ्रॉम होम है, इसका मतलब ये नहीं कि आप आराम से सोकर उठें। उठने में आलस करेंगे तो फिर काम नहीं कर पाएंगे। ठीक उसी तरह उठकर तैयार हों, जैसे आप ऑफिस के लिए तैयार होते हैं।
  • निश्चित तौर पर लॉकडाउन में जिंदगी संघर्षपूर्ण है। शुरुआती दिनों में मुझे घर पर बैठकर काम करने में तकलीफ हो रही थी। ऐसा इसलिए भी क्योंकि ऑफिस की चेयर और घर के फर्नीचर में काफी अंतर होता है। इसलिए काम करने के लिए एक डेडीकेटेड जोन बनाएं।
  • मैं काम के दौरान घर वालों से बात नहीं करता हूं। क्याेंकि इससे मेरा ध्यान हटता है। हां, यह जरूर है कि बीच-बीच में मैं घर के अंदर ही टहल लेता हूं और परिवार वालों से 5 मिनट गपशप मारकर फिर काम करने बैठ जाता हूं।
  • ऑफिस की तरह पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाने के कारण थोड़ी चिड़चिड़ाहट होती है। ऐसे वक्त में मैं कुछ देर म्यूजिक थेरिपी का इस्तेमाल करता हूं। यकीन मानिए गाने सुनकर आपकी चिड़चिड़ाहट भी दूर हो जाएगी और आप काम के लिए फिर से रिफ्रेश हो जाएंगे।

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लॉकडाउन में जिंदगी: भावना अवस्थी, राइटर

भावना कहती हैं, ” लॉकडाउन के दौरान बच्चों के स्कूल बंद हैं। बच्चे को पूरा दिन संभालते हुए ऑफिस का काम करना बहुत बड़ा चैलेंज है। बच्चे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, इसलिए उन्हें घर के अंदर खेल के साथ ही अपनी मॉम का पूरा समय भी चाहिए होता है। अब चूंकि ऑफिस का काम भी देखना है और बाकी जिम्मेदारियों को भी संभालना है, ये वक्त एक मां के लिए बहुत ही चैलेंजिंग है। कई बार अपनी जगह से उठने के बाद मुझे मेरा लैपटॉप ऑफ मिलता है, क्यूंकि मेरी बेबी को नहीं पसंद की मैं उसे इग्नोर करके लैपटॉप में काम करूं। मुझे कई बार अपने गुस्से को भी कंट्रोल करना पड़ता है। इन सब के बावजूद मैं अपने ऑफिस वर्क और घर के काम के बीच बैलेंस बना कर चल रही हूं “।

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लॉकडाउन में जिंदगी: सुरेंद्र अग्रवाल, राइटर

सुरेंद्र कहते हैं, ” मैं दिल्ली से हूं और मुंबई में अकेला रहता हूं। मेरे जैसे बैचलर के लिए लॉकडाउन में जिंदगी बिताना और वर्क फ्रॉम होम करना काफी मुश्किल है। क्योंकि आपको घर का सारा काम भी खुद करना होता है और ऑफिस वर्क में सौ प्रतिशत भी देना होता है। बस इन्हीं दोनों बातों में तालमेल बैठाना ही कामकाजी लोगों के लिए लॉकडाउन की सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, आप अकेले रहने की वजह से और कमरे में बंद रहने की वजह से मानसिक तौर पर काफी कमजोर हो जाते हैं, जिसका असर आपके शरीर, दिमाग और काम पर पड़ता है। लेकिन, इन चुनौतियों से पार पाना ही असली सफलता होगा “।

अपनाएं ये टिप्स

सुरेंद्र आगे कहते हैं कि इस वक्त हमें संयम बरतने की आवश्यक्ता है, क्योंकि बहुत जल्द यह समस्या खत्म हो जाएगी। बाकी, सुबह थोड़ी देर व्यायाम करें, ध्यान लगाएं, जिससे मन और दिमाग मजबूत और संयमित रहे। वर्क फ्रॉम होम करते समय अपना पोस्चर ठीक रखें, ताकि आपको कमर या गर्दन दर्द जैसी दिक्कत न हो। काम के साथ बीच-बीच में ब्रेक लेकर स्ट्रेचिंग करना न भूलें। ताकि आप स्वस्थ रूप से लॉकडाउन से क्नोकडाउन (Knockdown to Lockdown) कर पाएं और बेवजह बाहर न जाएं और अपनी सेहत का ख्याल रखें।

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लॉकडाउन में जिंदगी: शायली रेखा, राइटर

शायली कहती हैं, ” वर्क फ्रॉम होम इमरजेंसी में ही अच्छी लगने वाली चीज है। लॉकडाउन के कारण वर्क फ्रॉम होम में मजा नहीं आ रहा है। घर पर ऑफिस की कुर्सी और मेज की बहुत याद आती है। बिस्तर, चेयर और फर्श पर बैठ कर काम करने में कमर दर्द, गर्दन में दर्द और कंधे में दर्द जैसी समस्या हो रही है। इस वक्त ऑफिस की तुलना में ज्यादा भूख भी लगती है। सबसे बड़ी दिक्कत स्लो चल रहे इंटरनेट से होती है। मैं रोज सुबह 3-4 बजे उठ कर अपने टेक्निकल कामों को फटाफट निपटाने की कोशिश करती हूं। जिस कारण से नींद भी पूरी नहीं हो पाती है। घर की बालकनी ही मेरा ठिकाना हो गई है। मैं उसे बालकनी नहीं बल्कि कोरोना के समय में सेल्फ आइसोलेशन रूम मानने लगी हूं।

मेरे वर्कफ्रॉम होम टिप्स

  • मैं माइंड रिफ्रेश करने के लिए बीच-बीच में उठ कर घर में ही टहलती हूं, पानी पीती हूं और घर वालों से थोड़ी बातें करती हूं।
  • गर्दन और कंधे में दर्द होने पर उठ कर थोड़ी एक्सरसाइज भी करती हूं, जिससे राहत मिलती है।
  • इस मुश्किल दौर में मैं यही कहना चाहूंगी हम कल क्या थे और आने वाले कल में क्या होंगे बस इसी के बीच का वर्तमान हमारा सुनहरा भविष्य तय करेगा।
  • अगर आपको ये लॉकडाउन अभी भी 13 दिनों का लग रहा है तो आप ये कतई न सोचें कि ये 13 दिन का लॉकडाउन है, ये सोचें कि बस ये लॉकडाउन कल भर और रहेगा। क्योंकि, मेरे दोस्त कल कभी आता नहीं और ये दिन ऐसे ही कट जाएंगे।

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लॉकडाउन में जिंदगी: अंकिता, राइटर

मेरा वर्कफ्रॉम होम मुझे हमेशा याद रहने वाला है। मैं सुबह उठती हूं ब्रश करके और फ्रेश होकर काम करना शुरू कर देती हूं। अगर नेट चलता है, तो अच्छी बात है नहीं चलता है सोचते हैं आज क्या बनाए खाने में, नहाउं या ना नहाउं। फिर फाइनली कुछ न करने का फैसला करते हैं और काम पर लग जाते हैं। लंच के फिक्स समय में जो भी बना लिया वो खा लिया। जब घर से बाहर जाना ही नहीं है, तो नहा कर समय बर्बाद करना कैसा, इसलिए शनिवार का दिन फिक्स किया है नहाने के लिए।

मुझे अभी एक होम थिएटर, टेबल और चेयर की सख्त कमी महसूस हो रही है। और हां वाई-फाई भी। अगर यह लॉकडाउन 15 अप्रैल से और आगे बढ़ा तो पता नहीं मेरा क्या होगा। आस-पास सिर्फ चिड़ियों और कुत्तों के भौंकने की ही आवाज आती है।

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लॉकडाउन में जिंदगी: मौसमी दत्ता, कंटेन्ट एडिटर

सच कहें तो वर्किंग वुमन के लिए घर से काम करे या ऑफिस से वह चुनौतीपूर्ण काम ही होता है। पर लॉकडाउन के दौरान वर्क फ्रॉम होम करना सचमुच मुश्किल काम होता है क्योंकि परिवार में बच्चों से लेकर बड़े सभी लोग हैं। यह एक सामान्य मानसिकता होती है कि जब महिला ऑफिस न जाकर घर पर हो तो सब यही आशा करते हैं कि उन्हें संडे जैसा स्पेशल ट्रीटमेंट मिले। यानि अच्छा-अच्छा खाना, आराम और सभी सहुलियतें मिलें। ऊपर से बच्चों का घर पर रहना यानी पूरा घर सिर पर उठा लेना। कुलमिलाकर कहें तो लॉकडाउन के दौरान वर्किंग वुमन्स सबको खुश रखने के चक्कर में शारीरिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह से थक जाती हैं, लेकिन तब भी हम यही कहेंगे कि सभी घर पर रहे, तभी कोविड-19 के महामारी को जड़ से खत्म कर सकते हैं। हर वर्किंग वुमन की तरह मेरी भी यही कहानी है।

