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इरिटेबल मेल सिंड्रोम- कहीं आपके रिश्ते बिगड़ने की वजह तो नहीं

इरिटेबल मेल सिंड्रोम- कहीं आपके रिश्ते बिगड़ने की वजह तो नहीं

क्या आपके पार्टनर का मूड भी अक्सर खराब रहता है और वह हमेशा चिड़चिड़े या तनावग्रस्त रहते हैं तो इसे हल्के में न लें। क्योंकि इसकी वजह इरिटेबल मेल सिंड्रोम (Irritable Male Syndrome) हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुषों में प्रीमेन्स्ट्रुअल जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं यानी पीरियड्स से कुछ दिन पहले जैसे महिलाओं का अचानक मूड बदलता है, चिड़चिड़ापन होता है। कुछ लोगों को यह अजीब जरूर लग सकता है कि भला पीरियड्स वाले लक्षण पुरुषों में कैसे नजर आते है, लेकिन ऐसा होता है और इसके लिए शरीर के हार्मोन्स जिम्मेदार होते हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं इरिटेबल मेल सिंड्रोम (Irritable Male Syndrome) के बारे में।

इरिटेबल मेल सिंड्रोम (Irritable Male Syndrome) क्या है?

मेल सेक्स हार्मोन्स टेस्टोस्टेरोन में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण पुरुषों को महीने में कुछ दिन मूड स्विंग, थकान, डिप्रेशन और तनाव होने लगता है ठीक वैसे ही जैसा की आमतौर पर महिलाओं को पीरियड्स के दौरान या उसके कुछ दिन पहले होता है। पुरुष खुद समझ नहीं पाते कि आखिर वह इतने चिड़चिड़े क्यों हो गए हैं और बार-बार मूड स्विंग क्यों हो रहा है। इरिटेबल मेल सिंड्रोम को पुरुषों में होने वाली हाइपरसेंसिटिविटी, निराशा, एंग्जाइटी और गुस्से के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। ऐसा बायोकेमिक बदलवा, हार्मोनल उतार-चढ़ाव, तनाव और अपनी पहचान खोने के डर के कारण हो सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इरिटेबल मेल सिंड्रोम के लिए वैसे तो कई चीजें जिम्मेदार हो सकती है, लेकिन मुख्य वजह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का कम होना है इसलिए इसे मेल मेनोपॉज (Menopause) या एंड्रोपॉज (Andropause) भी कहा जाता है, हालांकि महिलाओं के मेनोपॉज की तरह पुरुषों का हार्मोन लेवल उतनी तेजी से नीचे नहीं आता। इस सिंड्रोम से पीड़ित पुरुषों के व्यवहार में बदलाव साफ नजर आता है। वह हमेशा तनाव में रहते हैं, मूड खराब रहता है और अपनी पहचान को लेकर परेशान रहते हैं।

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इरिटेबल मेल सिंड्रोम के लक्षण (Irritable male syndrome symptoms)?

आपका पार्टनर कहीं इरिटेबल मेल सिंड्रोम का शिकार तो नहीं यह समझने के लिए आपको इसके लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। इस सिंड्रोम का शिकार पुरुषों में दिखने वाले आम लक्षणों में शामिल है।

  • चिड़चिड़ापन
  • डिप्रेशन
  • आत्मविश्वास की कमी
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • सोने मे परेशानी
  • ऊर्जा में कमी
  • हार्मोनल बदलाव के कारण सेक्स ड्राइव में कमी और इरेक्टाइल डिसफंक्शन
  • वजन कम करने में परेशानी

इन सारे लक्षणों का असर संपूर्ण स्वास्थ्य के साथ ही पार्टनर के साथ रिश्ते पर भी पड़ता है। समय रहते यदि इसकी पहचान करके इलाज न करवाया जाए तो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मूड भी दिन-ब-दिन और खराब होता जाता है।

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इरिटेबल मेल सिंड्रोम के कारण (Irritable male syndrome reason)

पुरुषों में 30 की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर अपने आप कम होने लगता है। यह हार्मोन पुरुषों के रिप्रोडक्टिव डेवलपमेंट के साथ ही मसल्स मास और शरीर के बालों के लिए भी जिम्मेदार होता है। इसमें कमी से उनका आत्मविश्वास, फिटनेस, एनर्जी और सेक्स ड्राइव सबमें कमी आती है और इन सबमें कमी का असर कपल्स के रिलेशनशिप पर पड़ना लाजमी ही है। वैसे हार्मोन के अलावा इरिटेबल मेल सिंड्रोम के लिए कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

साइकोलॉजिकल समस्याएं- तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन की वजह से इरेक्टाइल डिसफंक्शन और कामेच्छा में कमी जैसी समस्याएं आती है। स्ट्रेस और एंग्जाइटी रिश्ते में हुई खटपट, ऑफिस के वर्क प्रेशर या आर्थिक समस्याओं के कारण हो सकता है और इसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति डिप्रेशन में भी जा सकता है। इसलिए ऐसी समस्याओं के लिए जल्द काउंसलिंग की जरूरत होती है।

शारीरिक समस्याएं- इरेक्टाइल डिसफंक्शन ब्लड वेसल्स में होने वाले बदलाव का भी नतीजा है, इसलिए जरूरी नहीं कि इसके लिए साइकोलॉजिकल समस्याएं ही जिम्मेदार हों।

मिड लाइफ क्राइसेस – बढ़ती उम्र के साथ ही महिलाओं और पुरुषों की चिंताए भी बढ़ने लगती है, हालांकि दोनों की चिंता अलग-अलग तरह की होती है। पुरुष सोचते हैं कि अब तक जिंदगी में उन्होंने क्या पाया है और आगे क्या होने वाला है उनके साथ। ऐसी बातें सोचकर वह एंग्जाइटी और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं जिसकी वजह से मूड स्विंग होता है, नींद नहीं आती और हमेशा थकान महसूस होती है।

सही डायट और एक्सरसाइज की कमी- वजन कम न होने या वजन बढ़ने के लिए हेल्दी फूड नहीं खाना और एक्सरसाइज न करने जैसी आपकी आदतें जिम्मेदार हो सकती है। साथ ही जब आपको जरूरी पोषण नहीं मिलता है तो टेस्टोस्टेरोन लेवल में कमी आने लगती है।

गलत जीवनशैली- एल्कोहल और सिगरेट के अधिक सेवन का असर आपकी नींद और सेहत पर पड़ता है। इसकी वजह से वजन भी बहुत अधिक बढ़ने लगता है।

इरिटेबल मेल सिंड्रोम का रिश्ते पर असर (Irritable male syndrome impact on relationship)

इस सिंड्रोम के कारण पुरुषों को जिस तरह की समस्याएं होती है उसका असर पार्टनर के साथ उनके रिश्ते पर होना स्वाभाविक है। मूड स्विंग और कामेच्छा में कमी की वजह से दोनों पार्टनर में दूरियां आ सकती हैं और रिश्ते में तनाव बढ़ जाता है। चिड़चिड़ा होने के कारण पुरुष अपनी महिला पार्टनर से ठीक से बात भी नहीं करतें और रिश्ते से रोमांस पूरी तरह खत्म हो जाता है। चूकि इस सिंड्रोम का असर पुरुषों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर होता है इसलिए वह रिश्ते को बचा पाने में खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से असमर्थ पाते हैं।

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इरिटेबल मेल सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है (How irritable male syndrome diagnosed)?

पुरुषों को और उनकी महिला पार्टनर को भी उनके व्यवहार के प्रति थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। यदि उन्हें लंबे समय से पुरुषों में इरिटेबल मेल सिंड्रोम के लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। इरिटेबल मेल सिंड्रोम का निदान टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की जांच करके किया जाता है। ऐसा नियमित ब्लड टेस्ट जिसमें आपका कोलेस्ट्रॉल,ब्लड शुगर लेवल और अन्य चीजों की जांच के साथ किया जा सकता है। आप डॉक्टर को ब्लड टेस्ट में टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के लिए कह सकते हैं। रक्त में मौजूद हार्मोन का स्तर और आपके मूड स्विंग के आधार पर डॉक्टर को समस्या का पता लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर आपका फिजिकल एग्जामिनेशन कर सकता है और आपके अन्य लक्षणों के बारे में पूछ सकता है। इसके साथ ही रिश्ते में आने वाली समस्या के समाधान के लिए आप मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल की मदद ले सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि आपको डॉक्टर और मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स से अपने लक्षणों के बारे में कुछ छुपाना नहीं है।

इरिटेबल मेल सिंड्रोम का उपचार (Irritable male syndrome treatments)?

