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रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन के बारे में यह जानकारी है जरूरी!

रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन के बारे में यह जानकारी है जरूरी!

ब्रेस्टफीडिंग को मदरहुड का नेचुरल पार्ट माना जाता है। लेकिन, कई महिलाओं के लिए ब्रेस्टफीडिंग हमेशा आसान काम नहीं होता। कई मामलों में किन्हीं कारणों की वजह से ब्रेस्टफीडिंग कराना बंद करना पड़ता है। जैसे किसी बीमारी या किसी खास दवाई के सेवन के कारण। अगर शिशु को एडॉप्ट किया हो या सरोगेसी के कारण भी ब्रेस्टफीडिंग करना असंभव हो सकता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कई महिलाओं को लैक्टेशन का दूसरा चांस भी मिल सकता है या अगर वे वास्तव में शिशु को जन्म नहीं देती हैं तो भी इसे इंड्यूज कर सकती हैं। आइए जानें रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) के बारे में। लेकिन, रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) इन दोनों के बारे में जानने से पहले इन दोनों के बारे में जान लेते हैं।

रिलैक्टेशन क्या है? (Relactation)

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार रिलैक्टेशन उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोई महिला एक गैप के बाद फिर सेब्रेस्टफीडिंग कराना शुरू करती है। यह गैप कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों या महीनों तक का हो सकता है। रिलैक्टेट के कई विभिन्न कारण हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • अगर ब्रेस्टफीडिंग के बारे में मां अपना माइंड बदल दें।
  • अगर किसी बीमारी या एमरजेंसी के कारण मां को अपने शिशु से अलग होना पड़े।
  • अगर आपका शिशु इन्फेंट फार्मूला के प्रति सेंसिटिव या इन्टॉलरेंट हो।
  • अगर आपने किसी शिशु को एडॉप्ट किया हो, इस स्थिति में भी रिलैक्टेशन आवश्यक है।

रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) से पहले रिलैक्टेशन के बारे में यह जानना जरूरी है कि रिलैक्टेशन उस स्थिति में सबसे बेहतरीन है, जब आपका बच्चा तीन महीने से भी कम उम्र का हो या आपने पहले कम पीरियड के लिए नर्सिंग बंद की हो। हालांकि, रिलैक्टेशन के लिए समय और एफर्ट्स की जरूरत होती है, लेकिन धैर्य और दृढ़ता के साथ यह संभव है। अब रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) में इंड्यूस्ड लैक्टेशन के बारे में।

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इंड्यूस्ड लैक्टेशन क्या है? (Induced lactation)

अगर किसी महिला ने शिशु को स्वयं जन्म नहीं दिया है लेकिन ब्रेस्टफीड कराना है, तो उनके लिए लैक्टेशन इंड्यूस करना जरूरी है। जब कोई महिला शिशु को जन्म देती हैं, तो उनमें एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन लेवल (Progesterone Level) कम हो जाते हैं। हालांकि, इस स्थिति में हॉर्मोन प्रोलैक्टिन (Hormone prolactin) लेवल भी तक तक बढ़ा हुआ रहता है जब तक मां ब्रेस्टफीडिंग कराती है। यह वो हॉर्मोनल बदलाव हैं, जिनसे मिल्क प्रोडक्शन ट्रिगर होती है। लेकिन, अगर किसी ने बच्चे को एडॉप्ट किया है या इसके लिए गर्भकालीन सरोगेट (Gestational surrogate) का प्रयोग किया है, तो मां के शरीर में मिल्क प्रोड्यूज (Milk Produce) करना मुमकिन है।

रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) में इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Induced lactation) के बारे में यह जानना जरूरी है कि इसे हमेशा किसी एक्सपर्ट और मेडिसिन फिजिशियन के मार्गदर्शन में करना चाहिए। क्योंकि, इसके लिए दवाई की जरूरत भी हो सकती है। अगर मां के पास पर्याप्त समय है, तो आमतौर पर कुछ महीने पहले ही उसे नर्सिंग के बारे में प्लान करना शुरू कर देना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर आपको मिमिक प्रेग्नेंसी (Mimic pregnancy) के लिए हॉर्मोन थेरेपी (Hormone Therapy) जैसे एस्ट्रोजन (Estrogen) या प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) की सलाह भी दे सकते हैं। ब्रेस्टफीडिंग के बारे में प्लान शुरू करने से दो महीने पहले ही डॉक्टर आपकी हॉर्मोन थेरेपी को बंद कर सकते हैं और एक हॉस्पिटल-ग्रेड इलेक्ट्रिक पंप (Hospital-grade electric pump) के साथ पम्पिंग शुरू कर सकते हैं। इससे मां का शरीर प्रोलैक्टिन (Prolactin) को रिलीज़ और प्रोड्यूस करने के लिए एनकरेज करता है।