ऐसे आसान बनाएं वर्क फ्रॉम होम

हां, वर्क फ्रॉम होम को आसान बनाने के लिए एक बात कह सकते है कि आप वीकएंड में ही पूरे हफ्ते के लिए एक रूटीन शेड्यूल बना लें जिससे हर काम को आप आसानी से समय पर कर सकें। अगर घर पर सास-ससुर या मां-पिताजी या अन्य बुजुर्ग हैं, तो बच्चों को उनके साथ व्यस्त रखने की कोशिश करें। इससे यह होगा कि दोनों जेनेरेशन को तनाव या डिप्रेशन का सामना नहीं करना पड़ेगा और आपका भी काम थोड़ा आसान होगा। और अगर आप दोनों बच्चों के साथ अकेले रहते हैं तो बच्चों को तरह-तरह के इंडोर गेम्स खेलने या, बुक्स पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और काम खत्म हो जाने के बाद सभी को एक साथ मिलकर समय व्यतित करना चाहिए।

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लॉकडाउन में जिंदगी: मंजरी, कंटेन्ट एडिटर

‘वर्क फ्रॉम होम’ कभी मन को लुभाने वाली चीज इन दिनों मजबूरी बन गई है। वैसे अगर इसे इस समय की जरूरत कहा जाए तो सही होगा। वर्क फ्रॉम होम हमारे जैसे लोगों (प्राइवेट कर्मचारियों) के लिए एक ऐसी पहल है जिसने हमें कोरोना के जाल से बचा रखा है। अगर इसे समय लागू नहीं किया जाता है तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि हमारे देश का हाल भी अमेरिका या इटली की तरह होता।
वैसे अगर अपनी बात करूं तो मैं तो वर्क फ्रॉम काे एंजॉय कर रही हूं (बैक पेन और शोल्डर पेन के साथ)। इससे पहले कभी घर पर इतना समय बिताने का मौका नहीं मिला (क्योंकि ज्यादातर समय ऑफिस और ट्रैफिक में बीतता था)। जब वर्क फ्रॉम की शुरुआत हुई थी तब कुछ दिन इसके साथ सामंजस्य बिठाने में परेशानियां हुईं, लेकिन अब इसमें रम गई हूं। ऐसा लग रहा है कि ऐसे में काम भी ज्यादा हो रहा है (इसके अलावा और कुछ करने को नहीं है, ये बात अलग है)। कई दोस्त शिकायत कर रहे हैं कि हम घर पर बैठे-बैठे बाेर रहे हैं। भई हमारे पास तो बोर होने के लिए समय नहीं है। बस वर्क फ्रॉर्म में जो चीज बाधा डाल रही है वो है इंटरनेट कनेक्शन। काश सरकार ने इसके लिए भी कुछ इंतजामात पहले ही कर लिए होते तो… । खैर, कोरोना वायरस से बचाव के सभी नियमों का पालन करें और कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें
टिप्स के तौर पर वर्क फ्रॉर्म कर रहे साथियों से यही कहना चाहूंगी कि,
  • एक जगह बैठकर कई घंटाें तक काम न करें।
  • बीच-बीच में उठकर चहलकदमी करें (घर में ही, बाहर न निकल जाएं)।
  • सही पॉश्चर में बैठकर काम करें (बेड पर लेटकर काम करने वालों के लिए स्पेशली)।
  • काम करने के लिए टेबल कुर्सी का इंतजाम कर लें तो बहुत बेहतर होगा।
  • दिन का प्रॉपर शेड्यूल बनाकर काम की शुरुआत करें (घर में हैं कभी भी काम कर लेंगे ऐसा न सोचें)

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लॉकडाउन में जिंदगी: मोना नारंग

वैसे तो मुझे लगता था हफ्ते में एक वर्क फ्रॉर्म होम तो होना ही चाहिए लेकिन लॉकडाउन के कारण मिले वर्क फ्रॉम होम ने मेरी इस सोच को बदल दिया है। मैं हर दिन के साथ कैलेंडर में तारीख को कट कर रही हूं। मुझे उस समय का बेसब्री से इंतजार है जब फाइनली दफ्तर जाकर अपने सहकर्मियों का चेहरा देख सकूं। अपनी डेस्क पर बैठकर काम कर सकूं।

वर्क फ्रॉम होम में आ रही चुनौतियों का सामना करने के लिए मैं एक दिन पहले अपने आने वाले दिन का शेड्यूल तैयार कर लेती हूं। इससे काम को समय पर पूरा करने में मदद होती है। दिनभर एक्टिव रहने के लिए रात को समय पर सोती हूं। सुबह उठकर टैरेस पर जाकर थोड़ी एक्सरसाइज कर लेती हूं। मैं कहूंगी कि आप भी दिनभर पानी पीते रहें और डायट में लाइट फूड को ही शामिल करें। घर पर काम करते वक्त आपको जिस चीज का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए वो है आपका पॉश्चर। यदि आपको पॉश्चर ठीक नहीं होता तो इससे आपको कमर या गर्दन दर्द की शिकायत हो सकती है।

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लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Mona narang द्वारा लिखित
अपडेटेड 08/04/2020
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