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कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा चाइल्ड एब्यूज का शिकार? ऐसे करें पेरेंटिंग

कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा चाइल्ड एब्यूज का शिकार? ऐसे करें पेरेंटिंग

मौजूदा दौर में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण के मामले आम हो चुके हैं। न जाने कितने निर्दोष एवं लाचार बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित होते हैं और किसी को ये बात बता भी नहीं पाते। इसके चलते कई बच्चे डिप्रेशन को शिकार हो जाते हैं। तो वहीं कुछ परेशान होकर सुसाइड अटेम्पट कर लेते हैं। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट मनोज शर्मा के अनुसार अगर किसी बच्चे के साथ कोई मारपीट या मानसिक रूप से परेशान करता है या फिर यौन उत्पीड़न करता है तो उसे चाइल्ड एब्यूज की क्षेणी में रखा जाता है।

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला प्रोग्राम ‘सत्यमेव जयते’ में आमिर खान ने चाइल्ड एब्यूज पर एक एपिसोड किया था। इसमें उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की 2007 की एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया था कि देशभर में 53 पर्सेंट बच्चे चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज का शिकार हो चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि हर दो में से एकबच्चा बाल यौन शोषण का शिकार हुआ। ये हाल सिर्फ बड़े शहरों का ही नहीं बल्कि छोटे शहर और गांव भी इसमें सभी शामिल हैं।

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चाइल्ड एब्यूज (Child Abuse) क्या है?

18 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे के साथ जानबूझकर मानसिक या शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाना या दुर्व्यवहार करना आदि चाइल्ड एब्यूज माना जाता है। जो कानूनी तौर पर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। बाल दुर्व्यवहार के कई रूप होते हैं, जैसे कि-

  • फिजिकल चाइल्ड एब्यूज : फिजिकल चाइल्ड एब्यूज की स्थिति तब होती है जब किसी बच्चे को शारीरिक तौर पर जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है।
  • सेक्शुअल चाइल्ड एब्यूज : सेक्शुअल चाइल्ड एब्यूज की स्थिति तब होती है जब किसी बच्चे के साथ शारीरिक तौर पर दुर्व्यवहार, यौन रिश्ता, सेक्स, ओरल सेक्स, गुप्तांओं का गलत तरीके से छूना या चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जाती है।
  • इमोशनल चाइल्ड एब्यूज : इमोशनल चाइल्ड एब्यूज का अर्थ है बच्चे के आत्मसम्मान या भावनात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचाना। इसमें मौखिक और भावनात्मक हमले शामिल हो सकते हैं- जैसे बच्चे को जबरन शांत करना, उसे दूसरे बच्चों से एकदम अलग रखना, उसे अनदेखा करना या अस्वीकार करना।
  • चिकित्सक शोषणः जब कोई जानबूझकर किसी बच्चे को बीमार करता है, तो उसे चिकित्सा की आवश्यकता होती है। जिसकी वजह से बच्चे को अनावश्यक चिकित्सा देखभाल की जरूरत पड़ती है। यह मानसिक विकार के कारण हो सकता है, जैसे- माता-पिता किसी बच्चे को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • बाल उपेक्षाः पर्याप्त भोजन, आश्रय, स्नेह, माहौल, शिक्षा या चिकित्सा देखभाल न मिलना।

कई मामलों में, बाल दुर्व्यवहार किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे बच्चा जानता है और जिस पर भरोसा करता है। ऐसे मामलों में दोषी अक्सर एक माता-पिता या अन्य रिश्तेदार हो सकते हैं। अगर आपको चाइल्ड एब्यूज पर संदेह है, तो उसे रोकने और बच्चे की मदद करन के लिए उचित अधिकारियों को इसकी सूचना दें।

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चाइल्ड एब्यूज से बच्चे को बचाने के लिए टिप्स

अपने बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता को बेहद सतर्क रहने की जरुरत है। इसके लिए उन्हें खुद ही अपने बच्चों को तैयार करना होगा। आइए जानते है चाइल्ड एब्यूज से बच्चों को बचाने हेतु माता-पिता के लिए टिप्स:

रिश्ते को मजबूत बनाना

बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें। उनसे हर विषय पर बात करें। उन्हें अपने साथ ऐसा महौल दें कि वो हर बात आपसे बेझिझक शेयर करे। उसे ये भरोसा दिलाए कि आप हर हाल में उसके साथ रहेंगे। बच्चों को गुड और बैड टच में अंतर समझाएं। बच्चे को मालूम होना चाहिए कि उसकेशरीर के साथ होने वाली गलत गतिविधि‍यों पर क्या प्रतिक्रिया दी जाए। उसे इतना मालूम हो कि उसे बिना डरे इसका विरोध करना है। बच्चों को बताएं अगर उसे कहीं भी सहज महसूस नहीं होता तो वो शोर मचाएं।

