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जानिए क्या है ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर और उसे कैसे हैंड्ल करें

जानिए क्या है ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर और उसे कैसे हैंड्ल करें

बात-बात पर गुस्सा या क्रोधित होना, किसी की बात न मानना, निराश रहना, बड़ो की अवहेलना करना और असामान्य व्यवहार करने वाले बच्चों, किशोरों और बड़ों में यह ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (Oppositional Defiant Disorder) के बड़े संकेत हैं। ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर एक व्यवहार संबंधी विकार है। यह समस्या पीड़ित के स्कूल, परिवार और सोशल लाइफ पर बुरा असर डाल सकती है। बच्चों में इसके लक्षण 6 से 8 वर्ष की उम्र के बीच दिखने लगते हैं। वहीं, किशोरों और बड़ों में भी इसके लक्षण आसानी से देखे जा सकते हैं। सोचने वाली बात यह है कि यह विकार लड़कियों की तुलना में लड़कों में अधिक देखने को मिलता है।

बच्चों और किशोरों में ओडीडी के लक्षण (Oppositional Defiant Disorder Symptoms)

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (Oppositional Defiant Disorder) सबसे ज्यादा बच्चों और किशोरों का प्रभावित करता है। इसलिए बचपन में ही इसे पहचानकर इसका इलाज करवा लेना बेहतर होता है, नहीं तो फिर यह किशोरावस्था में भी परेशान करता हैं।

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बच्चों और किशोरों में ओडीडी (ODD Symptoms) के आम लक्षण

बता दें कि इनमें से एक लक्षण का होना ओडीडी का शिकार नहीं माना जा सकता है। बल्कि बच्चे या किशोर में लगातार छह महीने तक यह लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।

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ओडीडी से ग्रस्त बच्चों को संभालना मुश्किल (Oppositional Defiant Disorder)

ओडीडी से ग्रस्त बच्चों को संभालना पैरेंट्स के लिए बहुत मुश्किल होता है। इस कंडिशन में बच्चे अपनी हद से बाहर होते हैं और कुछ भी करने और कहने में हिचकते नहीं हैं। ऐसे में बच्चों में डर का आभाव भी नहीं होता है। पैरेंट्स के लाख समझाने के बाद भी बच्चे उनकी सभी बातें एक सिरे से नकार देते हैं और और अपने मनमुताबिक काम करते हैं। यह बच्चों में एक व्यवहारिक समस्या है और इसी कारण बच्चा आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लेता है। इस कंडिशन में बच्चें बस अपने ही मन की करने की ठान लेते हैं।

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वयस्कों में ओडीडी के आम लक्षण

  • दुनिया पर गुस्सा निकालना
  • गलत और नापंसद महसूस होना
  • अपनी गलतियों के लिए दूसरों को गलत ठहराना
  • एक विरोधी के रूप में अपनी पहचान बनाना
  • ऑफिस में बॉस या सीनियर की बात न मानना
  • अड़ियल और जिद्दी रवैया अपनाना
  • हमेशा खुद का ही बचाव करना

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ओडीडी के कारण (Oppositional Defiant Disorder Causes)

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर का कोई निश्चित कारण नहीं है। लेकिन, इसे आसपास के विचार, बायोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल फेक्टर्स से पहचाना जा सकता है। यह उन परिवारों में अधिकतर देखा जाता है, जिनकी मेडिकल हिस्ट्री में ‘ध्यान की कमी और सक्रियता विकार’ (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) यानि एडीएचडी जैसी समस्या शामिल होती है।

एक थिओरी के मुताबिक, ओडीडी की समस्या टॉडलर्स (जब बच्चे पहली बार चलना शुरू करते हैं) समय ही शुरू हो जाती है। क्योंकि, ओडीडी से ग्रस्त बच्चे और किशोरों का टॉडलर्स जैसा ही व्यवहार होता है।

ओडीडी के अन्य कारणों में माता-पिता के प्रति सकारात्मक लगाव का अभाव, मजबूत इच्छाशक्ति और घर या दैनिक जीवन में भारी तनाव होना है। खुद को अकेलापन महसूस करने वाले लोग भी इस समस्या का शिकार हो सकते हैं।

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ओडीडी के जोखिम कारक (Oppositional Defiant Disorder Factors)

बच्चों, किशोर और व्यस्कों में ओडीडी की समस्या कैसे विकसित हो जाती है यह कहना और पहचानना थोड़ा मुश्किल है। यह एक जेनेटिक कारक भी हो सकता है। ओडीडी के कुछ जोखिम हैं , जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

  • ऐसे लोगों में भाषा को समझने और बोलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जो लंबे समय तक बनी रह सकती है।
  • पारिवारिक लोगों के बीच संबंधों का अभाव होने लगता है।
  • इस कंडिशन में बच्चा स्कूल में हर एक्टिविटीज में पीछे रह सकता है और उसकी परफॉर्मेंस भी कमजोर हो सकती है।
  • ओडीडी से पीड़ित चीजों को सीखने के भी कच्चे हो सकते हैं।
  • इनमें सोशल स्किल की कमी होती है। समस्याओं को जल्दी से हल नहीं कर पाते हैं। साथ ही इनको याद करने में दिक्कत होती है।
  • एडीएचडी की समस्या से जूझना पड़ सकता है।

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बच्चों में कैसे पहचाने ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (Oppositional Defiant Disorder Symptoms)