यदि टेस्टोस्टेरोन लेवल में कमी के कारण यह सिंड्रोम हुआ है तो इसका उपचार टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के जरिए किया जाता है। हालांकि अन्य उपचार की तरह ही इसके भी कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं। वैसे इस थेरेपी के अलावा हेल्दी लाइफस्टाइल मेंटेन करना और वजन नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

  • हेल्दी फूड खाएं
  • वजन बढ़ाने वाले फैटी और मीठे पदार्थों से दूर रहें
  • एल्कोहल और सिगरेट से दूर रहें
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।

यदि मेल इरिटेबल सिंड्रोम का असर रिश्ते पर होने लगा है तो आपको मानसिक उपचार की भी जरूरत है जिससे आपकी पर्सनैलिटी में अनचाहे बदलाव न आएं। थेरेपी से आपको अपनी भावनाओं पर काबू रखने और पार्टनर से बात करने में आसानी होगी। बेहतर होगा कि दोनों पार्टनर अपनी काउंसलिंग करवाए। इससे महिला पार्टनर को भी अपने पुरुष पार्टनर की समस्या समझने में आसनी होगी।

और पढ़ें- जानें मेल मेनोपॉज क्या है? महिलाओं की तरह पुरुषों में भी होता है मेनोपॉज

इरिटेबल मेल सिंड्रोम को मैनेज कैसे करें (How to manage irritable male syndrome)?

इरिटेबल मेल सिंड्रोम को मैनेज करने के लिए पहले उसके लक्षणों की पहचान और निदान जरूरी है। फिर डॉक्टर ने जो उपचार बताया है उसे फॉलो करें। इरिटेबल मेल सिंड्रोम से पीड़ित पुरुष हेल्दी रिलेशनशिप के लिए इन बातों का ध्यान रखें।

  • सबसे पहले तो खुद में हो रहे बदलवा को पहचाने कि कैसे आप किसी चीज पर प्रतिक्रिया करते हैं।
  • अपने मूड में होने वाले बदलाव को पहचाने और मन को शांत रखने की कोशिश करें।
  • जब पार्टनर आपकी पर्सनैलिटी और मूड में होने वाले बदलाव के बारे में बताए तो उसे ध्यान से सुनें।
  • जरूरत पड़ने पर टेस्टोस्टेरोन लेवल टेस्ट करवाएं और यदि डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी की सलाह देता है तो वह भी जरुर करवाएं और जब तक पॉजिटिव रिजल्ट न मिले थेरेपी को बीच में रोके नहीं।
  • तनाव दूर करने और रिलैक्सेशन के लिए योग, मेडिटेशन और ब्रिदिंग एक्सरसाइज का सहारा लें।
  • एक्सरसाइज का समय बढ़ा लें, क्योंकि जब आप ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करते हैं तो फील गुड हार्मोन का स्राव होता है जो डिप्रेशन के लक्षणों और निगेटिव विचारों को कम करने में मददगार है।
  • हमेशा हेल्दी बैलेंस डायट लें, जो आपके दिल के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा हो जैसे सब्जियां, फल, साबूत अनाज, नट्स, लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स आदि।
  • मीठे पेय पदार्थों से दूर रहें।
  • यदि ज्यादा समस्या हो रही है तो काउंसलिंग लेने से हिचकिचाए नहीं और एक बार शुरू करने पर पूरी काउंसलिंग करवाएं, क्योंकि इससे होने वाले बदलाव कुछ महीनों में नजर आते हैं।

इरिटेबल मेल सिंड्रोम का संबंध भले ही हार्मोन्स से हो, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज कल कि तनावपूर्ण जीवनशैली ने इसकी संभावना को बढ़ा दिया है। इसलिए बेहतर होगा कि हर कोई अपने फीजिकल हेल्थ के साथ ही मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

 

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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