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बच्चों को दें सेक्स एज्युकेशन

बच्चों से किसी तरह की झिझक न रखें। उनकी सेक्स एज्युकेशन अनिवार्य तौर पर हो। उन्हें इस बारे में पूरी समझ होनी चाहिए कि उनके साथ होने वाली गतिविधी सही है या नहीं। इसके साथ ही बच्चों को टीचर, बस ड्राइवर, ट्यूशन टीचर व बाहर मिलने वाले सभी लोगों से सतर्क रहने की कहें। इसके लिए आप अपने बच्चे को कुछ डॉक्यूमेंट्री मूवीज भी दिखा सकते हैं जिसके जरिए बच्चों को एजुकेट किया जा सकता है। उन्हें इसे लेकर अवेयर करना बहुत जरूरी है। घर के दूसरे सदस्यों को भी बच्चों से समय-समय पर इस पर बात करते रहना चाहिए।

पेरेंट्स को बच्चों के बिहेवियर पर नजर रखनी चाहिए

अगरबच्चे के बिहेवियर में अचानक बदलाव आ रहा है जैसे अगर बच्‍चा एक्टिव था और अचानक गुमसुम रहने लग जाए या फिर बच्चे के स्कूल में नंबर कम आने लग जाए तो इसका कारण जानने की कोशिश करें। क्योंकि ज्यादातर बच्चे जो चाइल्ड एब्यूज का शिकार होते हैं वह कभी खुद से कुछ नहीं बताते। आपको खुद उन पर ध्यान देना होगा। हमेशा बच्चों में इतना विश्वास जगाएं कि वह बिना डरे हर बात आपसे आकर शेयर करें। अगर स्कूल में उसकी बहुत ज्यादा पिटाई हो रही है तो इसके खिलाफ एक्शन लें। बच्चे के बदलते बिहेवियर को वक्त रहते काउंसलिंग कराके ठीक किया जा सकता है।

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इसके अलावा चाइल्ड एब्यूज से बच्चे को निम्न तरीकों से उबार सकते हैं :

  • बच्चे के साथ क्या हुआ था, उससे उबरने में उसकी मदद करें। उसके साथ हुए शोषण के बारे में उससे बात की जाए और उसे प्रोत्साहित किए जाए।
  • बच्चे की हर बात को ध्यान से सुने और उसे गंभीरता से परखें।
  • समय-समय पर बच्चे से उसके जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में बात करें। संभव हो तो हर दिन बच्चे के साथ थोड़ा समय बिताएं और उससे उसके निजी जीवन में हो रही घटनाओं के बारे में बात करें।
  • बच्चे को याद दिलाएं कि वह दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार नहीं है। जिसने भी उसके साथ शोषण किया है, वही व्यक्ति बाल दुर्व्यवहार के लिए पूर्ण तौर पर जिम्मेदार होता है।
  • घर में बच्चे को एक सुरक्षित माहौल प्रदान करें।
  • बच्चे के साथ हुए शोषण की जानकारी पुलिस को दें। किसी स्थानीय बाल सुरक्षा एजेंसी या पुलिस विभाग से संपर्क करें। अधिकारी रिपोर्ट की जांच करेंगे और अगर जरूरी हो, तो बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं।

बच्चे के यौन शोषण होने के बारे में मालूम होने पर कैसे करें पेरेंट्स रिएक्ट?

सबसे पहले आप अपने आप को इतना स्ट्रांग बनाएं कि आप आराम से बच्चे की पूरी बात सुन सकें। अपने बच्चे पर पूरा भरोसा रखें कि वह आपसे झूठ नहीं बोलेगा। उसे यकीन दिलाएं कि उसने आपसे ये बात शेयर करके बहुत अच्छा किया। बच्चे से पूरी बात जानें और इसके बाद अपने बच्चे से इसे लेकर माफी मांगे कि उसके साथ ऐसा हुआ। इसके बाद कोई ठोस कदम उठाएं।

बच्चों को इस बात से वाकिफ करें कि जरूरी नहीं कि कोई आपसे बड़ा है तो उसको रिसपेक्ट करो। अगर किसी का व्यवहार आपके साथ ठीक नहीं है तो उसका आदर ना करें। फिर चाहे उनकी उम्र कितनी भी क्यों न हो। ऐसे लोगों की रिसपेक्ट की बजाय शिकायत करनी चाहिए।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Dr. Abhishek Kanade के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 05/10/2019
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