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जब शिशु का जन्म हो जाता है, तो आप लगातार नर्स कर सकती है जैसे सामान्य मामलों में होता है। यानी, आप दिन में कुछ घंटे और रात को दो से तीन बार। लेकिन, इसके साथ ही आपको अन्य सप्लीमेंट्स लेने की जरूरत भी हो सकती है, ताकि आपके बच्चे को पर्याप्त न्यूट्रिशन प्राप्त हो जाएं। उम्मीद है कि रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) क्या हैं आप जान गए होंगे। अब जानते हैं कि रिलैक्टेट कैसे किया जा सकता है?

आप कैसे रिलैक्टेट कर सकती हैं?

रिलैक्टेशन के लिए ब्रेस्ट का नर्सिंग से लगातार स्टिमुलेट होना आवश्यक है। इसके लिए आप शिशु को दिन में आठ से बारह बार ब्रेस्टफीड कराने की कोशिश करें और रात में कम से कम दो बार फीड कराएं। यह सेशन कम से कम पंद्रह से बीस मिनट्स का होना चाहिए। प्रत्येक नर्सिंग सेशन को पांच से 10 मिनट की पम्पिंग के साथ फिनिश करें। यह सुनिश्चित करेगा कि आपकी ब्रेस्ट अच्छी तरह से ड्रेन हो गए हैं। इससे बदले में मां में मिल्क प्रोडक्शन स्टिमुलेट होने में मदद मिलेगी। आप पावर पंपिंग के डेली सेशन में जोड़ने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे मिल्क प्रोडक्शन बढ़ती है। इस बारे में पूरी जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। अब जानते हैं कि रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) को आसान बनाने के टिप्स क्या हैं?

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रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन को आसान बनाने के टिप्स (Tips for Relactation and induced lactation)

अगर आप रिलैक्टेशन या इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Induced lactation) में से किसी के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से सही सलाह लेनी चाहिए। अपने और शिशु के लिए ब्रेस्टफीडिंग स्मूद बनाने के लिए आपको कुछ खास कदम बढ़ाने चाहिए। यह खास टिप्स और तरीके इस प्रकार हैं:

  • स्किन टू स्किन कांटेक्ट (Skin to skin contact): अपनी ब्रेस्टफीडिंग की जर्नी को स्मूथ बनाने के लिए स्किन टू स्किन कांटेक्ट (skin to skin contact) पर फोकस करें। इसके अलावा आपके करीबी और परिजन भी आराम से नर्सिंग में आपकी मदद कर सकते हैं।
  • शांत रहें (Keep calm): अपने शिशु को नर्सिंग कराना चिंताजनक हो सकता है। लेकिन, आप अपने शिशु के लिए किसी भी चीज को कॉम्प्लिकेटेड नहीं करना चाहेंगे। इसके लिए आपका शांत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप रिलैक्सेशन एक्सरसाइजेज कर सकते हैं जैसे ब्रीदिंग टेक्निक्स (Breathing Techniques), योगा आदि का सहारा लें। इस अवस्था में आपका धैर्य रखना बेहद जरूरी है। अगर आपको अधिक समस्या हो रही है तो अपने डॉक्टर से बात करें।
  • रीयलिस्टिक रहें (Be realistic): अगर आप लम्बे समय तक ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराती हैं, तो ऐसे में मिल्क सप्लाई में समस्या आ सकती है। लेकिन, अगर ऐसा आपके लिए मुमकिन होता है, तो यह आपके बच्चे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।इस समय का पूरा फायदा अपने शिशु को उठाने दें। इस स्थिति में आपका रीयलिस्टिक और सकारात्मक रहना बेहद जरूरी है। रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) के इन टिप्स के अलावा आप इनके लिए कुछ फूड्स और सप्लीमेंट्स का सहारा भी ले सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

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रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन के लिए खाद्य पदार्थ

आपने कई मदर्स को यह कहते सुना होगा कि दलिया या मेथीदाना का सेवन करने से मिल्क प्रोडक्शन में बढ़ोतरी होती है। हालांकि, इसके बारे में बहुत कम प्रूफ मौजूद हैं कि रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) के लिए कुछ फूड्स या सप्लीमेंट्स भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। आइए जानें ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में, जिन्हें इसके लिए लाभदायक माना जाता है:

रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन के लिए मेथी (Fenugreek)

मेथी को कई चीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसकी चाय को गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक माना गया है। यह भी कहा जाता है कि इसका सेवन करना ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित होता है। लेकिन, इससे पहले डॉक्टर से अवश्य सलाह ले लें। क्योंकि, इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

दलिया (Oatmeal)

नर्सिंग मॉम्स के लिए दलिया भी एक बेहतरीन आहार माना जाता है। हालांकि, इसके स्पोर्ट के लिए भी कोई रीसर्च मौजूद नहीं है। लेकिन, सही मात्रा में अगर आप इसका सेवन करेंगी तो यह आपके लिए हानिकारक नहीं होगा। यह आयरन का अच्छा स्त्रोत भी है। यानी, आपके और आपके शिशु के लिए इसके कई लाभ हो सकते हैं।

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सौंफ के बीज (Fennel seeds)

उम्मीद है कि रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) के बारे में दी गई यह जानकारी आपके लिए फायदेमंद है। अब बात की जाए सौंफ की, तो सौंफ के बीज न केवल क्रंची होते हैं बल्कि इनका स्वाद भी अच्छा होता है। इनमें एस्ट्रोजन (Estrogen) जैसे कंपाउंड होते हैं, जिनसे मिल्क सप्लाई बढ़ती है। इसके साथ ही शिशु का वजन बढ़ाने में भी यह लाभदायक हैं। लेकिन, इनका सेवन आपके लिए करना लाभदायक है या नहीं और इन्हें कितनी मात्रा में लेना चाहिए। इस बारे में जानकारी होना जरूरी है।

लीन मीट और पोल्ट्री (Lean meat and poultry)

लीन मीट और पोल्ट्री में आयरन बहुत अधिक होता है, जो मिल्क सप्लाई के लिए बेहतरीन है। लेकिन मीट कंसम्पशन और मिल्क प्रोडक्शन में बढ़ोतरी के बारे में भी कोई पुख्ता सुबूत उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में, डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इनका सेवन करें।

रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन के लिए लहसुन (Garlic)

इस बारे में अधिक रिसर्च नहीं की गयी है कि लहसुन से मिल्क सप्लाई बढ़ती है। हालांकि, ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इसका सेवन सुरक्षित और लाभदायक माना गया है। इसके अलावा कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी हो सकते हैं, जो इसमें आपके लिए फायदेमंद साबित हों। लेकिन, इस स्थिति में किसी भी चीजों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।

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यह तो थी रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) के बारे में जानकारी। जब आप रिलैक्टेशन और इंड्यूस्ड लैक्टेशन (Relactation and induced lactation) के बारे में सोचते हैं, तो इस बात का ख्याल रखें कि हर व्यक्ति अलग होता है। ऐसे ही, हर मां एक जैसे नहीं होती और हर बच्चा दूसरे बच्चे से अलग होता है। यही नहीं हर किसी की परिस्थितियां भी अलग होती हैं। ऐसे में अगर आप इस बारे में विचार कर रहे हैं तो सबसे पहले आपको इसके बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए।

यह भी याद रखें कि ब्रेस्टफीडिंग केवल शिशु को दूध पिलाना ही नहीं है। यह मां और बच्चे के बीच का क्लोज कांटेक्ट हैं जो शिशु के दिमाग, इमोशनल और सोशल डेवलपमेंट के लिए जरूरी है। लेकिन, आसान प्रक्रियाएं नहीं हैं। इसके लिए आपका शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। अगर इसके बारे में आपके दिमाग में कोई भी सवाल है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में अवश्य बात करें। आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड