शिशुओं की सुरक्षा के लिए फॉलो करें ये टिप्स, इन जगहों पर रखें विशेष ध्यान

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट December 16, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
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शिशुओं की सुरक्षा माता-पिता की जिम्मेदारी होती है। बच्चे के पैदा होने के बाद से लेकर टोडलर होने तक, पेरेंट्स को शिशुओं की सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है। कई बार शिशुओं की सुरक्षा में चूक माता-पिता को परेशानी में डाल सकती है। नवजात शिशु के पैदा होने के बाद से लेकर घर में शिशुओं की सुरक्षा, बाहर जाते समय शिशुओं की सुरक्षा पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। बच्चों को अचानक से होने वाली इंजुरी से बचाने के लिए भी निगरानी की जरूरत पड़ती है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि किस तरह से शिशुओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा सकता है।

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पैदा होने के बाद शिशुओं की सुरक्षा

शिशुओं की सुरक्षा उनके पैदा होने के बाद से ही शुरू हो जाती है। बच्चे के जन्म के बाद मां को नहीं पता होता है कि किस तरह से उसे पकड़ना है, उठाना है आदि। अक्सर बच्चे को गर्दन से पकड़ने में दिक्कत होती है। ऐसे में माओं को नर्स की मदद लेनी चाहिए। नवजात शिशु को ब्रेस्टफीड कराने से लेकर डायपर चेंज करना या फिर उनकी सफाई करते समय विशेष ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर कोई चूक हो जाए तो नवजात के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। पैदा होने के बाद इन बातों को करते समय विशेष ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है।

  • नवजात शिशु को संभालना, बच्चे की गर्दन को आराम से पकड़ना।
  • बच्चे का डायपर बदलना
  • बच्चे को नहलाना
  • बच्चे को कपड़े पहनाना।
  • बच्चे को कपड़े में लपेटकर रखना।
  • बच्चे को दूध पिलाना और डकार दिलाना।
  • गर्भनाल (कॉर्ड) की सफाई करना।
  • बच्चे के नाक की सफाई करना।
  • नवजात शिशु के शरीर के तापमान को चेक करना।

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कार में शिशुओं की सुरक्षा

  • जब भी कार से शिशु को बाहर घुमाने ले जा रहे हो तो सेफ्टी सीट का जरूर ध्यान रखें।
  • सीट सेफ्टी के बारे में चाहे तो पहले से जानकारी लें, फिर बच्चे को सीट पर बिठाएं।
  • बच्चे को कार में घुमाते समय ये ध्यान रखें कि उन्हें कभी भी अपनी गोद में न बिठाएं।
  • कार में शिशुओं की सुरक्षा के लिए हमेशा ध्यान रखें कि उन्हें बैक सीट पर मिडिल में बिठाएं।
  • शिशुओं की सुरक्षा के तहत उसे कभी भी फ्रंट पैसेंजर सीट पर न बिठाएं।
  • अगर आपको सेफ्टी सीट के लेकर कोई भी प्रश्न है तो ऑटो सेफ्टी हॉटलाइन से संपर्क कर सकते हैं।

बच्चे के पीछे बैठने पर दें ध्यान

  • बच्चा पीछे बैठा है और आप आगे तो इस बात का ध्यान रखें कि कार से उतरते वक्त उसे भी साथ में लें। कई बार पेरेंट्स बच्चों को कार से लेना भूल जाते हैं।
  • आप अपने शिशु को कार में न भूले, इसके लिए बैक सीट में पर्स, मोबाइल फोन व अन्य जरूरी सामान रख सकते हैं। ऐसा करने से आपका ध्यान बच्चे पर भी रहेगा।
  • शिशुओं की सुरक्षा के तहत कार की चाबियां या अन्य छोटा सामान उनकी पहुंच से दूर रखें। कई बार शिशु कार की चाभी को मुंह में डाल लेते हैं। बच्चे को कहीं पर भी अकेले छोड़ने की भूल न करें। बच्चे अकेले में कुछ भी काम कर सकते हैं जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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शिशुओं की सुरक्षा के लिए उन्हें बचाएं इंजुरी से