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर का इलाज बेहद आसान है। इस कंडिशन में बच्चे के लगातार गुस्सा होना और बैचेन रहने से उसे समझा जा सकता है। इसमें बच्चे का व्यवहार दिन ब दिन नकारात्मक होता चला जाता है। ऐसे बच्चे पैरेंट्स और स्कूल के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर देते हैं। नीचे दिए गई इन बातों को ध्यान दें जो यह बताते हैं कि बच्चा ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से ग्रस्त है।

  • छोटी सी बात पर आपा खो देना
  • बड़ों के साथ लगातार बहस करना
  • बड़ों के सवालों का जवाब न देना और उनकी बात न मानना
  • दया का भाव कम होना
  • दूसरो से आसानी से नाराज हो जाना

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर को ऐसे करें मैनेज (Oppositional Defiant Disorder Treatment)

ओडीडी ग्रस्त बच्चे, किशोर और वयस्कों को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब यह पता चल जाता है कि उन्हें यह डिसऑर्डर है। ऐसे में पैरेंट्स को अपने व्यवहार में सहनशक्ति भी लानी पड़ती है। इसमें हेल्थ प्रोफेशनल बिहेवियर मैनेजमेंट के तौर पर काम करना होगा

  • उनके व्यवहार को समझने की कोशिश करें और गौर करें कि वे दूसरों को कैसे इफेक्ट कर रहे हैं।
  • उनके व्यवहार को सुधारें और उनकी गलत हरकतों को नोटिस करें।
  • ऐसे लोगों के आगे क्रोध और चिंता जैसी बातों को मैनेज करना होगा।
  • देखें कि वे समस्याओं को कैसे हल करते हैं और दूसरों से कैसे अलग हैं।
  • यह जानने की कोशिश करें की वह सामान्य लोगों से कितने अलग हैं।

इन बातों पर गौर करने से आप उन्हें आसानी से समझ पाएंगे और वे आपको अपना समझने लगेंगे। साथ ही उनका व्यवहार भी धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा।

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ओडीडी ग्रस्त बच्चों के लिए ऐसे करें तैयारी

किशोर और वयस्कों के मुकाबले ओडीडी की समस्या में बच्चों को संभालना सबसे मुश्किल माना जाता है। इसके लिए पैरेंट्स को ऐसे बच्चों को संभालने के लिए कुछ तैयारी करनी होगी। इसके लिए नीचे कुछ टिप्स दिए गए हैं।

  • अगर आपको पता है कि आपका बच्चा ओडीडी का शिकार है तो घबराएं नहीं। सबसे पहले उसके व्यवहार, हरकतें और आदतों को समझना शुरू करें।
  • ऐसे बच्चों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए उन्हें सराहें और मोटिवेट करते रहें।
  • ऐसे बच्चे एडीएचडी (ADHD) की कैटेगरी में आते हैं। इसलिए इन्हें समय-समय पर ईनाम दें।
  • आस-पड़ोस के बच्चों को घर में बुलाकर एक सकारात्मक माहौल बनाएं, जिससे बच्चा अन्य बच्चों की तरह व्यवहार करने की कोशिश करे।
  • ऐसे बच्चों को कभी भी ना डांटे और ना ही पिटाई करें, इससे बच्चा और भी ज्यादा एग्रेसिव हो सकता है।
  • पैरेंट्स दिन में एक बार बच्चे को समय दें, उसके साथ खेलें और उन्हें समझें।
  • पैरेंट्स ऐसे बच्चों पर कभी भी किसी बात का प्रेशर ना डालें।
  • ऐसे बच्चों से सीधे बात करें और उन्हें अकेलेपन का एहसास ना होने दें।
  • ऐसे बच्चों को दूसरो बच्चों के आगे नीचा न दिखाएं।

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पैरेंट्स खुद का भी करें ख्याल (Tips For Parents)

ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर से ग्रस्त बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स अपना ख्याल करना भी न भूलें। क्योंकि ऐसे बच्चों पर काम करना दिमागी रूप से थका देता है। इसलिए खुद को आराम देने के लिए इन बातों का ख्याल जरूर करें।

  • पार्क में टहलने जाएं, घर में हो तो टीवी शोज देखें। अगर आपको पढ़ने का शौक है तो आप बुक्स या कोई रोचक कहानी वाली किताब पढ़ सकते हैं।
  • बच्चे को बेबी सीटिंग के लिए दे दें या परिजनों को बच्चा संभालने के लिए कह दें। इससे आपके पास खुद के लिए थोड़ा समय होगा।
  • खुद को फिट रखने के लिए जॉगिंग और एक्सरसाइज करें, जिससे आप ऊर्जावान बन रहें।
  • सोशल एक्टिविटिज के लिए भी समय निकालें। साथ ही पार्टनर को भी समय दें। क्योंकि पैरेंट्स में बच्चों की वजह से झगड़े होना आम बात है।
  • इतना सब करने के बाद भी आपको बच्चे के व्यवहार में कोई सुधार नहीं दिखता है तो आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।

पैरेंट्स को इन सब बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। यह उम्र भी ऐसी है कि बच्चों के साथ जोर-जर्बदस्ती करना या डाटने का उल्टा परिणाम हो सकता है। आप इन टिप्स को अपनाकर अपनी मुश्किल को थोड़ा आसान बना सकते हैं।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड