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लॉकडाउन में घरों में बढ़ा क्लेश, हर दिन बढ़ते जा रहे हैं घरेलू हिंसा के मामले

लॉकडाउन में घरों में बढ़ा क्लेश, हर दिन बढ़ते जा रहे हैं घरेलू हिंसा के मामले

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन लगाया गया था। इसके चलते लोग अपने अपने घरों में बंद होने को मजबूर हैं। लेकिन इस बीच एक हैरान करने वाली बात सामने आई है। लॉकडाउन के इस समय में घरेलू हिंसा की शिकायतों में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बारे में जानकारी दी है कि लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामले अचानक से बढ़ गए हैं। लॉकडाउन के करीब एक हफ्ते में ही उन्हें 250 से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं। इसमें से 69 घरेलू हिंसा की हैं। आयोग के मुताबिक, यह आंकड़ा लगातार बढ़ ही रहा है।

कोरोना वायरस और लॉकडाउन में घरेलू हिंसा

देशभर में कोविड-19 के प्रोकोप से बचने के लिए लॉकडाउन किया गया था। यह फैसला इसलिए लिया गिया जिससे लोग अपने अपने घरों में सुरक्षित रह सकें। लेकिन ऐसे में उन महिलाओं के लिए परेशानी आ खड़ी हुई है जो अक्सर अपने जीवनसाथी से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती हैं। घर में पति पत्नी के साथ रहने के कारण देशभर में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के मामले बढ़ गए हैं।

एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने मीडिया को बताया, ‘घरेलू हिंसा से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतें मिली हैं, जिसमें पति पत्नियों को गाली दे रहे हैं और उनको कोरोना वायरस बुला रहे हैं।’ घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं से मिली शिकायत के बारे में बात करते हुए, शर्मा ने कहा, ‘मुझे आज नैनीताल से एक शिकायत मिली जहां एक महिला बाहर यात्रा करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि उसका पति उसे पीट रहा है और गाली दे रहा है लेकिन वह दिल्ली में अपने घर वापस नहीं जा सकती है। वह एक छात्रावास या किसी और जगह जाना चाहती है, जहां वह लॉकडाउन के दौरान रह सकती है। वह पुलिस में भी नहीं जाना चाहती क्योंकि वह कहती है कि अगर पुलिस पति को गिरफ्तार करती है तो उसके ससुराल वाले उसे यातना देंगे।’

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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामलों के बढ़ने का एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि पहले महिलाएं पति द्वारा परेशान करने पर अपने माता-पिता के घर, दफ्तर या सार्वजनिक स्थानों पर चली जाती थी, जहां वे खुली सांस ले पा रही थी। लेकिन लॉकडाउन के दौरान उन्हें हर परेशानी के साथ अपने घर पर ही रहना पड़ रहा है। जरा सोचिए एक घर में अपराधिक मानसिकता वाले लोगों के साथ रहना कितना मुश्किल हो सकता है।

दुनियाभर की ये ही कहानी है

सिर्भ भारत में ही नहीं दुनियाभर की महिलाओं की कुछ ऐसी ही कहानी है। अमेरीका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में राष्ट्रीय हॉटलाइन नंबर पर उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की मदद के लिए फोन कॉल की बौछार हो रखी है। वहां भी महिलाएं अपने साथी से प्रताड़ित होने की शिकायत कर रही हैं।

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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा की कैसे शिकायत दर्ज करें?

लॉकडाउन के तहत पीड़ितों के लिए शिकायत दर्ज कराने के तीन तरीके हैं। पहला सोशल मीडिया, दूसरा ईमेल और तीसरा ऑनलाइन पंजीकरण।

लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के आंकडे

एनसीडब्ल्यू के आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के 69 मामले, गरिमा के साथ जीने के 77 मामले, विवाहित महिलाओं की प्रताड़ना के 15 मामले, दहेज की वजह से हत्याओं के दो मामले, बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के 13 मामले दर्ज हुए हैं। घरेलू हिंसा और प्रताड़ना की सर्वाधिक 90 शिकायतें उत्तर प्रदेश से आई हैं। दिल्ली से 37, बिहार से 18, मध्य प्रदेश से 11 और महाराष्ट्र से 18 शिकायतें आई हैं।

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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा का हो रही हैं शिकार तो क्या करें

यदि कोई महिला लॉकडाउन के इस समय में घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है तो सबसे पहले वह उस शख्स से जितना हो सके दूरी बनाकर रखे। घरेलू हिंसा से बचने के लिए अपने घर भी नहीं जा पा रही है तो उसे यह जरूर मालूम होना चाहिए कि वह क्या कदम उठाए। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि यदि वह चिल्लाए तो क्या उनकी कोई मदद करने आएगा। यदि उनके पास फोन है तो उन्हें किसे फोन मिलाना चाहिए। कौन उनकी मदद करने आ सकता है। नेश्नल हेल्पलाइन नंबर 1091 है यह उन्हें जरूर मालूम होना चाहिए। पुलिस का नंबर मिलाएं। अपने परिवार के लोगों, दोस्तों को इस बात की जानकारी दें।

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लॉकडाउन में घरेलू हिंसा: क्या आप जानते हैं घरेलू हिंसा के चार प्रकार होते हैं?

मौखिक और भावनात्मक हिंसा

किसी महिला को अगर कोई अपमानित करता है, या चरित्र के बारे में उल्टा सीधा बोलता है, मर्जी के खिलाफ शादी करना, गाली देना, आत्महत्या की धमकी देना आदि मौखिक और भावनात्मक हिस्सा में आते हैं।

शारीरिक हिंसा

किसी महिला को शारीरिक पीड़ा देना होता है। जैसे ठोकर मारना, धक्का देना, मारपीट करना, लात-घूसा मारना, किसी वस्तु से मारना या किसी अन्य तरीके से महिला को शारीरिक पीड़ा देना शारीरिक हिंसा के अंतर्गत आता है।

यौनिक या लैंगिक हिंसा

यदि कोई आपको अश्लील साहित्य या अश्लील तस्वीरों को देखने के लिए जोर जबरदस्ती करता है। कोई बलात्कार करने की कोशिश करे, दुर्व्यवहार करना, अपमानित करना यौनिक या लैंगिक हिंसा के अंतर्गत आते हैं। महिला की पारिवारिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को आहत करना भी इसके अंतर्गत आता है।

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आर्थिक हिंसा

खाने के लिए, बच्चों की पढ़ाई या कपड़ा आदि के लिए पैसे न देना, रोजगार चलाने से रोकना, महिला द्वारा कमाए जा रहे पैसे का हिसाब उसकी मर्जी के खिलाफ लेना आर्थिक हिंसा में आते हैं।

उम्मीद है हैलो स्वास्थ्य के इस आर्टिकल में कोविड-19 के दौरान घरेलू हिंसा से जुड़ी दी गई जानकारियां आपके काम आएंगी। हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। यदि आप या आपका कोई करीबी घरेलू हिंसा का शिकार होता है तो उसकी लेख में बताए तरीको से मदद करें। इसके अलावा, अगर आपके पास इसके लिए कोई अन्य सुझाव हैं, तो हमारे साथ जरूर शेयर करें। अगर इस आर्टिकल के बारे में आपकी कोई राय है, तो हमारे साथ हमारे फेसबुक पेज पर जरूर शेयर करें। इसके अलावा, ये आर्टिकल ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें।

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लेखक की तस्वीर
04/04/2020 पर Mona narang के द्वारा लिखा
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
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