शिशुओं की सुरक्षा में इंजुरी बचाव के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा है। बच्चे खेल या उत्सुकता के चलते कभी भी ऐसा काम कर सकते हैं, जिसके कारण उन्हें चोट लग जाए। शिशुओं की सुरक्षा के लिए पेरेंट्स को हर पल उनकी निगरानी करना बहुत जरूरी है। इंजुरी कभी भी मौत का रूप ले सकती है। कुछ इंजुरी बच्चों को बाय चांस या बैड लक के कारण नहीं होती है। ये जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों को इंजुरी से बचाने के लिए घर में पहले से ही इंतजाम करके रखें।

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घर में शिशुओं की सुरक्षा

नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए उन्हें संक्रमण से बचाना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें स्वच्छ वातावरण प्रदान किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण ये है कि जो भी बच्चे को गोद ले रहा हो उसने हाथों को अच्छी तरह से साफ किया हो। जुकाम, फ्लू या कोल्ड सोर आदि संक्रमण बच्चे को आसानी से हो सकते है।

अगर घर में किसी भी व्यक्ति को संक्रमण हो तो ये जरूरी है कि बच्चे को उससे दूर रखा जाए। कोल्ड सोर नवजात शिशु के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। शिशुओं की सुरक्षा के लिए और संक्रामक रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण जरूर कराना चाहिए। शुरुआती महीनों और वर्षों में बच्चों का विकास तेजी से होता है। शिशुओं की सुरक्षा के लिए घर के आसपास की जगह का निरीक्षण करना बहुत जरूरी होता है।

इन बातों पर दें ध्यान

  • अगर कोई छोटा या नुकीला सामान रखा हो तो उसे हटा देना चाहिए।
  • जानवरों को बच्चों से दूर रखें। जब नवजात बच्चा घर में होता है तो पालतू जानवरों को उससे दूर रखने का प्रयास करें।
  • जब भी बच्चे को पकड़े हुए हों तो कोई भी गरम पेय न लें। झटके के कारण गरम पेय आप पर या बच्चे पर गिर सकता है।
  • मेज में बच्चे को बिठाकर अकेले न छोड़ें, बच्चा मूमेंट कर सकता है और गिरने का भी खतरा रहता है।
  • फर्श बच्चों के लिए सेफ नहीं होता है। अगर बच्चा थोड़ा बहुत चल लेता है तो भी उसके गिरने और चोट लगने का खतरा रहता है।

क्या खा रहे हैं बच्चे, जरूर दें ध्यान?

शिशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि उन्हें अकेला न छोड़ा जाए। शिशुओं को हाथ मुंह में डालने की आदत होती है। हो सकता है कि आप किसी काम में व्यस्त हो और बच्चे को अकेला खेलने के लिए छोड़ दें। अगर बच्चा चल नहीं पाता है तो अपने आसपास की किसी भी चीज को हाथ से पकड़ सकता है। अगर बच्चा छोटी चीज को पकड़कर मुंह में डाल लेता है तो ये उसके लिए खतरनाक हो सकता है।

बच्चों को मुंह में सिक्का डालना, पेन का ढ़क्कन डालना बहुत पसंद आता है। कई बार तो बच्चे मुंह में मेटल का छोटा सामान भी डाल सकते हैं। किसी भी गंभीर समस्या से बचने के लिए बेहतर रहेगा कि जब भी बच्चा जागे, आप उसके साथ में रहे। बच्चे को अकेला खेलने के लिए ना छोड़ें।

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घर में या फिर बाहर जाते समय शिशुओं की सुरक्षा का ध्यान रखना माता-पिता की जिम्मेदारी होती है। आप इस बारे में अपने पेरेंट्स या फिर डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं। न्यू पेरेंट्स को अक्सर शिशुओं की सुरक्षा के संबंध में जानकारी नहीं रहती है। इस बारे में बड़े बुजुर्गों से जानकारी लेना भी बेहतर रहेगा। शिशुओं की सुरक्षा के लिए निगरानी अहम है। अधिक जानकारी के लिए अपने बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें।

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