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स्पेशल चाइल्ड के ऑनलाइन एज्यूकेशन और मेंटल हेल्थ से जुड़ें सवालों पर जानें एक्सपर्ट ओपिनियन..

स्पेशल चाइल्ड के ऑनलाइन एज्यूकेशन और मेंटल हेल्थ से जुड़ें सवालों पर जानें एक्सपर्ट ओपिनियन..

कोरोना के इस कहर ने बड़ों से लेकर बच्चों तक की जिंदगी को काफी प्रभावित किया है, केवल बच्चों की हेल्थ ही नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई-लिखाई पर भी असर पड़ा है। देखा जाए, तो जिसका प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। इस ऑनलाइन एज्यूकेशन (online Education) में बच्चों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, खासतौर पर स्पेशल चाइल्ड को। मानिसक रूप से बीमार बच्चे और उनके पेरेंट्स के लिए ऑनलाइन एज्यूकेशन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। तो ऐसे में पेरेंट्स (Parents) को उनकी जरूत को समझते हुए उनकी ऑनलाइन एज्यूकेशन को आसान बनाने की कोशिश करनी चाहिए। जानें स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एज्यूकेशन (Special Child and online Education) और मेंटल हेल्थ से जुड़े सवालों के कुछ जवाब। इन टिप्स के माध्यम से पेरेंट्स को स्पेशल बच्चों की जरूरी को समझने और संभालने में मदद मिलेगी। स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एज्यूकेशन (Special Child and online Education) के साथ पेरेंट्स को उसकी मेंटल हेल्थ पर भी ध्यान देना चाहिए।

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जानें स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एज्यूकेशन और मेंटल हेल्थ से जुड़े सवाल पर एक्सपर्ट ओपिनियन (Special Child and online Education)

सभी बच्चे एक दूसरे से अलग होते हैं और उनकी समझ भी विभिन्न होती है। इसलिए किसी भी बच्चे के मानसिक विकास (Mental Growth) की तुलना नहीं की जा सकती है। जैसा कि कोरोना के चलते आजकल ऑनलाइन एजुकेशन (online Education) हो गई है। लेकिन यह स्पेशल चाइल्ड के लिए काफी चुनौतीभरी भी हो सकती है। तो ऐसे स्पेशल चाइल्ड के पैंरेट्स को बच्चों को कैसे डील करना चाहिए। इस पर एक्सपर्ट अपने टिप्स और ओपिनियन दे रहे हैं। जानें स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एजुकेशन और मेंटल से जुड़े टिप्स-

स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एजुकेशन से पहले पेरेंट्स को क्या पता होना चाहिए?

ऑनलाइन एजुकेशन बच्चों के लिए नया है, इस दौरान उन्हें काफी कुछ नया भी जानने को मिला। लेकिन यह स्पेशल चाइल्ड यानि कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए काफी मुश्किल भरा हो सकता है। ऐसे में पेरेंट्स को जरूरत है कि वो अपने वे बच्चों कि इसमें मदद करें। ऐसे स्पेशल चाइल्ड (Special child) के पैरेंट्स को उनके लिए ऑनलाइन एजुकेशन में मदद के साथ विभिन्न प्रकार के अवसर बनाने चाहिए। माता-पिता को प्री रिकॉर्डेड प्रोग्राम का उनके आमने-सामने बातचीत के माध्यम से समझाने की कोशिश भी इसमें शामिल है।पहले से रिकॉर्ड किए गए कार्यक्रमों और ऐप-आधारित शिक्षा के माध्यम से उनके लिए अवसर पैदा करने की आवश्यकता है। इससे कठिनाइयों का सामना करने वाले बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे। शिक्षा का यह रूप इन बच्चों में से अधिकांश के लिए शिक्षा की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करेगा।

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क्या बच्चे मेें लर्निंग डिसऑर्डर होने का संबंध उसके खराब मेंटल हेल्थ (Mental Health) से है?

लर्निंग डिसऑर्डर से ग्रसित बच्चों में एवरेज व तेज बुद्धि की तुलना में किसी भी चीज को याद करने में अधिक समय लगता है। इन बच्चों को गणित के सवाल से लेकर भाषा को बोलना व लिखना सीखने में देरी हो सकती है। इससे बच्चे के स्कूल में रिजल्ट प्रभावित हो सकते हैं। सामान्य बुद्धि होने के कारण भी इन बच्चों को परीक्षा के समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

इस बात का कैसे पता लगा सकते हैं कि मेरा बच्चा स्लो लर्नर है या लर्निंग डिसऑर्डर (Learning Disorder) से ग्रसित है?

जो बच्चे स्लो लर्नर होते हैं वो कक्षा की गति के अनुसार चीजों को सीखने में असमर्थ होते हैं। ऐसा बच्चे की सीखने की गति अलग होने के कारण हो सकता है। जब बच्चे की बुद्धि का स्तर 70-85 होता है, तो उसे स्लो लर्नर व बॉर्डरलाइन इंटेलिजेंस की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं, जो बच्चे लर्निंग डिसऑर्डर से ग्रसित हैं उनका आईक्यू 90 से ऊपर भी हो सकता है।

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स्पेशल (मंदबुद्धि) बच्चों के पेरेंट्स की मदद हम कैसे कर सकते हैं?

स्पेशल बच्चों के पेरेंट्स को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

जागरूकता: पेरेंट्स को बच्चों में लर्निंग डिसऑर्डर (Learning Disorder) के संकेत और लक्षण से जागरूक कराएं, जिससे बच्चे की परेशानी के बारे में शुरुआती दौर में पता लगाया जा सके। इससे बच्चे का समय पर उपचार करके उसकी स्थिति को समय पर बेहतर करने में मदद होगी।

स्वीकार करें: बहुत सारे माता पिता भावुक (Emotional) हो जाते हैं। कुछ को लगता है कि मेरा बच्चा एक दिन इससे बाहर जरूर निकलेगा। कुछ माता पिता सोचते हैं कि वो अपने बच्चे का इलाज नहीं करा पाएंगे। वहीं कुछ पेरेंट्स हर तरह का इलाज (Treatment) कराने में डट जाते हैं। इस दौरान सभी पेरेंट्स अलग-अलग भावनाओं से घिरे हो सकते हैं। लेकिन इन सबसे पहले अपने बच्चे को स्वीकार करें। आपका बच्चा जैसा भी है उसे पूरे दिल से प्यार करें।

पहुंच बनाएं: स्पेशल बच्चों की पढ़ाई से लेकर दवाओं के लिए आपको ज्यादा भागदौड़ करनी पड़ सकती है, लेकिन कभी भी सामान्य विकल्पों को न चुनें। बच्चे की पढ़ाई से लेकर इलाज के लिए बेहतर से बेहतर विकल्पों तक अपनी पहुंच बनाएं।

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जब बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगाता या असाइनमेंट को लेकर हाथ खड़े कर देता है तो क्या करें?

निम्नलिखित टिप्स के जरिए बच्चे का पढ़ाई के लिए प्रेरित करने व मन लगाकर एसाइनमेंट करने में मदद हो सकती है:

  • बच्चे को बीच-बीच में ब्रेक दें: बच्चे को लगातार घंटों पढ़ाई कराने की बजाय बीच-बीच में ब्रेक दें। इससे बच्चे का मूड फ्रेश होगा व पढ़ाई के वक्त दिमाग इधर-उधर नहीं भटकेगा।
  • गैजेट्स (Gadgets) से दूर: बच्चे को पढ़ाई का माहौल दें। जिस कमरे में बच्चा पढ़ता है वहां मोबाइल, टीवी या किसी भी तरह की आवाज नहीं होनी चाहिए। इससे बच्चा मन लगाकर पढ़ाई कर सकेगा।
  • चैकलिस्ट (Checklist): जब बच्चा पढ़ने बैठे तो उससे पहले उसे खाना खिलाना, फ्रेश होने के लिए वॉशरूम जाना, पानी पीना, किताबें और पेंसिल व उसके सभी जरूरी सामानों को देख लें। एक बार जब बच्चा पढ़ने बैठे तो उसके बाद व इनमें से कोई बहाना न बनाएं।
  • पाठयक्रम को भागों में बांट दें: बच्चे का कोई पाठ लंबा है तो उसे दो से तीन टास्क में बांट दें। इससे बच्चा जिस काम को करने से भाग रहा था उसमें दिलचस्पी लेने लगेगा। बच्चे को हमेशा प्रोत्साहित करें कि वह सब काम अच्छे से कर सकते हैं।
  • बच्चे की प्रशंसा करें: जब बच्चा अपना काम पूरा कर लें, तो उसकी प्रशंसा करना न भूलें। कभी-कभी बच्चे को इसके लिए गिफ्ट भी दे सकते हैं। इससे बच्चा आगे के टास्क भी बेहतर से करेगा। साथ ही बच्चे में आत्मविश्वास जागेगा।

कई स्पेशल चाइल्ड को बात-बात पर गुस्सा आता है, वो अपने बच्चों को कैसे संभालें?

