नए साल की पहली खुशखबरी: कोविड-19 वैक्सीन कोविशील्ड (Covishield) को आपातकालीन स्थिति में उपयोग करने की मिली मंजूरी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट January 25, 2021 . 5 मिनट में पढ़ें
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साल 2020 दुनिया के हर व्यक्ति के लिए एक बुरे सपने की तरह गुजरा है। पिछले लगभग एक साल से पूरा संसार भय के साए में हैं। इस भय का नाम है “कोरोना वायरस”, जिसे कोविड-19 भी कहा जाता है। हालांकि, इस महामारी की शुरुआत 2019 से ही हो गई थी। चीन से शुरू हुआ यह वायरस कुछ ही महीनों में पूरे संसार में फैल गया। इस वायरस के कारण लोग घरों में कैद हैं। कई लोग इस का शिकार हो चुके हैं, कुछ अभी भी इससे पीड़ित हैं, तो लाखों लोगों को इसकी वजह से अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। कई देश लंबे समय से इस महामारी से बचने का इलाज यानी वैक्सीन को तैयार करने में जी-जान से जुटे हुए हैं। 

लंबी मेहनत के बाद अब उन्हें सफलता भी मिल रही है और ऐसी पूरी उम्मीद है कि कुछ समय में हालत इस महामारी से पहले जैसे सामान्य हो जाएंगे। इस समय पूरी दुनिया के लोग यह चाहते हैं कि जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन बने और कोविड के खौफ से निकला जा सके। पिछले पूरा साल यानी 2020 बुरी खबरों से भरा जरूर था, लेकिन 2021 की शुरुआत एक अच्छी खबर से हुई है। यह वो खबर है जिसका इंतजार लंबे समय से लोग कर रहे थे। यह खबर जुड़ी है कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) से। 

कोविशील्ड (Covishield) कोविड- 19 की वैक्सीन है। इस साल एक जनवरी को ऑक्सफोर्ड एस्ट्रेजेनेका की कोरोना वैक्सीन “कोविशील्ड” को इमरजेंसी में प्रयोग करने को मंजूरी मिल गई है। यह एक बड़ी खुशखबरी है। जानिए, कोविशील्ड कितनी प्रभावी है और कब से यह उपलब्ध होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने यह भी कहा है कि यह वैक्सीन देश में मुफ्त में मिलेगी। चलिए जानते हैं भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड के बारे में जानकारी विस्तार से।

कोविशील्ड वैक्सीन(Covishield vaccine) को मिली मंजूरी

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को भारत में पुणे में स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ विकसित किया जा रहा है। उन्होंने इस कोरोना वायरस वैक्सीन के आपातकालीन प्रयोग की स्वीकृति मांगी थी। नए साल के पहले दिन सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी(SEC) ऑफ इंडिया’स सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (CDSCO) के सदस्यों ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोरोना वायरस वैक्सीन कोविशील्ड को आपातकालीन स्थिति में प्रयोग करने की मंजूरी दे दी। रिपोर्टस के अनुसार सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी (SEC) ने कुछ शर्तों के साथ इस वैक्सीन के इमरजेंसी प्रयोग की मंजूरी दी है। इस वैक्सीन को ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है और इसे एस्ट्राजेनेका द्वारा निर्मित किया गया है। सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में भारत बायोटेक ने अपनी कोवाक्सिन और सीरम इंस्टीट्यूट ने कोविशील्ड के लिए प्रेजेंटेशन दिया था। लेकिन कमिटी ने केवल कोविशील्ड को ही प्रयोग की मंजूरी दी है। हालांकि, अभी भी थोड़े और इंतजार की जरूरत है क्योंकि कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से भी अभी इस वैक्सीन को अप्रूव कराया जाएगा। अभी इस वैक्सीन को अंतिम मंजूरी के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) वि. जी. सोमानी के पास भेजा गया है। यहां से मंजूरी मिलने के बाद इस कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) की खुराक कुछ ही दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में पहुंचनी शुरू हो सकती है। एसआईआई(SII) के सीईओ अदर पूनावाला ने बताया है कि (Covishield vaccine) की 40-50 मिलियन खुराक स्टोर कर दी गई है और इसका रोलआउट जनवरी में शुरू हो सकता है।

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जानिए कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) के बारे में

कोविशील्ड एडेनोवायरस (एक सामान्य कोल्ड वायरस) के कमजोर और मॉडिफाइड वर्जन से बनी है। जो चिंपांज़ी में संक्रमण का कारण बनता है और इसमें SARS-CoV-2 वायरस स्पाइक प्रोटीन के जेनेटिक चीजें होती है। एसआईआई के सीईओ अदर पूनावाला के अनुसार इस वैक्सीन को बनाने में उन्होंने पिछले 7 -8 महीनों से कड़ी मेहनत की है। इतने लंबे समय से वो इस वैक्सीन को बनाने में लगे हैं और अब उनके पास लाखों की मात्रा में डोज तैयार है। अदर पूनावाला का कहना है कि कोरोना वायरस की इस वैक्सीन को बनाने में सबसे बड़ी चुनौती, जो उनके सामने थी, वो थी “कम समय”। इसके साथ उन्हें यह भी पता नहीं था कि यह वैक्सीन काम करेगी या नहीं। आमतौर, पर हर वैक्सीन को बनाने से पहले उसके फेज-3  के खत्म होने का इंतज़ार किया जाता है और इसके बाद उत्पाद को बनाया जाता है। लेकिन, इस वैक्सीन के लिए उन्हें पहले ही काफी इंवेस्टमेंट करना पड़ा था। अभी उनके पास इस वैक्सीन की लगभग 50 मिलियन (5 करोड़ )खुराक तैयार हैं, जो 25 मिलियन(2 .5 करोड़) लोगों के लिए पर्याप्त हैं। वो लगातार इस वैक्सीन का उत्पादन कर रहे हैं और आने वाले समय में इस उत्पादन को बढ़ा दिया जाएगा। इस कंपनी का यह भी मानना है कि आने वाले समय में यानी दो या तीन महीनों में वो लगभग दस करोड़ कोविशील्ड वैक्सीन की डोज तैयार कर लेंगे। यही नहीं, भारत में वेक्सिनेशन के पहले फेज में लगभग तीस करोड़ लोगों को इस वैक्सीन का प्रयोग करने दिया जाएगा। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई है। 

स्टोर

इस वैक्सीन को बहुत कम तापमान पर स्टोर किया जाता है। एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड कोविड -19 वैक्सीन को कम से कम छह महीने तक सामान्य रेफ्रिजरेटेड कंडीशंस में (2 ° C से 8 ° C) पर स्टोर, एक जगह से दूसरी जगह भेजा और संभाला जा सकता है। हालांकि हमारे देश में कोल्ड स्टोरेज कम है इसलिए यह एक समस्या का कारण जरूर हो सकता है। ऐसा भी माना जा रहा है कि कोविशील्ड वैक्सीन(Covishield vaccine) की एक बोतल में दस डोज स्टोर है और इस बोतल को अगर एक बार खोल दिया जाता है, तो चार या पांच घंटे के अंदर इसका प्रयोग करना अनिवार्य है। अभी तैयार वैक्सीन को सही पैकिंग के साथ कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। जहां उनकी सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया गया है।

प्रभाव 

हर व्यक्ति को इस कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) के लिए दो डोज लेना जरूरी है। विषेशज्ञों के अनुसार इस कोविड -19 वैक्सीन ने 90 प्रतिशत और 62 प्रतिशत की प्रभावकारिता दिखाई है। जिन लोगों ने एक महीने के अंतर में दोनों पूरी खुराकें ली है, उनमें इसका प्रभाव 62 प्रतिशत देखा गया है। वहीं, जिन लोगों ने पहली खुराक कम और दूसरी पूरी ली, उनमें इस वैक्सीन का प्रभाव 90 प्रतिशत देखा गया है। अदर पूनावाला के अनुसार दोनों खुराकों के बीच में अंतर होना इसके प्रभाव को बढ़ाने के लिए जरूरी है।

और पढ़ें: कोरोना वायरस (कोविड 19) का टीका: क्या वैक्सीन के साइड इफेक्ट की होगी चिंता?

कीमत

कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) की कीमत अन्य दवाइयों से अधिक नहीं रखी गई है। अगर आप इस वैक्सीन को सरकारी स्टोर से लेते हैं तो इसकी एक डोज की कीमत मात्र 400 रुपए होगी और अगर आप इसके प्राइवेट स्टोर से लेते हैं तो यह आपको 700 -800 की मिलेगी। लेकिन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री में हाल ही में यह बात साफ कर दी है कि पूरे देश में कोरोना की वैक्सीन फ्री में दी जाएगी।

साइड इफेक्ट

कोरोना वायरस ने भारत में पिछले एक साल से कई लोगों की जान ली है। अभी भी रोजाना इसके कई मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में, इस वैक्सीन को मंजूरी मिलने से सभी लोगों ने राहत की सांस ली जा सकती है। हर वैक्सीन के कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं। हालांकि, कोविशील्ड वैक्सीन(Covishield vaccine)  पूरी तरह से सुरक्षित मानी गई है। इसके ट्रायल के दौरान लोगों को हलका सिरदर्द और बुखार की शिकायत हुई, लेकिन यह बेहद सामान्य है। ऐसा भी माना गया है कि यह सामान्य साइड-इफेक्ट एक या दो दिन में ठीक हो जाते हैं। 

किस को मिलेगी सबसे पहले यह वैक्सीन

कोविड-19 वैक्सीन-COVID-19 vaccine

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जाएगा। इसके बाद इस वैक्सीन को अधिक उम्र के लोगों या उन लोगों को दिया जाएगा जो अन्य रोगों से पीड़ित हैं। इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में हो रहा है तो पहले इसका प्रयोग भारत में ही होगा। लेकिन, बाद में इसका निर्यात दूसरे देशों में भी हो सकता है। यह वैक्सीन न केवल युवा बल्कि अधिक उम्र के लोगों के लिए भी असरदार है। इसलिए, इस वैक्सीन को बेहतरीन माना जा रहा है।

और पढ़ें: ब्रिटेन में जल्‍द शुरू होगा कोरोना का वैक्‍सीनेशन (COVID-19 vaccine), सरकार ने दिया ग्रीन सिग्नल

दो जनवरी से भारत के हर राज्य में कोविशील्ड वैक्सीन (Covishield vaccine) का ड्राय रन (dry run) किया जाएगा। ड्राय रन का अर्थ है वैक्सीन का प्रयोग किए बिना ही उस कार्यप्रणाली को फॉलो करना, जो वैक्सीनेशन के समय की जाएगी। इस प्रक्रिया से इस बात को चेक किया जाता है कि पूरी प्रक्रिया ठीक से काम करेगी या नहीं। ड्राय रन के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के अप्रूवल के बाद ही देश में टीकाकरण शुरू हो जाएगा। कोविशील्ड के साथ ही हमारे देश में कोरोना वायरस की दो अन्य वैक्सीनस भी फाइनल फेज में हैं। आने वाले दिनों में अगर उन्हें भी अप्रूवल मिल जाता है, तो भारत जैसे अधिक जनसंख्या वाले देश के लोगों को ज्यादा राहत मिल सकती है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कोविशील्ड वैक्सीन से वैक्सीनेशन के बाद हम सब का जीवन सामान्य हो सके। तब तक जितना हो सके घर में रहें और सरकार द्वारा बताए गए नियमों का पालन करें। इसके साथ ही वैक्सीनेशन के लिए भी तैयार रहें।

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