इस तरह के बच्चों में देखा जाता है कि इनमें बिल्कुल बरदाश करने की क्षमता नहीं होती है, जिस वजह से इन्हें जल्दी गुस्सा आता है। इनके ज्यादा कोई दोस्त नहीं होते। शिक्षा में खराब प्रदर्शन के कारण माता-पिता व टीचर्स इनसे निराश रहते हैं। यह सब बच्चे में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की कमी के परिणाम हैं। ऐसे बच्चों को सकारात्मक रखने के प्रयास करें। उन्हें आत्मविश्वास महसूस कराने में मदद करें। इससे धीरे-धीरे उनमें सुधार होगा। अपने बच्चों को लोगों से मिलवाएं। उन्हें बच्चों के साथ खेलने के लिए प्रेरित करें। इससे वो सोशल होंगे और उनके दोस्त बनेंगे।

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क्या लर्निंग डिसऑर्डर का कोई इलाज है?

लर्निंग डिसऑर्डर (Learning Disorder) हमेशा रहने वाली स्थिति है। हालांकि, इसके होने के बावजूद यह बच्चे के विकास (Child Growth) में किसी तरह की कोई बाधा नहीं डालता है। बशर्ते आपने अपने बच्चे के लिए कोई स्पेशल टीचर या थेरेपिस्ट नियुक्त किया हो। इससे बच्चे में सामान्य होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे बहुत सारे चर्चित नाम है जो कभी लर्निंग डिसऑर्डर से ग्रसित थे। इसमें वॉल्ट डिजनी, अभिषेक बच्चन, अगस्था क्रिस्टे और टोमी हिलफिगर जैसे कामयाब लोगों का नाम शामिल है। इसलिए जो बच्चे लर्निंग डिसऑर्डर (Learning Disorder) से ग्रसित हैं उनके माता-पिता को उन्हें स्वीकार करना चाहिए और उनकी जरूरतों का पूरा समर्थन करना चाहिए।

स्पेशल चाइल्ड के एक्सपर्ट होने के नाते उनके पेरेंट्स को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?

स्पेशल बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर्स उनकी योग्यताओं को निखारने का प्रयास करते हैं। जैसे कोई बच्चा यदि पांचवी कक्षा में है तो हो सकता है कि पढ़ाई और योग्यताओं के मामले में उसका दिमाग तीसरी कक्षा के बच्चों के समान हो। स्पेशल टीचर्स बच्चों की पढ़ाई और योग्यताओं के उसी अंतराल को भरने का प्रयास करते हैं। कई माता-पिता को अपने बच्चों को स्पेशल बच्चों के टीचर के पास पढ़ने के लिए भेजना अजीब लग सकता है, लेकिन ऐसे आप अपने बच्चे को चीजों को याद करने और आगे बढ़ने से रोकते हैं।

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बच्चों में याद करने में दिक्कत होना और लर्निंग डिसऑर्डर में क्या अंतर है?

कुछ बच्चों में पढ़ाई करते समय अंग्रेजी उनका एडिशनल सब्जेक्ट हो सकता है, जिस वजह से उन्हें अंग्रेजी में चीजों को याद करने के अवसर कम मिलते हैं। इससे आगे जाकर जब उन्हें अंग्रेजी विषय पढ़ने को मिलता है तो कुछ बच्चों को याद करने में दिक्कतों (Learning Problem) का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्हें समय पर पर्याप्त सीखने के अवसर नहीं मिले होते हैं। कुछ बच्चों के भावनात्मक रूप से प्रभावित होने के कारण भी लर्निंग क्षमता कमजोर हो सकती है। जैसे माता पिता के बीच खराब संबंध, क्लेश, यौन शोषण आदि। कुछ बच्चों में परिवार द्वारा पढ़ाई (Education) को लेकर अधिक दबाव बनाने के कारण भी यह समस्या हो सकती है। हालांकि, आपको समझना होगा कि ये सभी स्थिति के कारण बच्चे को याद करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। लेकिन जब बच्चे को समय पर पढ़ाई को लेकर सही एक्पोजर मिला हो। बच्चे को घर पर सही महौल से लेकर सही समय पर स्कूल में एडमिशन से लेकर उसपर पूरा ध्यान दिया गया हो, बावजूद उसके वो पढ़ने, लिखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हो तो यह लर्निंग डिसऑर्डर के कारण हो सकता है।

इस तरह से आपने जाना कि स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एज्यूकेशन के दौरान किस-किस तरह की दिक्कते आती हैं। इसके आलवा स्पेशल चाइल्ड की ऑनलाइन एज्यूकेशन के साथ उनकी मेंटल हेल्थ और भी कई जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह करें।

 

 

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डॉ. धवल मोदी द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 07/06/2021 को